भारत एक युवा देश, हमें अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का इस्तेमाल करना चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी
हमें प्रकृति के अनुरूप रहने पर महत्व देना चाहिए, अल्पकालिक लाभ के बारे में नहीं सोचना चाहिए: पीएम मोदी
प्रत्येक रुपयाभारत सरकार का हर संसाधन देशवासियों के कल्याण के लिए समर्पित: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी अपनी कर्नाटक यात्रा के पहले चरण में मंगलूरु पहुंचे। वह धर्मस्‍थल के लिए रवाना हुए जहां उन्‍होंने श्री मंजूनाथ स्‍वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की।

उजिरे में आयोजित एक जनसभा में प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाताधारकों को रुपे कार्ड वितरित किया। उन्‍होंने 'धरती माता को बचाओ और अगली पीढ़ी को हस्‍तांतरित करो' (प्रिजर्व मदर अर्थ एंड ट्रांसफर टु नेक्‍स्‍ट जेनेरेशन) कार्यक्रम की शुरुआत के लिए एक लोगो का अनावरण किया।

सभा को संबोधित करते हुए उन्‍होंने भगवान मंजूनाथ की पूजा करने का अवसर प्राप्‍त होने पर खुशी जताई।

उन्होंने कहा कि वर्तमान शताब्‍दी कौशल विकास की है। उन्‍होंने कहा कि भारत एक युवा देश है और इसलिए हमें जनसांख्यिकीय लाभांश का अवश्‍य फायदा उठाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे संतों और महात्‍माओं द्वारा स्‍थापित एवं पोषित संस्‍थानों ने सदियों से समाज की मदद की है।

महिला स्‍वयं सहायता समूहों को रुपे कार्ड सौंपने के अवसर के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह डिजिटल लेनदेन के प्रति जबरदस्‍त उत्‍साह को देखकर खुश हैं।

उन्‍होंने लोगों से भीम ऐप का इस्‍तेमाल करने और नकदी रहित लेनदेन को अपनाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ईमानदारी और अखंडता का युग है जहां व्‍यवस्‍था को धोखा देने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सरकार का प्रत्‍येक रुपया और हरेक संसाधन भारतीयों के कल्‍याण के लिए समर्पित है। उन्‍होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास का फल बिना किसी भ्रष्‍टाचार के अपेक्षित लाभार्थियों तक पहुंचे।

श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि इस दिन और काल में जल संरक्षण हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्‍होंने कहा कि हमें प्रकृति के साथ सामंजस्‍यपूर्वक रहने को भी महत्‍व देने की आवश्‍यकता है और हमें अल्‍पावधि फायदे के बारे में नहीं सोचना चाहिए। उन्‍होंने कर्नाटक के किसानों से ड्रिप सिंचाई जैसे तरीकों को अपनाने की अपील की जो जल संरक्षण में मदद करता है।

 

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प्रधानमंत्री ने जड़ों की रक्षा के महत्व पर संस्कृत सुभाषितम साझा किया
February 25, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें ज्ञान की मूलभूत जड़ों तथा दैनिक अनुशासन की रक्षा के निर्णायक महत्व पर बल दिया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया सुभाषित इस प्रकार है:

विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।

तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥

“एक बुद्धिमान व्यक्ति वृक्ष के समान होता है। उस ज्ञान स्‍वरूपी वृक्ष की जड़ दैनिक उपासना है। वेद उसकी शाखाएँ हैं और सत्कर्म उसके पत्ते हैं। अतः जड़ की सावधानीपूर्वक रक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि यदि जड़ नष्ट हो गई तो न शाखाएँ रहेंगी और न ही पत्ते।”

एक्स पर प्रधानमंत्री ने लिखा;

विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या वेदाः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम्।

तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम्॥