प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति रूसेफ़, प्रधानमंत्री शिंजो अबे, चांसलर मर्केल ने न्यूयॉर्क में जी-4 शिखर सम्मेलन में भाग लिया
जी-4 के नेताओं ने एक ऐसे सुरक्षा परिषद पर जोर दिया जो और अधिक प्रतिनिधिक, न्यायसंगत एवं प्रभावी हो
जी-4 के नेताओं ने पाठ (टेक्स्ट) आधारित वार्ता की दिशा में आईजीएन प्रक्रिया बढ़ाने में श्री सैम कुटेसा एवं राजदूत कोर्टनी राट्रे की सराहना की
विस्तारित एवं पुनर्गठित सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत, जापान, ब्राजील, जर्मनी वैध उम्मीदवार: जी-4 देशों के प्रमुख
जी-4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे की उम्मीदवारी का समर्थन किया

26 सितंबर, 2015 को भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी ने न्‍यूयार्क में जी-4 की बैठक के लिए ब्राजील की राष्‍ट्रपति महामहिम श्रीमती डिल्‍मा राउसेफ, जर्मनी की चांसलर महामहिम सुश्री एंजेला मर्केल और जापान के प्रधानमंत्री महामहिम श्री शिंजो आबे को आमंत्रित किया। 

जी-4 के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक संघर्षों एवं संकटों, जो हाल के वर्षों में उत्‍तरोत्‍तर बढ़ा है, से निपटने के लिए पहले की तुलना में आज अधिक प्रतिनिधिमूलक, वैध तथा कारगर सुरक्षा परिषद की अधिक जरूरत है। उन्‍होंने इस विचार को साझा किया कि 21वीं शताब्‍दी में अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय की सच्‍चाइयों को प्रतिबिंबित करके इसे प्राप्‍त किया जा सकता है, जहां अधिक सदस्‍य देशों के पास अंतर्राष्‍ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के संबंध में क्षमता तथा जिम्‍मेदारी ग्रहण करने की तत्‍परता हो।

इस संदर्भ में, नेताओं ने सरोकार के साथ नोट किया कि 2005 की विश्‍व शिखर बैठक के बाद कोई सारवान प्रगति नहीं हुई है, जहां राष्‍ट्राध्‍यक्षों एवं शासनाध्‍यक्षों ने सर्वसम्‍मति से सुरक्षा परिषद के जल्‍दी से सुधार का संयुक्‍त राष्‍ट्र सुधार के समग्र प्रयास के एक आवश्‍यक घटक के रूप में समर्थन किया था। उन्‍होंने इस बात पर बहुत बल दिया कि सुरक्षा परिषद में सुधार लाने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र में जो प्रक्रिया चल रही है वह नियत समय सीमा में इसकी तत्‍काल आवश्यकता को देखते हुए पूरी होनी चाहिए। 

नेताओं ने 69वीं महासभा के अध्‍यक्ष के गतिशील नेतृत्‍व तथा पाठ आधारित वार्ता की दिशा में आई जी एन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अंतर्सरकारी वार्ता (आईजीएन) के अध्‍यक्ष के प्रयासों के लिए अपना आभार व्‍यक्‍त किया। उन्‍होंने आईजीएन के अंदर वार्ता के लिए आधार के रूप में 69वीं महासभा के अध्‍यक्ष द्वारा अपने पत्र दिनांक 31 जुलाई, 2015 में प्रस्‍तुत पाठ के प्रयोग के लिए महासभा के निर्णय 69/560 को सर्वसम्‍मति से अपनाए जाने का स्‍वागत किया। उन्‍होंने 70वीं महासभा के अध्‍यक्ष का समर्थन करने एवं उनके साथ सहयोग करने की भी शपथ ली।

नेताओं ने पाठ आधारित वार्ता की दिशा में आगे बढ़ने में सदस्‍य देशों के प्रयासों की भी प्रशंसा की। विशेष रूप से, उन्‍होंने अफ्रीकी समूह, कैरीकॉम और एल-69 समूह के सदस्‍य देशों द्वारा किए गए प्रयासों का स्‍वागत किया। उन्‍होंने सुरक्षा परिषद की स्‍थाई एवं अस्‍थाई दोनों श्रेणी की सदस्‍यता में अफ्रीका के प्रतिनिधित्‍व का समर्थन किया। उन्‍होंने विस्‍तारित एवं संशोधित सुरक्षा परिषद में छोटे द्वीपीय विकासशील देशों सहित छोटे एवं मझोले आकार के सदस्‍य देशों के पर्याप्‍त एवं सतत प्रतिनिधित्‍व के महत्‍व का भी उल्लेख किया। 

नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जी-4 के देश संशोधित एवं विस्‍तारित सुरक्षा परिषद में स्‍थाई सदस्‍यता के लिए वैध उम्‍मीदवार हैं और उन्‍होंने एक–दूसरे की उम्‍मीदवारी का समर्थन किया। उन्‍होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र चार्टर के प्रयोजनों एवं सिद्धांतों की पूर्ति में लगातार योगदान करने के अपने संकल्‍प की भी फिर से पुष्टि की। उन्‍होंने सभी सदस्‍य देशों के साथ मिलकर काम करने तथा सुरक्षा परिषद का शीघ्रता से एवं सार्थक सुधार प्राप्‍त करने की दिशा में पहुंच को तेज करने की भी शपथ ली। उन्‍होंने महासभा के 70वें सत्र के दौरान ठोस परिणाम प्राप्‍त करने की दिशा में अपने प्रयासों को फिर से दोगुना करने के लिए अपना दृढ़ निश्‍चय व्‍यक्‍त किया।

न्यूयार्क में जी-4 की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री के उद्घाटन वक्तव्य को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश में एनएच-34 के कानपुर-कबराई खंड के 4/6 लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड खंड के निर्माण को बीओटी (टोल) मोड पर 7145.14 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत से मंजूरी दी
July 01, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज राष्ट्रीय राजमार्ग (ओ) कार्यक्रम के अंतर्गत भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारे के एक महत्वपूर्ण खंड के रूप में 117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबराई एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड गलियारा है जिसमें भविष्य में छह लेन तक विस्तारित करने की व्यवस्था भी है। 7145.14 करोड़ रुपये की अनुमानित कुल पूंजी लागत वाली इस परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा बीओटी (टोल) मोड पर कार्यान्वित किया जाएगा, साथ ही एनएच-34 के मौजूदा कानपुर-कबराई खंड का संचालन और रखरखाव भी किया जाएगा।

यह परियोजना कानपुर और कबराई के बीच निर्बाध, उच्च गति की कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, साथ ही सागर, भोपाल और मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों तक आगे की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य प्रदेश के खनिज-समृद्ध, विनिर्माण और कृषि क्षेत्रों से जोड़ने वाला एक आधुनिक पहुंच नियंत्रित आर्थिक गलियारा बनेगा और इस प्रकार इसमें सुधार होगा।

80-100 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति के लिए डिज़ाइन किया गया यह कॉरिडोर कानपुर और कबराई के बीच यात्रा समय को 3.5 घंटे से घटाकर 1.5 घंटे (58 प्रतिशत) कर देगा, साथ ही सड़क सुरक्षा में सुधार करेगा, वाहन परिचालन लागत को कम करेगा और यात्री एवं माल यातायात की कुशल आवाजाही को सुगम बनाएगा। यह परियोजना एनएच-34, एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड और राज्य राजमार्ग एसएच-46, एसएच-91, एसएच-10बी और एसएच-42 के साथ रणनीतिक संपर्क भी प्रदान करेगी, जिससे क्षेत्रीय राजमार्ग नेटवर्क के साथ एकीकरण मजबूत होगा। यह कॉरिडोर कबराई खनन क्षेत्र से संपर्क को और मजबूत करेगा, खनिजों, औद्योगिक वस्तुओं, निर्माण सामग्री और कृषि उत्पादों की आवाजाही में सुधार करेगा, जिससे रसद दक्षता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप, यह परियोजना 16 आर्थिक नोड से कनेक्टिविटी में सुधार करेगी, जिनमें उन्नाव, बंथर, पंखी, रनिया, जैनपुर, रूमा, चकेरी, सुमेरपुर और भूरागढ़ औद्योगिक क्षेत्र, ट्रांस गंगा इंटीग्रेटेड टाउनशिप, ग्रोथ सेंटर जयपुर, कानपुर नगर नोड और बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड शामिल हैं। यह 9 सोशल नोड, अर्थात् फतेहपुर, महोबा, कानपुर जूलॉजिकल पार्क, बुद्ध पार्क, जेके मंदिर और जेके मंदिर से कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगी। गार्डन, राधा कृष्ण मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, गोपेश्वर मंदिर और महोबा पर्यटक स्थल, और 10 लॉजिस्टिक नोड, जिनमें कानपुर, घाटमपुर, हमीरपुर, महोबा, कबरई, भरवा सुमेरपुर और बांदा रेलवे स्टेशन, साथ में कानपुर, चकेरी और खजुराहो हवाई अड्डे शामिल हैं।

कुल मिलाकर, पीएम गतिशक्ति के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए, बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में रसद प्रतिस्पर्धात्मकता, औद्योगिक विकास और आर्थिक विकास में सुधार करना इसका लक्ष्‍य है।

इस परियोजना से निर्माण के दौरान प्रति लेन प्रति किलोमीटर लगभग 11,188 प्रत्यक्ष और 13,985 अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2028 तक इसकी वार्षिक औसत दैनिक यातायात (एएडीटी) लगभग 18,069 यात्री कार इकाइयों (पीसीयू) तक पहुंचने का अनुमान है, जो इसके दीर्घकालिक आर्थिक, रसद और परिवहन महत्व को दर्शाता है। इस प्रकार प्रस्तावित परियोजना से लगभग 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा।

कॉरिडोर का नक्शा: