कृषि महोत्सव २०१२ का समापन

Published By : Admin | May 31, 2012 | 21:35 IST

  • कृषि महोत्सव २०१२ का समापन
  •  एक करोड़ से ज्यादा ग्रामीणों ने कृषिक्रांति का सन्देश पाया
  • २५ दिन में ही १५.१७ लाख किसानों को कृषि सहायता के रूप में ७२० करोड़ का वितरण .
  •  समग्र देश में कृषि महोत्सव ने गुजरात की कृषिक्रांति का गौरव दिलवाया: श्री मोदी
अहमदाबाद,गुरुवार। मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राज्यभर की तपती गर्मी में चल रहे कृषि महोत्सव अभियान के समापन की घोषणा करते हुए कहा कि कृषि महोत्सव ने देशभर में गुजरात की कृषिक्रांति को गौरव दिलवाया है और देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ताकत दी है।

गौरव दिलवाया है और देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ताकत दी है।

श्री मोदी ने घोषणा करते हुए कहा कि आठवें कृषि महोत्सव में २५ दिन में ही १५.१७ लाख किसानों को कृषि सम्बन्धी विभिन्न सहायता के तौर पर ७२० करोड़ का वितरण किया गया है। ६ मई से गुजरात में प्रारम्भ हुए कृषि महोत्सव और पशु स्वास्थ्य मेले के अभियान में २२५ तहसीलों सहित ४३९७ गांवों में कृषि रथ पहुंचे थे और एक करोड़ से ज्यादा किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों ने आधुनिक खेती और वैज्ञानिक पशुपालन में नई तरह की हरियाली क्रांति का सन्देश पाया। लगभग एक माह की अथक परिश्रम यात्रा के दौरान एक लाख कृषि कर्मचारिगण और वैज्ञानिक गावं-गांव में पहुंचे थे। प्रगतिशील किसान और कृषि के ऋषि- सफल प्रयोगशील किसान इसमें शामिल हुए थे, एक अर्थ में कृषि महोत्सव चलती-फिरती कृषि युनिवर्सिटी बन गया था। इसके साथ ही राज्य सरकार की सभी कृषि योजनाओं के लाभ किसानों तक पहुंच सके हैं।

कृषि महोत्सव की सफलता का श्रेय राज्य में कड़ी मेहनत करनेवाले लाखों किसानों को अर्पित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि गुजरात को कृषि क्षेत्र में परिवर्तन का गौरव दिलवाने में किसानों और पशुपालकों ने हृदय से इस सरकार पर भरोसा रखा इसी का यह परिणाम है। कृषि महोत्सव को पशु स्वास्थ्य मेले के साथ शामिल करने से दौनों क्षेत्रों में काफी लाभ हुआ है। इतना ही नहीं, इस साल ४४०० जितनी तहसील पंचायतों में कृषि रथ मौजूद रहे और किसानो को लाभ दिया। रोजाना शाम को साढ़ॆ छह बजे विडियो कांफ्रेंस करके किसानों से वार्तालाप किया गया, इसका उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री मोदी ने कहा कि एक ही महीने में एक करोड़ ग्राम नागरिकों को कृषि- पसुपालन विषय पर ऐसी घटना की मिसाल मिलना कठिन है। राज्य की योजनाशक्ति और मानवशक्ति का महत्तम सुयोग हुआ है जिसके कारण कोई तहसील ऐसी नहीं है कि जहां प्रयोगशील और प्रगतिशील किसान ना हों। १०००० जितने सफल प्रगतिशील किसान और ५६२२ कृषि के ऋषि कृषि महोत्सव के प्राण बने हैं।

उन्होने कहा कि राज्य के सभी गावों को शामिल करते हुए जमीन के सूक्ष्म पोषक तत्वों के सर्वे का काम शुरु किया गया है। ९००० गावों में यह कार्य पूरा होने वाला है। कृषि महोत्सव के दौरान ११००० ट्रेक्टर्स नए खरीदने और ३४००० रोटावेटर खरीदने के लिए किसानों को सहायता दी गई है। श्री मोदी ने कहा कि जमीनों के साढ़े तीन लाख नमूने लेकर पौने तीन लाख सोइल हैल्थ कार्ड का वितरण किया गया है। ४१७५ जितने पशु स्वास्थ्य मेलों में ४० लाख पशुओं का टीकाकरण, ४.५ लाख पशुओं का उपचार और ऑपरेशन करके जीवदया का विराट काम किया गया है। छोटे-सीमांत किसानों और आदिवासी किसानों सहित आदिवासी महिलाओं ने भी बीज उत्पादन की पहल की है।

श्री मोदी ने कहा कि तपती गर्मी में इतनी मेहनत करके पूरी सरकार ने कृषि और पशुपाल क्षेत्र के विकास को मजबूती प्रदान की है। इसके साथ ही जल संग्रह के लिए ६४२५ ग्राम तालाब,५०६४१ खेत तालाब और ९६४४ सीम तालाबों का निर्माण किया गया है। राज्य में कृषि महोत्सव के लिए मेहनत करनेवाले सरकारी प्रशासन और कृषि युनिवर्सिटियों के वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं देते हुए श्री मोदी ने कहा कि कृषि किट्स, बागायती किट्स और पशुपालन किट्स सहित कुल ३.७५ लाख किट्स का वितरण किया गया है। कम खर्च में, सीमित जमीन पर भारी उत्पादन और टपक सींचाई द्वारा पूरे गुजरात को शामिल करते हुए रिकॉर्ड बनाने का मुख्यमंत्री ने आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया की यह वर्षा का सीजन भी बेहतर होगा और खेती भी बेहतर होगी।

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की
June 23, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।

प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी को एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता बताया, जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का अटूट विश्वास, सार्वजनिक जीवन में साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी दृढता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में अंकित है।

डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की निस्वार्थ सेवा में समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के गहन विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने संस्कृत में रचित सुभाषितम भी साझा किया:

“न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।”

परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”

सुभाषितम् में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमरत्व कर्मों, धन-दौलत या वंश से नहीं, बल्कि त्याग और महान आदर्शों के प्रति पूर्ण समर्पण से प्राप्त होता है। वे महान आत्माएं जो राष्ट्र, समाज और सत्य के लिए अपने स्वार्थों का त्याग कर देते हैं, समय की सीमाओं को पार करते हुए जनमानस में अमर हो जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर, मैं उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। सार्वजनिक जीवन में उनका अटूट विश्वास, साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। डॉ. मुखर्जी का बलिदान हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित है। हम उनके द्वारा संजोए गए और अपनी अंतिम सांस तक सेवा किए गए मूल्यों के मार्गदर्शन में एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी दृढता की पुष्टि करते हैं।”

“निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र और समाज की सेवा में आजीवन समर्पित रहे देश की महान विभूति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को उनके बलिदान दिवस पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उनके प्रखर विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।

परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”