रूस की अपनी यात्रा की पूर्व संध्या पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'तास' के फर्स्ट डिप्टी जनरल डायरेक्टर मिखाइल गुस्मान को 'तास' और 'रोसिएस्काया गजेटा' के लिए एक विशेष साक्षात्कार दिया।

आपसे दोबारा मिलने के अवसर के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। सुदूर पूर्वी रूस में ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम की बैठक हेतु व्लादिवोस्तोक के लिए उड़ान भरने से कुछ घंटे पहले हम आपसे मिल रहे हैं। आप इस मंच से क्या उम्मीद करते हैं? वहां आप किन अपेक्षाओं के साथ जा रहे हैं?

नमस्ते! सबसे पहले, मैं आपको धन्यवाद देना चाहूंगा कि आप इतनी दूर से यहाँ आए। भारत में आपका स्वागत है! चूँकि रूस और भारत के लोग एक-दूसरे से कई मायनों में करीबी से जुड़े हैं इसलिए आपके माध्यम से मैं रूस के लोगों का हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहूँगा।

एक बार मैं द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए रूस आया था, उस शाम हमें एक सांस्कृतिक कार्यक्रम दिखाया गया था। मंच पर सभी वक्ता रूसी थे, किंतु उन्होंने जिस प्रकार भारत का चित्रण प्रस्तुत किया मैं स्तब्ध रह गया। मंच पर पूरा माहौल भारतीय था, वक्ताओं ने भारतीय परंपराओं, भारतीय परिधान व संस्कृति का प्रदर्शन किया और मुझे यह महसूस हुआ कि रूसी लोग भारत से कितना स्नेह करते हैं। इसलिए, मैं पूरी ईमानदारी से रूसियों को धन्यवाद और उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूँ।

जहां तक भारत और रूस के संबंधों का प्रश्न है, दो वर्ष पहले मैंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर सेंट पीटर्सबर्ग में एक इकोनॉमिक फोरम का दौरा किया था। पुनः उन्होंने मुझे एक साल पहले इस फोरम पर आमंत्रित किया और मुझे यह निमंत्रण चुनावों से पहले ही मिल गया था, जबकि आगामी चुनाव परिणाम प्रतीक्षित थे। परन्तु राष्ट्रपति ने आत्मविश्वास से मुझसे कहा, "नहीं, आप आइए।" ऐसा मित्रवत विश्वास, सम्मान और प्रेम होना अपने आप में बहुत मायने रखता है।

जहां तक भारत और रूस के बीच संबंधों का सवाल है, मुझे यकीन है कि वह केवल राजनेताओं या राजधानियों - दिल्ली और मास्को के बीच संबंधों तक ही सीमित नहीं हैं। भारत एक विशाल और विविध देश है। दुनिया के हर देश में अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी-अपनी विशिष्टता है और अगर हमें संबंध विकसित करने हैं तो हमें पूरे देश को व्यापकता में समझना होगा। मेरा मानना है कि अगर हम सुदूर पूर्वी रूस से परिचित नहीं हुए, तो हम रूस को पूर्ण रूप से नहीं समझ पाएंगे। यह रूस का बहुत शक्तिशाली क्षेत्र है।

मुझे यह स्मरण है कि पिछली बार जब मैं सेंट पीटर्सबर्ग में था, तो लगभग आधे दिन तक रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्रों से पीटर्सबर्ग पहुँचे गवर्नर्स से बातचीत का अवसर मिला। बाद में, उन्हीं पूर्वी क्षेत्रों से कई प्रतिनिधि 'वाइब्रेंट गुजरात' - अंतर्राष्ट्रीय निवेश मंच पर पधारे।

यह सुदूर पूर्वी क्षेत्र; भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को एक नई मजबूती, नया विस्तार और समावेशी बनाने में अपना योगदान दे, इस दिशा में मेरा पूरा प्रयास है। इसलिए मुझे लगता है कि यह मंच बहुत महत्वपूर्ण है।

लेकिन यह मंच सिर्फ मुलाकातों और विचारों के आदान-प्रदान तक ही सीमित नहीं है। हम छह महीने से इस फोरम की तैयारी कर रहे हैं। सुदूर पूर्वी रूस से एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल हमारे पास आया। हमारे राज्यों के मुख्यमंत्री, सरकार के मंत्री, उद्यमी वहां गए, उन्होंने इस क्षेत्र को अपनी आंखों से देखा। और अब मैं जा रहा हूँ। मुझे विश्वास है कि यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा, नई ऊर्जा, नई गति देगी।

प्रधानमंत्री महोदय, आपने राष्ट्रपति पुतिन के साथ अपनी पिछली बैठकों का उल्लेख किया, जिसमें सेंट पीटर्सबर्ग का फोरम शामिल है; आप व्लादिवोस्तोक में मिलेंगे। आपका व्यक्तिगत संवाद कैसा चल रहा है, जैसा कि कहा जाता है कि आपके विशिष्ट सम्बन्ध हैं, ख़ास किस्म का तालमेल है, आप इसे कैसे देखते हैं ?

देखिए, पिछले 20 वर्षों में, भारत और रूस के बीच संबंधों ने काफी प्रगति की है। लेकिन सबसे बड़ी उपलब्धि विश्वास है, जो अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे पहली बार 2001 में राष्ट्रपति पुतिन से मिलने का अवसर मिला। तब मैं तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मास्को यात्रा पर गया था।

मैं गुजरात राज्य का मुख्यमंत्री था और यह हमारी पहली बैठक थी, लेकिन पुतिन ने बिल्कुल भी यह एहसास नहीं होने दिया कि मैं कमतर हूँ, एक छोटे राज्य से हूं या कि मैं एक नया व्यक्ति हूं। उन्होंने मुझसे मित्रवत व्यवहार किया। नतीजा यह हुआ कि दोस्ती के दरवाजे खुल गए। हमने अपने देशों से संबंधित मुद्दों के अलावा विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की, अपने शौक के बारे में बात की, फिर शांति और विश्व की समस्याओं के बारे में बात की। हम अपनों की तरह खुलकर बात करते थे। उनके साथ बात करना बहुत दिलचस्प है और मैं साफ़ तौर पर स्वीकार करता हूं कि उनके साथ बातचीत करना बहुत ही ज्ञानवर्धक है।

आज, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिये, भारत में सस्ते सैन्य उपकरणों का उत्पादन संभव है और हम ऐसे हथियारों की आपूर्ति तीसरे देशों को बहुत कम कीमत पर कर सकते हैं। भारत और रूस प्रदत्त यह अवसर वैश्विक स्तर पर अन्य देशों द्वारा इस्तेमाल हो, ऐसा हमारा मानना है।

प्रधानमंत्री महोदय, अगर आप देखें कि अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में हमारे संबंध कैसे विकसित हो रहे हैं, तो अधिकांश आधुनिक विदेश नीति के मुद्दों पर मास्को और दिल्ली की स्थिति काफी हद तक समान है या पूरी तरह से मेल खाती है। विशेष रूप से, दोनों देश एक बहुध्रुवीय विश्व के पक्षधर हैं, जो सभी देशों और लोगों के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखता है। द्विपक्षीय सहयोग के अलावा, रूस और भारत संयुक्त राष्ट्र, जी20, ब्रिक्स, एससीओ जैसे अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के ढांचे के भीतर बहुत सक्रिय रूप से संबंध और संपर्क विकसित कर रहे हैं। आप इस क्षेत्र में हमारी बातचीत का मूल्यांकन कैसे करते हैं?

50-60 वर्षों में, विशेष रूप से पिछले 20 वर्षों में हमारे संबंधों को विभिन्न कसौटियों पर परखा गया है और सभी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत और रूस का स्टैंड कमोबेश समान रहा है। हमारी आम राय ने विश्व राजनीति को प्रभावित किया। देखिए, हम पड़ोसी नहीं हैं, हमारी कोई सामान्य सीमा नहीं है, लेकिन हमारे दिल जुड़े हुए हैं। इसलिए, हमारे सहयोग में कोई बाधा नहीं है। मुझे आश्चर्य है कि रूसी लोग भारतीय फिल्मों के गानों को मुझसे ज्यादा जानते हैं। वे सभी शब्दों को जानते हैं और उनका अर्थ भी जानते हैं।

महात्मा गांधी की आगामी 150वीं जयंती के अवसर पर; रूसी कलाकारों ने मेरे मूल राज्य की भाषा गुजराती में एक धार्मिक गीत गाया। उन्होंने इस गाने को बहुत अच्छा गाया है। मैंने राष्ट्रपति पुतिन को गाने का एक वीडियो भी दिखाया और कहा: "देखिए इन रूसी कलाकारों की प्रतिभा का स्तर कितना ऊँचा है।" आपने सही कहा कि बॉलीवुड की भारतीय फिल्मों ने रूसियों को प्रभावित किया। यहां मैं उन युवाओं से मिलता हूं जो भारतीय गाने भी जानते हैं। राज कपूर को हर कोई याद करता है। वे भारत से ज्यादा आपके यहां लोकप्रिय थे। वह हमारे देश के एक महान कलाकार थे और उनके परिवार की चार पीढ़ियों का भारतीय फिल्म जगत में शानदार योगदान रहा है।

आज पूरी दुनिया का ध्यान जटिल कश्मीर मुद्दे पर है। कश्मीर के हालात पर आप कैसे टिप्पणी करेंगे?

देखिए, कश्मीर का अपना एक लंबा इतिहास है। 1947 में जब भारत को स्वतंत्रता मिली, तब उसका विभाजन हुआ, पाकिस्तान का निर्माण हुआ। लेकिन पाकिस्तान ने अपने निर्माण से ही भारत को तबाह करने का सपना देखा और उसकी शुरुआत कश्मीर से हुई। उसने कश्मीर का विभाजन किया, इसके एक बड़े हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा है और आज भी पाकिस्तान की सेना कश्मीर के इस हिस्से में लोगों को मार रही है। वहीं भारत अपने हिस्से में कश्मीरी जनता के हित के लिए लगातार काम कर रहा है। हमने कश्मीर में शांति और सुशासन स्थापित किया है - राज कपूर की फिल्मों में भी आप कश्मीर में फिल्माए गए दृश्यों को देख सकते हैं।

और यही बात पाकिस्‍तान को पसंद नहीं थी, इसलिए उसने हमारे ऊपर युद्ध थोपे, लेकिन जीत नहीं सके और फिर उसने छद्म युद्ध का रास्ता अपनाया। 40 वर्षों से, उन्होंने कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र को आतंकवादी अड्डे में बदल दिया है।

पिछले 20-25 सालों में 43,000 निर्दोष लोगों की मौत हुई है। हमने हजारों किलोग्राम विस्फोटक, हजारों एके-47 असॉल्ट राइफलें बरामद कीं। पाकिस्तान लगातार आतंकवादी कार्रवाइयों को अंजाम दे रहा है, आतंकवाद पाकिस्तान के लिए एक उद्योग बन गया है। वह कश्मीरियों को भारत के प्रति भड़काने का काम करता है।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय से ही हमने इस समस्या को हल करने का प्रयास किया है। लेकिन पाकिस्तान का यह इरादा कभी नहीं रहा। भारत अब कश्मीर में अपने नागरिकों की बेहतरी के लिए काम कर रहा है। आपको आश्चर्य होगा कि कश्मीर की महिलाओं को पूरे भारत की अन्य महिलाओं के समान अधिकार नहीं थे। सामान्य कश्मीरियों के पास वे अधिकार नहीं थे जो पूरे भारत में आम नागरिकों के पास हैं। 1947 में जिन लोगों को पाकिस्तान से भारत आना पड़ा, उन्हें वे सभी अधिकार मिल गए हैं। लेकिन जो लोग दूसरी तरफ वाले कश्मीर चले गए, उन्हें समान अधिकार नहीं मिले। वोट देने का अधिकार भी नहीं है। कश्मीर में पहले भ्रष्टाचार विरोधी कानून लागू नहीं होते थे।

कश्मीरी इस स्थिति से खुश नहीं थे, उन्होंने अपने वाजिब हक पाने के लिए लम्बा इंतजार किया। हमारा मानना है कि उन्हें भी विकास के अधिकार, अवसर मिलने चाहिए। उन्हें सम्मान के साथ जीने का अधिकार होना चाहिए। इसलिए हम कश्मीर के लोगों की भलाई के व्यापक स्तर पर कार्य कर रहे हैं।

चुनावों का जहाँ तक सवाल है, भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर भी सभी को भरोसा था कि हमारी सरकार सत्ता में वापस आएगी, लोगों को संदेह केवल संसद में हमारे बहुमत को लेकर था, कुछ लोग सोच रहे थे कि हमें पूर्ण बहुमत नहीं होगा, लेकिन देश की जनता ने मन बना लिया था और हमें भारी बहुमत देकर इतिहास रचने का काम किया। मैं इसके लिए भारत की महान जनता का आभारी हूं।

और राष्ट्रपति पुतिन भारत से विशिष्ट लगाव रखते हैं। भारत और रूस का मानना है कि हम एक साथ विकास कर सकते हैं, इस तथ्य पर मुझे और राष्ट्रपति पुतिन को पूरा भरोसा है। और हमें विश्वास है कि हमारे देशों की जनता का सामर्थ्य मिलकर दुनिया को बहुत कुछ दे सकते है।

रूस, भारत को ऊर्जा संसाधनों के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। ऊर्जा क्षेत्र में रूस और भारत के बीच सहयोग की संभावना और संभावनाओं पर आपकी क्या राय है?

"आपने ठीक कहा" भारत के लिए ऊर्जा के महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक रूस है। हमारी कंपनियों ने रूस में ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करना शुरू किया है, मुझे इसकी प्रसन्नता है। मैं जानता हूं कि तेल का उत्पादन और उसका परिवहन महंगा है। लेकिन एक सच्चे मित्र के रूप में हम रूस से प्रेम करते हैं और जब हम साथ मिलकर काम करते हैं तो यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होता है। हम ऊर्जा क्षेत्र में और भी सक्रिय रूप से सहयोग करना चाहेंगे।

पिछले साल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में, आपको पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ल्ड आर्गेनाईजेशन अर्थ चैंपियन द्वारा सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हम जानते हैं कि आप इस दिशा में काफी प्रयास कर रहे हैं। आपकी कौन सी पर्यावरणीय गतिविधियाँ आपके लिए व्यक्तिगत रूप से सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं?

सबसे पहले तो हमें अपने बारे में, अपने लिए मिलने वाले पुरस्कारों के बारे में नहीं सोचना चाहिए। हमें लोगों की भलाई के लिए, उनके विकास के लिए, अपने देश के नागरिकों के हित में पूरे विश्व के हित में काम करना चाहिए। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित ग्रह, एक सुरक्षित दुनिया के निर्माण की दिशा में कार्य करना चाहिए।

और भारत उसी दिशा में काम कर रहा है - प्रकृति और वातावरण को संरक्षित करने के लिए। शायद इसलिए मुझे सम्मानित किया गया। लेकिन जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब भी किसी अवार्ड या मान्यता की परवाह से दूर इस क्षेत्र में काम कर रहा था। मैंने प्रकृति के रक्षक के रूप में, मेरे राज्य में बाघों के संरक्षण के लिए कार्य किया। मैं इस दिशा में किए गए अपने कार्यों से संतुष्ट हूँ और यह सब हमारी संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा भी है।

हमें प्रकृति को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। हमें प्रकृति का सम्मान करना चाहिए, उसका संरक्षण करना चाहिए, उसकी पूजा करनी चाहिए, यह सब हमारी संस्कृति का हिस्सा है। यह अच्छा है कि पूरी दुनिया अब इसके बारे में सोच रही है।

भारत समृद्ध परंपराओं के साथ एक प्राचीन संस्कृति और सभ्यता है। आज प्राचीन परंपराएं और आधुनिक भारतीय समाज आपस में किस प्रकार से जुड़े हुए हैं?

भारत ने विकास का अपना रास्ता खुद चुना है, जहां पुराने और नए के बीच संघर्ष के लिए कोई जगह नहीं है। कोई विवाद क्यों नहीं है? क्योंकि भारत का मूल मंत्र क्रांति नहीं है, जहाँ पुराने को त्यागने और उसे नष्ट करने की बात होती है।

भारत क्रमागत उन्नति की बात करता है, क्रांति की नहीं।

हम शाश्वत आत्मा में विश्वास करते हैं, इस तथ्य में कि शरीर परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है, लेकिन आत्मा अपरिवर्तित रहती है। सर्वशक्तिमान ने इसे इसलिए बनाया है ताकि हमारा शरीर एक निश्चित समय के बाद नष्ट हो जाए और एक नया शरीर प्रकट हो। तो हम उसी सूत्र के अनुसार कार्य करते हैं: एक नए शरीर में हम नई ऊर्जा के साथ कार्य करते हैं।

जैसा कि महात्मा गांधी ने कहा, जैसा कि बुद्ध ने कहा, हम प्राणियों की एकता में विश्वास करते हैं: सभी पशु, पक्षी, मनुष्य, गोरे और काले, पूर्व या पश्चिम से एक हैं। हम पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं और इसलिए हम संघर्षहीनता का रास्ता चुनते हैं - समझौते का रास्ता, आपसी बातचीत, और परस्पर समझदारी का रास्ता। यह भारत का मुख्य मंत्र या विचार है!

अब हम वर्तमान में जा रहे हैं। हमारे बच्चे सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जाते हैं, लेकिन हम सिर्फ भविष्य का इंतजार नहीं करते रहेंगे। हम मानव जाति द्वारा बनाई गई हर चीज का उपयोग करने के लिए तैयार हैं, ज्ञान का मार्ग सभे के लिए खुला है। हम जो भी करें, वह सबके हित में होना चाहिए।

रूस में, भारत के पर्यटन के लिए अत्यंत उत्साह है। लोग दिल्ली, बॉम्बे और गोवा के रिसॉर्ट्स में जाते हैं। आप व्यक्तिगत रूप से पर्यटकों को भारत जाने की सलाह कहां देंगे, वे क्या देखें, क्या नया करें? और अपने अद्भुत देश में, आपका पसंदीदा स्थान कौन सा है?

यदि आप गोवा राज्य में आते हैं, तो आप पाएँगे कि वहां के विक्रेता रूसी भी बोलते हैं, क्योंकि रूस से कई अतिथि वहां आते हैं। लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि भारत एक विशाल देश है, जिसे देखने के लिए आपको प्रत्येक राज्य में साल में कम से कम एक महीना रहने के लिए 20 साल पहले से एक कार्यक्रम तैयार करना होगा और यह महीना भी आपके लिए पर्याप्त नहीं होगा।

यदि आप बर्फ, रेगिस्तान की रेत, पहाड़ों, समुद्र तटों, समुद्र, नदियों, मैदानों, जंगलों को देखना चाहते हैं, तो हमारे पास यह सब है। यहां आप वह सब कुछ देख सकते हैं जो आपका दिल चाहता है। मोहनजोदड़ो युग का दुनिया का सबसे पुराना बंदरगाह भी यहां देखा जा सकता है - यह गुजरात में स्थित है।

एक भारतीय कहावत के अनुसार एक हजार लोगों को सम्भालना उतना ही मुश्किल है जितना तीन लोगों को। आप एक अरब से ज्यादा आबादी वाले देश के प्रधानमंत्री हैं। आप अपने काम में किन बुनियादी सिद्धांतों का पालन करते हैं? आप निर्णय कैसे लेते हैं? आप एक अरब से अधिक लोगों के संपर्क में कैसे रहते हैं?

मैं आपसे सहमत हूं कि यह बाहर के लोगों को 1.3 बिलियन लोगों वाला एक अजीब देश लगता है, जिसमें 100 भाषाएं, 1700 बोलियां, एक अलग ही दुनिया है अपने आप में...यह सब एक सूत्र में कैसे जुड़ता है?

पहले तो, भारत एक सांस्कृतिक रूप से एकजुट समुदाय है और हम इसे स्वीकार करते हैं।

दूसरी बात, हम दूसरे देशों के लोगों की इस धारणा के बारे में जानते हैं कि सब कुछ किसी एक इकाई के अंतर्गत नियंत्रित और निर्देशित होना चाहिए, लेकिन भारत जैसे देश पर शासन करने का यह सिद्धांत कारगर नहीं है। इसलिए कोशिश भी नहीं की जाती है। भारत स्वतंत्रता और विविधता को स्वीकार करता है। हम एक दूसरे की स्वतंत्रता और विविधता का सम्मान करते हैं।

हम प्रत्यक्ष नियंत्रण करने की बजाय निर्णय लेने के लिए क्या आवश्यक है यह समझते हैं और इसकी रिपोर्टिंग पर शर्त लगाई। संदेश का प्रसार इस प्रकार हो कि कोई व्यक्ति अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुसार आपके संदेश का प्रतिउत्तर दे। इसलिए, मैं देश पर शासन नहीं करता, बल्कि हम देश को निर्देशित करते हैं।

Thank!

Source: TASS

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प्रधानमंत्री मोदी का ‘IANS’ के साथ इंटरव्यू
May 27, 2024

पहले तो मैं आपकी टीम को बधाई देता हूं भाई, कि इतने कम समय में आपलोगों ने अच्छी जगह बनाई है और एक प्रकार से ग्रासरूट लेवल की जो बारीक-बारीक जानकारियां हैं। वह शायद आपके माध्यम से जल्दी पहुंचती है। तो आपकी पूरी टीम बधाई की पात्र है।

Q1 - आजकल राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को पाकिस्तान से इतना endorsement क्यों मिल रहा है ? 370 ख़त्म करने के समय से लेकर आज तक हर मौक़े पर पाकिस्तान से उनके पक्ष में आवाज़ें आती हैं ?

जवाब – देखिए, चुनाव भारत का है और भारत का लोकतंत्र बहुत ही मैच्योर है, तंदरुस्त परंपराएं हैं और भारत के मतदाता भी बाहर की किसी भी हरकतों से प्रभावित होने वाले मतदाता नहीं हैं। मैं नहीं जानता हूं कि कुछ ही लोग हैं जिनको हमारे साथ दुश्मनी रखने वाले लोग क्यों पसंद करते हैं, कुछ ही लोग हैं जिनके समर्थन में आवाज वहां से क्यों उठती है। अब ये बहुत बड़ी जांच पड़ताल का यह गंभीर विषय है। मुझे नहीं लगता है कि मुझे जिस पद पर मैं बैठा हूं वहां से ऐसे विषयों पर कोई कमेंट करना चाहिए लेकिन आपकी चिंता मैं समझ सकता हूं।

 

Q 2 - आप ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहिम तेज करने की बात कही है अगली सरकार जब आएगी तो आप क्या करने जा रहे हैं ? क्या जनता से लूटा हुआ पैसा जनता तक किसी योजना या विशेष नीति के जरिए वापस पहुंचेगा ?

जवाब – आपका सवाल बहुत ही रिलिवेंट है क्योंकि आप देखिए हिंदुस्तान का मानस क्या है, भारत के लोग भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं। दीमक की तरह भ्रष्टाचार देश की सारी व्यवस्थाओं को खोखला कर रहा है। भ्रष्टाचार के लिए आवाज भी बहुत उठती है। जब मैं 2013-14 में चुनाव के समय भाषण करता था और मैं भ्रष्टाचार की बातें बताता था तो लोग अपना रोष व्यक्त करते थे। लोग चाहते थे कि हां कुछ होना चाहिए। अब हमने आकर सिस्टमैटिकली उन चीजों को करने पर बल दिया कि सिस्टम में ऐसे कौन से दोष हैं अगर देश पॉलिसी ड्रिवन है ब्लैक एंड व्हाइट में चीजें उपलब्ध हैं कि भई ये कर सकते हो ये नहीं कर सकते हो। ये आपकी लिमिट है इस लिमिट के बाहर जाना है तो आप नहीं कर सकते हो कोई और करेगा मैंने उस पर बल दिया। ये बात सही है..लेकिन ग्रे एरिया मिनिमल हो जाता है जब ब्लैक एंड व्हाइट में पॉलिसी होती है और उसके कारण डिसक्रिमिनेशन के लिए कोई संभावना नहीं होती है, तो हमने एक तो पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस पर बल दिया। दूसरा हमने स्कीम्स के सैचुरेशन पर बल दिया कि भई 100% जो स्कीम जिसके लिए है उन लाभार्थियों को 100% ...जब 100% है तो लोगों को पता है मुझे मिलने ही वाला है तो वो करप्शन के लिए कोई जगह ढूंढेगा नहीं। करप्शन करने वाले भी कर नहीं सकते क्योंकि वो कैसे-कैसे कहेंगे, हां हो सकता है कि किसी को जनवरी में मिलने वाला मार्च में मिले या अप्रैल में मिले ये हो सकता है लेकिन उसको पता है कि मिलेगा और मेरे हिसाब से सैचुरेशन करप्शन फ्री गवर्नेंस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सोशल जस्टिस की गारंटी देता है। सैचुरेशन सेकुलरिज्म की गारंटी देता है। ऐसे त्रिविध फायदे वाली हमारी दूसरी स्कीम, तीसरा मेरा प्रयास रहा कि मैक्सिमम टेक्नोलॉजी का उपयोग करना। टेक्नोलॉजी में भी..क्योंकि रिकॉर्ड मेंटेन होते हैं, ट्रांसपेरेंसी रहती है। अब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में 38 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए हमने। अगर राजीव गांधी के जमाने की बात करें कि एक रुपया जाता है 15 पैसा पहुंचता है तो 38 लाख करोड़ तो हो सकता है 25-30 लाख करोड़ रुपया ऐसे ही गबन हो जाते तो हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया है। जहां तक करप्शन का सवाल है देश में पहले क्या आवाज उठती थी कि भई करप्शन तो हुआ लेकिन उन्होंने किसी छोटे आदमी को सूली पर चढ़ा दिया। सामान्य रूप से मीडिया में भी चर्चा होती थी कि बड़े-बड़े मगरमच्छ तो छूट जाते हैं, छोटे-छोटे लोगों को पकड़कर आप चीजें निपटा देते हो। फिर एक कालखंड ऐसा आया कि हमें पूछा जाता था 19 के पहले कि आप तो बड़ी-बड़ी बातें करते थे क्यों कदम नहीं उठाते हो, क्यों अरेस्ट नहीं करते हो, क्यों लोगों को ये नहीं करते हो। हम कहते थे भई ये हमारा काम नहीं है, ये स्वतंत्र एजेंसी कर रही है और हम बदइरादे से कुछ नहीं करेंगे। जो भी होगा हमारी सूचना यही है जीरो टोलरेंस दूसरा तथ्यों के आधार पर ये एक्शन होना चाहिए, परसेप्शन के आधार पर नहीं होना चाहिए। तथ्य जुटाने में मेहनत करनी पड़ती है। अब अफसरों ने मेहनत भी की अब मगरमच्छ पकड़े जाने लगे हैं तो हमें सवाल पूछा जा रहा है कि मगरमच्छों को क्यों पकड़ते हो। ये समझ में नहीं आता है कि ये कौन सा गैंग है, खान मार्केट गैंग जो कुछ लोगों को बचाने के लिए इस प्रकार के नैरेटिव गढ़ती है। पहले आप ही कहते थे छोटों को पकड़ते हो बड़े छूट जाते हैं। जब सिस्टम ईमानदारी से काम करने लगा, बड़े लोग पकड़े जाने लगे तब आप चिल्लाने लगे हो। दूसरा पकड़ने का काम एक इंडिपेंडेंट एजेंसी करती है। उसको जेल में रखना कि बाहर रखना, उसके ऊपर केस ठीक है या नहीं है ये न्यायालय तय करता है उसमें मोदी का कोई रोल नहीं है, इलेक्टेड बॉडी का कोई रोल नहीं है लेकिन आजकल मैं हैरान हूं। दूसरा जो देश के लिए चिंता का विषय है वो भ्रष्ट लोगों का महिमामंडन है। हमारे देश में कभी भी भ्रष्टाचार में पकड़े गए लोग या किसी को आरोप भी लगा तो लोग 100 कदम दूर रहते थे। आजकल तो भ्रष्ट लोगों को कंधे पर बिठाकर नाचने की फैशन हो गई है। तीसरा प्रॉब्लम है जो लोग कल तक जिन बातों की वकालत करते थे आज अगर वही चीजें हो रही हैं तो वो उसका विरोध कर रहे हैं। पहले तो वही लोग कहते थे सोनिया जी को जेल में बंद कर दो, फलाने को जेल में बंद कर दो और अब वही लोग चिल्लाते हैं। इसलिए मैं मानता हूं आप जैसे मीडिया का काम है कि लोगों से पूछे कि बताइए छोटे लोग जेल जाने चाहिए या मगरमच्छ जेल जाने चाहिए। पूछो जरा पब्लिक को क्या ओपिनियन है, ओपिनियन बनाइए आप लोग।

 

Q3- नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक सबने गरीबी हटाने की बात तो की लेकिन आपने आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया, इसे लेकर कैसे रणनीति तैयार करते हैं चाहे वो पीएम स्वनिधि योजना हो, पीएम मुद्रा योजना बनाना हो या विश्वकर्मा योजना हो मतलब एकदम ग्रासरूट लेवल से काम किया ?

जवाब – देखिए हमारे देश में जो नैरेटिव गढ़ने वाले लोग हैं उन्होंने देश का इतना नुकसान किया। पहले चीजें बाहर से आती थी तो कहते थे देखिए देश को बेच रहे हैं सब बाहर से लाते हैं। आज जब देश में बन रहा है तो कहते हैं देखिए ग्लोबलाइजेशन का जमाना है और आप लोग अपने ही देश की बातें करते हैं। मैं समझ नहीं पाता हूं कि देश को इस प्रकार से गुमराह करने वाले इन ऐलिमेंट्स से देश को कैसे बचाया जाए। दूसरी बात है अगर अमेरिका में कोई कहता है Be American By American उसपर तो हम सीना तानकर गर्व करते हैं लेकिन मोदी कहता है वोकल फॉर लोकल तो लोगों को लगता है कि ये ग्लोबलाइजेशन के खिलाफ है। तो इस प्रकार से लोगों को गुमराह करने वाली ये प्रवृत्ति चलती है। जहां तक भारत जैसा देश जिसके पास मैनपावर है, स्किल्ड मैनपावर है। अब मैं ऐसी तो गलती नहीं कर सकता कि गेहूं एक्सपोर्ट करूं और ब्रेड इम्पोर्ट करूं..मैं तो चाहूंगा मेरे देश में ही गेहूं का आटा निकले, मेरे देश में ही गेहूं का ब्रेड बने। मेरे देश के लोगों को रोजगार मिले तो मेरा आत्मनिर्भर भारत का जो मिशन है उसके पीछे मेरी पहली जो प्राथमिकता है कि मेरे देश के टैलेंट को अवसर मिले। मेरे देश के युवाओं को रोजगार मिले, मेरे देश का धन बाहर न जाए, मेरे देश में जो प्राकृतिक संसाधन हैं उनका वैल्यू एडिशन हो, मेरे देश के अंदर किसान जो काम करता है उसकी जो प्रोडक्ट है उसका वैल्यू एडिशन हो वो ग्लोबल मार्केट को कैप्चर करे और इसलिए मैंने विदेश विभाग को भी कहा है कि भई आपकी सफलता को मैं तीन आधारों से देखूंगा एक भारत से कितना सामान आप..जिस देश में हैं वहां पर खरीदा जाता है, दूसरा उस देश में बेस्ट टेक्नोलॉजी कौन सी है जो अभीतक भारत में नहीं है। वो टेक्नोलॉजी भारत में कैसे आ सकती है और तीसरा उस देश में से कितने टूरिस्ट भारत भेजते हो आप, ये मेरा क्राइटेरिया रहेगा...तो मेरे हर चीज में सेंटर में मेरा नेशन, सेंटर में मेरा भारत और नेशन फर्स्ट इस मिजाज से हम काम करते हैं।

 

Q 4 - एक तरफ आप विश्वकर्माओं के बारे में सोचते हैं, नाई, लोहार, सुनार, मोची की जरूरतों को समझते हैं उनसे मिलते हैं तो वहीं दूसरी तरफ गेमर्स से मिलते हैं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की बात करते हैं, इन्फ्लुएंसर्स से आप मिलते हैं इनकी अहमियत को भी सबके सामने रखते हैं, इतना डाइवर्सीफाई तरीके से कैसे सोच पाते हैं?

जवाब- आप देखिए, भारत विविधताओं से भरा हुआ है और कोई देश एक पिलर पर बड़ा नहीं हो सकता है। मैंने एक मिशन लिया। हर डिस्ट्रिक्ट का वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पर बल दिया, क्यों? भारत इतना विविधता भरा देश है, हर डिस्ट्रिक्ट के पास अपनी अलग ताकत है। मैं चाहता हूं कि इसको हम लोगों के सामने लाएं और आज मैं कभी विदेश जाता हूं तो मुझे चीजें कौन सी ले जाऊंगा। वो उलझन नहीं होती है। मैं सिर्फ वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट का कैटलॉग देखता हूं। तो मुझे लगता है यूरोप जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। अफ्रीका जाऊंगा तो यह लेकर जाऊंगा। और हर एक को लगता है एक देश में। यह एक पहलू है दूसरा हमने जी 20 समिट हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्से में की है। क्यों? दुनिया को पता चले कि दिल्ली, यही हिंदुस्तान नहीं है। अब आप ताजमहल देखें तो टूरिज्म पूरा नहीं होता जी मेरे देश का। मेरे देश में इतना पोटेंशियल है, मेरे देश को जानिए और समझिए और इस बार हमने जी-20 का उपयोग भारत को विश्व के अंदर भारत की पहचान बनाने के लिए किया। दुनिया की भारत के प्रति क्यूरियोसिटी बढ़े, इसमें हमने बड़ी सफलता पाई है, क्योंकि दुनिया के करीब एक लाख नीति निर्धारक ऐसे लोग जी-20 समूह की 200 से ज्यादा मीटिंग में आए। वह अलग-अलग जगह पर गए। उन्होंने इन जगहों को देखा, सुना भी नहीं था, देखा वो अपने देश के साथ कोरिलिरेट करने लगे। वो वहां जाकर बातें करने लगे। मैं देख रहा हूं जी20 के कारण लोग आजकल काफी टूरिस्टों को यहां भेज रहे हैं। जिसके कारण हमारे देश का टूरिज्म को बढ़ावा मिला।

इसी तरह आपने देखा होगा कि मैंने स्टार्टअप वालों के साथ मीटिंग की थी, मैं वार्कशॉप करता था। आज से मैं 7-8 साल पहले, 10 साल पहले शुरू- शुरू में यानी मैं 14 में आया। उसके 15-16 के भीतर-भीतर मैंने जो नए स्टार्टअप की दुनिया शुरू हुई, उनकी मैंने ऐसे वर्कशॉप की है तो मैं अलग-अलग कभी मैंने स्पोर्ट्स पर्सन्स के की, कभी मैंने कोचों के साथ की कि इतना ही नहीं मैंने फिल्म दुनिया वालों के साथ भी ऐसी मीटिंग की।

मैं जानता हूं कि वह बिरादरी हमारे विचारों से काफी दूर है। मेरी सरकार से भी दूर है, लेकिन मेरा काम था उनकी समस्याओं को समझो क्योंकि बॉलीवुड अगर ग्लोबल मार्केट में मुझे उपयोगी होता है, अगर मेरी तेलुगू फिल्में दुनिया में पॉपुलर हो सकती है, मेरी तमिल फिल्म दुनिया पॉपुलर हो सकती है। मुझे तो ग्लोबल मार्केट लेना था मेरे देश की हर चीज का। आज यूट्यूब की दुनिया पैदा हुई तो मैंने उनको बुलाया। आप देश की क्या मदद कर सकते हैं। इंफ्लुएंसर को बुलाया, क्रिएटिव वर्ल्ड, गेमिंम अब देखिए दुनिया का इतना बड़ा गेमिंग मार्केट। भारत के लोग इन्वेस्ट कर रहे हैं, पैसा लगा रहे हैं और गेमिंग की दुनिया में कमाई कोई और करता है तो मैंने सारे गेमिंग के एक्सपर्ट को बुलाया। पहले उनकी समस्याएं समझी। मैंने देश को कहा, मेरी सरकार को मुझे गेमिंग में भारतीय लीडरशिप पक्की करनी है।

इतना बड़ा फ्यूचर मार्केट है, अब तो ओलंपिक में गेमिंग आया है तो मैं उसमें जोड़ना चाहता हूं। ऐसे सभी विषयों में एक साथ काम करने के पक्ष में मैं हूं। उसी प्रकार से देश की जो मूलभूत व्यवस्थाएं हैं, आप उसको नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। हमें गांव का एक मोची होगा, सोनार होगा, कपड़े सिलने वाला होगा। वो भी मेरे देश की बहुत बड़ी शक्ति है। मुझे उसको भी उतना ही तवज्जो देना होगा। और इसलिए मेरी सरकार का इंटीग्रेटेड अप्रोच होता है। कॉम्प्रिहेंसिव अप्रोच होता है, होलिस्टिक अप्रोच होता है।

 

Q 5 - डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया उसका विपक्ष ने मजाक भी उड़ाया था, आज ये आपकी सरकार की खास पहचान बन गए हैं और दुनिया भी इस बात का संज्ञान ले रही है, इसका एक उदहारण यूपीआई भी है।

जवाब – यह बात सही है कि हमारे देश में जो डिजिटल इंडिया मूवमेंट मैंने शुरू किया तो शुरू में आरोप क्या लगाए इन्होंने? उन्होंने लगाई कि ये जो सर्विस प्रोवाइडर हैं, उनकी भलाई के लिए हो रहा है। इनको समझ नहीं आया कि यह क्षेत्र कितना बड़ा है और 21वीं सदी एक टेक्नॉलॉजी ड्रिवन सेंचुरी है। टेक्नोलॉजी आईटी ड्रिवन है। आईटी इन्फोर्स बाय एआई। बहुत बड़े प्रभावी क्षेत्र बदलते जा रहे हैं। हमें फ्यूचरस्टीक चीजों को देखना चाहिए। आज अगर यूपीआई न होता तो कोई मुझे बताए कोविड की लड़ाई हम कैसे लड़ते? दुनिया के समृद्ध देश भी अपने लोगों को पैसे होने के बावजूद भी नहीं दे पाए। हम आराम से दे सकते हैं। आज हम 11 करोड़ किसानों को 30 सेकंड के अंदर पैसा भेज सकते हैं। अब यूपीआई अब इतनी यूजर फ्रेंडली है तो क्योंकि यह टैलेंट हमारे देश के नौजवानों में है। वो ऐसे प्रोडक्ट बना करके देते हैं कि कोई भी कॉमन मैन इसका उपयोग कर सकता है। आज मैंने ऐसे कितने लोग देखे हैं जो अपना सोशल मीडिया अनुभव कर रहे हैं। हमने छह मित्रों ने तय किया कि छह महीने तक जेब में 1 पैसा नहीं रखेंगे। अब देखते हैं क्या होता है। छह महीने पहले बिना पैसे पूरी दुनिया में हम अपना काम, कारोबार करके आ गए। हमें कोई तकलीफ नहीं हुई तो हर कसौटी पर खरा उतर रहा है। तो यूपीआई ने एक प्रकार से फिनटेक की दुनिया में बहुत बड़ा रोल प्ले किया है और इसके कारण इन दिनों भारत के साथ जुड़े हुए कई देश यूपीआई से जुड़ने को तैयार हैं क्योंकि अब फिनटेक का युग है। फिनटेक में भारत अब लीड कर रहा है और इसलिए दुर्भाग्य तो इस बात का है कि जब मैं इस विषय को चर्चा कर रहा था तब देश के बड़े-बड़े विद्वान जो पार्लियामेंट में बैठे हैं वह इसका मखौल उड़ाते थे, मजाक उड़ाते थे, उनको भारत के पोटेंशियल का अंदाजा नहीं था और टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य का भी अंदाज नहीं था।

 

Q 6 - देश के युवा भारत का इतिहास लिखेंगे ऐसा आप कई बार बोल चुके हैं, फर्स्ट टाइम वोटर्स का पीएम मोदी से कनेक्ट के पीछे का क्या कारण है?

एक मैं उनके एस्पिरेशन को समझ पाता हूं। जो पुरानी सोच है कि वह घर में अपने पहले पांच थे तो अब 7 में जाएगा सात से नौ, ऐसा नहीं है। वह पांच से भी सीधा 100 पर जाना चाहता है। आज का यूथ हर, क्षेत्र में वह बड़ा जंप लगाना चाहता है। हमें वह लॉन्चिंग पैड क्रिएट करना चाहिए, ताकि हमारे यूथ के एस्पिरेशन को हम फुलफिल कर सकें। इसलिए यूथ को समझना चाहिए। मैं परीक्षा पर चर्चा करता हूं और मैंने देखा है कि मुझे लाखों युवकों से ऐसी बात करने का मौका मिलता है जो परीक्षा पर चर्चा की चर्चा चल रही है। लेकिन वह मेरे साथ 10 साल के बाद की बात करता है। मतलब वह एक नई जनरेशन है। अगर सरकार और सरकार की लीडरशिप इस नई जनरेशन के एस्पिरेशन को समझने में विफल हो गई तो बहुत बड़ी गैप हो जाएगी। आपने देखा होगा कोविड में मैं बार-बार चिंतित था कि मेरे यह फर्स्ट टाइम वोटर जो अभी हैं, वह कोविड के समय में 14-15 साल के थे अगर यह चार दीवारों में फंसे रहेंगे तो इनका बचपन मर जाएगा। उनकी जवानी आएगी नहीं। वह बचपन से सीधे बुढ़ापे में चला जाएगा। यह गैप कौन भरेगा? तो मैं उसके लिए चिंतित था। मैं उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंस से बात करता था। मैं उनको समझाता था का आप यह करिए। और इसलिए हमने डेटा एकदम सस्ता कर दिया। उस समय मेरा डेटा सस्ता करने के पीछे लॉजिक था। वह ईजिली इंटरनेट का उपयोग करते हुए नई दुनिया की तरफ मुड़े और वह हुआ। उसका हमें बेनिफिट हुआ है। भारत ने कोविड की मुसीबतों को अवसर में पलटने में बहुत बड़ा रोल किया है और आज जो डिजिटल रिवॉल्यूशन आया है, फिनटेक का जो रिवॉल्यूशन आया है, वह हमने आपत्ति को अवसर में पलटा उसके कारण आया है तो मैं टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को समझता हूं। मैं टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना चाहता हूं।

प्रधानमंत्री जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपने हमें समय दिया।

नमस्कार भैया, मेरी भी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, आप भी बहुत प्रगति करें और देश को सही जानकारियां देते रहें।