प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मेक इन इंडिया पहल की आज शुरूआत की। 

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l2014092557168  _ 684राजधानी के विज्ञान भवन में मौजूद शीर्ष ग्लोबल सीईओ सहित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि “एफडीआई’’ को ‘‘प्रत्यक्ष विदेशी निवेश’’ के साथ ‘‘फर्स्ट डेवलप इंडिया’’ के रूप में समझा जाना चाहिए। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत को सिर्फ बाजार के रूप में न देखें बल्कि इसे एक अवसर समझें।  

2-684प्रधानमंत्री ने कहा कि आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़नी चाहिए क्योंकि इससे मांग बढ़गी और निवेशकों को फायदा मिलने के साथ-साथ विकास को बढ़ावा मिलेगा। लोगों को जितनी तेजी से गरीबी से बाहर निकालकर मध्यम वर्ग में लाया जाएगा, वैश्विक व्यवसाय के लिए उतने ही अधिक अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा, इसलिए विदेशों से निवेशकों को नौकरियां सृजित करनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सस्ते निर्माण और उदार खरीददार- जिसके पास क्रय शक्ति हो- दोनों की ही जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधिक रोजगार का अर्थ है अधिक क्रय शक्ति का होना।

l2014092557169  _ 684प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां लोकतंत्र, जनसंख्या और मांग का अनोखा मिश्रण है। उन्होंने कहा कि नई सरकार कौशल विकास के लिए पहल कर रही है ताकि निर्माण के लिए कुशल जनशक्ति सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने डिजीटल इंडिया मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि इससे सुनिश्चित होगा कि सरकारी प्रक्रिया कार्पोरेट की प्रक्रिया के अनुकूल रहे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से वे महसूस कर रहे थे कि नीतिगत मुद्दों पर स्पष्टता का अभाव होने के कारण भारत के व्यावसायिक समुदाय के बीच निराशा है। उन्होंने कहा कि उन्हें यहां तक सुनने को मिला कि भारतीय व्यवसायी भारत छोड़ कर चले जाएंगे तथा कहीं और जाकर व्यवसाय स्थापित कर लेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे उन्हें दुख पहुंचा। उन्होंने कहा कि किसी भी भारतीय व्यवसाय को किसी भी परिस्थिति में देश छोड़ने की बाध्यता जैसी भावना नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों के अनुभव के आधार पर वे कह सकते हैं कि अब ये निराशा समाप्त हो गई है।

प्रधानमंत्री ने दस्तावेजों का स्व-प्रमाणीकरण करने की सरकार की नई पहल का उदाहरण दिया और कहा कि यह इस बात को स्पष्ट करता है कि नई सरकार को अपने नागरिकों पर कितना विश्वास है। आइये विश्वास के साथ शुरूआत करें; यदि कोई परेशानी है तो सरकार हस्तक्षेप कर सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्वास भी बदलाव की ताकत बन सकता है।

श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विकास और विकासोन्मुख रोजगार सरकार की जिम्मेदारी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में व्यवसाय करना कठिन माना जाता था। उन्होंने इस संबंध में सरकारी अधिकारियों को संवेदनशील बनाया। उन्होंने ‘प्रभावकारी’ शासन की जरूरत पर बल दिया।

“लुक ईस्ट’’ अभिव्यक्ति के साथ प्रधानमंत्री ने ‘‘लिंक वेस्ट’’ को जोड़ा उन्होंने कहा कि एक वैश्विक दूरदर्शिता आवश्यक है। उन्होंने कहा स्वच्छ भारत और ‘‘कचरे से सम्पन्नता’’ मिशन अच्छी आमदनी और बिजनस का जरिया बन सकते हैं। उन्होंने सार्वजनिक निजी भागीदारी के जारिए भारत के 500 शहरों में बेकार पानी के प्रबंधन और ठोस कचरा प्रबंधंन के बारे में अपने विजन का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने राजमार्गों के अलावा आई-वेज सहित भविष्य के बुनियादी ढांचे की चर्चा की और बंदरगाह प्रमुख विकास, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, गैस ग्रिड और जल ग्रिडों का जिक्र किया।

3-684प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया का प्रतीक चिन्ह जारी किया और वेबसाइट makeinindia.com की शुरूआत की।

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प्रधानमंत्री ने डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
September 08, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने महान गायक-संगीतकार और गीतकार डॉक्टर भूपेन हजारिका को उनकी 100वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है।

प्रधानमंत्री ने कहा है कि डॉ. भूपेन हजारिका के सुरों ने असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि डॉ. हजारिका ने अपने संगीत के माध्यम से अनगिनत लोगों के विचारों और भावनाओं को अत्यंत खूबसूरती से व्यक्त किया और लोगों को करीब लाये।

श्री मोदी ने विगत वर्ष गुवाहाटी में डॉ. हजारिका की जन्म शताब्दी समारोह के शुभारंभ में भाग लेने की यादें भी ताजा कीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भूपेन दा का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

“मैं प्रसिद्ध व्यक्तित्व डॉ. भूपेन हजारिका जी को उनकी 100वीं जयंती पर याद कर रहा हूं।”

उनकी आवाज ने असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाया।

अपने संगीत के माध्यम से उन्होंने अनगिनत लोगों के विचारों और भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त किया। उनके गीतों लोगों को करीब लाये।

मैं पिछले वर्ष गुवाहाटी में उनके जन्म शताब्दी समारोह के शुभारंभ में शामिल हुआ था। उसकी यादें मेरे मन में बनी हुई हैं। भूपेन दा का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।