संसद 125 करोड़ भारतीयों के सपने और आवाज का प्रतिनिधित्व करती है: प्रधानमंत्री मोदी
संसद में बोले जाने वाले शब्द रिकॉर्ड होते हैं और वे इतिहास की किताबों का हिस्सा होंगे, इसलिए संसद के कार्य प्रभावी ढंग से करना महत्वपूर्ण है: पीएम मोदी
संसद में गतिरोध से सरकार को कम, लेकिन देश को अधिक नुकसान होता है: प्रधानमंत्री
सांसदों का कर्तव्य आम लोगों की समस्याओं को उठा कर उनका कल्याण सुनिश्चित करने के लिए सरकार पर जोर डालने का होता है: प्रधानमंत्री मोदी

उपस्थित सभी वरिष्‍ठ महानुभाव।

मैं सबसे पहले सम्‍मान प्राप्‍त करने वाले इन पांचों महानुभावों को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं। देश टीवी पर ये दृश्‍य देखता होगा और बहुत आश्‍चर्य अनुभव करता होगा कि आज वही सांसद हैं जो दिन में दिखाई देते हैं। और उपराष्‍ट्रपति जी और स्‍पीकर महोदया भी शायद आज सबसे ज्‍यादा प्रसन्‍न होंगे ये दृश्‍य देख करके कि शांत विद्यार्थी। हम आशा करते हैं कि ऐसा दृश्‍य, दोनों सदनों में भी उसके दर्शन करने का अवसर मिले। और हमें हमारे सांसद जो धरती से उठ करके आए हैं, जन सामान्‍य के सुख-दुख के साथ जुड़े हुए हैं, उनको बात करने का अवसर मिले। सरकार को उनकी बातों को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर होना पड़े। दूर-सुदूर गांव के, जंगल की, गरीब की आवाज इन सांसदों के माध्‍यम से सरकार तक ऐसे पहुंचे कि सरकार को भी उन भावनाओं को समाहित करके आगे बढ़ने के लिए मजबूर करे। लेकिन दुर्भाग्‍य से सांसद का वो अवसर, वो सामर्थ्‍य, वो अपने क्षेत्र में कितनी ही तपस्‍या करके आया होगा, वतृत्‍व हो या न हो वो कतृत्‍व का धनी है। लेकिन शोर-बकोर, हो-हल्‍ला– सरकार का उससे कम से कम नुकसान होता है; देश का सबसे ज्‍यादा नुकसान होता है। और उन जनप्रतिनिधि का नुकसान होता है कि जो इतनी मेहनत करके, धरती से निकल करके, लोगों से जिंदगी गुजार करके आया है, जो उनके दुख-दर्द बताना चाहता है; वो बता नहीं पा रहा है। और इसलिए अगर नुकसान किसी का होता है तो जिस क्षेत्र से वो आता है, उस क्षेत्र के सामान्‍य मानवी का होता है। नुकसान होता है, उस सांसद का होता है और दिनभर हो-हल्‍ला, टीवी पर उसकी आयुष दो मिनट, पांच मिनट या 15 मिनट या एक दिनभर रहती है- परदा गिर जाता है, खेल खत्‍म हो जाता है। लेकिन जिसको बात करने का मौका मिलता है, सरकार की कठोर से कठोर आलोचना करने के लिए तर्क भी हों, तीखे वचन भी हों; उसके बावजूद भी वो हर शब्‍द इतिहास का हिस्‍सा बनता है, चिरंजीव बन जाता है।

अब सबका दायित्‍व है कि हमारे हर सांसद साथी का शब्‍द चिंरजीव बने। हम सबका दायित्‍व है हमारे शब्‍द सांसद के दिल से निकली हुई वो गांव-गरीब किसान की बात सरकार को कुछ करने के लिए मजबूर करे। ये स्थिति सदन में हम सब पैदा कर सकते हैं। और जितना अच्‍छे ढंग से पैदा करेंगे, देश को आगे ले जाने में उसकी ताकत और बढ़ेगी।

मेरा अनुभव है, कोई सांसद की बात ऐसी नहीं होती है जिसका महात्‍मय न हो, जिसका मूल्‍य न हो। मिर्जा के दबाव के कोई तत्‍कालीन स्‍वीकार करे, न करे अलग बात है। राजनीतिक point gain करने के लिए कुछ करना पड़े न करना पड़े, वो एक अलग स्थिति है, लेकिन ये गहरी छाप छोड़ करके जाता है जो नीति-निर्धारकों के लिए कभी न कभी सोचने के लिए मजबूर करता है। और इसलिए सांसद बन करके आना, ये सामान्‍य बात नहीं है। सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपने ले करके आते हैं, अपने क्षेत्र के संकल्‍प ले करके आते हैं, उज्‍ज्‍वल भविष्‍य का वादा कर-करके आते हैं। और उस काम को निभाने में जिस-जिस को अवसर मिला है, उनमें से कुछ बंधुओं को हम आज हमें सम्‍मानित करने का अवसर मिला है और अपने साथ बैठने-उठने वाले साथियों का सम्‍मान होता हो, तब हमारा भी तो सीना चौड़ा हो जाता है। हमें भी गर्व होता है कि हम ऐसे-ऐसे वरिष्‍ठ साथियों के साथ, इस कालखंड में हम भी एक साथी कार्यकर्ता थे, हम भी एक साथी के सांसद थे। ये हमारे लिए भी गर्व की बात है।

मैं हृदय से आप सबको फिर से बधाई देता हूं। बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

आप सबका भी बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की
June 11, 2026
विकसित भारत की परिकल्पना प्रत्येक राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 70 करोड़ युवाओं को देश की संपत्ति बताया और राज्यों से इस जनसांख्यिकीय लाभांश को विकास लाभांश में बदलने का आग्रह किया
प्रधानमंत्री ने राज्यों को युवाओं और एमएसएमई के लिए अवसर पैदा करने तथा उन देशों से सक्रिय रूप से निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जिनके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं
राज्यों को एक ज़िला एक उत्पाद को मजबूत करना चाहिए और रक्षा विनिर्माण में अवसरों का लाभ उठाना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और लोगों को भविष्य के लिए तैयार कौशल से सुसज्जित किया जाना चाहिए
प्रधानमंत्री ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री मोदी ने अल नीनो से उत्पन्न चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया
मुख्यमंत्री/उप राज्यपाल/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को कार्यालय में 12 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी
राज्यों ने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और भारत की क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की
सभी राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने बैठक में भाग लिया; पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें भाग लिया
बैठक का विषय : विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस वर्ष बैठक का विषय विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास था। इसमें 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहला अवसर था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भारत की विकास गाथा दुनिया को प्रेरित करती रहती है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के प्रति राष्ट्र के संकल्प को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और लागू करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने सहकारी संघवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के युवा इसकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं, जिसमें लगभग 70 करोड़ भारतीय 25 वर्ष से कम आयु के हैं। इसे जनसांख्यिकीय लाभांश बताते हुए उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इसे शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण की पहल के माध्यम से विकास लाभांश में बदलने पर ध्यान केंद्रित करें जो युवाओं को भविष्य के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार करे।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में कई देशों के साथ हुए भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए राज्यों को युवाओं और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए अवसर पैदा करने और हितधारकों को इन समझौतों से होने वाले फायदों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने के लिए तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राज्यों से सक्रिय रूप से सहयोगी देशों से निवेश आकर्षित करने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व वाले विकास पर बल देते हुए, राज्यों से लखपति दीदी की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और नारी शक्ति के लिए सुरक्षित तथा संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से एक ज़िला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल पर ध्यान केंद्रित करने और इसके आसपास निर्यात के अनुकूल रणनीतियों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने रक्षा विनिर्माण का एक उभरते क्षेत्र के रूप में उल्लेख किया जहां भारत एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। श्री मोदी ने राज्यों को इसके विकास से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीतियां तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रधानमंत्री ने निवारक उपायों, जागरूकता अभियानों और प्रभावी शासन के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने अल नीनो की स्थिति से उत्पन्न चिंताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती की प्रथाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चालू खरीफ सीजन के दौरान किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ कृषि में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने जिला स्तर पर प्रगति का मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री मोदी ने विशेष रूप से आकांक्षी जिला मानकों के माध्यम से सुझाव दिया कि इसी तरह कृषि के क्षेत्र में 100 जिलों की पहचान की जानी चाहिए ताकि सकारात्मक परिणाम लाए जा सकें। उन्होंने राज्यों से इस प्रयास में आगे आने का आग्रह किया ताकि महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के माध्यम से एक अभूतपूर्व परिवर्तन हासिल किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत@2047 की परिकल्पना साकार करने के लिए एक निगरानी ढांचे और लक्षित 100-दिवसीय तथा पांच-वर्षीय लक्ष्यों की आवश्यकता पर बल दिया।

निवेश आकर्षित करने के लिए सुशासन, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने राज्यों से ब्रांडिंग, कारोबार करने में आसानी और डेटा केंद्रों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। श्री मोदी ने भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कौशल से लोगों को सुसज्जित करने के लिए अधिक प्रयासों का आह्वान किया।

मुख्यमंत्रियों/उपराज्यपालों/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके कार्यालय में 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और ऊर्जा आवश्यकताओं के संबंध में भारत की क्षमता को मजबूत करने और इसकी विकास गति को बनाए रखने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चा रचनात्मक रही और यह राज्यों की आकांक्षाओं, आशाओं, अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं तथा चुनौतियों को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने बैठक में भाग लेने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भरोसा जताया कि सहयोग, नवाचार और विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता के माध्यम से भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत की ओर अपनी यात्रा को गति दे सकता है।