2025 के केंद्रीय बजट में भारत में शैक्षिक परिदृश्य को बदलने के उद्देश्य से कई पहल की गई हैं, जिसमें टेक्नोलॉजी, मेडिकल और इनोवेशन के क्षेत्रों में युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। ये उपाय भविष्य के वर्कफोर्स को तेजी से डिजिटल और प्रतिस्पर्धी वैश्विक अर्थव्यवस्था में कामयाब होने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने के लिए पेश किए गए हैं। बजट में उल्लिखित कुछ प्रमुख पहल नीचे दी गई हैं:

भारतनेट पहल के तहत, सरकार ने सभी सरकारी माध्यमिक विद्यालयों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ने की योजना की घोषणा की है। इस कदम से डिजिटल शिक्षण संसाधनों में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे छात्रों को शैक्षिक उपकरणों और सामग्रियों की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुँच प्राप्त होगी। बेहतर कनेक्टिविटी शिक्षा में शहरी-ग्रामीण विभाजन को पाटने और देश भर में दूरस्थ शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और उभरते उद्योगों में कुशल श्रमिकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, सरकार कौशल विकास के लिए समर्पित 5 राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE) स्थापित करेगी। इन केंद्रों को वैश्विक विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के सहयोग से युवाओं को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करके मेक इन इंडिया पहल के साथ संरेखित एक उच्च कुशल कार्यबल विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। वैश्विक विशेषज्ञता और उद्योग भागीदारी का लाभ उठाकर, NCOE अत्याधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेंगे, जिससे भारत के कार्यबल को उभरते क्षेत्रों की मांगों को पूरा करने के लिए सशक्त बनाया जा सकेगा। यह पहल न केवल भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ावा देगी बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्यात करने की इसकी क्षमता को भी बढ़ाएगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसकी स्थिति मजबूत होगी।

केंद्रीय बजट में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) के विस्तार का प्रस्ताव है, ताकि 6,500 अतिरिक्त छात्रों को समायोजित किया जा सके। इस विस्तार के हिस्से के रूप में, IIT पटना में छात्रावास की क्षमता में भी वृद्धि होगी। बजट में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाकर स्वास्थ्य सेवा के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला गया है। पिछले एक दशक में जोड़ी गई 1.1 लाख सीटों के अलावा, चालू वित्त वर्ष में अतिरिक्त 10,000 मेडिकल सीटें जोड़ी जाएंगी। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाना है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 75,000 मेडिकल सीटें जोड़ने की योजना है। इसके अलावा, IIT और IISc में तकनीकी शोध के लिए अगले पांच वर्षों में PM रिसर्च फेलोशिप योजना के तहत 10,000 फेलोशिप प्रदान की जाएंगी।

डिजिटल इनोवेशन की दिशा में भारत के प्रयासों के अनुरूप, सरकार ने शिक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस पहल से शिक्षा क्षेत्र में इनोवेशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 2023 में, सरकार ने कृषि, स्वास्थ्य सेवा और स्थिरता पर केंद्रित AI में उत्कृष्टता के तीन केंद्रों की स्थापना की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में अनुसंधान और व्यावहारिक AI एप्लीकेशन को आगे बढ़ाना है। शिक्षा के लिए AI उत्कृष्टता केंद्र शिक्षकों और शिक्षार्थियों दोनों के लिए AI को एकीकृत करने का एक मजबूत संकेत है। इससे सीखने को बढ़ावा मिलेगा और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी जिससे रोजगार में सुधार होगा,

बजट में छात्रों और अभिभावकों के लिए अनुपालन बोझ को कम करने के उपायों का भी प्रस्ताव है। सरकार ने निर्दिष्ट वित्तीय संस्थानों से ऋण द्वारा फंडेड शिक्षा-संबंधी प्रेषण पर स्रोत पर कर संग्रह (TCS) को समाप्त करने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, माल की बिक्री के लेन-देन पर TCS को हटा दिया जाएगा, जिससे व्यक्तियों के लिए जटिल कर प्रक्रियाओं की परेशानी के बिना शिक्षा-संबंधी भुगतान करना आसान हो जाएगा।

छात्रों में जिज्ञासा, इनोवेशन और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए सरकार अगले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों में 50,000 अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करेगी। ये लैब स्कूली बच्चों को रोबोटिक्स, 3डी प्रिंटिंग और अन्य तकनीक के साथ प्रयोग करने में सक्षम बनाएगी। इससे जिज्ञासा और इनोवेशन की भावना को विकसित करने और युवा दिमागों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि शिक्षा एआई में तकनीकी प्रगति के साथ चलती रहे।

भारतीय भाषा पुस्तक योजना स्कूली और उच्च शिक्षा दोनों में छात्रों के लिए भारतीय भाषाओं में डिजिटल पुस्तकें उपलब्ध कराएगी। इसका उद्देश्य छात्रों को उनके विषयों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना है। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में छात्र डिजिटल प्रारूप में पाठ्यपुस्तकों और सीखने के संसाधनों तक पहुँच सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य विविध भाषाई समूहों के छात्रों के लिए शैक्षिक संसाधनों में अंतर को पाटना है। यह पहल एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए सरकार के पिछले कदमों का भी पूरक है, जैसे कि ASMITA (ऑगमेंटिंग स्टडी मैटेरियल्स इन इंडियन लैंग्वेज़ेज़ थ्रू ट्रांसलेशन एंड अकैडमिक राइटिंग) इनिशिएटिव।

2025 का केंद्रीय बजट शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य सेवा के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को संबोधित करके भारत के युवाओं के प्रति एक मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्कूलों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना और आईआईटी और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार जैसी पहलों के साथ, सरकार देश भर में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। डिजिटल टूल, एआई रिसर्च और इनोवेशन पर ध्यान केंद्रित करना भी भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए अगली पीढ़ी को तैयार करने के उद्देश्य से एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को उजागर करता है।

ये पहलें, पूरी तरह लागू होने के बाद, शैक्षिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखती हैं और भारत भर के छात्रों के लिए एक अधिक समावेशी और इनोवेटिव एनवायरनमेंट तैयार कर सकती हैं।

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को किया याद
August 14, 2026
प्रधानमंत्री ने परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हम विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास का वह एक ऐसा क्षण था जिसने कई जिंदगियां तबाह कर दीं, लोगों के परिवार उजड़ गए, कई लोगों को अपनों को खोना पड़ा और लोगों ने अत्यधिक पीड़ा झेली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में भी लोगों ने शून्य से शुरू कर अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धियों में बदला और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का जीवन सभी को मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाता है। श्री मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने तथा विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करे।

प्रधानमंत्री ने उस भयावह दौर से उबरकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान देने वाले सभी देशवासियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने साहस और क्षमता से उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को साकार करने का उदाहरण प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने सभी से सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने एक सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि परिश्रम, उद्यम और समर्पित प्रयासों से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प तथा नवाचार विकसित होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसलिए, किसी को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्यों की ओर दृढ़ता से अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:

आज हम #PartitionHorrorsRemembranceDay मना रहे हैं। विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को हम याद करते हैं। इतिहास का वह क्षण कई जिंदगियों को तहस-नहस कर देने वाला था…परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खोया और असहनीय पीड़ा सहनी पड़ी।
इन सब पर विजय प्राप्त करते हुए, लोगों ने शून्य से अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपत्ति को सफलता में परिवर्तित किया और राष्ट्र की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उनकी जीवन यात्राएं हमें मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाती हैं। आशा है कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा और हम सब मिलकर एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।

उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”

It is through hard work, enterprise and dedicated effort that diverse arts, science, technological skills, craftsmanship and innovations flourish, paving the way for success. Therefore, one should not remain dependent on fate; rather, one should move steadily towards one's goals with courage, diligence and persistent effort, for it is human endeavor that shapes destiny.