परीक्षा पे चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मेमोरी को शार्प करने के लिए एक मंत्र साझा किया। पीएम मोदी ने स्टूडेंट्स को सलाह दी कि वे जो स्टडी करते हैं, उसे Memorized नहीं बल्कि Internalised करें।
प्रधानमंत्री मोदी ने राजस्थान के पुष्कर की छात्रा दिव्यंका के सवाल का जवाब देते हुए कहा," यह मत सोचो कि तुम्हारी याददाश्त कमजोर है। किसी को भी बहुत सी बातें याद हैं... जो चीजें आपको पसंद हैं, ऐसी चीजें जिन्हें आपको याद रखने की कोशिश नहीं करनी पड़ती है,क्योंकि वे आपके जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं जैसे कि आपकी मातृभाषा। यह मेमोरी के बारे में नहीं, बल्कि Internalisation के बारे में है।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, " मेमोरी को शार्प करने के लिए आप इन्वॉल्व, इंटरनलाइज, एसोसिएट और विजुअलाइज के मंत्र को फॉलो करें।"
राष्ट्रगान का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा," आप याद कीजिए कि स्कूलों में सुबह एसेंबली में राष्ट्रगान होता है। अब जन-गण-मन हर कोई गाता है, लेकिन क्या कभी आपने जन-गण-मन गाते समय, आपने उस राष्ट्रगान के साथ देश में ट्रैवल किया क्या? आप उसके साथ जो शब्द आते हैं उन शब्दों के साथ अपने आपको विजुअलाइज कर पाएं कि नहीं कर पाए। पंजाब को, गुजरात को, महाराष्ट्र को, बंगाल को मन ही मन राष्ट्रगान गाते समय ट्रैवल किया क्या? आपको एकदम से याद होना शुरू हो जाएगा।"
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि नदियों का अविरल प्रवाह हमें सिखाता है कि हम किस प्रकार अपनी क्षमताओं का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नि:स्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की भावना राष्ट्र को नई दिशा प्रदान करती है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-
“जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”
इस सुभाषितम् का संदेश है कि हमें अपना जीवन दूसरों की सेवा और कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। जिस प्रकार नदियां निरंतर और निस्वार्थ भाव से बहती हुई अपने जल मार्ग में आने वाले असंख्य प्राणियों का जीवन पोषित करती हैं और अंतत: समुद्र में विलीन हो जाती हैं, उसी प्रकार हमें भी अपना समय, क्षमता और संसाधन दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित करना चाहिए। मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता नि:स्वार्थ सेवा, परोपकार और लोककल्याण में ही निहित है।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर लिखा:
“नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।
जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥”
नदियों का अविरल प्रवाह सिखाता है कि हम किस प्रकार अपने सामर्थ्य का उपयोग मानवता की भलाई के लिए कर सकते हैं। निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और परोपकार की यही भावना राष्ट्र को नई दिशा देती है।
— Narendra Modi (@narendramodi) August 21, 2026
जीवनं स्वं परार्थाय नित्यं यच्छत मानवाः।
इति सन्देशमाख्यातुं समुद्रं यान्ति निम्नगाः॥ pic.twitter.com/wiaXL3jabi


