कृषि कानूनों पर सरकार का रुख वैसा ही है, जैसा 22 जनवरी को था और कृषि मंत्री द्वारा दिया गया प्रस्ताव अभी भी कायम है – प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने संसद के सुचारू कामकाज के महत्व पर जोर दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 30 जनवरी, 2021 को संसद के बजट सत्र पर सर्वदलीय बैठक को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि हमें उनके सपनों को पूरा करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आज सुबह यूएसए में महात्मा गांधी की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि नफरत का ऐसा माहौल हमारी दुनिया के लिए स्वागत योग्य नहीं है।

प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार खुले दिमाग से कृषि कानूनों के मुद्दे पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का रुख वैसा ही है, जैसा 22 जनवरी को था, और कृषि मंत्री द्वारा दिया गया प्रस्ताव अभी भी कायम है। उन्होंने दोहराया कि कृषि मंत्री को सिर्फ एक फोन कॉल करके बातचीत को आगे बढ़ाया जा सकता है।

बैठक में नेताओं द्वारा 26 जनवरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का उल्लेख करने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कानून अपना काम करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार बैठक में नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने संसद के सुचारू कामकाज और सदन के पटल पर व्यापक बहस के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सदन में बार-बार होने वाले व्यवधानों के कारण छोटे राजनीतिक दलों को पर्याप्त रूप से खुद को व्यक्त करने का अवसर नहीं मिल पाता है। उन्होंने कहा कि बड़े राजनीतिक दलों यह सुनिश्चित करना चाहिए कि संसद सुचारू रूप से चले, कोई व्यवधान न हो और इस प्रकार, छोटे दल संसद में अपने विचार रखने में सक्षम हों।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की भलाई के लिए कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने देशवासियों के कौशल और साहस का उल्लेख किया, जो वैश्विक समृद्धि को गुणात्मक रूप से बढ़ाने के लिए एक ताकत हो सकती है।

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।