एक आश्चर्यजनक कायापलट से गुजरते हुए, भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र, विकसित भारत की दिशा में अग्रणी बनकर उभरा है, जिसने अपनी दूरदराज वाले इलाके की छवि को पीछे छोड़ दिया है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शांति, विकास, स्वीकार्यता और समृद्धि पर केंद्रित नीतियों ने इस परिवर्तनकारी यात्रा को आगे बढ़ाया है। पूर्वोत्तर केवल पकड़ नहीं बना रहा है; बल्कि यह नेतृत्व कर रहा है, देश में शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के 50 से अधिक दौरे करने और केंद्रीय मंत्रियों की 400 से अधिक यात्राएं करने के साथ पूर्वोत्तर, भारत की मुख्यधारा के पॉलिसी फ्रेमवर्क का एक अभिन्न अंग बन गया है। इस क्षेत्र में जनजातीय नायकों के गौरव को स्वीकार करने और उत्सव मनाने को सरकार ने प्रभावी ढंग से बढ़ावा दिया है। पहले की सरकारों की तरह लोगों की आकांक्षाओं का दमन और उपेक्षा नहीं की है। बल्कि मोदी सरकार ने विगत के उपेक्षित दृष्टिकोण को पलट कर उसे सकारात्मक स्वरुप देते हुए, अकल्पनीय विकास की क्षमता से लैस आठ राज्यों के इस समूह को ‘अष्टलक्ष्मी’ से संबोधित किया है।
अशांत क्षेत्र से विकास के पथ की ओर
यह क्षेत्र दशकों से उग्रवाद से प्रेरित हिंसा से प्रभावित था। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी दृष्टिकोण के तहत, जो पिछले विभाजनकारी रुख के विपरीत पूर्वोत्तर भारत की 'दिव्य' प्रकृति पर जोर देता है, पिछले नौ वर्षों में कई शांति समझौतों पर सफलतापूर्वक बातचीत की गई है। इन समझौतों को क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे विवादों को समाप्त करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। बोडो समझौते और ब्रू-रियांग समझौते जैसे प्रमुख समझौतों ने लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों को हल किया। 29 नवंबर, 2023 को हाल ही में हुआ UNLF शांति समझौता, छह दशक लंबे सशस्त्र आंदोलन के अंत का प्रतीक है, जो मणिपुर में शांति और स्थिरता के लिये एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसी तरह, यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के वार्ता समर्थक गुट के साथ हाल ही में हस्ताक्षरित शांति समझौता एक ऐतिहासिक मोड़ है, जिसने राज्य के लिए स्थायी शांति का वादा किया है।
प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए परिवर्तन और आर्थिक उत्थान का एक नया युग लगातार आगे बढ़ रहा है। पिछले नौ वर्षों में प्रधानमंत्री ने न केवल इस क्षेत्र में शांति और समृद्धि लाने के अपने वादे को पूरा किया है, बल्कि सबका साथ-सबका विकास, हर नीतिगत निर्णय का आधार भी बन गया है, जहां आत्मनिर्भरता अब एक सपना नहीं रह गया है। पूर्वोत्तर को पीछे नहीं छोड़ा जा रहा है; वास्तव में, यह देश को शांति और समृद्धि के मार्ग पर ले जा रहा है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक्ट ईस्ट पॉलिसी, सक्रिय रूप से एक क्रांतिकारी बदलाव में योगदान दे रही है, जो उत्तर-पूर्व क्षेत्र की संभावित भूमिका में पर्याप्त बदलाव को दर्शाती है। चाहे मणिपुर में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना हो या पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए पिछले नौ वर्षों में 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन, यह क्षेत्र की उन्नति को बढ़ावा देने और इसके विकास को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
एक विकसित पूर्वोत्तर भारत की ओर
जबकि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा रखता है, ऐसे में पूर्वोत्तर भारत की भूमिका और भी अहम है। लंबे समय तक आर्थिक ठहराव के बाद, यह रीजन अब देश की विकास यात्रा का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। इस क्षेत्र की मुख्य ताकत इसकी पर्यटन क्षमता और प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों में निहित है।
इस क्षेत्र में 'भारत के लिए हाइड्रोपावर हब' के रूप में विकसित होने की महत्वपूर्ण क्षमता है, जो देश की कुल पनबिजली क्षमता का लगभग 40% है। वर्तमान सरकार इस एनर्जी का उपयोग कर रही है, और जल्द ही, यह क्षेत्र राष्ट्र को पावर देने के लिए तैयार होगा। इसके साथ ही, क्षेत्र में पर्यटन क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं। नॉर्थईस्ट स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NESIDS) के तहत, 31 मार्च, 2022 तक 2598.15 करोड़ रुपये की 80 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जो इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी, बिजली और जल आपूर्ति जैसे पर्यटन से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित करती हैं। इसके अलावा, सरकार ने स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत विकसित किए जाने वाले क्षेत्र से पंद्रह नए स्थलों को शामिल करने की घोषणा की है। इसके अलावा, पिछले नौ वर्षों में 8 नए एयरपोर्ट्स की स्थापना ने इस क्षेत्र की पर्यटन अर्थव्यवस्था को काफी बढ़ावा दिया है।
पूर्वोत्तर भारत को मुख्यधारा में लाना
सरकार द्वारा उठाया गया एक और महत्वपूर्ण कदम भारत के स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करना और उनकी स्मृतियों को संजोना है। इस उद्देश्य के साथ, मोदी सरकार ने 22 नवंबर, 2021 को मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के लुआंगकाओ गांव में रानी गाइदिनिलु जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय की स्थापना की नींव रखी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिवसागर में रंग घर के सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से परियोजना की आधारशिला रखी है। 2022 में इस क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बदलाव देखा गया। 2022 में 118.45 लाख घरेलू और 1.04 लाख विदेशी सैलानियों ने पूर्वोत्तर राज्यों का विजिट की।
सांस्कृतिक मुख्यधारा स्थानीय भोजन को लोकप्रिय बनाने से भी संबंधित है। इस संबंध में, मुगा सिल्क, तेजपुर लेसु, जोहा राइस, बोका चौल, काजी नेमू और गामोसा ने जीआई टैग हासिल किया है। आज, इस क्षेत्र का गौरवशाली इतिहास राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित कर रहा है। 25 नवंबर, 2022 को सरायघाट की लड़ाई में मुगलों के खिलाफ अपनी जीत के लिए जाने जाने वाले महान अहोम सेनापति लसित बोरफुकन की 400वीं जयंती मनाने के लिए दिल्ली में एक समारोह आयोजित किया गया था। इस तरह के उत्सव से एक लोक नायक को मोदी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित विभूति के रूप में प्रतिष्ठित किया है।
पीएम मोदी के नेतृत्व में, सरकार पूर्वोत्तर में सुरक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में व्यापक निवेश कर रही है। नतीजतन, यह क्षेत्र विकसित भारत की ओर राष्ट्र की यात्रा में अग्रणी के रूप में उभर रहा है। इसके अलावा, इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाने की सरकार की पहल को व्यापक प्रशंसा मिली है। जिस तरह से पीएम मोदी अक्सर पूर्वोत्तर के रंगीन पारंपरिक हेडड्रेस, स्थानीय स्कार्फ और परिधानों को धारण करते हैं, वह एकता और ताकत का एक मजबूत संदेश भेजता है, यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री न केवल लोगों और राष्ट्र की जरूरतों के प्रति सचेत हैं, बल्कि इसे दुनिया को दिखाने में भी गर्व महसूस करते हैं। एक ऐसे क्षेत्र में जो बहुत लंबे समय से उपेक्षित रहा है, पूर्वोत्तर के लोगों को अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में भरोसा और आशावाद मिला है।




