“आज एक ऐसा पल है, आइए, हम सब भारत के पराक्रमी वीरों को सिर झुका कर नमन करें। आज चुरू की धरती से मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि देश सुरक्षित हाथों में है। साल 2014 में विजय शंखनाद युवा संगम के दौरान मैंने अपने दिल की बात आप सबके सामने रखी थी और मेरी आत्मा कहती है, आज का दिवस उसे फिर से दोहराने का दिवस है। आज फिर से एक बार 2014 के मेरे इन शब्दों को मां भारती के वीरों को नमन करते हुए मैं दोहरा रहा हूं- सौगंध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं मिटने दूंगा, मैं देश नहीं रुकने दूंगा, मैं देश नहीं झुकने दूंगा...”   

राजस्थान के चुरू में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि देश से बढ़कर कुछ नहीं होता है। देश की सेवा करने वाले को, देश के निर्माण में लगे हर व्यक्ति को यह प्रधानसेवक नमन करता है। कल आपने देखा होगा कि आजादी के 70 साल बाद, राष्ट्र रक्षा के लिए प्राण बलिदान करने वाले शहीदों के लिए राष्ट्रीय समर स्मारक का उद्घाटन किया गया। यहां के हजारों नौजवान सीमा पर राष्ट्ररक्षा में जुटे हुए हैं। आपका सम्मान, आपकी सेवा मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

पीएम मोदी ने सरकार की विभिन्न उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि 30 लाख परिवारों को ‘वन रैंक वन पेंशन’ का लाभ मिल चुका है। वन रैंक वन पेंशन के तहत 35,000 करोड़ रुपये हमारे फौजी परिवारों को वितरित किए जा चुके हैं। इसका बहुत बड़ा लाभ राजस्थान के एक लाख से भी अधिक फौजी परिवारों को हुआ है। उन्होंने कहा, “आपका ये प्रधानसेवक यह काम इसलिए कर पा रहा है, क्योंकि हमारे लिए खुद से बड़ा दल है, और दल से बड़ा देश है। हम निरंतर पूरी ईमानदारी से देश के एक-एक जन की सेवा में जुटे हैं।”

श्री मोदी ने कहा कि हम ‘जय जवान जय किसान जय विज्ञान’ के मंत्र को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। दो दिन पहले ही किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत गोरखपुर में की गई, जिसके तहत एक करोड़ किसानों को 2,000 रुपये की पहली किस्त भेजी जा चुकी है। बाकी किसानों को भी मदद देने के लिए तेजी से काम चल रहा है। देश भर में कुल 12 करोड़ किसानों को इस योजना का लाभ मिलने वाला है। इसमें चुरू समेत पूरे राजस्थान के 50 लाख किसान परिवार भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि जिन एक करोड़ किसान परिवारों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की पहली किस्त मिली है, उनमें चुरू या राजस्थान का एक भी किसान परिवार नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार ने अभी तक लाभार्थी किसानों की सूची केंद्र को नहीं भेजी है। इस योजना के तहत 75,000 करोड़ रुपये हर वर्ष किसानों के बैंक खातों में सीधे भेजे जाएंगे। इसमें किसी बिचौलिए की कोई भूमिका नहीं होगी। अगले दस साल में साढ़े सात लाख करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने हैं। इसके लिए किसानों को कुछ नहीं करना है। आपके फोन पर मैसेज आएगा कि पैसे आ गए हैं। आप इन पैसों से बीज, खाद, कीटनाशक जैसी चीजें खरीद सकते हैं। अब नामुमकिन मुमकिन है, क्योंकि ये मोदी सरकार है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी योजना पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। आयुष्मान योजना के तहत गरीबों को पांच लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। लेकिन, राजस्थान सरकार ने इस योजना को भी लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई। आयुष्मान योजना के तहत देश भर में 13 लाख लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल चुकी है, लेकिन इनमें राजस्थान का एक भी व्यक्ति शामिल नहीं है। राजस्थान सरकार से मेरा आग्रह है कि जल्द से जल्द आयुष्मान योजना से जुड़कर गरीबों का कल्याण करें। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ‘सबका साथ सबका विकास’ मंत्र पर चल रही है। यह बदला हुआ भारत नई रफ्तार के साथ काम कर रहा है। मुझे गर्व है कि पिछले साढ़े चार साल में गरीबों के लिए डेढ़ करोड़ मकान बनाए चुके हैं। पुरानी स्पीड से घर बनाने का काम होता तो कई दशक लग जाते। राजस्थान में भी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के 7 लाख घर बन चुके हैं, इनमें सात हजार से अधिक घर चुरू जिले में ही बने हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि मध्यम वर्ग को होम लोन पर छूट की योजना से बीस साल में करीब 6 लाख रुपये की बचत होगी। होम लोन की ब्याज दर 10 प्रतिशत से घटाकर 8 से 9 प्रतिशत तक कर दी गई है। हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने निर्माणाधीन घरों पर लगने वाले टैक्स में बड़ी कटौती करते हुए इसे 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। अफोर्डेबल हाउसिंग में जीएसटी को 8 प्रतिशत से घटाकर सिर्फ 1 प्रतिशत कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वसुंधरा जी की सरकार ने यमुना का पानी चुरू तक पहुंचाने का काम किया। अगर यहां की सरकार ने गंभीरता दिखाई तो जल्द ही यमुना का पानी दूसरे इलाकों में भी पहुंच जाएगा। नेशनल हाइवे बनाने का काम भी तेज गति से चल रहा है। इस पूरे क्षेत्र में अनेक नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। रेल लाइनों के आधनिकीकरण का काम भी तेजी से हो रहा है। बिजली, पानी, गैस कनेक्शन पहुंचा कर और घर, शौचालय बनाकर हमने इन सुविधाओं को सामान्य लोगों से जोड़ा है। उज्ज्वला योजना के तहत 50 लाख से अधिक रसोई गैस के मुफ्त कनेक्शन दिए गए हैं, जिनमें से डेढ़ लाख से अधिक गैस कनेक्शन चुरू की ही गरीब, दलित, वंचित माताओं-बहनों को मिले हैं।  

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि देश के विकास के क्रम में देश के संसाधनों पर सबको समान अवसर मिले, यही हमारा प्रयास है। गरीब, किसान, नौजवान और जवान को सम्मान देने का प्रयास आपकी एक वोट की ताकत से ही संभव हो पा रहा है। मजबूत सरकार का दम आज दुनिया देख रही है। आपका ही वोट मजबूर और कमजोर सरकार का सपना देखने वाले को जवाब देगा और आपका ही वोट मुझे और भाजपा को पहले से ज्यादा मजबूती देगा, ये मेरा विश्वास है।

अपने भाषण की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने भगवान बाला जी को नमन किया और चुरू को शक्ति, शौर्य, विश्व बंधुत्व और मानवता की धरती बताया।


 

 

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।