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सरकार ने डिजिटल और कैशलैस इकोनॉमी के प्रोमोशन के लिए इनसेंटिंव्स के पैकेज को पेश किया
डिजिटल माध्यम से पेट्रोल/डीजल की खरीद के लिए 0.75% की मिलेगी छूट
10,000 से कम जनसंख्या आबादी वाले गांवों में एक लाख तक की लिमिट वाली दो पीओएस मशीनों को लगाया जाएगा
यदि भुगतान डिजिटल हुआ तो मासिक या सीज़नल टिकटों के लिए 01 जनवरी 2017 से 0.5% तक की मिलेगी छूट
रेलवे की टिकटों की ऑनलाइन खरीद करने वाले प्रत्येक यात्री को मुफ्त में मिलेगा ₹10 लाख तक का बीमा कवर

₹500 और ₹1,000 के नोटों की लीगल टेंडरिंग बंद हो जाने के बाद क्रेडिट/डेबिट कार्ड और मोबाइल फोन एप्लीकेशन्स/ई-वैलेट्स के माध्यम से होने वाले भुगतान में तेजी के साथ बढ़ोतरी हुई है। इस प्रक्रिया को ही आगे बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार ने देश में डिजिटल और कैशलैस इकोनॉमी के प्रोमोशन के लिए कदम उठाते हुए इनसेंटिव्स का पैकेज लाने के निर्णय किया है। 

ये इनसेंटिव्स/कदम निम्न प्रकार से हैः

1. डिजिटल तरीके से पेमेंट करने पर सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां पेट्रोल या डीजल की बिक्री पर ग्राहकों को 0.75 प्रतिशत कीरियायत देंगी।

ऐसे पेट्रोलपंपों पर हर रोज 4.5 करोड़ लोग पेट्रोल या डीजल भरवाते हैं, जिन्हें इस स्कीम का फायदा मिल सकता है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन 1800 करोड़ का पेट्रोल/डीजल लोगों को बेचा जाता है। इसमें से 20 प्रतिशत का पेमेंट डिजिटल तरीके से किया जाता था। नवंबर के महीने में ये बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 360 करोड़ रुपए प्रतिदिन का कैशट्रांजेक्शन अब डिजिटल माध्यमों से होने लगा है।

 

इस स्कीम के बाद 30 प्रतिशत और ग्राहकों के डिजिटल पेमेंट की तरफ बढ़ने की संभावना है। इससे पेट्रोलपंपों पर सालाना 2 लाख करोड़ रुपए के कैश की आवश्यकता भी कम होगी।

 

2. ग्रामीण इलाकों में डिजिटल पेमेंट को आसान बनाने के लिए सरकार नाबार्ड की मदद से बैंकों को आर्थिक मदद देगी। प्रयास है कि 10 हजार से कम आबादी वाले 1 लाख गावों में 2 POS मशीनें अवश्य हों।

 

ये POS मशीनें प्राइमरीकॉपरेटिवसोसायटी/दुग्ध सोसायटी/ कृषि से जुड़ा सामान बेचने वाले डीलरों के पास लगाई जाएंगी ताकि खेती से जुड़ी चीजों के लिए लेन-देन डिजिटल तरीके से हो सके।

 

इस स्कीम का फायदा एक लाख गांवों में रहने वाले किसानों को होगा। इससे 75 करोड़ की कुल आबादी कवर होगी जो गांवों में खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए डिजिटल तरीके से लेन-देन करेगी।

 

3. नाबार्ड की मदद से सरकार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और कॉपरेटिव बैंकों को RUPAY किसान कार्ड जारी करने में सहायता करेगी। 4 करोड़ 32 लाख किसान क्रेडिट कार्ड रखने वाले धारकों को RUPAY किसान कार्ड वितरित किए जाएंगे ताकि वोPOS मशीनों/माइक्रोATM या ATM के जरिए डिजिटल पेमेंट कर सकें।

 

4. रेलवे के सब-अर्बन रेलवे नेटवर्क में मासिक और सीजनल टिकट के लिए डिजिटल तरीके से पेमेंट करने वालों को 0.5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। ये छूट 1 जनवरी 2017 से खरीदे जाने वाले टिकटों पर मिलेगी।

उपनगरीय रेलवे में लगभग 80 लाख यात्री मासिक या सीजनल टिकट ज्यादातर कैश देकर ही खरीदते हैं। ऐसे टिकट के लिए प्रतिवर्ष लगभग 2 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। जब ज्यादा से ज्यादा यात्री डिजिटल पेमेंट की तरफ बढ़ेंगे तो भविष्य में टिकट खरीदने के लिए नकद राशि की मांग 1000 करोड़ रुपए तक कम हो सकती है।

 

5. रेलवे में ऑनलाइन टिकट बुक कराने वालों को 10 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा मुफ्त दिया जाएगा।

 

प्रतिदिन 14 लाख रेलवे यात्री टिकट खरीदते हैं जिनसे में 58 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन खरीदे जाते हैं। उम्मीद है कि इस कदम के बाद 20 प्रतिशत और यात्री टिकट बुक कराने के लिए डिजिटल पेमेंट की तरफ बढ़ेंगे। ऐसा होने पर प्रतिदिन लगभग 11 लाख रेल यात्री प्रतिदिन दुर्घटना बीमा स्कीम के तहत कवर होंगे।

 

6. रेल अपनी मान्यता प्राप्त इकाइयों और कोरपोरेशंस द्वारा सशुल्क सेवाएं भी उपलब्ध कराती है जैसे केटरिंग, ठहरने की सुविधा, विश्रामगृह इत्यादि। इन सुविधाओं के लिए डिजिटल तरीके से पेमेंट करने पर 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।

रेलवे से सफर करने वाले हर यात्री को इसका फायदा मिलेगा।

 

7. सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां कस्टमर पोर्टल के जरिए डिजिटल पेमेंट किए जाने पर जनरल इंश्योरेंसपॉलिसी के समय प्रीमियम में 10 प्रतिशत तक का डिस्काउंट या क्रेडिट देंगी। इसके अलावा लाइफइंश्योरेंसकॉरपोरेशन में नई जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम में 8 प्रतिशत का डिस्काउंट या क्रेडिट दिया जाएगा।

 

8. केंद्र सरकार के विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान ये सुनिश्चित करेंगे कि डिजिटल पेमेंट करने पर ट्रांजेक्शन फीस या MDR चार्ज ग्राहकों से ना वसूला जाए। ये चार्ज इन विभागों या संस्थानों को खुद वहन करना होगा।

 

राज्य सरकारो को भी सलाह दी गई है कि राज्य सरकार के विभाग और संस्थाएं डिजिटल पेमेंट किए जाने पर ग्राहकों से ट्रांजेक्शन फीस या MDR चार्ज ना वसूलें।

 

9. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सलाह दी गई है कि वोPOS टर्मिनल के लिए/ मोबाइल POS के लिए या फिर माइक्रोATM के लिए 100 रुपए प्रतिमाह से ज्यादा मासिक किराया ना वसूलें। इससे छोटे कारोबारियों को भी डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ने में मदद मिलेगी।

 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा लगभग 6.5 लाख मशीनें व्यापारियों को दी गई हैं जिन्हें कम किराए का लाभ मिलेगा। किराया कम होने की वजह से और ज्यादा व्यापारी ऐसी मशीनों को लगाने और डिजिटल पेमेंट के लिए प्रोत्साहित होंगे।

 

10. डिजिटल तरीके से 2000 रुपए तक के ट्रांजेक्शन पर अब कोई सर्विस चार्ज नहीं लिया जाएगा और ना ही MDR ( मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वसूला जाएगा।

 

11. आरएफआईडी कार्ड / फास्ट टैग का उपयोग कर राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर टोल का भुगतान के लिए, 10% की छूट वर्ष 2016-17 में उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो जाएगा

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गरीबों के सशक्तिकरण को आज सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है : पीएम मोदी
August 03, 2021
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पहले सस्ते राशन की योजनाओं का विस्तार होता रहा और बजट बढ़ता रहा लेकिन भुखमरी और कुपोषण उस अनुपात में कम नहीं हुए: पीएम
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शुरू होने के बाद लाभार्थियों को पहले की तुलना में लगभग दोगुना राशन मिल रहा है: पीएम
महामारी के दौरान 80 करोड़ से अधिक लोगों को नि:शुल्क राशन मिल रहा है और इस पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए है: पीएम
सदी की सबसे बड़ी आपदा आने के बावजूद कोई भी नागरिक भूखा नहीं रहा: पीएम
आज गरीबों के सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है: पीएम
हमारे खिलाड़ियों का नया आत्मविश्वास नए भारत की पहचान बन रहा है: पीएम
देश 50 करोड़ के टीकाकरण की उपलब्धि की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है: पीएम
आजादी के अमृत महोत्सव पर, आइए हम राष्ट्र निर्माण की नई प्रेरणा को जगाने का पवित्र संकल्प लें: पीएम

नमस्‍कार! गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रुपाणी जी, उप-मुख्यमंत्री श्री नितिन भाई पटेल जी, संसद में मेरे साथी और गुजरात भाजपा के अध्यक्ष श्रीमान सी. आर. पाटिल जी, पी एम गरीब कल्याण अन्न योजना के सभी लाभार्थी, भाइयों और बहनों!

बीते वर्षों में गुजरात ने विकास और विश्वास का जो अनवरत सिलसिला शुरु किया, वो राज्य को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। गुजरात सरकार ने हमारी बहनों, हमारे किसानों, हमारे गरीब परिवारों के हित में हर योजना को सेवाभाव के साथ ज़मीन पर उतारा है। आज गुजरात के लाखों परिवारों को पी एम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत एक साथ मुफ्त राशन वितरित किया जा रहा है। ये मुफ्त राशन वैश्विक महामारी के इस समय में गरीब की चिंता कम करता है, उनका विश्वास बढ़ाता है। ये योजना आज से प्रारंभ नहीं हो रही है, योजना तो पिछले एक साल से करीब-करीब चल रही है ताकि इस देश का कोई गरीब भूखा ना सो जाए।

मेरे प्‍यारे भाईयों और बहनों,

गरीब के मन में भी इसके कारण विश्‍वास पैदा हुआ है। ये विश्वास, इसलिए आया है क्योंकि उनको लगता है कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी हो, देश उनके साथ है। थोड़ी देर पहले मुझे कुछ लाभार्थियों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला, उस चर्चा में मैंने अनुभव भी किया कि एक नया आत्‍मविश्‍वास उनके अन्‍दर भरा हुआ है।

साथियों,

आज़ादी के बाद से ही करीब-करीब हर सरकार ने गरीबों को सस्ता भोजन देने की बात कही थी। सस्ते राशन की योजनाओं का दायरा और बजट साल दर साल बढ़ता गया, लेकिन उसका जो प्रभाव होना चाहिए था, वो सीमित ही रहा। देश के खाद्य भंडार बढ़ते गए, लेकिन भुखमरी और कुपोषण में उस अनुपात में कमी नहीं आ पाई। इसका एक बड़ा कारण था कि प्रभावी डिलिवरी सिस्टम का ना होना और कुछ बिमारियाँ भी आ गईं व्‍यवस्‍थाओं में, कुछ cut की कंपनियाँ भी आ गईं, स्‍वार्थी तत्‍व भी घुस गये। इस स्थिति को बदलने के लिए साल 2014 के बाद नए सिरे से काम शुरु किया गया। नई technology को इस परिवर्तन का माध्यम बनाया गया। करोड़ों फर्ज़ी लाभार्थियों को सिस्टम से हटाया। राशन कार्ड को आधार से लिंक किया और सरकारी राशन की दुकानों में digital technology को प्रोत्साहित किया गया। आज परिणाम हमारे सामने है।

भाइयों और बहनों,

सौ साल की सबसे बड़ी विपत्ति सिर्फ भारत पर नहीं, पूरी दुनिया पर आई है, पूरी मानव जाति पर आई है। आजीविका पर संकट आया, कोरोना लॉकडाउन के कारण काम-धंधे बंद करने पड़े। लेकिन देश ने अपने नागरिकों को भूखा नहीं सोने दिया। दुर्भाग्य से दुनिया के कई देशों के लोगों पर आज संक्रमण के साथ-साथ भुखमरी का भी भीषण संकट आ गया है। लेकिन भारत ने संक्रमण की आहट के पहले दिन से ही, इस संकट को पहचाना और इस पर काम किया। इसलिए, आज दुनियाभर में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की प्रशंसा हो रही है। बड़े-बड़े expert इस बात की तारीफ कर रहे हैं कि भारत अपने 80 करोड़ से अधिक लोगों को इस महामारी के दौरान मुफ्त अनाज उपलब्ध करा रहा है। इस पर 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक ये देश खर्च कर रहा है। मकसद एक ही है- कोई भारत का मेरा भाई-बहन, मेरा कोई भारतवासी भूखा ना रहे। आज 2 रुपए किलो गेहूं, 3 रुपए किलो चावल के कोटे के अतिरिक्त हर लाभार्थी को 5 किलो गेहूं और चावल मुफ्त दिया जा रहा है। यानि इस योजना से पहले की तुलना में राशन कार्ड धारकों को लगभग डबल मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। ये योजना दीवाली तक चलने वाली है, दिवाली तक किसी गरीब को पेट भरने के लिये अपनी जेब से पैसा नहीं निकालना पड़ेगा। गुजरात में भी लगभग साढ़े 3 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त राशन का लाभ आज मिल रहा है। मैं गुजरात सरकार की इस बात के लिए भी प्रशंसा करूंगा कि उसने देश के दूसरे हिस्सों से अपने यहां काम करने आए श्रमिकों को भी प्राथमिकता दी। कोरोना लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए लाखों श्रमिकों को इस योजना का लाभ मिला है। इसमें बहुत सारे ऐसे साथी थे, जिनके पास या तो राशन कार्ड था ही नहीं, या फिर उनका राशन कार्ड दूसरे राज्यों का था। गुजरात उन राज्यों में है जिसने सबसे पहले वन नेशन, वन राशन कार्ड की योजना को लागू किया। वन नेशन, वन राशन कार्ड का लाभ गुजरात के लाखों श्रमिक साथियों को हो रहा है।

भाइयों और बहनों,

एक दौर था जब देश में विकास की बात केवल बड़े शहरों तक ही सीमित होती थी। वहाँ भी, विकास का मतलब बस इतना ही होता था कि ख़ास-ख़ास इलाकों में बड़े बड़े flyovers बन जाएं, सड़कें बन जाएं, मेट्रो बन जाएं! यानी, गाँवों-कस्बों से दूर, और हमारे घर के बाहर जो काम होता था, जिसका सामान्‍य मानवी से लेना-देना नहीं था उसे विकास माना गया। बीते वर्षों में देश ने इस सोच को बदला है। आज देश दोनों दिशाओं में काम करना चाहता है, दो पटरी पर चलना चाहता है। देश को नए infrastructure की भी जरूरत है। Infrastructure पर भी लाखों-करोड़ों खर्च हो रहा है, उससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है, लेकिन साथ ही, सामान्य मानवी के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए, Ease of Living के लिए नए मानदंड भी स्थापित कर रहे हैं। गरीब के सशक्तिकरण, को आज सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जब 2 करोड़ गरीब परिवारों को घर दिये जाते हैं तो इसका मतलब होता है कि वो अब सर्दी, गर्मी, बारिश के डर से मुक्त होकर जी पायेगा, इतना ही नहीं, जब खुद का घर होता है ना तो आत्‍मसम्‍मान से उसका जीवन भर जाता है। नए संकल्‍पों से जुड़ जाता है और उन संकल्‍पों को साकार करने के लिये गरीब परिवार समेत जी जान से जुट जाता है, दिन रात मेहनत करता है। जब 10 करोड़ परिवारों को शौच के लिए घर से बाहर जाने की मजबूरी से मुक्ति मिलती है तो इसका मतलब होता है कि उसका जीवन स्तर बेहतर हुआ है। वो पहले सोचता था कि सुखी परिवारों के घर में ही toilet होता है, शौचालय उन्‍हीं के घर में होता है। गरीब को तो बेचारे को अंधेरे का इंतजार करना पड़ता है, खुले में जाना पड़ता है। लेकिन जब गरीब को शौचालय मिलता है तो वो अमीर की बराबरी में अपने आप को देखता है, एक नया विश्‍वास पैदा होता है। इसी तरह, जब देश का गरीब जन-धन खातों के जरिए बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ता है, मोबाइल बैंकिंग गरीब के भी हाथ में होती है तो उसे ताकत मिलती है, उसे नए अवसर मिलते हैं। हमारे यहाँ कहा जाता है-

सामर्थ्य मूलम्
सुखमेव लोके!

अर्थात्, हमारे सामर्थ्य का आधार हमारे जीवन का सुख ही होता है। जैसे हम सुख के पीछे भागकर सुख हासिल नहीं कर सकते बल्कि उसके लिए हमें निर्धारित काम करने होते हैं, कुछ हासिल करना होता है। वैसे ही सशक्तिकरण भी स्वास्थ्य, शिक्षा, सुविधा और गरिमा बढ़ने से होता है। जब करोड़ों गरीबों को आयुष्मान योजना से मुफ्त इलाज मिलता है, तो स्वास्थ्य से उनका सशक्तिकरण होता है। जब कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की सुविधा सुनिश्चित की जाती है तो इन वर्गों का शिक्षा से सशक्तिकरण होता है। जब सड़कें शहरों से गाँवों को भी जोड़ती हैं, जब गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन, मुफ्त बिजली कनेक्शन मिलता है तो ये सुविधाएं उनका सशक्तिकरण करती हैं। जब एक व्यक्ति को स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सुविधाएं मिलती हैं तो वो अपनी उन्नति के बारे में, देश की प्रगति में सोचता है। इन सपनों को पूरा करने के लिए आज देश में मुद्रा योजना है, स्वनिधि योजना है। भारत में ऐसी अनेकों योजनाएं गरीब को सम्मानपूर्ण जीवन का मार्ग दे रही हैं, सम्मान से सशक्तिकरण का माध्यम बन रही हैं।

भाइयों और बहनों,

जब सामान्य मानवी के सपनों को अवसर मिलते हैं, व्यवस्थाएं जब घर तक खुद पहुँचने लगती हैं तो जीवन कैसे बदलता है, ये गुजरात बखूबी समझता है। कभी गुजरात के एक बड़े हिस्से में लोगों को, माताओं-बहनों को पानी जैसी जरूरत के लिए कई-कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था। हमारी सभी माताएं-बहनें साक्षी हैं। ये राजकोट में तो पानी के लिये ट्रेन भेजनी पड़ती थी। राजकोट में तो पानी लेना है तो घर के बाहर गड्ढा खोदकर के नीचे पाइप में से पानी एक-एक कटोरी लेकर के बाल्‍टी भरनी पड़ती थी। लेकिन आज, सरदार सरोवर बांध से, साउनी योजना से, नहरों के नेटवर्क से उस कच्छ में भी मां नर्मदा का पानी पहुंच रहा है, जहां कोई सोचता भी नहीं था और हमारे यहां तो कहा जाता था कि मां नर्मदा के स्‍मरण मात्र से पूण्‍य मिलता है, आज तो स्‍वयं मां नर्मदा गुजरात के गांव-गांव जाती है, स्‍वयं मां नर्मदा घर-घर जाती है, स्‍वयं मां नर्मदा आपके द्वार आकर के आपको आशीर्वाद देती है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज गुजरात शत-प्रतिशत नल से जल उपलब्ध कराने के लक्ष्य से अब ज्यादा दूर नहीं है। यही गति, आम जन के जीवन में यही बदलाव, अब धीरे धीरे पूरा देश महसूस कर रहा है। आज़ादी के दशकों बाद भी देश में सिर्फ 3 करोड़ ग्रामीण परिवार पानी के नल की सुविधा से जुड़े हुए थे, जिनको नल से जल मिलता था। लेकिन आज जल जीवन अभियान के तहत देशभर में सिर्फ दो साल में, दो साल के भीतर साढ़े 4 करोड़ से अधिक परिवारों को पाइप के पानी से जोड़ा जा चुका है और इसलिये मेरी माताएं-बहनें मुझे भरपूर आशीर्वाद देती रहती हैं।

भाइयों और बहनों,

डबल इंजन की सरकार के लाभ भी गुजरात लगातार देख रहा है। आज सरदार सरोवर बांध से विकास की नई धारा ही नहीं बह रही, बल्कि Statue of Unity के रूप में विश्व के सबसे बड़े आकर्षण में से एक आज गुजरात में है। कच्छ में स्थापित हो रहा Renewable Energy Park, गुजरात को पूरे विश्व के Renewable Energy Map में स्थापित करने वाला है। गुजरात में रेल और हवाई कनेक्टिविटी के आधुनिक और भव्य Infrastructure Project बन रहे हैं। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों में मेट्रो कनेक्टिविटी का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। Healthcare और Medical Education में भी गुजरात में प्रशंसनीय काम हो रहा है। गुजरात में तैयार हुए बेहतर Medical Infrastructure ने 100 साल की सबसे बड़ी Medical Emergency को हैंडल करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

साथियों,

गुजरात सहित पूरे देश में ऐसे अनेक काम हैं, जिनके कारण आज हर देशवासी का, हर क्षेत्र का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। और ये आत्मविश्वास ही है जो हर चुनौती से पार पाने का, हर सपने को पाने का एक बहुत बड़ा सूत्र है। अभी ताज़ा उदाहरण है ओलंपिक्स में हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन। इस बार ओलंपिक्स में भारत के अब तक के सबसे अधिक खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया है। याद रहे ये 100 साल की सबसे बड़ी आपदा से जूझते हुए हमने किया है। कई तो ऐसे खेल हैं जिनमें हमने पहली बार qualify किया है। सिर्फ qualify ही नहीं किया बल्कि कड़ी टक्कर भी दे रहे हैं। हमारे खिलाड़ी हर खेल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। इस ओलिंपिक में नए भारत का बुलंद आत्मविश्वास हर game में दिख रहा है। ओलंपिक्स में उतरे हमारे खिलाड़ी, अपने से बेहतर रैंकिंग के खिलाड़ियों को, उनकी टीमों को चुनौती दे रहे हैं। भारतीय खिलाड़ियों का जोश, जुनून और जज़्बा आज सर्वोच्च स्तर पर है। ये आत्मविश्वास तब आता है जब सही टैलेंट की पहचान होती है, उसको प्रोत्साहन मिलता है। ये आत्मविश्वास तब आता है जब व्यवस्थाएं बदलती हैं, transparent होती हैं। ये नया आत्मविश्वास न्यू इंडिया की पहचान बन रहा है। ये आत्मविश्वास आज देश के कोने-कोने में, हर छोटे-छोटे बड़े गांव-कस्बे, गरीब, मध्यम वर्ग के युवा भारत के हर कोने में ये विश्‍वास में आ रहा है।

साथियों,

इसी आत्मविश्वास को हमें कोरोना से लड़ाई में और अपने टीकाकरण अभियान में भी जारी रखना है। वैश्विक महामारी के इस माहौल में हमें अपनी सतर्कता लगातार बनाए रखनी है। देश आज 50 करोड़ टीकाकरण की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है तो, गुजरात भी साढ़े 3 करोड़ वैक्सीन डोसेज के पड़ाव के पास पहुंच रहा है। हमें टीका भी लगाना है, मास्क भी पहनना है और जितना संभव हो उतना भीड़ का हिस्सा बनने से बचना है। हम दुनिया में देख रहे हैं। जहां मास्क हटाए भी गए थे, वहां फिर से मास्क लगाने का आग्रह किया जाने लगा है। सावधानी और सुरक्षा के साथ हमें आगे बढ़ना है।

साथियों,

आज जब हम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्नयोजना पर इतना बड़ा कार्यक्रम कर रहे हैं तो मैं एक और संकल्प देशवासियों को दिलाना चाहता हूँ। ये संकल्प है राष्ट्र निर्माण की नई प्रेरणा जगाने का। आज़ादी के 75 वर्ष पर, आजादी के अमृत महोत्सव में, हमें ये पवित्र संकल्प लेना है। इन संकल्पों में, इस अभियान में गरीब-अमीर, महिला-पुरुष, दलित-वंचित सब बराबरी के हिस्सेदार हैं। गुजरात आने वाले वर्षों में अपने सभी संकल्प सिद्ध करे, विश्व में अपनी गौरवमयी पहचान को और मजबूत करे, इसी कामना के साथ मैं आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। एक बार फिर अन्न योजना के सभी लाभार्थियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं !!! आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद !!!