प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देशभर के डॉक्टरों, नर्सों और लैब तकनीशियनों समेत मेडिकल समुदाय के साथ संवाद किया।

प्रधानमंत्री ने कोविड-19 से निपटने में भारत के चिकित्सा पेशेवरों द्वारा किए जा रहे निस्वार्थ कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पूरे देश ने 'जनता कर्फ्यू' के दौरान उन्हें सैल्यूट किया और उन्होंने एक बार फिर राष्ट्र के लिए उनकी सेवा को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि मेडिकल समुदाय के परिवार के सदस्यों के योगदान को, उनके समर्थन स्तंभ होने के लिए स्वीकार करना महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सामने चुनौती अभूतपूर्व और ऐतिहासिक है। इस मोड़ पर, पूरा देश उम्मीद के साथ चिकित्सा समुदाय की ओर देख रहा है और यह जरूरी है कि इतनी बड़ी चुनौती का सामना करने हुए भी उनका मनोबल कभी कम न हो।

 

सरकार की तरफ से सभी प्रकार के सहयोग के लिए चिकित्सा बिरादरी को आश्वस्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे संक्रमित होने से बचने के लिए सभी प्रकार के जरूरी प्रोटोकॉल का पालन करें और पर्याप्त सावधानी बरतें। उन्होंने उनसे कहा कि वे आम जनता को क्या करें, क्या न करें, को लेकर मार्गदर्शन दें, सेल्फ-क्वारंटाइन और सामाजिक दूरी की महत्ता पर सलाह दें और इलाज कहां मिल सकता है, इसकी जानकारी प्रदान करें।

उन्होंने उनसे सर्वांगीण जागरूकता पैदा करने और अवैज्ञानिक उपचारों और गलत सूचनाओं के विरोध में बोलने का अनुरोध किया। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और तकनीशियनों के कौशल विकास और तेजी से प्रशिक्षण को लेकर प्रोत्साहित किया, जिससे वे सामने खड़ी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहें।

चिकित्सा जगत के प्रतिनिधियों ने जरूरत की इस घड़ी में प्रधानमंत्री के अग्रणी नेतृत्व के प्रति आभार जताया। उन्होंने 'संकल्प और संयम' के मंत्र के लिए उनका धन्यवाद दिया। अखिल भारतीय नर्स संघ ने फ्लोरेंस नाइटिंगेल के 200वें जन्मवर्ष समारोह में उनके योगदान को मान्यता देने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

प्रतिनिधियों ने जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक मदद प्रदान करने के अपने प्रयासों के बारे में भी बात की। उन्होंने क्वारंटाइन उपायों के महत्व, कोविड-19 के मामलों से निपटने के लिए समर्पित अस्पतालों/विभागों के महत्व और ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल की व्यवस्थाओं पर बात की। उन्होंने जरूरत के इस समय चिकित्सा समुदाय की जरूरतों को लेकर संवेदनशीलता दिखाने वाले समुदाय के महत्व के बारे में भी बात की।

प्रधानमंत्री ने व्यापक स्तर पर और बहुआयामी सुझावों के लिए चिकित्सा समुदाय को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सा उपचार के लिए टेलीकंसल्टेशन्स के ज्यादा इस्तेमाल के प्रस्तावों पर गौर करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और डॉक्टरों की सुरक्षा चिंताओं को अत्यंत महत्व के साथ देखा जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि उनके आशावादी विचारों को सुनकर खुशी हुई, इससे उनमें ज्यादा भरोसा पैदा हुआ है कि देश सफलतापूर्वक चुनौती का सामना करेगा और विजयी होगा।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव ने भी उनके योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने पहले ही सक्रिय रहने, ग्रेडेड रेस्पॉन्स के बारे में बात की जो विकासशील स्थिति के साथ विकसित हुई है।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री, प्रधान सचिव, कैबिनेट सचिव और डीजी, आईसीएमआर ने भी इस विचार-विमर्श में हिस्सा लिया।

 

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प्रधानमंत्री ने शक्ति और क्षमता के सामंजस्य पर बल देने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 13, 2026
प्रधानमंत्री ने 1998 के परमाणु परीक्षणों को हमारे राष्ट्र के संकल्प का निर्णायक क्षण बताया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज मई 1998 में पोखरण में भारत द्वारा किए गए ऐतिहासिक परमाणु परीक्षणों को याद करते हुए उन्हें हमारे राष्ट्र के संकल्प का निर्णायक क्षण बताया। श्री मोदी ने कहा, “11 मई के परीक्षणों के बाद, पूरी दुनिया ने भारत पर दबाव बनाया, लेकिन हमने यह सिद्ध कर दिया कि कोई भी शक्ति भारत को झुका नहीं सकती।”

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-

“एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता ।

न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पोस्‍ट पर लिखा;

“1998 में इसी दिन भारत ने जो परमाणु परीक्षण किए थे, उनसे दुनिया को पता चला कि हमारे देश की इच्छाशक्ति कितनी अटल है! 11 मई के टेस्ट के बाद पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन हमने दिखाया कि कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती।

एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता ।

न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”