1. पीएम-जन धन योजना: वित्तीय पहुंच

• राजस्थान में 3.31 करोड़ PMJDY खाते खोले गए हैं, जिनमें से 1.93 करोड़ खाते महिलाओं के हैं।

 2. जल जीवन मिशन: राजस्थान में प्रगति

• मिशन के शुभारंभ के बाद से राजस्थान में 43.69 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल के कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।

• 3,600 गांवों में शत-प्रतिशत घरेलू नल कनेक्शन हो गए हैं, 1146 गांव और 61 पंचायतें ‘हर घर जल बन; गई हैं (इसका मतलब है कि उस क्षेत्र के

सभी घरों को नल से पानी की आपूर्ति प्रदान की जाती है)।

• 63,127 (73%) स्कूलों को नल से जल की आपूर्ति प्रदान की गई है।

• 32,791 (61%) आंगनबाड़ियों को नल से जल की आपूर्ति प्रदान की गई है।

• 23,066 (72%) ग्राम पंचायतों/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को नल से जल की आपूर्ति प्रदान की गई है।

 3. सर्वांगीण बुनियादी ढांचा

 घर

• राजस्थान में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 1.73 लाख से अधिक घर बने।

• राजस्थान में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 16.15 लाख से अधिक घर बनाए गए।

 रेलवे

• वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए राजस्थान के लिए रेल बजट आवंटन बढ़कर 9,532 करोड़ रुपये हो गया है, जो 2009-14 के औसत वार्षिक बजट आवंटन (682 करोड़ रुपये प्रति) से 1298% अधिक है।

• वर्ष 2014-22 के दौरान, राजस्थान राज्य में पूर्णत/आंशिक रूप से आने वाली 2322 किमी लंबाई (176 किमी नई लाइन, 771 किमी गेज कन्वर्जन और 1,375 किमी दोहरीकरण) को 29025 किमी प्रति वर्ष की औसत दर से चालू किया गया है, जो 2009-14 के दौरान चालू किए गए (1596 किमी/वर्ष) से 82% अधिक है।

• इसके अलावा, वंदे भारत ट्रेनों की शुरूआत, एक आधुनिक और हाई स्पीड ट्रेन सेवा, ने राज्य के भीतर कनेक्टिविटी में काफी सुधार किया है और यात्रियों के लिए यात्रा के अनुभव को बढ़ाया है। वर्तमान में, भारतीय रेलवे राजस्थान में दो वंदे भारत ट्रेनों का संचालन कर रहा है: 1) दिल्ली कैंट – अजमेर और 2) जोधपुर – अहमदाबाद

 एयरपोर्ट्स

• UDAN योजना के तहत राजस्थान में 3 एयरपोर्ट्स बीकानेर, जैसलमेर, किशनगढ़ संचालित किए गए हैं।

 ग्रामीण सड़कें

• राजस्थान में पिछले पांच वर्षों (2017-18 से 2021-22) के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 10,990 किमी से अधिक सड़कें बनाई गईं।

राजमार्गों को छह लेन का बनाना

• गुड़गांव-कोटपूतली-जयपुर सेक्शन (161 किमी)

• ओल्ड NH-79A और NH-79 (90 किमी) के किशनगढ़-गुलाबपुरा सेक्शन

• ओल्ड NH-79A और NH-79 (124 किमी) के गुलाबपुरा-भीलवाड़ा चित्तौड़गढ़ सेक्शन

• ओल्ड NH-76 (93 किमी) का चित्तौड़गढ़-उदयपुर सेक्शन

• ओल्ड NH-8 (113 किमी) का उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी सेक्शन

PRASHAD स्कीम और स्वदेश दर्शन योजना के तहत टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर

• डेजर्ट सर्किट का डेवलपमेंट: सांभर लेक टाउन

• कृष्णा सर्किट का डेवलपमेंट: गोविंद देव जी मंदिर (जयपुर), खाटू श्याम जी (सीकर) और नाथद्वारा (राजसमंद)

• आध्यात्मिक सर्किट का डेवलपमेंट: चूरू (सालासर बालाजी) - जयपुर (श्री समोद के बालाजी, घाट के बालाजी, बंधे के बालाजी) - विराटनगर (बीजक, जैनसिया, अंबिका मंदिर) - भरतपुर (कामां क्षेत्र) - धौलपुर (मुचकुंड) - मेहंदीपुर बालाजी - चित्तौड़गढ़ (सांवलियाजी)

• हेरिटेज सर्किट का डेवलपमेंट: राजसमंद (कुंभलगढ़ किला) - जयपुर (जयपुर और नाहरगढ़ किले में फसाड लाइटिंग) - झालावाड़ (गागरोन किला) - चित्तौड़गढ़ (चित्तौड़गढ़ किला) - जैसलमेर (जैसलमेर किला) - हनुमानगढ़ (गोगामेडी) - उदयपुर (प्रताप गौरव) केन्द्र) - धौलपुर (बाग-ए-नीलोफर और पुरानी छावनी) - नागौर (मीरा बाई स्मारक, मेड़ता) - टोंक (सुनहरी कोठी)

•पुष्कर एवं अजमेर का इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट

4. MSME और इंडस्ट्रीज

• राजस्थान में 01.07.2020 से 14.07.2023 तक 'Udyam' रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर 13 लाख से अधिक MSME रजिस्टर्ड हैं।

• PLI योजना के तहत आठ क्षेत्रों में 26 एप्लीकेशन का चयन किया गया है, जिनमें आईटी हार्डवेयर, बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, व्हाइट गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और बल्क ड्रग्स शामिल हैं।

• PLI योजना के तहत चयनित कंपनियों ने राजस्थान के नौ जिलों बीकानेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, झालावाड़, कोटा, सीकर, अलवर, जयपुर और उदयपुर में लगभग 3,000 करोड़ रुपये के अपेक्षित निवेश के साथ अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव किया है।

5. हेल्थकेयर

• 2.07 करोड़ आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट्स (ABHA) बनाए गए

• 1.09 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए गए

• 57.41 लाख अस्पताल दाखिलों को मंजूरी

• 1,366 अस्पतालों को पैनल में शामिल किया गया।

• पिछले तीन वर्षों (2019-2022) के दौरान राजस्थान में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के तहत नामांकित 9.4 लाख लाभार्थी

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जल जीवन मिशन के 6 साल: हर नल से बदलती ज़िंदगी
August 14, 2025
"हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन, एक प्रमुख डेवलपमेंट पैरामीटर बन गया है।" - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

पीढ़ियों तक, ग्रामीण भारत में सिर पर पानी के मटके ढोती महिलाओं का दृश्य रोज़मर्रा की बात थी। यह सिर्फ़ एक काम नहीं था, बल्कि एक ज़रूरत थी, जो उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा थी। पानी अक्सर एक या दो मटकों में लाया जाता, जिसे पीने, खाना बनाने, सफ़ाई और कपड़े धोने इत्यादि के लिए बचा-बचाकर इस्तेमाल करना पड़ता था। यह दिनचर्या आराम, पढ़ाई या कमाई के काम के लिए बहुत कम समय छोड़ती थी, और इसका बोझ सबसे ज़्यादा महिलाओं पर पड़ता था।

2014 से पहले, पानी की कमी, जो भारत की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक थी; को न तो गंभीरता से लिया गया और न ही दूरदृष्टि के साथ हल किया गया। सुरक्षित पीने के पानी तक पहुँच बिखरी हुई थी, गाँव दूर-दराज़ के स्रोतों पर निर्भर थे, और पूरे देश में हर घर तक नल का पानी पहुँचाना असंभव-सा माना जाता था।

यह स्थिति 2019 में बदलनी शुरू हुई, जब भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) शुरू किया। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक सक्रिय घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) पहुँचाना है। उस समय केवल 3.2 करोड़ ग्रामीण घरों में, जो कुल संख्या का महज़ 16.7% था, नल का पानी उपलब्ध था। बाकी लोग अब भी सामुदायिक स्रोतों पर निर्भर थे, जो अक्सर घर से काफी दूर होते थे।

जुलाई 2025 तक, हर घर जल कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति असाधारण रही है, 12.5 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को जोड़ा गया है, जिससे कुल संख्या 15.7 करोड़ से अधिक हो गई है। इस कार्यक्रम ने 200 जिलों और 2.6 लाख से अधिक गांवों में 100% नल जल कवरेज हासिल किया है, जिसमें 8 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश अब पूरी तरह से कवर किए गए हैं। लाखों लोगों के लिए, इसका मतलब न केवल घर पर पानी की पहुंच है, बल्कि समय की बचत, स्वास्थ्य में सुधार और सम्मान की बहाली है। 112 आकांक्षी जिलों में लगभग 80% नल जल कवरेज हासिल किया गया है, जो 8% से कम से उल्लेखनीय वृद्धि है। इसके अतिरिक्त, वामपंथी उग्रवाद जिलों के 59 लाख घरों में नल के कनेक्शन किए गए, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विकास हर कोने तक पहुंचे। महत्वपूर्ण प्रगति और आगे की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2025–26 में इस कार्यक्रम को 2028 तक बढ़ाने और बजट में वृद्धि की घोषणा की गई है।

2019 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किए गए जल जीवन मिशन की शुरुआत गुजरात से हुई है, जहाँ श्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में सुजलाम सुफलाम पहल के माध्यम से इस शुष्क राज्य में पानी की कमी से निपटने के लिए काम किया था। इस प्रयास ने एक ऐसे मिशन की रूपरेखा तैयार की जिसका लक्ष्य भारत के हर ग्रामीण घर में नल का पानी पहुँचाना था।

हालाँकि पेयजल राज्य का विषय है, फिर भी भारत सरकार ने एक प्रतिबद्ध भागीदार की भूमिका निभाई है, तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए राज्यों को स्थानीय समाधानों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार दिया है। मिशन को पटरी पर बनाए रखने के लिए, एक मज़बूत निगरानी प्रणाली लक्ष्यीकरण के लिए आधार को जोड़ती है, परिसंपत्तियों को जियो-टैग करती है, तृतीय-पक्ष निरीक्षण करती है, और गाँव के जल प्रवाह पर नज़र रखने के लिए IoT उपकरणों का उपयोग करती है।

जल जीवन मिशन के उद्देश्य जितने पाइपों से संबंधित हैं, उतने ही लोगों से भी संबंधित हैं। वंचित और जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करके, और स्थानीय समुदायों को योगदान या श्रमदान के माध्यम से स्वामित्व लेने के लिए प्रोत्साहित करके, इस मिशन का उद्देश्य सुरक्षित जल को सभी की ज़िम्मेदारी बनाना है।

इसका प्रभाव सुविधा से कहीं आगे तक जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि JJM के लक्ष्यों को प्राप्त करने से प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे से अधिक की बचत हो सकती है, यह समय अब शिक्षा, काम या परिवार पर खर्च किया जा सकता है। 9 करोड़ महिलाओं को अब बाहर से पानी लाने की ज़रूरत नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह भी अनुमान है कि सभी के लिए सुरक्षित जल, दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोक सकता है और स्वास्थ्य लागत में 8.2 लाख करोड़ रुपये की बचत कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आईआईएम बैंगलोर और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, JJM ने अपने निर्माण के दौरान लगभग 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष का रोजगार सृजित किया है, और लगभग 25 लाख महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया है।

रसोई में एक माँ का साफ़ पानी से गिलास भरते समय मिलने वाला सुकून हो, या उस स्कूल का भरोसा जहाँ बच्चे बेफ़िक्र होकर पानी पी सकते हैं; जल जीवन मिशन, ग्रामीण भारत में जीवन जीने के मायने बदल रहा है।