अर्थव्‍यवस्‍था

भारत आज दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था है। क्‍या हम भारत को बीस ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था बनाने का सपना नहीं देख सकते ?

आप भारत को अपार संभावनाओं से भरे एक देश के रूप में देखेंगे, जो पूरी दुनिया में अद्वितीय है। भारत बाकी दुनिया के लिए आर्थिक वृद्धि और समावेश का आदर्श बन सकता है।

सरकार को एक ऐसा इको-सिस्टम अवश्य तैयार करना चाहिए जहां अर्थव्यवस्था, आर्थिक विकास के लिए हो; और आर्थिक विकास, चहुंमुखी प्रगति को बढ़ावा दे। जहां विकास, रोजगार का सृजन करता हो; और रोजगार, हुनर पर केन्द्रित हो। जहां हुनर का सामंजस्‍य उत्पादन से हो; और उत्पादन, गुणवत्ता के मानदंड के अनुरूप हो। जहां गुणवत्ता, वैश्विक मानदंड पर खरी उतरे; और वैश्विक मानदंडों को पूरा करने से समृद्धि आए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह समृद्धि सभी के कल्याण के लिए हो। आर्थिक सुशासन और चहुंमुखी विकास के लिए यही मेरी अवधारणा है।

विकास

विकास का परिणाम, रोजगार होना चाहिए। हमें न सिर्फ अधिक उत्‍पादन की, बल्कि जनता के लिए और जनता द्वारा उत्‍पादन की जरूरत है।‍ि

ऐसा लगता है कि विकास सिर्फ सरकार का एजेंडा बन चुका है। इसे स्‍कीम के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। विकास हर किसी का एजेंडा होना चाहिए। यह जन आंदोलन होना चाहिए।

आर्थिक विकास खुद-ब-खुद देश को आगे नहीं ले जा सकता। हमें ऐसे समाज और अर्थव्‍यवस्‍था की जरूरत है जो एक-दूसरे के पूरक हों। हमें गरीबों, वंचितों और पीछे छूट गए समाज के तबकों पर ध्‍यान देने की जरूरत है।

सब्सिडी का अंतिम लक्ष्‍य गरीबों को सशक्‍त बनाना और गरीबी के दुष्‍चक्र को तोड़ना एवं गरीबी से जंग में उन्‍हें भागीदार बनाना है। हमें सब्सिडी में हेरा-फेरी को रोकने की जरूरत है सब्सिडी को नहीं।

शासन

सरकारी तंत्र की दो समस्‍याएं हैं - वे जटिल भी हैं और शिथिल भी। हमें इसे बदलने की जरूरत है। हमारे व्यवस्था को पैना, कारगर, तेज तथा लचीला होना चाहिए। इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उनमें नागरिकों का भरोसा बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए नीति निर्देशित राष्‍ट्र की जरूरत है।

मैक्सिमम गवर्नेंस, मिनिमम गवर्नमेंट क्‍या है? इसका मतलब है कि सरकार का काम व्‍यवसाय करना नहीं है।

पहले, सरकार को उन बातों पर ध्‍यान देना चाहिए जिनकी राष्‍ट्र को जरूरत है। दूसरे, सरकार में दक्षता हासिल करने की आवश्‍यकता है ताकि राष्‍ट्र ने जो लक्ष्‍य निर्धारित किया है उसे हासिल किया जा सके।

सुधार

सुधार अपनेआप में लक्ष्‍य नहीं हैं। सुधारों के पीछे ठोस उद्देश्‍य होना चाहिए।

छोटे-छोटे कार्य भी सुधार ला सकते हैं। जो कार्य छोटे लगते हैं, वास्‍तव में वे बेहद महत्वपूर्ण और मूलभूत हो सकते हैं। 20,000 मेगावाट बिजली के उत्‍पादन के लिए बहुत अधिक ध्‍यान दिया जाना चाहिए। यह महत्‍वपूर्ण है। इसके साथ-साथ बिजली बचाने के जन आंदोलन चलाकर भी 20,000 मेगावाट बिजली बचाई जा सकती है। दूसरी उपलब्धि हासिल करना कहीं ज्‍यादा मुश्किल है, लेकिन पहली उपलब्धि की तरह ही बहुत महत्‍वपूर्ण है। छोटा पर खूबसूरत है।

भारत में बदलाव के लिए केवल योजना बनाना ही नहीं, बल्कि प्रमुख संस्थागत सुधार भी जरूरी है। नीति आयोग की स्‍थापना इस दिशा में एक कदम है।

कानून सरकार का डीएनए है। उन्‍हें समय-समय पर नया रूप देते रहना चाहिए।

वित्‍त

हम बजट में घोषित राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने के प्रति कटिबद्ध हैं।

आज हम सभी को बैंक खाते की सुविधा देने वाला देश बनने के काफी करीब पहुंच गए हैं।

वित्‍तीय एकता- हर व्‍यक्ति को वित्‍तीय प्रणाली में शामिल करना; एक ऐसा मुद्दा है जिस पर पूंजीवादी और समाजवादी दोनों ही सहमत हैं। दोस्‍तों, इससे बड़ा सुधार क्‍या हो सकता है?

जीएसटी लागू करने के लिए संविधान में संशोधन के लिए राज्‍यों की सहमति प्राप्‍त करना भी एक बड़ी उपलब्धि है। जीएसटी अकेले ही भारत को निवेश के लिहाज से प्रतिस्‍पर्धी और आकर्षक बना सकता है।

आज भारत में रसोई गैस की सब्सिडी सीधे बैंक खातों में भेजना, दुनिया में सबसे बड़ा नकद हस्‍तांतरण कार्यक्रम है।

मैंने अभी हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को आश्‍वासन दिया है कि वे ऋण और अपने परिचालन के बारे में सरकार की ओर से बिना किसी हस्‍तक्षेप के अपने व्‍यावसायिक निर्णय लेने में पूर्ण रूप से स्‍वतंत्र होंगे।

क्षेत्रवार

सत्‍याग्रह आजादी का मंत्र था। और आजादी के योद्धा सत्‍याग्रही थे। नए जमाने के भारत का मंत्र स्‍वच्‍छताग्रह होना चाहिए। और इसके योद्धा स्‍वच्‍छताग्रही होंगे।

लोगों को क्‍लीन गंगा कार्यक्रम को समझना चाहिए। यह भी एक आर्थिक गतिविधि ही है। गंगा के मैदानी इलाकों में हमारी 40 प्रतिशत आबादी रहती है। इस क्षेत्र में एक सौ से अधिक कस्‍बे और हजारों गांव हैं।

मैं सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कंप्‍यूटरीकृत करने के लिए व्यापक राष्‍ट्रीय कार्यक्रम शुरू करना चाहता हूं।

आसपास के गांव के लिए ये स्‍टेशन आर्थिक विकास के केंद्र बन सकते हैं।

हम भारत का जायका दुनिया तक पहुंचाएंगे।

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इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट के अवसर पर प्रधानमंत्री की मॉरीशस के प्रधानमंत्री के साथ बैठक
February 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के अवसर पर मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम के साथ द्विपक्षीय बैठक की। प्रधानमंत्री रामगुलाम की सितंबर 2025 की राजकीय यात्रा के पश्चात, उनके वर्तमान कार्यकाल में यह दूसरी भारत यात्रा है। यह मुलाकात 09 फरवरी 2026 को दोनों नेताओं के बीच हुई टेलीफोन बातचीत के बाद हुई है।

दोनों नेताओं ने उन्नत रणनीतिक साझेदारी की प्रगति और व्यापार, निवेश, समुद्री सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं डिजिटल सहयोग जैसे बहुआयामी क्षेत्रों में जुड़ाव की समीक्षा की। उभरती प्रौद्योगिकियों की बढ़ती प्रासंगिकता को स्वीकार करते हुए, उन्होंने समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार-आधारित क्षेत्रों में सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

दोनों नेताओं ने मॉरीशस की विकास प्राथमिकताओं के समर्थन में भारत द्वारा दिए गए विशेष आर्थिक पैकेज के कार्यान्वयन की समीक्षा की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि मॉरीशस भारत की विकास साझेदारी के लिए एक रोल मॉडल है, जो आपसी विश्वास और प्रगति के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत के विजन महासागर (MAHASAGAR) और नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत भारत-मॉरीशस साझेदारी के स्थायी महत्व की पुष्टि की। उन्होंने आपसी समृद्धि और ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में इस साझेदारी के योगदान पर विशेष बल दिया।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक मजबूत करने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देने के लिए मिलकर काम करना जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।