मित्रो,

19 नवंबर, 2014 की शाम को म्यांमार, आस्ट्रेलिया और फिजी की मेरी यात्रा का समापन हुआ। वापसी के दौरान, मैं पिछले 10 दिनों की अपनी यात्रा के बारे में सोच रहा था। मैं यह सोच रहा था कि हमनें क्या हासिल किया, भारत को इससे क्या प्राप्त होगा और इसलिए मैंने तय किया कि मुझे अपने ब्लॉग के माध्यम से ये बातें आप तक पहुंचानी चाहिए।

हमें इस इस यात्रा की historic uniqueness को समझना होगा।

आस्ट्रेलिया के मामले में, आस्ट्रेलिया की यह द्वीपक्षीय यात्रा पिछले 28 वर्षों के दौरान, भारत के प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। वहीं फिजी की यह द्वीपक्षीय यात्रा पिछले 33 वर्षों के दौरान, भारत के प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। जहां एक ओर IT और Communication Revolution की वजह से संसार छोटा हो गया है वहीं दूसरी ओर हम लगभग पिछले तीन दशकों से इन देशों की यात्रा नहीं कर सके। ये दोनों देश अपने आप में महत्वपूर्ण हैं।

मेरा विचार है कि इसमें बदलाव अवश्य किया जाना चाहिए।

मैं कुल पांच Summits में शामिल हुआ। इसमें से एक Summit में Pacific Islands के नेताओं के साथ फिजी में मैंने मुलाकात की थी। यह Summit हमारे द्वारा आयोजित थी। इन सभी Summits में मैंने 38 देशों के नेताओं के साथ मुलाकात की थी। 20 Bilateral Meetings में शामिल हुआ था। यहां पर मुझे विश्व के हर हिस्से के नेताओं से मुलाकात करने का अवसर मिला था। ये सभी बैठकें Frank, Comprehensive और fruitful रही थीं। इन बैठकों में कई मुद्दों पर हमारे बीच सार्थक बातचीत हुई। साथ ही मैं कई Business Leaders से भी मिला।

इन Bilateral Meetings के दौरान, मैंने यह पाया कि संपूर्ण विश्व भारत की ओर नए आदर और बेहद उत्साह से देख रहा है। मैंने यह भी पाया कि global community भारत के साथ engage होने के लिए काफी गंभीर है।

हमने प्रत्येक नेता के साथ इस बात पर चर्चा की, कि कैसे हम अपने संबंधों को और अधिक extensive, diverse और wide-ranging बना सकते हैं? इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य यह था कि व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा दिया जाए और भारत में और अधिक उद्योग लगाए जाएं। जिन नेताओं से मेरी मुलाकात हुई उनमें से ज्यादातर नेता हमारे "Make in India" initiative के प्रति बहुत उत्साही थे। साथ ही वो भारत में उपलब्ध extensive और diverse opportunities का लाभ उठाना चाहते हैं। मैं इसे एक ऐसे सकारात्मक लक्षण के रूप में देख रहा हूं, जिससे भारत के युवाओं को कई अवसर प्राप्त होंगे और उन्हें सही exposure मिलेगा। यह उनके सुनहरे भविष्य की नींव है। ऐसा exposure आज आवश्यक हो गया है। यहां हमें इस बात को भी ध्यान में रखना है कि संसार विकसित हो रहा है। विश्व के कुछ नेताओं ने "Next Gen Infrastructure और Smart Cities" बनाने की हमारी योजनाओं के प्रति भी गहरी रूचि दिखाई है।

इस यात्रा के दौरान मुझे आस्ट्रेलिया और फिज़ी के सांसदों को सम्बोधित करने का अवसर मिला।

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मैं विश्व के सबसे बड़े प्रजातंत्र से संबंध रखता हूं और मुझे उन देशों की यात्रा करने में हमेशा खुशी होती है जहां प्रजातंत्र सफल रहा है। मुझे इन पवित्र देशों से अपने विचार बांटने में भी खुशी होती है। दो प्रजातंत्रों के संबंधों से गहरे कोई और संबंध नहीं हो सकते। इससे जहां एक ओर मुझे इन देशों के वृहत्तर राजनैतिक नेतृत्व तक पहुंचने का अवसर मिला, वहीं दूसरी ओर इससे सहयोग के नए क्षेत्र भी खुले। मैं एक बार पुन: कहना चाहूंगा कि इन देशों के राजनीतिज्ञ भारत के प्रति बहुत अधिक आशावादी हैं।

भारत के किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार आस्ट्रेलिया और फिज़ी की Parliaments को सम्बोधित किया है। मुझे यह बताया गया कि फिज़ी की Parliament को पहली बार विश्व के किसी नेता ने सम्बोधित किया है। यह एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि global community की नजरों में भारत के 125 करोड़ लोगों के प्रति कितना सम्मान है।

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G-20 Summit में, भारत ने World Community के सामने existence और repatriation of black money का मामला प्रमुखता से रखा।

मुझे इस बात की खुशी है कि world community ने इसे गंभीरता से लिया। वास्तव में, यह मामला किसी एक देश को ही प्रभावित करने वाला नहीं है, बल्कि काले धन की समस्या में वह ताकत है जो विश्व-शांति और सामंजस्य को भंग कर सकती है। इसके अलावा, काला धन Terrorism, Money Laundering और Narcotics Trade को भी बढ़ावा देता है। ऐसे प्रजातंत्रों के रूप में जो विधि के शासन के प्रति वचनबद्ध हैं, तो हमारी यह बाध्यता बन जाती है कि हम इस बुराई का मिलजुल कर सामना करें। और इन मुद्दों को उठाने के लिए G-20 Summit से बेहतर और कोई अवसर नहीं था। हमारे प्रयासों के फलस्वरूप इस मामले को दर्शाने वाला आधिकारिक घोषणापत्र (official communique) तैयार करने में सफलता मिली।

ASEAN Summit, ASEAN देशों के नेतृत्व के साथ engage होने का एक अवसर था। इसमें हमने इस बात पर चर्चा की कि कैसे हम group of nations के रूप में और एक देश के रूप में - दोनों ही प्रकार से अपना engagement बढ़ा सकते हैं?

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मेरा यह विचार है कि ASEAN और भारत मिलकर सहयोग के नए क्षेत्र तलाश सकते हैं। हमारे बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध होने के साथ-साथ हमारे पास हमारे युवावर्ग का जोश और ऊर्जा भी है।

मैंने मलेशिया के प्रधानमंत्री Razak के साथ affordable housing के बारे में बातचीत की। ब्रुनेई के सुल्तान के साथ energy issues के बारे में और सिंगापुर के प्रधानमंत्री Lee Hsien Loong के साथ urban development के मुद्दों पर बातचीत की।

फिजी में Pacific Island Nations के नेताओं से मेरी मुलाकात हुई। यह क्षेत्र हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इन सभी देशों के साथ मजबूत द्वीपक्षीय संबंधों के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण और ठोस कदमों से मैं बहुत प्रसन्न हूं। इन देशों के लिए हम बहुत कुछ कर सकते हैं और इन देशों से हम बहुत कुछ सीख भी सकते हैं।

मैं जहां कहीं भी गया लोगों ने मेरा बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया। मैं तीनों देशों के नेताओं - राष्ट्रपति Thein Sein, प्रधानमंत्री Abbott और प्रधानमंत्री Bainimarama का अत्यंत आभारी हूं।

मैंने उनके साथ जो व्यक्तिगत मुलाकातें कीं उनमें अपने संबंधित देशों के साथ संबंधों को आगे बढाने की महत्वपूर्ण बातें शामिल थी।

राष्ट्रपति Thein Sein के साथ मुख्य रूप से 3Cs अर्थात culture, commerce and connectivity के बारे में बात हुई थी। प्रधानमंत्री Abbott के साथ energy, culture और security के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बातचीत हुई और हम nuclear energy के मुद्दे पर बेहद सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रहे हैं। Security Cooperation की रूपरेखा आस्ट्रेलिया के साथ हमारे बढ़ते सुरक्षा संबंधों का सटीक प्रमाण है। आस्ट्रेलिया की कंपनियों को भारत आने का न्यौता देने के लिए अगले वर्ष ‘Make in India’ नामक रोड शो किया जाएगा। आस्ट्रेलिया के business leaders के साथ मुलाकात के दौरान मैंने देखा कि वे भारत में निवेश करने के लिए इच्छुक और उत्सुक हैं और इस संदर्भ में यह रोड शो निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण होगा।

व्यक्तिगत तौर पर मैंने यह महसूस किया कि भारतीय समुदाय से जो स्नेह मिला वो दिल को छू लेने वाला था। चाहे वह म्यांमार में हो, आस्ट्रेलिया में हो या फिजी में, उन्होंने जिस गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया उसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता। मैंने देखा कि उन्हें भारत पर और भारत में हो रहे परिवर्तन पर गर्व हो रहा था। मुझे उनकी आंखों में सपने और आशाएं दिखाई दीं। जैसा कि मैंने सिड़नी में भारतीय समुदाय के कार्यक्रम के दौरान कहा था, हम उनकी अपेक्षाओं से पूर्ण रूप से अवगत हैं और उनके सपनों का भारत बनाने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे।

जब मैंने आस्ट्रेलिया और फिजी में visa-on-arrival facilities तथा OCI और PIO के विलय की घोषणा की तो हमारे मूल के लोगों के चेहरों पर बेहद प्रसन्नता थी। अपने मूल के लोगों को अपनी विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बनाना हमारा उद्देश्य है और पिछले कुछ महीनों में हमने इसी दिशा में प्रयास किए हैं। हम एक ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं, जहां हमारे मूल के लोगों को भी यह आभास हो कि वे भी भारत के विकास में अपना सहयोग कर सकते है। यह भी एक कारण है, जिसके लिए मैंने अप्रवासी भारतीयों से अपने विचारों और राय को www.mygov.in पर साझा करने का आग्रह किया है।

मुझे आइकोनिक मेलबर्न क्रिकेट ग्रांउड का स्नेहपूर्ण स्वागत याद आता है। यह प्रधानमंत्री Abbott की महानता थी कि वे विशेषतौर पर मेलबर्न पहुंचे और स्वागत की मेजबानी की, जिसमें कपिल देव, सुनील गावस्कर, वी वी एस लक्ष्मण, एलन बार्डर, स्टीव वॉ, डीन जोंस और ग्लैन मैकग्रा जैसे क्रिकेट की महान हस्तियां शामिल हुईं।

दोस्तों, पिछले कुछ दिनों में मेरे द्वारा की गई पूर्व की यात्रा यादगार रही जो मुझे याद दिलाती रहेगी कि दुनिया को भारत से क्या अपेक्षाएं हैं !

मुझे उनकी आंखों में आशा की चमक दिखाई दी कि भारत एक शांत, स्थिर और विकसित वैश्विक समुदाय का मुकाम हासिल करने में अपनी भूमिका अदा करेगा।

मुझे अपने ऊर्जावान नौजवानों की एक छवि भी नजर आई, जो तेजी से बदल रही दुनिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।

मेरा स्पष्ट रूप से यह मानना है कि भारत दुनिया के मंच पर सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

दुनिया भारत को एक नए जोश के साथ देख रही है।

हमें अपने साझा मूल्यों और लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नई प्रतिबद्धता को परस्पर बढाने की आवश्यकता है।

हम मिलकर ही, भारत और दुनिया के बेहतर भविष्य की कहानी लिखेंगे। आपका,

नरेन्द्र मोदी

यात्रा के संबंध में अधिक जानकारी

म्यांमार

राष्ट्रपति थेन सेन के साथ द्विपक्षी वार्ता

आंग सान सू की के साथ बैठक

भारतीय समुदाय द्वारा स्वागत

प्रधानमंत्री की म्यांमार यात्रा के वीडियो

भारत-आसियान शिखर बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन वक्तव्य

जी20

भाषण और हस्तक्षेप

भाषणों का मूलपाठ

जी20 द्विपक्षीय/रीट्रीट्स

ऑस्ट्रेलिया

क्वींसलैंड यूनीवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलॉजी

ब्रिस्बेन और मेलबॉर्न में ऑस्ट्रेलियाई उद्योगपतियों को संबोधन

टोनी एबॉट के साथ बैठक

ऑस्ट्रेलिया के राजनीतिक नेताओं के साथ बैठक

ऑस्ट्रेलियाई संसद में संबोधन

भारतीय समुदाय का कार्यक्रम

युद्ध स्मारक

प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के वीडियो

फिजी

स्वागत समारोह

संसद में संबोधन

विश्वविद्यालय में संबोधन

प्रधानमंत्री की फिजी यात्रा के वीडियो

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इटली और भारत: इंडो-मेडिटेरेनियन के लिए एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप
May 20, 2026

भारत और इटली के बीच संबंध अब एक निर्णायक दौर में पहुंच चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी आई है और यह सौहार्दपूर्ण मित्रता से आगे बढ़कर स्वतंत्रता, लोकतंत्र और भविष्य को लेकर साझा विजन पर आधारित एक सच्ची स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में बदल गए हैं।

ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था गहरे बदलाव के दौर से गुजर रही है, इटली और भारत की साझेदारी उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर नियमित संवाद से आगे बढ़ रही है और अब एक नए तथा व्यापक आयाम हासिल कर रही है, जो हमारी आर्थिक गतिशीलता, सामाजिक रचनात्मकता और हजारों साल पुरानी सभ्यतागत समझ को साथ जोड़ती है। हमारा सहयोग इस साझा समझ को दर्शाता है कि 21वीं सदी में समृद्धि और सुरक्षा इस बात से तय होगी कि देश इनोवेशन, एनर्जी ट्रांजिशन के प्रबंधन और स्ट्रैटेजिक संप्रभुता को मजबूत करने में कितने सक्षम हैं। इसी उद्देश्य से हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा डाइवर्स बनाने का संकल्प लिया है, ताकि नए लक्ष्यों को हासिल किया जा सके और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं का बेहतर उपयोग हो सके। हमारा लक्ष्य इटली की डिजाइन क्षमता, मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस और वर्ल्ड-क्लास सुपरकंप्यूटर्स, जो उसे एक इंडस्ट्रियल पावरहाउस बनाते हैं, को भारत की तेज आर्थिक ग्रोथ, इंजीनियरिंग टैलेंट, बड़े पैमाने की क्षमता, इनोवेशन और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न तथा 2 लाख स्टार्ट-अप वाले एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम के साथ जोड़कर मजबूत तालमेल बनाना है। यह केवल साधारण इंटीग्रेशन नहीं, बल्कि ऐसा साझा वैल्यू क्रिएशन है जिसमें दोनों देशों की औद्योगिक ताकतें एक-दूसरे को और मजबूत बनाती हैं।

यूरोपियन यूनियन और भारत के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों दिशाओं में ट्रेड और इनवेस्टमेंट बढ़ाने का रास्ता खोलता है। हमारा लक्ष्य 2029 तक इटली और भारत के बीच 20 बिलियन यूरो के ट्रेड टारगेट को हासिल करना और उससे आगे निकलना है। इसके लिए डिफेंस और एयरोस्पेस, क्लीन टेक्नोलॉजी, मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, केमिकल्स, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, एग्री-फूड, टूरिज्म समेत कई सेक्टर्स पर फोकस किया जाएगा।

“मेड इन इटली” हमेशा से पूरी वर्ल्ड में एक्सीलेंस का प्रतीक रहा है और आज इसकी स्वाभाविक साझेदारी “मेक इन इंडिया” पहल के हाई-क्वालिटी लक्ष्यों के साथ बन रही है। इस संदर्भ में भारत के लिए प्रोडक्शन को लेकर इटली की कंपनियों की बढ़ती रुचि और इटली में भारतीय इंडस्ट्री की बढ़ती मौजूदगी, जिनकी संख्या अब दोनों तरफ से 1,000 से ज्यादा हो चुकी है, एक सकारात्मक संकेत है जो हमारी सप्लाई चेन के इंटीग्रेशन को और मजबूत करेगा।

टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन हमारी साझेदारी के केंद्र में है। आने वाले दशकों को ऐसी टेक्नोलॉजिकल क्रांति आकार देगी जिसका दायरा बेहद व्यापक होगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में तेज प्रगति शामिल है। भारत का डायनामिक इनोवेशन इकोसिस्टम, हाई स्किल्ड प्रोफेशनल टैलेंट पूल और इटली की एडवांस्ड इंडस्ट्रियल क्षमताएं इन सेक्टर्स में हमारे सहयोग को स्वाभाविक और रणनीतिक बनाती हैं। हमारी यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स के बीच बढ़ती साझेदारी भी इसे मजबूत आधार देगी।

भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही बड़ी संख्या में देशों, खासकर ग्लोबल साउथ में, अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब हमारे समाज और ग्लोबल अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रही है। इटली और भारत लंबे समय से यह सुनिश्चित करने के लिए साथ काम कर रहे हैं कि AI डेवलपमेंट जिम्मेदारीपूर्ण और मानव-केंद्रित हो। इसी नजरिये से भारत और इटली AI को समावेशी विकास के एक मजबूत माध्यम के रूप में भी देखते हैं, खासकर ग्लोबल साउथ के लिए, जहां डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुलभ बहुभाषी टेक्नोलॉजी विभाजन बढ़ाने के बजाय उसे कम कर सकती हैं। टेक्नोलॉजी के केंद्र में इंसान को रखने वाले भारत के MANAV विजन और मानवीय परंपरा पर आधारित मानव-केंद्रित “एल्गोर-एथिक्स” को बढ़ावा देने में इटली की अग्रणी भूमिका के आधार पर हमारी साझेदारी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि AI सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बने। हमारा दृष्टिकोण भारत की डिजिटल क्षमता को इटली की एथिकल और इंडस्ट्रियल विशेषज्ञता के साथ जोड़ता है, ताकि टेक्नोलॉजी मानव गरिमा की सेवा करे। सुरक्षित डिजिटल सहयोग, कैपेसिटी बिल्डिंग और मजबूत साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बेस्ट प्रैक्टिसेज को साझा करते हुए हमारा लक्ष्य ऐसा स्वतंत्र, भरोसेमंद और समान अवसर वाला डिजिटल स्पेस तैयार करना है, जिसमें हर देश AI को आकार देने और उससे लाभ उठाने में सक्षम हो। यही दृष्टिकोण इटली की G7 प्रेसीडेंसी और नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 के निष्कर्षों के केंद्र में है। AI को इंसानों द्वारा इंसानों के लिए बनाए गए एक माध्यम के रूप में देखने का मतलब यह स्पष्ट करना है कि टेक्नोलॉजी न तो लोगों की जगह ले सकती है, न उनके मौलिक अधिकारों को कमजोर कर सकती है और न ही इसका इस्तेमाल जनमत को प्रभावित करने या लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बदलने के लिए होना चाहिए। तेजी से जुड़ती दुनिया में स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा को लेकर हमारा दृष्टिकोण इसी चुनौती पर आधारित है।

हमारा सहयोग स्पेस सेक्टर तक भी फैला हुआ है। स्पेस एक्सप्लोरेशन और सैटेलाइट टेक्नोलॉजी में भारत की प्रभावशाली प्रगति, साथ ही एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में इटली की उत्कृष्ट क्षमता, संयुक्त पहलों और अगली पीढ़ी की टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए बड़े अवसर प्रदान करती है।

सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी देशों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी बनी हुई हैं। इटली और भारत डिफेंस, सिक्योरिटी और स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में अपने सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। हमारा सहयोग महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क, ड्रग तस्करी, साइबर क्राइम और मानव तस्करी जैसे खतरों के खिलाफ मजबूती बढ़ाने में मदद करेगा।

एनर्जी हमारी साझेदारी का एक और प्रमुख स्तंभ है। डाइवर्सिफाइड एनर्जी सोर्सेज की ओर बढ़ रहे ग्लोबल ट्रांजिशन के लिए इनोवेशन, इनवेस्टमेंट और सहयोग की जरूरत है। भारत और इटली रिन्यूएबल एनर्जी से लेकर हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी तक, और स्मार्ट ग्रिड से लेकर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में साथ काम कर रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन एक्सपोर्ट हब बनने की भारत की पहल जहां अपार संभावनाएं प्रदान करती है, वहीं यह रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर में इटली की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और यूरोप के लिए एनर्जी गेटवे के रूप में उसकी रणनीतिक भूमिका के साथ पूरी तरह मेल खाती है। इस संदर्भ में भारत की अगुवाई वाली प्रमुख पहलों, इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) और ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस (GBA) में अन्य देशों के साथ हमारा सहयोग भी महत्वपूर्ण है।

फिजिकल, डिजिटल और मानवीय कनेक्टिविटी वह कड़ी है जो हमें एक साथ जोड़ती है। भारत और इटली दोनों ग्लोबल अर्थव्यवस्था के दो अहम केंद्रों, इंडो-पैसिफिक और मेडिटेरेनियन, के मध्य स्थित हैं। इन क्षेत्रों को अलग-अलग दायरों के रूप में नहीं, बल्कि तेजी से एक-दूसरे से जुड़ते हुए क्षेत्रों के रूप में देखा जाना चाहिए।

दरअसल, हम उस उभरते हुए “इंडो-मेडिटेरेनियन” को देख रहे हैं, जो ट्रेड, टेक्नोलॉजी, एनर्जी, डेटा और विचारों का एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर बनता जा रहा है, जो हिंद महासागर को यूरोप से जोड़ता है। इसी आपस में जुड़े हुए क्षेत्र में हमारे संबंध स्वाभाविक रूप से एक विशेष स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में विकसित हो रहे हैं, जो दो महाद्वीपों को जोड़ते हुए नई ग्लोबल डायनामिक्स को आकार दे रही है।

इसी संदर्भ में इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर हमारे क्षेत्रों को मॉडर्न ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल नेटवर्क, एनर्जी सिस्टम और मजबूत सप्लाई चेन के जरिए जोड़ने की एक दूरदर्शी पहल है। भारत और इटली इस विजन को हकीकत में बदलने के लिए अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

हम अपनी साझा चुनौतियों का समाधान दोनों देशों के बीच गहरी साझेदारी और दीर्घकालिक सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में “धर्म” की अवधारणा उस जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती है, जो हमारे कार्यों का आधार बननी चाहिए, जबकि “वसुधैव कुटुम्बकम”, यानी “पूरी दुनिया एक परिवार है”, का सिद्धांत आज के आपस में जुड़े डिजिटल युग में गहराई से प्रतिध्वनित होता है। ऐसे मूल्य इटली की पुनर्जागरण काल से जुड़ी मानवतावादी परंपरा में भी स्वाभाविक रूप से दिखाई देते हैं, जो हर व्यक्ति की गरिमा और समाजों तथा लोगों को जोड़ने में संस्कृति की शक्ति को महत्व देती है।

इसलिए हमारा साझा विजन लोगों को केंद्र में रखकर मजबूत और भविष्योन्मुखी भारत-इटली साझेदारी की नींव रखना है।

(लेखक: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी)