खाली समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग के बारे में कन्याकुमारी के एक छात्र नील अनंत से एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, " खाली समय को खाली मत समझिए, ये खजाना है। खाली समय एक सौभाग्य है, खाली समय एक अवसर है। आपकी दिनचर्या में खाली समय के पल होने ही चाहिए, वरना तो ज़िंदगी एक रोबोट जैसी हो जाती है।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "जब आप खाली समय Earn करते हैं, तो आपको उसकी सबसे ज्यादा Value पता चलती है। इसलिए आपकी Life ऐसी होनी चाहिए कि जब आप खाली समय Earn करें तो वो आपको असीम आनंद दे।"
प्रधानमंत्री मोदी ने स्टूडेंट्स से जिज्ञासा से बाहर नई चीजों को सीखने और Co-curricular एक्टिविटीज में भाग लेने के लिए खाली समय का उपयोग करने का आग्रह किया, जिसके माध्यम से वे खुद को व्यक्त कर सकते हैं और अपनी विशिष्टता सामने ला सकते हैं। उन्होंने कहा, "भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अपने विचारों को एक रचनात्मक तरीका दें। ज्ञान का दायरा अक्सर आपके लिए सीमित होता है लेकिन क्रिएटिविटी आपको एक ऐसे क्षेत्र में ले जा सकती है जहां कोई पहले नहीं पहुंचा है, जो नया है।"
उन्होंने शिक्षकों को छात्रों को सिलेबस से बाहर बात करने की सलाह देते हुए कहा कि छात्रों को किसी चीज़ से रोकने के बजाय, शिक्षकों को उन्हें अपना बेस्ट वर्जन के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब उनके पास खाली समय होता है, तो वह झूले पर समय बिताने का आनंद लेते हैं। उन्होंने कहा, "अगर मुझे थोड़ा सा भी खाली समय मिल जाए और अगर झूला है, तो मेरा मन करता है कुछ पल मैं झूले पर जरुर बैठूं। बहुत थकान है और पांच मिनट का भी समय मिल गया, या फिर मैं कोई काम भी कर रहा हूं, तो अपने खाली समय में झूले पर बैठकर, पता नहीं क्या कारण है लेकिन मेरा मन प्रफुल्लित हो जाता है।"
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि नदियों का अविरल प्रवाह हमें सिखाता है कि हम किस प्रकार अपनी क्षमताओं का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नि:स्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करती है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-
“जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”
इस सुभाषितम् का संदेश है कि हमें अपना जीवन दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। जिस प्रकार नदियां निरंतर और निस्वार्थ भाव से बहती हुई अपने जल मार्ग में आने वाले असंख्य प्राणियों का जीवन पोषित करती हैं और अंतत: समुद्र में विलीन हो जाती हैं, उसी प्रकार हमें भी अपना समय, क्षमता और संसाधन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता नि:स्वार्थ सेवा, परोपकार और लोककल्याण में ही निहित है।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:
“नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।
जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”
नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।
— Narendra Modi (@narendramodi) August 21, 2026
जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥ pic.twitter.com/wiaXL3jabi


