कुवैत राज्य के महामहिम अमीर शेख मेशल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह के निमंत्रण पर, भारत के प्रधानमंत्री महामहिम श्री नरेन्द्र मोदी ने 21-22 दिसंबर 2024 को कुवैत की आधिकारिक यात्रा की। यह उनकी कुवैत की पहली यात्रा थी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 21 दिसंबर 2024 को कुवैत में 26वें अरेबियन गल्फ कप के उद्घाटन समारोह में महामहिम अमीर शेख मेशल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह के 'सम्मानित अतिथि' के रूप में भाग लिया।

कुवैत के महामहिम अमीर शेख मेशल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह और कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबा अल-खालिद अल-सबाह अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह ने 22 दिसंबर 2024 को बयां पैलेस में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अगवानी की और उनका औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कुवैत राज्य का सर्वोच्च पुरस्कार 'ऑर्डर ऑफ मुबारक अल कबीर' प्रदान करने के लिए कुवैत के महामहिम अमीर शेख मेशल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह के प्रति अपनी गहरी सराहना व्यक्त की। राजनेताओं ने आपसी हित के द्विपक्षीय, वैश्विक, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

पारंपरिक, घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों और सभी क्षेत्रों में सहयोग को प्रगाढ़ करने की इच्छा को देखते हुए, दोनों राजनेताओं ने भारत और कुवैत के बीच संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यह दोनों देशों के साझा हितों के अनुरूप है और दोनों देशों के लोगों के पारस्परिक लाभ के लिए है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की स्थापना से हमारे दीर्घकालिक ऐतिहासिक संबंधों को और व्यापक तथा प्रगाढ़ बनाया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कुवैत राज्य के प्रधानमंत्री महामहिम शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-जबर अल-मुबारक अल-सबाह के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। नव स्थापित रणनीतिक साझेदारी के आलोक में, दोनों पक्षों ने राजनीतिक, व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, संस्कृति, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और लोगों के आपसी संबंध सहित प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक और व्यवस्थित सहयोग के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

दोनों पक्षों ने साझा इतिहास और सांस्कृतिक समानताओं पर आधारित सदियों पुराने ऐतिहासिक संबंधों को याद किया। उन्होंने विभिन्न स्तरों पर नियमित बातचीत पर संतोष व्यक्त किया, जिसने बहुआयामी द्विपक्षीय सहयोग में गति पैदा करने और उसे बनाए रखने में मदद की है। दोनों पक्षों ने मंत्रिस्तरीय और वरिष्ठ-अधिकारी स्तरों पर नियमित द्विपक्षीय आदान-प्रदान के माध्यम से उच्च स्तरीय आदान-प्रदान में हाल की गति को बनाए रखने पर जोर दिया।

दोनों पक्षों ने भारत और कुवैत के बीच हाल ही में सहयोग पर संयुक्त आयोग (जेसीसी) की स्थापना का स्वागत किया। जेसीसी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण आयाम की समीक्षा और निगरानी करने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था होगी और इसका नेतृत्व दोनों देशों के विदेश मंत्री करेंगे। विभिन्न क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ाने के लिए, स्वास्थ्य, जनशक्ति और हाइड्रोकार्बन पर मौजूदा जेडब्ल्यूजी के अलावा व्यापार, निवेश, शिक्षा और कौशल विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी, कृषि और संस्कृति के क्षेत्रों में नए संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) स्थापित किए गए हैं। दोनों पक्षों ने जल्द से जल्द जेसीसी और इसके तहत जेडब्ल्यूजी की बैठकें आयोजित करने पर जोर दिया।

दोनों पक्षों ने कहा कि व्यापार दोनों देशों के बीच एक स्थायी कड़ी रहा है और द्विपक्षीय व्यापार में और वृद्धि व विविधीकरण की संभावना पर जोर दिया। उन्होंने व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और संस्थागत संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

यह मानते हुए कि भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से बढ़ रही उभरती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और कुवैत की महत्वपूर्ण निवेश क्षमता को स्वीकार करते हुए, दोनों पक्षों ने भारत में निवेश के विभिन्न अवसरों पर चर्चा की। कुवैती पक्ष ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और विदेशी संस्थागत निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में भारत द्वारा उठाए गए कदमों का स्वागत किया तथा प्रौद्योगिकी, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य-सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अवसरों का पता लगाने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने कुवैत के निवेश अधिकारियों और भारतीय संस्थानों, कंपनियों और कोषों के बीच घनिष्ठ और अधिक जुड़ाव की आवश्यकता को स्वीकार किया। उन्होंने दोनों देशों की कंपनियों को अवसंरचना परियोजनाओं में निवेश करने और भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने दोनों देशों के संबंधित अधिकारियों को द्विपक्षीय निवेश संधि पर चल रही बातचीत को तेजी से आगे बढ़ाने और पूरा करने का भी निर्देश दिया।

दोनों पक्षों ने ऊर्जा क्षेत्र में अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार पर संतोष व्यक्त करते हुए, वे इस बात पर सहमत हुए कि इसे और बढ़ाने की क्षमता मौजूद है। उन्होंने सहयोग को क्रेता-विक्रेता संबंध से आगे अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में अधिक सहयोग के साथ व्यापक साझेदारी में बदलने के तरीकों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने तेल और गैस के अन्वेषण और उत्पादन, रिफाइनिंग, इंजीनियरिंग सेवाओं, पेट्रोकेमिकल उद्योगों, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों की कंपनियों को समर्थन देने की इच्छा व्यक्त की। दोनों पक्षों ने भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व कार्यक्रम में कुवैत की भागीदारी पर चर्चा करने पर भी सहमति व्यक्त की।

दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि रक्षा, भारत और कुवैत के बीच रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण घटक है। दोनों पक्षों ने रक्षा के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का स्वागत किया जो संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा कर्मियों के प्रशिक्षण, तटीय रक्षा, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और उत्पादन सहित द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के लिए आवश्यक रूपरेखा प्रदान करेगा।

दोनों पक्षों ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट रूप से निंदा की और आतंकवाद के वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों को बाधित करने और आतंकी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने का आह्वान किया। सुरक्षा के क्षेत्र में वर्तमान में चल रहे द्विपक्षीय सहयोग की सराहना करते हुए, दोनों पक्षों ने आतंकवाद-रोधी अभियानों, सूचना और खुफिया जानकारी साझा करने, अनुभवों, सर्वोत्तम तौर-तरीकों और प्रौद्योगिकियों के विकास व आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाने और कानून प्रवर्तन, धन शोधन विरोधी, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य अंतरराष्ट्रीय अपराधों में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने साइबर सुरक्षा में सहयोग को बढ़ावा देने के तरीकों और उपायों पर चर्चा की, जिसमें आतंकवाद, कट्टरपंथ और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने के लिए साइबरस्पेस के उपयोग की रोकथाम शामिल है। भारतीय पक्ष ने "आतंकवाद का मुकाबला करने और सीमा सुरक्षा के लिए सुदृढ़ तंत्र बनाने में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने - दुशांबे प्रक्रिया का कुवैत चरण" पर चौथे उच्च स्तरीय सम्मेलन के परिणामों की प्रशंसा की, जिसे 4-5 नवंबर, 2024 को कुवैत राज्य द्वारा आयोजित किया गया था।

दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक के रूप में स्वीकार किया और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। दोनों पक्षों ने कोविड-19 महामारी के दौरान द्विपक्षीय सहयोग की सराहना की। उन्होंने कुवैत में भारतीय दवा निर्माण संयंत्र स्थापित करने की संभावना पर चर्चा की। उन्होंने औषधि नियामक प्राधिकरणों के बीच समझौता ज्ञापन पर चल रही चर्चाओं में चिकित्सा उत्पाद विनियमन के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की अपनी इच्छा भी व्यक्त की।

दोनों पक्षों ने उभरती प्रौद्योगिकियों, सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में गहन सहयोग को मजबूत करने में रुचि व्यक्त की। उन्होंने बी2बी सहयोग का पता लगाने, ई-गवर्नेंस को आगे बढ़ाने तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्र में नीतियों और विनियमन में दोनों देशों के उद्योगों/कंपनियों की सुविधा के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के तरीकों पर चर्चा की।

कुवैती पक्ष ने भारत के साथ खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग में भी रुचि व्यक्त की। दोनों पक्षों ने भारत के खाद्य पार्कों में कुवैती कंपनियों द्वारा निवेश सहित सहयोग के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की।

भारतीय पक्ष ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) का सदस्य बनने के कुवैत के फैसले का स्वागत किया, जो कार्बन के कम उत्सर्जन से जुड़े तरीकों को विकसित करने और तैनात करने तथा सतत ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देने में सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों पक्ष आईएसए के तहत दुनिया भर में सौर ऊर्जा की स्थापना बढ़ाने की दिशा में मिलकर काम करने पर सहमत हुए।

दोनों पक्षों ने दोनों देशों के नागरिक विमानन अधिकारियों के बीच हाल की बैठकों का उल्लेख किया। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय उड़ान सीट क्षमताओं की वृद्धि और संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने शीघ्र ही पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान तक पहुंचने के लिए चर्चा जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।

2025-2029 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (सीईपी) के नवीनीकरण की सराहना करते हुए, जो कला, संगीत और साहित्य उत्सवों में अधिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करेगा, दोनों पक्षों ने लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

दोनों पक्षों ने 2025-2028 के लिए खेल के क्षेत्र में सहयोग पर कार्यकारी कार्यक्रम पर हस्ताक्षर किये जाने पर संतोष व्यक्त किया, जो दोनों देशों के बीच खिलाड़ियों के आपसी आदान-प्रदान और दौरे, कार्यशालाओं, सेमिनारों और सम्मेलनों के आयोजन, खेल प्रकाशनों के आदान-प्रदान सहित खेल के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करेगा।

दोनों पक्षों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि शिक्षा सहयोग का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें दोनों देशों के उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच संस्थागत संबंधों और आदान-प्रदान को मजबूत करना शामिल है। दोनों पक्षों ने शैक्षिक प्रौद्योगिकी पर सहयोग करने तथा शैक्षिक अवसंरचना को आधुनिक बनाने के लिए ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों और डिजिटल पुस्तकालयों के अवसरों की खोज करने में भी रुचि व्यक्त की।

शेख सऊद अल नासिर अल सबा कुवैती डिप्लोमैटिक इंस्टीट्यूट और सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस (एसएसआईएफएस) के बीच समझौता ज्ञापन के तहत गतिविधियों के हिस्से के रूप में, दोनों पक्षों ने नई दिल्ली के एसएसआईएफएस में कुवैत के राजनयिकों और अधिकारियों के लिए विशेष पाठ्यक्रम आयोजित करने के प्रस्ताव का स्वागत किया।

दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि सदियों पुराने लोगों के बीच आपसी संबंध ऐतिहासिक भारत-कुवैत संबंधों के एक मूलभूत स्तंभ का प्रतिनिधित्व करते हैं। कुवैती नेतृत्व ने अपने देश की प्रगति और विकास के लिए कुवैत में भारतीय समुदाय द्वारा निभायी गई भूमिका और योगदान के लिए गहरी प्रशंसा व्यक्त की, इस बात का उल्लेख करते हुए कि कुवैत में भारतीय नागरिकों को उनके शांतिपूर्ण और मेहनती स्वभाव के लिए बहुत सम्मान दिया जाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कुवैत में बड़े और जीवंत भारतीय समुदाय के कल्याण और भलाई को सुनिश्चित करने के लिए कुवैत के नेतृत्व की सराहना की।

दोनों पक्षों ने जनशक्ति गतिशीलता और मानव संसाधन के क्षेत्र में दीर्घकालिक और ऐतिहासिक सहयोग की गहराई और महत्व पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने प्रवासियों, श्रम गतिशीलता और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने के लिए कांसुलर वार्ता के साथ-साथ श्रम और जनशक्ति वार्ता की नियमित बैठकें आयोजित करने पर सहमति जताई।

दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर दोनों पक्षों के बीच उत्कृष्ट समन्वय की सराहना की। भारतीय पक्ष ने 2023 में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की भारत की अध्यक्षता के दौरान एससीओ में 'वार्ता भागीदार' के रूप में कुवैत के प्रवेश का स्वागत किया। भारतीय पक्ष ने एशियाई सहयोग वार्ता (एसीडी) में कुवैत की सक्रिय भूमिका की भी सराहना की। कुवैती पक्ष ने एसीडी को एक क्षेत्रीय संगठन में बदलने की संभावना तलाशने के लिए आवश्यक प्रयास करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस वर्ष कुवैत द्वारा जीसीसी की अध्यक्षता ग्रहण करने पर महामहिम अमीर को बधाई दी तथा विश्वास व्यक्त किया कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व में भारत-जीसीसी के बीच बढ़ता सहयोग और मजबूत होगा। दोनों पक्षों ने 9 सितंबर 2024 को रियाद में आयोजित विदेश मंत्री स्तर रणनीतिक वार्ता के लिए पहली भारत-जीसीसी संयुक्त मंत्रिस्तरीय बैठक के परिणामों का स्वागत किया। जीसीसी के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में कुवैती पक्ष ने स्वास्थ्य, व्यापार, सुरक्षा, कृषि और खाद्य सुरक्षा, परिवहन, ऊर्जा, संस्कृति आदि क्षेत्रों में हाल ही में अपनाई गई संयुक्त कार्य योजना के तहत भारत-जीसीसी सहयोग को गहरा करने के लिए पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। दोनों पक्षों ने भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र पूरा करने के महत्व पर भी बल दिया।

संयुक्त राष्ट्र सुधारों के संदर्भ में, दोनों राजनेताओं ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने में एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने वाले संयुक्त राष्ट्र पर केंद्रित एक प्रभावी बहुपक्षीय प्रणाली के महत्व पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने सदस्यता की दोनों श्रेणियों में विस्तार के माध्यम से सुरक्षा परिषद सहित संयुक्त राष्ट्र सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि इसे अधिक प्रतिनिधित्व आधारित, विश्वसनीय और प्रभावी बनाया जा सके।

यात्रा के दौरान निम्नलिखित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर/आदान-प्रदान किए गए, जो बहुआयामी द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेंगे तथा सहयोग के नए क्षेत्रों के लिए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेंगे:

  • रक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर भारत और कुवैत के बीच समझौता ज्ञापन।
  • वर्ष 2025-2029 के लिए भारत और कुवैत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम।
  • युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारत सरकार तथा युवा और खेल सार्वजनिक प्राधिकरण, कुवैत सरकार के बीच वर्ष 2025-2028 के लिए खेल के क्षेत्र में सहयोग पर भारत और कुवैत के बीच कार्यकारी कार्यक्रम।
  • कुवैत की अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की सदस्यता।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें और उनके प्रतिनिधिमंडल को दिए गए गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए कुवैत राज्य के महामहिम अमीर को धन्यवाद दिया। इस यात्रा ने भारत और कुवैत के बीच मित्रता और सहयोग के मजबूत संबंधों की पुष्टि की। राजनेताओं ने आशा व्यक्त की कि यह नई साझेदारी बढ़ती रहेगी, जिससे दोनों देशों के लोगों को लाभ होगा तथा क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में योगदान मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कुवैत के महामहिम अमीर शेख मेशल अल-अहमद अल-जबर अल-सबाह, क्राउन प्रिंस महामहिम शेख सबा अल-खालिद अल-सबाह अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह और कुवैत के प्रधानमंत्री महामहिम शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-जबर अल-मुबारक अल-सबाह को भारत आने का निमंत्रण भी दिया।

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Developed nations are eager to sign trade deals with India because a confident India is rising beyond doubt and despair: PM
In the last 11 years, a new energy has flowed into the nation's consciousness, India is determined to regain its rightful strength: PM
India's Digital Public Infrastructure has today become a subject of global discussion: PM
Today, every move India makes is closely watched and analysed across the world, the AI Summit is a clear example of this: PM
Nation-building never happens through short-term thinking; It is shaped by a long-term vision, patience and timely decisions: PM

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।