केंद्र सरकार द्वारा बिहार के लिए घोषित 1 लाख 65 हज़ार करोड़ का पैकेज बिहार का भाग्य बदलने का ताकत रखता है: प्रधानमंत्री मोदी
1984 में सिखों की बर्बरतापूर्वक हत्याएँ करनेवाली कांग्रेस हमें 'असहिष्णुता' का पाठ ना पढ़ाए: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
घर-घर बिजली पहुँचाने के अपने वादे को पूरा न कर नीतीश कुमार ने बिहार की जनता के साथ धोखा किया है: प्रधानमंत्री मोदी
महास्वार्थबंधन ने बिहार को भ्रष्टाचार और जंगलराज के ऐसे दलदल में धकेल दिया है जिससे बिहार को निकालने के लिए दो-दो इंजन की जरूरत: मोदी
बिहार के विकास के लिए हमारा छह सूत्री कार्यक्रम - जनता के लिए पढाई, कमाई और दवाई एवं प्रदेश के विकास के लिए बिजली, सड़क और पानी: मोदी
नीतीश कुमार तो अब बिजली का 'ब' भी नहीं बोलते: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी #परिवर्तनरैली
जब एक बार किसी से भरोसा उतर जाता है तो बिहार की जनता फिर कभी उसे गले नहीं लगाती, इस चुनाव नीतीश जी का भी यही हश्र होने वाला है: मोदी
बिहार की माताएं-बहनें शांति, सुरक्षा एवं बच्चों के भविष्य के लिए अच्छी सरकार बनाना चाहती हैं और यह सरकार केवल भाजपा दे सकती है: मोदी

पूर्णिया के पावन भूमि के नमन करै छी। अहाँ सब के ह्रदय से अभिनंदन करै छी। मंच पर विराजमान भाजपा एवं एनडीए के हमारे सभी वरिष्ठ नेतागण। ये मैदान भी छोटा पड़ गया, पूर्णिया में इससे बड़ा मैदान नहीं है। आपका प्यार मेरे सर आँखों पर। दूर वाले लोग मुझे देख भी नहीं पा रहे लेकिन इसके बावजूद मुझे आशीर्वाद देने आये, इससे बड़ा जीवन का सौभाग्य क्या हो सकता है।   

चुनाव में कसवा से भाजपा के उम्मीदवार श्री प्रदीप दास, मनमंखी से भाजपा के उम्मीदवार कृष्ण कुमार, पूर्णिया से भाजपा के उम्मीदवार विजय खेमका, अमोर से भाजपा के उम्मीदवार सबा जफ़र, रूपौली से भाजपा के उम्मीदवार परमानंद मंडल, बायसी से रालोसपा के उम्मीदवार अजीज़ऊर रहमान, दमदाहा के उम्मीदवार शिवशंकर ठाकुर, किशनगंज की उम्मीदवार श्रीमती स्वीटी सिंह, और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे भाईयों एवं बहनों।

मैं लोकसभा के चुनाव में भी आया था लेकिन इस बार लगता है कि लोकसभा चुनाव में जो कसर रह गई थी, उसे पूरा करने का फ़ैसला आपने कर लिया है। मैं ख़ासकर इतनी बड़ी संख्या में जो माताएं-बहनें आयी हैं, उन्हें प्रणाम करता हूँ। लोगों को अजूबा लग रहा है कि बिहार की चुनावी रैलियों में इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें कैसे आने लगी हैं। अगर जंगलराज के खिलाफ़ सबसे ज्यादा किसी का गुस्सा है तो वो माताओं-बहनों का है क्योंकि जंगलराज के कारण जो परेशानी और गुंडागर्दी आती है, वो सारी मुसीबतें माताओं-बहनों को झेलनी पड़ती हैं। इस चुनाव में ये गुस्सा नज़र आया है। शांति, सुरक्षा और बच्चों के बेहतर जीवन के लिए माताएं-बहनें एक अच्छी सरकार बनाना चाहती हैं जो उनके बच्चों का भविष्य बदले, बच्चे उनके बुढ़ापे की चिंता कर पाएं, ऐसी स्थिति बनाना चाहती हैं। मैं माताओं-बहनों को विश्वास दिलाता हूँ कि मैं उनके सपनों को पूरा करूंगा।

सरकार में बैठे लोगों की जिम्मेवारी होती है कि वे चुनाव में अपने कामों का हिसाब दें। 15 साल तक लालू जी और 10 साल तक छोटे भाई ने राज किया; 25 साल इन्होंने सरकार चलाई, ये कोई कम समय नहीं होता। मेरी सरकार को अभी 25 महीने नहीं हुए हैं और ये लोग मेरा हिसाब मांग रहे हैं। ख़ुद का 25 साल का हिसाब देने का तैयार नहीं हैं; बिहार का क्या करना है, यहाँ नौजवानों, माताओं-बहनों, के लिए क्या करेंगे, इसपर पूरे चुनाव में कुछ नहीं बताया। बिजली की तो वो कोई बात ही नहीं करते क्योंकि उन्हें डर है कि अगर बोल दिया तो लोग उनसे हिसाब मांगेंगे क्योंकि 2010 में नीतीश जी ने कहा था कि अगर घर-घर बिजली नहीं पहुंचाऊंगा तो 2015 में अगले चुनाव में वोट मांगने नहीं आऊंगा। बिजली नहीं तो वोट नहीं, ऐसे उन्होंने कहा था कि नहीं? उन्होंने अपना वादा तोड़ा है, आपसे धोखा किया है। जो जनता से धोखा कर सकते हैं, उन पर कोई भरोसा कर सकता है क्या? जनता भली होती है, एक बार भरोसा करती है लेकिन नीतीश जी अब वो दिन चले गए। अब बिहार आप पर भरोसा नहीं कर सकता।

जंगलराज के बाद लोग, जो भी मिले, उसके भरोसे जीना चाहते थे, आप मिल गए तो लोगों ने आपकी उंगली पकड़ ली। जंगलराज से बचने के लिए लोग रास्ता खोज रहे थे। नीतीश जी आप नसीब वाले थे कि अटल बिहारी वाजपेयी ने आपके कंधों पर हाथ रखा था क्योंकि लोगों को वाजपेयी जी पर भरोसा था। अब अटल जी का आशीर्वाद आप पर नहीं है, अब बिहार आपको कभी स्वीकार नहीं करेगा। वो दिन-रात यही कहते हैं कि मोदी बिहार क्यों आते हैं। क्या बिहार आना गुनाह है? उन्हें इतना डर क्यों लगता है? उन्हें डर इसलिए है क्योंकि उनका कच्चा चिट्ठा खुल जाएगा। बिहार का हर बच्चा, हर नौजवान और माताएं-बहनें उनसे हिसाब मांग रही हैं। उनके सारे खेलों के बावजूद बिहार की जनता ने हमें गले लगाया है। मैं आज दिल्ली में बैठा हूँ, ये बिहार के लोगों का आशीर्वाद है।

बिहार का हाल खराब है, बिजली, सड़क पानी, रोजगार, शिक्षा, डॉक्टर, सुरक्षा, चैन की ज़िन्दगी, इनमें से कुछ भी नहीं है। ये 25 साल के बाद का परिणाम है और इसलिए वो अपने काम का हिसाब नहीं दे रहे। मैडम सोनिया जी, आपने तो 35 साल राज किया और आज 2 नवंबर है, याद कीजिये 2 नवंबर 1984 का दिन। इंदिरा गाँधी जी की हत्या के कुछ दिनों बाद दिल्ली और पूरे देश में सिखों का क़त्लेआम चल रहा था। कांग्रेस पार्टी और उनके नेताओं पर गंभीर आरोप लगे थे। आज वही कांग्रेस पार्टी असहिष्णुता पर भाषण दे रही है, अरे डूब मरो, आपको ये शोभा नहीं देता है। अभी भी उन सिखों के परिवारों के आंसू पोछे नहीं गए हैं।

बिहार में नीतीश बाबू, लालू जी की क्या मजबूरी थी जो कभी कांग्रेस के खिलाफ़ लड़ते थे, 40 सीटें दे दी उन्हें। नीतीश बाबू, लालू जी की जो भी मजबूरी रही हो लेकिन एक बात के लिए मैं उन्हें सार्वजनिक रूप से धन्यवाद करता हूँ कि हमें 40 सीट बिना चुनौती के हमें दे दी। जिस कांग्रेस का नामो-निशान नहीं है बिहार में, उसकी 40 सीटें तो हमें सोने की थाली में मिल गई है और बाकि सीटों के लिए बिहार के हमारे भाईयों-बहनों को धन्यवाद जो हमें दो-तिहाई बहुमत देने वाले हैं। कभी किसी ने सोचा था कि जहाँ नक्सलवाद और गोली-पिस्तौल की बातें होती हों, वहां लोग इतनी भारी संख्या में मतदान करने आये। पहले चरण से लेकर चौथे चरण तक लगातार मतदान करने वालों की संख्या बढ़ी है और अब पांचवे चरण में आप सारे रिकॉर्ड तोड़ दोगे न?

मेरा आपसे आग्रह है कि 5 तारीख को पूर्णिया सबसे ज्यादा मतदान करके दिखाए। नतीज़ा 8 तारीख को आएगा, चारों तरफ़ देश दिवाली मनाने वाला है और बिहार दो-दो दिवाली मनाने वाला है। हमने 1 लाख 25 हज़ार करोड़ का पैकेज और 40 हज़ार करोड़ पुराना वाला जो कागज़ पर पड़ा था, हमारी जिम्मेवारी नहीं थी लेकिन बिहार के प्रति मेरा यह प्यार है, बिहार के लिए हमें कुछ करना है, हमने निर्णय लिया इसे देने का। इस चुनाव में हम विकास के लिए वोट मांग रहे हैं। हमने सब मिलाकर 1 लाख 65 हज़ार करोड़ का पैकेज दिया जो बिहार का भाग्य बदलने का ताकत रखता है। अगर छोटे से गड्ढ़े में गाड़ी फंस जाए तो 3-4 लोग निकालें तो निकाल जाता है लेकिन अगर गाड़ी कुएं में गिरी हो तो उसको निकालने के लिए ट्रेक्टर की ज़रुरत होती है। बिहार ऐसे गड्ढ़े में फंसा है जिसे निकालने के लिए दो-दो इंजन की जरुरत है। एक इंजन बिहार में जो नई सरकार बनेगी वो और दूसरा इंजन दिल्ली में मेरी सरकार जो आपने बनाई है। पटना और दिल्ली के दो इंजन लगेंगे तब यह बिहार गड्ढ़े में से बाहर आएगा।

मेरे अकेले की मेहनत काम नहीं आएगी, पटना की मेहनत अकेले काम नहीं आएगी, पटना और दिल्ली दोनों की ताक़त लगेगी तो बिहार गड्ढ़े में से बाहर आ जाएगा। आपके इस पूर्णिया में मैंने वादा किया है, हमारी सरकार सभी घरों में 24*7 बिजली पहुंचाएगी। इसके लिए हमने करीब सवा दो सौ करोड़ रूपया हम दे चुके हैं। आने वाले दिनों में एनएच – 107, महेशुघाट, सहरसा, पूर्णिया ईस्ट सेक्शन पर डबल लेन के लिए 1000 करोड़ रूपया लगाया जाएगा; पूर्णिया में एलपीजी प्लांट के अपग्रेडेशन के लिए करोड़ों रुपये लगाए जा रहे हैं; पूर्णिया एयरपोर्ट के सिविल एन्क्लेव डेवलपमेंट के लिए 150 करोड़ रूपया लगाने का फ़ैसला किया है; सूची बहुत लंबी है, मैं यहाँ सारे पढ़ नहीं रहा।

मेरा एक ही काम है, विकास। बिहार में आप लोगों के लिए मेरा तीन सूत्रीय कार्यक्रम है – पढ़ाई, कमाई और दवाई। बिहार के गरीब से गरीब बालक को सस्ती एवं अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए। हर मां अपने बच्चों को पढ़ाना चाहती है, लेकिन बिहार में पढ़ाई की इतनी हालत खराब है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए माँ-बाप को अपनी ज़मीन गिरवी रखनी पड़ती है। इसलिए मेरा संकल्प है, बिहार के बच्चों को  सस्ती एवं अच्छी पढ़ाई। मेरा दूसरा सपना है, कमाई; नौजवान के लिए रोजगार। बिहार में नौजवान को अपना राज्य और अपने माँ-बाप को छोड़ना पड़ता है। ये पलायन बंद होना चाहिए और बिहार के नौजवान को यहीं पर रोजगार का अवसर मिलना चाहिए। इसलिए मेरा दूसरा संकल्प है, बिहार के नौजवानों के लिए कमाई। मेरा तीसरा सपना है, दवाई; बुजुर्गों के लिए सस्ती दवाई, दवाखाना और डॉक्टर होना चाहिए।

इसलिए आपके लिए - पढ़ाई, कमाई और दवाई और बिहार राज्य के लिए तीन काम - बिजली, पानी एवं सड़क। बिजली आएगी तो कारखाने लगेंगे, और इससे रोजगार मिलेगा। मेरी सरकार आपको बिजली देना चाहती है। बिहार को जो सौभाग्य मिला है, वो किसी और राज्य को नहीं मिला है; बिहार की दो ताक़त है - बिहार का पानी और बिहार की जवानी। ये दोनों पूरे हिन्दुस्तान का भाग्य बदल सकती हैं। किसान को अगर पानी मिल जाए तो वो मिट्टी में से सोना पैदा कर सकता है। हमारा दूसरा संकल्प है - खेतों में पानी, उद्योगों को पानी और पीने का पानी पहुँचाना। तीसरा मेरा संकल्प है – सड़क; बिहार में सडकों का जाल हो। गाँव ज़िले से, ज़िला राज्य से, राज्य दिल्ली से जुड़ जाए, ऐसा नेटवर्क बनाना है ताकि बिहार का सीधा मार्ग विकास की ओर चल पड़े, इन कामों को लेकर मैं आगे बढ़ना चाहता हूँ।

इसलिए मेरे भाईयों-बहनों, मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए। कल शाम तक प्रचार पूरा हो जाएगा, 5 तारीख को चुनाव है। आप सब दस-दस परिवारों से वोट कराओ, भाजपा, एनडीए को वोट कराओ।  मेरे साथ सब लोग ज़ोर से बोलिये –

भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!       

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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संसद का सुचारु संचालन और देश को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प समय की जरूरत: पीएम मोदी
July 20, 2026
आशा है कि इस सत्र में सार्थक चर्चाएं होंगी जो भारत के विकास पथ को सुदृढ़ करेंगी: प्रधानमंत्री
हम यही प्रार्थना करते हैं कि मानसून जितना प्रोएक्टिव होगा, मानसून सत्र भी उतना ही अधिक प्रोडक्टिव बनेगा, जिससे देश के कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा: पीएम मोदी
पिछले एक महीने में देश ने राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और अंतरिक्ष स्तर पर कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनसे हर भारतीय का सीना गर्व से भर गया है: पीएम मोदी
पश्चिम एशिया में चुनौतियों के बावजूद, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा। यह देश की मजबूती और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है: पीएम मोदी
संसद का सुचारु संचालन और देश को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प ही समय की जरूरत है: पीएम मोदी

स्वागत है भाई आप सबका।

मानसून का भी कुछ लाभ नजर आ रहा है और मानसून सत्र भी प्रारंभ हो रहा है। मानसून हो या मानसून सत्र, अगर दोनों प्रोएक्टिव हो, तो बहुत ही प्रोडक्टिव होते हैं, और दोनों प्रोडक्टिव होते हैं, तो देश का कल्याण होता है, जीव मात्र का कल्याण होता है। और इसलिए, हम यही प्रार्थना करते हैं कि मानसून भी प्रोएक्टिव रहे, मानसून सत्र भी प्रोडक्टिव रहे।

साथियों,

पिछले एक महीने में देश ने अनेक सिद्धियां प्राप्त की हैं और देशवासी गर्व से भर जाएं, इस प्रकार की सिद्धियों का सिलसिला चला है। चाहे राष्ट्रीय हो, अंतरराष्ट्रीय हो और अब तो अंतरिक्ष भी हो। एक प्रकार से भारत के लिए गर्व के पल रहे हैं। पिछले वर्ष मानसून सत्र के ठीक पहले भारतीय नागरिक ‘इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन’ पर पहुंचा था और परसों ही भारत का एक युवा स्टार्टअप, उसने बहुत बड़ी सिद्धि प्राप्त की है। विश्व के कम ही देश हैं, जहां इस प्रकार से प्राइवेट साहस हुए हैं और भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में नई उड़ान भरी है, बहुत बड़ी सफलता है। और ये जो स्काई रूट स्टार्टअप है, उसमें जो नौजवान काम कर रहे हैं, मुझे बताया गया, उनकी पूरी टीम की जो एवरेज एज है, वो सिर्फ 28 साल है। ऐसे नौजवानों ने यह काम करके दिखाया। मैं किसी 56 साल के नौजवान की बात नहीं कर रहा हूं, मैं देश के ये स्टार्टअप ने 28 के एवरेज वाले नौजवानों ने अंतरिक्ष में भारत का झंडा गाड़ दिया है। उनको तो बधाई है ही है, लेकिन ऐसी बातें जो हैं, जो भारत को आत्मविश्वास से भर देती है। विश्व में भारत का प्रोफाइल सर्वमान्य, सर्व-स्वीकृत बनता जाता है।

साथियों,

ये संयोग नहीं, ये एक संदेश है और बड़ा मजबूत संदेश है कि हमारे देश के युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षा अंतरिक्ष जितनी असीम है। इससे बड़ा संदेश देश के लिए कोई और प्रेरणा नहीं दे सकता है।

साथियों,

जो रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार होकर के आज देश चल पड़ा है, उसी का नतीजा है कि भारत के नौजवान इतना बड़ा साहस कर पाते हैं, और सफल भी हो रहे हैं।

साथियों,

पिछले दिनों राजस्थान में बहुत बड़ी ऑयल रिफाइनरी देश को समर्पित की गई। पिछले कुछ सप्ताह पहले, एक सेमीकंडक्टर प्लांट, यानी तीसरा, देश को समर्पित किया गया। अभी कुछ दिन पहले ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन और विश्व में बहुत कम देश ऐसे हैं कि जिनके पास ये सुविधा है। लेकिन भारत ने जो हाइड्रोजन ट्रेन देशवासियों को समर्पित की है, वो सबसे ताकतवर इंजन वाली है, और सबसे लंबी है। ये अपने आप में भारत के वैज्ञानिक, भारत के इंजीनियर्स, भारत के इनोवेटर्स, भारत के उद्यमी, भारत के श्रमिक, ये जो एक लक्ष्य लेकर के देश के लिए जी रहे हैं, देश के लिए काम कर रहे हैं, उसी का परिणाम है।

साथियों,

हम भली-भांति जानते हैं और पूरी दुनिया चिंतित भी है, लगातार कहीं न कहीं युद्ध की स्थितियां बनती रही है। पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण भारत जैसे देश जो एनर्जी के लिए औरों पर डिपेंडेंट है, उनके लिए ये पश्चिम एशिया का युद्ध एक बहुत ही बड़ा संकट का कारण रहा। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, फर्टिलाइजर, केमिकल्स, यानी हर विषय में अनेक बाधाएं, अनेक संकट आए। उसके बावजूद भी भारत 7.7 परसेंट के ग्रोथ से दुनिया की मेजर इकोनॉमी में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश बनके रहा। ये भारत के सामर्थ्य का परिचायक है। भारत किस प्रकार से उत्साह और उमंग के साथ नई ऊंचाइयों को पार करना चाहता है। उसकी इसमें एक झलक है और ऐसे में जब ये मानसून सत्र आरंभ हो रहा है, देश ने स्पीड पकड़ ली है और संसद का स्पिरिट उस स्पीड में नई ऊर्जा भर सकता है। सकारात्मक स्पिरिट राष्ट्र के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक होता है। हमारे सदन में बहुत अनुभवी सांसद भी है, दल उनका कोई भी हो, लेकिन उनके पास एक लंबा अनुभव है। ऐसे समय में उनके अनुभव की, उनके ज्ञान की संसद को भी जरूरत है, देश को भी जरूरत है। और इसके लिए संसद का चलना, सार्थक चर्चा होना, मिल जुलकर के देश को आगे ले जाने के संकल्प लेना, ये मैं समझता हूं कि बहुत ही समय की मांग है। एस्पिरेशन से भरे हुए देश के युवाओं की मांग है कि हम आगे बढ़े। आज समय की मांग है कि राष्ट्र निष्ठा से भरे हुए, राष्ट्रभक्ति के लिए जी रहे, आवाज को सदन में उचित मंच मिलता रहे, वे अपनी आवाज को बुलंद करें, देश को दिशा दे, और इसलिए मैं आशा करता हूं, और मुझे पक्का विश्वास है, जहां तथ्य होते हैं, जहां तर्क होते हैं, वहां तूफान के लिए जगह नहीं होती है। अगर तर्क मजबूत है, तथ्य मजबूत है, तो शांत चित्त से भी अपनी आवाज को बुलंद बनाया जा सकता है। मैं आशा करता हूं तर्क और तथ्य के साथ सदन की चर्चा को समृद्ध किया जाए। हर आवाज को अवसर मिले, हर विचार को सम्मान मिले, ये संसद की हमारी भूमिका है। मैं सभी सांसदों से बढ़-चढ़कर के इस सदन में हिस्सा लेने के लिए निमंत्रित करता हूं। आज सुबह स्पीकर महोदय जी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से देश के सांसदों का स्वागत करने के अपने भाव को व्यक्त किया है। मैं भी उसमें अपना स्वर मिलाता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कार।