मिशन इंद्रधनुष के तहत देश के हर बच्चे तक पहुंचने का लक्ष्य लिया गया, अब तक इस मिशन के तहत देश में लगभग 3 करोड़ 40 लाख बच्चों और करीब 90 लाख गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करवाया जा चुका है: प्रधानमंत्री मोदी
बच्चों के सुरक्षा कवच का एक और महत्वपूर्ण पहलू है स्वच्छता है, स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से इस खतरे को दूर करने का बीड़ा हमने उठाया: पीएम मोदी
मिशन इंद्रधनुष को आज दुनियाभर में सराहा जा रहा है, हाल में ही एक मशहूर मेडिकल जर्नल ने इस कार्यक्रम को दुनिया की 12 Best Practices में चुना है: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज उत्‍तर प्रदेश के वृंदावन का दौरा किया। उन्‍होंने वहां वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा तीन अरबवीं भोजन थाली परोसे जाने के अवसर पर पट्टिका का अनावरण किया। प्रधानमंत्री ने अल्प सुविधा प्राप्त स्‍कूली बच्‍चों को तीन अरबवीं भोजन थाली परोसी। उन्होंने इस्कॉन के आचार्य श्री प्रभुपाद् के विग्रह को भी पुष्पांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक, उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, अक्षय पात्र फाउंडेशन के अध्यक्ष स्वामी मधु पंडित दास और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने सम्‍बोधन में प्रधानमंत्री ने अक्षय पात्र फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की और कहा कि 1500 बच्चों को भोजन उपलब्‍ध कराने से शुरू हुआ आंदोलन आज देश भर के स्कूलों के 17 लाख बच्चों को मिड डे मील प्रदान कर रहा है। उन्हें इस बात पर प्रसन्‍न्‍ता व्‍यक्‍त की कि भोजन की पहली थाली अटल बिहारी वाजपेयी जी के कार्यकाल में परोसी गई थी और उन्हें तीन अरबवीं भोजन थाली परोसने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि अच्छा पोषण और स्वस्थ बचपन आधुनिक भारत की बुनियाद है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि- स्वास्थ्य के 3 पहलूओं-: पोषण, टीकाकरण और स्वच्छता को उनकी सरकार द्वारा प्राथमिकता दी गई है और राष्ट्रीय पोषण मिशन, मिशन इन्द्रधनुष और स्वच्छ भारत अभियान प्रमुख पहले हैं। प्रत्‍येक मां और बच्चे को उचित पोषण उपलब्‍ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए राष्ट्रीय पोषण मिशन पिछले साल शुरू किया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर हम हर मां, हर बच्चे को पोषण उपलब्‍ध कराने में सफल हो जाते हैं, तो कई लोगों की जान बच जाएगी।"

मिशन इन्द्रधनुष कार्यक्रम की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यक्रम में 5 और टीके जोड़े गए हैं। अब तक 3 करोड़ 40 लाख बच्चों और 90 लाख गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने एक मेडिकल जर्नल द्वारा मिशन इन्द्रधनुष को वैश्विक स्‍तर की 12 सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं में से एक चुने जाने की सराहना की।

स्वच्छ भारत अभियान और स्वच्छता के बारे में उन्होंने कहा कि एक अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट में कहा गया है कि शौचालयों के उपयोग से 3 लाख लोगों की जान बचाई जा सकती है। स्वच्छ भारत अभियान इसी दिशा में एक पहल है।

प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उज्ज्वला योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन सहित सरकार की अन्य पहलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत सरकार ने अकेले उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन प्रदान किए हैं।

गायों की सुरक्षा, संरक्षा और विकास के लिए राष्ट्रीय कामधेनुयोग की स्थापना की जा रही है। पशुपालन में संलग्‍न लोगों की मदद के लिए सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड के तहत उन्‍हें 3 लाख रुपये का ऋण उपलब्‍ध कराया गया है।

उन्होंने कहा कि किसान कल्याण के उद्देश्य से बनाई गई पीएम किसान योजना से उत्तर प्रदेश के किसानों को फायदा होगा, क्योंकि इस राज्य के अधिकांश किसानों की जोत का आकार 5 एकड़ से कम है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि फाउंडेशन के ये प्रयास ’मैं’ से ‘हम ’की ओर परिवर्तन के महत्व को दर्शाते हैं, जब हम खुद से ऊपर उठकर समाज के बारे में सोचते हैं।

अक्षय पात्र फाउंडेशन मध्याह्न भोजन कार्यक्रम के तहत लाखों बच्चों को गुणवत्ता, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्‍ध कराने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करता है। फाउंडेशन ने बारह राज्‍यों के 14,702 स्कूलों में 1.76 मिलियन बच्चों को मध्याह्न भोजन परोसा है। 2016 में, अक्षय पात्र फाउंडेशन ने भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की उपस्थिति में 2 अरबवीं भोजन की थाली परोसी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अल्प सुविधा प्राप्त स्‍कूली बच्चों को 3अरबवीं भोजन की थाली परोसा जाना समाज के गरीब और हाशिए के वर्गों तक पहुँच बनाने की दिशा में उठाया गया एक अन्‍य कदम है।

 

 

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कैबिनेट ने बिहार में ₹3,590.73 करोड़ की लागत वाले रोड अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी
August 19, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज बिहार में राष्‍ट्रीय राजमार्ग-22 (एनएच-22) के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड को चार लेन मानक में उन्‍नयन करने की मंजूरी दी है। इस परियोजना का विकास हाइब्रिड एन्युइटी मोड (एचएएम) के तहत किया जाएगा। इसकी कुल पूंजी लागत 3590.73 करोड़ रुपये होगी और इसकी कुल लंबाई 82.578 किलोमीटर है।

प्रस्तावित परियोजना बिहार के विस्तारित राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ एकीकरण के कारण महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक महत्‍व रखती है। यह एक प्रमुख फीडर कॉरिडोर के रूप में सोनबरसा स्थित भारत-नेपाल सीमा को एनएच-27 (पूर्व-पश्चिम गलियारा) पर स्थित मुजफ्फरपुर जैसे आर्थिक केंद्रों से जोड़ेगा। परियोजना से मुजफ्फरपुर, मुक्सुदपुर, रुन्नी सैदपुर, थुम्मा, दुमरा, भुतही और सोनबरसा के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात की भीड़ को काफी कम करने में मदद मिलती है।

इस परियोजना से यात्रियों और माल की तेज और सुरक्षित आवाजाही, यात्रा दक्षता में सुधार होगा और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसे 100 किमी प्रति घंटे और 80 किमी प्रति घंटे की औसत गति के डिजाइन किया गया है। इसमें सड़क के मध्‍य विभाजक में समतल-स्‍तरीय कोई खुला मार्ग नहीं होगा, जिससे तेज और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित होगी।

प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के सिद्धांतों के अनुरूप नियोजित ये परियोजना औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख रेलवे स्टेशनों सहित प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों से सम्‍पर्क में सुधार करके मल्टी-मॉडल एकीकरण को बढ़ाएगी। बेहतर कनेक्टिविटी से माल और कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं की कुशल आवाजाही सुगम होगी, क्षेत्रीय आर्थिक विकास को समर्थन मिलेगा और बौद्ध सर्किट तथा सीतामढ़ी स्थित ऐतिहासिक जानकी पुनौरा धाम मंदिर जैसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों तक बेहतर पहुंच उपलब्‍ध होगी।

एनएच-22 का मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो राष्ट्रीय माल ढुलाई ग्रिड से निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करता है। यह एनएच-31 और एनएच-122 जैसे मौजूदा गलियारों के साथ तालमेल बिठाकर बरौनी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों और गंगा नदी के किनारे स्थित लॉजिस्टिक्स केंद्रों से बेहतर संपर्क स्थापित करता है। साथ ही, यह भिटामोर स्थित निकटवर्ती लैंड पोर्ट के माध्यम से सीमा पार यात्री और माल की आवाजाही को भी बढ़ावा देता है।

इसके अतिरिक्त, इस परियोजना में यातायात की सुचारू आवाजाही बनाए रखने और सुरक्षित, उच्च गति वाली यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सात प्रमुख पुलों (जिसमें बारहमासी बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा एक प्रमुख पुल शामिल है), तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) और दो फ्लाईओवर (1170 मीटर और 270 मीटर) का प्रावधान है।

इस परियोजना से औसत यात्रा गति में वृद्धि, यात्रा समय में कमी तथा समग्र सड़क सुरक्षा, ईंधन दक्षता और वाहनों की परिचालन लागत में सुधार होगा। इससे क्षेत्रीय आवागमन और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना बिहार के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध सम्‍पर्क प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, उन्नत कॉरिडोर से पीएम गति-शक्ति के पांच आर्थिक केंद्रों (चार औद्योगिक एस्‍टेट और एक मेगा फूड पार्क), चार सामाजिक केंद्रों (बाबा गरीबनाथ मंदिर, माता जानकी मंदिर, पुनौरा धाम, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी आकांक्षी जिले) और दो लॉजिस्टिक्स केंद्रों (मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन) के लिए कनेक्टिविटी में सुधार होगा। इससे इस पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की तेज आवाजाही सुगम होगी।