क्रम सं.

समझौता ज्ञापन/समझौते/कार्य योजना का नाम

विवरण

भूटानी पक्ष की ओर से प्रतिनिधि

भारतीय पक्ष की ओर से प्रतिनिधि

1

भारत से भूटान को पेट्रोलियम, ऑयल, ल्‍यूब्रिकेंट्स (पीओएल) और संबंधित उत्पादों की सामान्य आपूर्ति के संबंध में समझौता ज्ञापन

यह समझौता ज्ञापन पेट्रोलियम, ऑयल, ल्‍यूब्रिकेंट्स से संबंधित मदों की एक सूची प्रदान करता है। भारत सरकार सहमत प्रवेश/निकास बिंदुओं के माध्यम से भूटान को इसकी आपूर्ति की सुविधा प्रदान करेगी।

सुश्री ताशी वांग्मो,
सचिव, उद्योग वाणिज्य और रोजगार मंत्रालय, आरजीओबी

श्री सुधाकर दलेला,
भूटान में भारत के राजदूत

2

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा भूटान फूड एंड ड्र्ग अथॉरिटी (बीएफडीए) द्वारा प्रयोग किए जाने वाले आधिकारिक नियंत्रण की मान्यता के लिए समझौता

यह समझौता कारोबार करने में सुगमता को बढ़ावा देकर और दोनों पक्षों की अनुपालन लागत कम करके भारत और भूटान के बीच व्यापार को सुविधाजनक बनाएगा। यह समझौता ज्ञापन भारत में उत्पादों का निर्यात करते समय एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित आवश्यकताओं के अनुपालन के लिए बीएफडीए द्वारा जारी निर्यात निरीक्षण प्रमाणपत्र को एफएसएसएआई द्वारा स्वीकार्य बनाएगा।

श्री पेम्बा वांग्‍चुक,
सचिव, स्वास्थ्य मंत्रालय, आरजीओबी

श्री सुधाकर दलेला,
भूटान में भारत के राजदूत

3

ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा संरक्षण उपायों के क्षेत्र में सहयोग के संबंध में समझौता ज्ञापन

इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य ऊर्जा दक्षता ब्यूरो द्वारा विकसित स्टार लेबलिंग कार्यक्रम को बढ़ावा देकर भूटान को घरेलू क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में सहायता करना है। इस एमओयू के अंतर्गत भारत के अनुभव के आधार पर बिल्डिंग कोड तैयार करने की सुविधा प्रदान करना, ऊर्जा ऑडिटर्स के प्रशिक्षण को संस्थागत बनाकर भूटान में ऊर्जा पेशेवरों का पूल तैयार करना आदि शामिल है।

श्री कर्मा शेरिंग,
सचिव, आर्थिक और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय, आरजीओबी

श्री सुधाकर दलेला,
भूटान में भारत के राजदूत

4

खेल और युवा क्षेत्र में सहयोग सहयोग के संबंध में समझौता ज्ञापन

यह समझौता ज्ञापन दोनों पक्षों की खेल एजेंसियों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाकर और खेल गतिविधियों/कार्यक्रमों का संचालन करके भारत और भूटान के बीच जनता के बीच पारस्‍परिक संबंधों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

सुश्री पेमा चोडेन,
सचिव, विदेश और विदेशी  व्यापार मंत्रालय, आरजीओबी

श्री सुधाकर दलेला,
भूटान में भारत के राजदूत

5

औषधीय उत्पादों के संदर्भ मानक, फार्माकोपिया, सतर्कता और परीक्षण साझा करने से संबंधित सहयोग पर समझौता ज्ञापन

यह समझौता ज्ञापन प्रत्येक पक्ष के संबंधित कानूनों और विनियमों के अनुरूप औषधियों  के विनियमन के क्षेत्र में हमारे घनिष्ठ सहयोग को और बढ़ाने तथा सूचनाओं के आदान-प्रदान में मदद करेगा। यह समझौता ज्ञापन भूटान द्वारा भारतीय फार्माकोपिया को दवाओं के मानकों की पुस्तक के रूप में स्वीकार करने और किफायती मूल्य पर जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति का अवसर देगा।

श्री पेम्बा वांग्‍चुक,
सचिव, स्वास्थ्य मंत्रालय, आरजीओबी

श्री सुधाकर दलेला,
भूटान में भारत के राजदूत

6

अंतरिक्ष सहयोग के संबंध में संयुक्त कार्य योजना (जेपीओए) <

संयुक्त कार्य योजना विनिमय कार्यक्रमों, प्रशिक्षण आदि के माध्यम से हमारे अंतरिक्ष सहयोग को और विकसित करने की ठोस योजना प्रदान करती है।

श्री जिग्मे तेनजिंग,
सचिव, सरकारी प्रौद्योगिकी एजेंसी, आरजीओबी

श्री सुधाकर दलेला,
भूटान में भारत के राजदूत

7

भारत के राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एनकेएन) और भूटान के ड्रुक रिसर्च एंड एजुकेशन नेटवर्क के बीच समकक्ष व्यवस्था या पियरिंग अरेंजमेंट के संबंध में समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण

यह समझौता ज्ञापन भारत के राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एनकेएन) और भूटान के ड्रुक रिसर्च एंड एजुकेशन नेटवर्क (ड्रुक रेन) के बीच एनकेएन और ड्रुकरेन के बीच समकक्ष व्यवस्था या पियरिंग अरेंजमेंट को नवीनीकृत करने के लिए है, यह समझौता ज्ञापन भारत और भूटान के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाएगा तथा भूटान के विद्वानों और  अनुसंधान संस्थानों को लाभान्वित करेगा।

श्री जिग्मे तेनजिंग,
सचिव, सरकारी प्रौद्योगिकी एजेंसी, आरजीओबी

श्री सुधाकर दलेला,
भूटान में भारत के राजदूत

इसके अलावा, दोनों पक्ष भारत और भूटान के बीच रेल लिंक की स्थापना के संबंध में एमओयू की विषय वस्‍तु पर भी सहमत हो गए हैं और उस पर हस्ताक्षर किए हैं। - यह एमओयू भारत और भूटान के बीच दो प्रस्तावित रेल लिंक की स्थापना का प्रावधान करता है, जिनमें कोकराझार-गेलेफू रेल लिंक और बानरहाट-सामत्से रेल लिंक और उनके कार्यान्वयन के तौर-तरीके शामिल हैं।

 

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पीएम मोदी ने 52वीं PRAGATI मीटिंग की अध्यक्षता की
June 24, 2026
प्रधानमंत्री ने सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरिडोर और मेट्रो रेल क्षेत्रों से जुड़ी लगभग 30,000 करोड़ रुपये लागत वाले चार प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की, जो चार राज्यों में फैली हुई हैं
प्रधानमंत्री ने कुशल योजना निर्माण के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उपयोग तथा पोर्टल पर परियोजनाओं, उपयोगिताओं और अवसंरचना संबंधी आंकड़ों को समय पर अपडेट करने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और राज्य सरकारों से लंबित मुद्दों का मिशन मोड में समाधान करने और उनकी कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने को कहा
प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित नवीनतम डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया
प्रधानमंत्री ने साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित शिकायतों की समीक्षा की तथा समयबद्ध कार्रवाई, समन्वित प्रतिक्रिया और ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण व्यवस्था पर जोर दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सेवा तीर्थ में 'प्रगति' की 52वीं बैठक की अध्यक्षता की। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित यह बहु-माध्यम मंच केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को निर्बाध रूप से एकीकृत कर सक्रिय शासन और समयबद्ध क्रियान्वयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरीडोर और मेट्रो रेल क्षेत्रों से संबंधित चार महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की। लगभग 30,000 करोड़ रुपये लागत वाली ये परियोजनाएं चार राज्यों में फैली हुई हैं। आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संपर्क, औद्योगिक प्रगति और जनकल्याण की दृष्टि से महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समयसीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, समस्याओं के समाधान और समय पर पूरा होने पर विशेष ध्यान देते हुए की गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में देरी न केवल लागत बढ़ाती है, बल्कि लोगों और उद्योगों को समय पर मिलने वाले लाभों से भी वंचित कर देती है। उन्होंने संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को लंबित मुद्दों का मिशन मोड में समाधान करने तथा उच्चतम स्तर पर उनकी सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रभावी योजना और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने परियोजनाओं के विवरण, उपयोगिताओं, अवसंरचना परतों, स्वीकृतियों और अन्य क्षेत्रीय सूचनाओं को पोर्टल पर नियमित एवं समय पर अपडेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंच पर जमीनी स्तर की नवीनतम स्थिति दिखाई देनी चाहिए ताकि रूकावटों के बारे में पहले से पता चल सके और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर हो तथा विश्वसनीय एवं वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकें।

प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित नवीनतम डिजिटल तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जागरूकता, रोगियों के फॉलो-अप और सामुदायिक सहभागिता के लिए एनसीसी कैडेटों और ‘माय भारत’ स्वयंसेवकों की एक टीम गठित करने का सुझाव दिया।

प्रधानमंत्री ने साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित शिकायतों की भी समीक्षा की। उन्होंने नागरिकों को ठगने के लिए डिजिटल मंचों के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसे मामलों का सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा समन्वित, संवेदनशील और समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी समस्या के समाधान के लिए एक विभाग या एजेंसी से दूसरी एजेंसी के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट जवाबदेही, त्वरित प्रतिक्रिया, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों और डिजिटल मंचों के बीच बेहतर समन्वय तथा जन-जागरूकता अभियानों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में वित्तीय नुकसान को रोकने और लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए समय पर कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी हितधारकों से रोकथाम, रिपोर्टिंग, जांच और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों को साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित पंजीकरण और प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।