नरेंद्र मोदी की केन्या यात्रा - प्रधानमंत्री स्तर पर 35 साल में यह पहली यात्रा थी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केन्या के रक्षा बलों के लिए 30 एंबुलेंस प्रदान किया
दोनों देशों ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक नए वैश्विक संकल्प और रणनीति के निर्माण में सहमति जताई
स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कैंसर थेरेपी मशीन - भाभाट्रॉन उपहार देने की घोषणा की
‘भारत महोत्सव’ 2016 के अक्टूबर-नबंवर के दौरान केन्या में आयोजित किया जाएगा: प्रधानमंत्री मोदी

महामहिम उहुरू केन्याता के निमंत्रण पर महामहिम नरेंद्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री केन्या की राजकीय यात्रा पर 10 से 11 जुलाई 2016 को गए। प्रधानमंत्री स्तर पर 35 साल में यह पहली यात्रा थी।
दोनों नेताओं ने केन्या और भारत के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधो का आह्वान किया और सहमति जताई कि राजकीय भेंट द्विपक्षीय सहयोग को पुनर्जीवित करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर सहयोग तेज करने के लिए नए क्षेत्रों का पता लगाता है। दोनों प्रमुखों ने इसकी प्राप्ति के लिए, अपने उत्कृष्ट संबंधों की निरंतर विस्तार और आपसी हित के सभी क्षेत्रों में गति प्रदान करने के लिए सहयोग की प्रतिबद्धता को दोहराया।
आवश्यकता से प्रेरित होकर दोनों सरकारों के बीच संलग्नता की सुविधा के लिए एक ठोस ढांचा स्थापित करने के लिए यात्रा के दौरान निम्नलिखित द्विपक्षीय समझौतों पर सहमति बनी है:

I. रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन।
II. राष्ट्रीय आवास नीति विकास और प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन।
III. दोहरे कराधान और आय पर करों से संबंधित राजकोषीय अपवंचन की रोकथाम के लिए करार।
IV. भारतीय मानक ब्यूरो और केन्या मानक ब्यूरो के बीच समझौता ज्ञापन
V. राजनयिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा की छूट पर करार।
VI. छोटे और मध्यम उद्यमों के विकास के लिए आईडीबी कैपिटल लिमिटेड के साथ $ 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लिए ऋण सहायता [एसएमई]।
VII. रिफ्ट वैली कपड़ा फैक्टरी के उन्नयन के लिए $ 29.95 मिलियन अमेरिकी डॉलर का केन्या सरकार के साथ ऋण करार [आरआईवीएटीईएक्स)।

दोनों नेताओं ने मजबूत रक्षा सहयोग की सराहना की और इन संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केन्या के रक्षा बलों के लिए 30 एंबुलेंस प्रदान किया। राष्ट्रपति उहुरू केन्याता ने इस उपहार के लिए उनको धन्यवाद दिया और केन्या के रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में भारत के समर्थन की सराहना की। केन्याई पक्ष ने रक्षा उपकरणों के प्राप्ति के लिए भारत के ऋण सहायता प्रस्ताव का उल्लेख किया। दोनों पक्ष इस क्षेत्र में सहयोग जारी रखने और आतंकवाद का मुकाबला, साइबर सुरक्षा, दवाओं और मानव तस्करी का मुकाबला करने के लिए जानकारी और विशेषज्ञता को साझा करने पर सहमत हुए। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र के व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने में तेजी लाने सहित, आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक नई वैश्विक संकल्प और रणनीति के निर्माण में एक साथ काम करने पर सहमति जताई।

दोनों पक्षों ने आपसी हित में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का प्रयोग शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए करने पर सहमति जताई। भारत ने केन्या के साथ, अंतरिक्ष आधारित संभावनाओं की विशेषज्ञता को प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, मौसम की भविष्यवाणी और आपदा प्रबंधन के पहचान के लिए साझा करने पर सहमति जताई है।

भारत ने जियोथर्मल और कृषि मशीनीकरण परियोजनाओं के लिए ऋण सहायता (एलओसी) को बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। राष्ट्रपति उहुरू केन्याता ने भारत के प्रस्ताव का स्वागत किया और कहा कि प्रस्तावित ऋण सहायता से इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रपति ने $ 29.95 मिलियन अमेरिकी डॉलर ऋण सहायता रिफ्ट वैली कपड़ा फैक्टरी (आरआईवीएटीईएक्स) के उन्नयन के लिए और $ 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर ऋण सहायता, आईडीबी कैपिटल लिमिटेड और छोटे और मध्यम उद्यमों [एसएमई) के विकास के लिए, पर हस्ताक्षर करने की सराहना की। उन्होंने भारतीय कंपनियों द्वारा $ 61.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर ऋण सहायता के तहत विद्युत संचरण लाइन परियोजनाओं के निष्पादन की भी सराहना की।

दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने केन्याई बिजनेस फोरम और भारतीय व्यवसायियों को संबोधित किया और दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों द्वारा मौजूदा व्यापार और निवेश से फायदा उठाने पर जोर दिया। केन्या से भारत को दालों के निर्यात की संभावना का भी पता लगाया गया। इसके अलावा, दोनों प्रमुखों ने संयुक्त व्यापार समिति को दोनों देशों के बीच व्यापार सहयोग बढ़ाने के तरीके का पता लगाने का काम सौंपा।
केन्या ने भारतीय पहल 'भारतीय प्रौद्योगिकी और नवाचारों के माध्यम से अफ्रीकी विकास' (एडीआईटीआई) का, साझेदारी तथा प्रौद्योगिकी और नवाचारों का व्यावसायीकरण और कार्यान्वन का पता लगाने के लिए स्वागत किया है, जिसका उद्देश्य अफ्रीका और भारत दोनों के विकास को प्रोत्साहित करना है।

दोनों नेता स्वास्थ्य और दवा के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए, एक टेली कोबाल्ट कैंसर थेरेपी मशीन उपहार देने की घोषणा की — भाभाट्रॉन II; एक आवश्यक/एआरवी दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का दान और स्वास्थ्य क्षेत्र में क्षमता निर्माण/प्रशिक्षण कार्यक्रम। भारतीय पक्ष ने केन्या में एक 100 बिस्तर का कैंसर अस्पताल की स्थापना के लिए ऋण सहायता का आश्वासन दिया है। राष्ट्रपति उहुरू केन्याता ने केन्यावासियों के लिए कैंसर इलाज के अच्छे प्रबंधन के लिए सराहना की।

शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के महत्व को देखते हुए, केन्या के लिए छात्रवृत्ति बढ़ाने के भारत के प्रस्ताव की, केन्याई स्नातकों के प्रशिक्षण, जो कि उनके अर्थव्यवस्था में सकारात्मक योगदान कर रहे हैं, इसके लिए भारतीय विश्वविद्यालयों की भूमिका की राष्ट्रपति उहुरू केन्याता ने सराहना की। उन्होंने भारत से, चिकित्सा, फार्मेसी, दंत चिकित्सा और आईसीटी क्षेत्रों में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को विस्तार करने का अनुरोध किया, जो कि केन्या के राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के लिए प्रासंगिक हैं।

दोनों प्रमुखों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में, लोगों के बीच संपर्कों और सांस्कृतिक बातचीत के महत्व को दोहराया। दोनों पक्षों ने 2016-19 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (सीईपी) को नवीनीकृत करने के लिए प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो संस्कृति सहयोग के क्षेत्र में एक रूपरेखा प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की, कि ‘भारत महोत्सव’ 2016 के अक्टूबर, नबंवर में केन्या में आयोजित किया जाएगा। दोनों नेताओं ने नैरोबी विश्वविद्यालय में भारतीय अध्ययन के लिए भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) विभाग के स्थापना का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने नैरोबी विश्वविद्यालय में, महात्मा गांधी स्नातकोत्तर लाइब्रेरी के नवीकरण के लिए $ 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर अनुदान देने की घोषणा की। केन्या के फिल्म उद्योग को विकसित करने के अनुरोध के प्रत्युतर में, भार

ने नैरोबी में फिल्म निर्माण के लिए भारतीय संकाय प्रतिनियुक्ति करने की पेशकश की। दोनों पक्षों में एथलेटिक्स और क्रिकेट में प्रशिक्षण के लिए कोचों के आदान-प्रदान पर सहमति हुई, जो कि खेल में सहयोग को बढ़ावा देने का एक तरीका है।
राष्ट्रपति उहुरू केन्याता ने 30 नवंबर 2015 को, भारत के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के शुभारंभ के लिए बधाई दी। दोनों नेताओं ने अपने-अपने सरकारों द्वारा आईएसए के उद्देश्यों को, प्रौद्योगिकी, वित्त, अनुसंधान और विकास तथा क्षमता निर्माण की उपलब्धता को सुविधाजनक बना के, सौर ऊर्जा के त्वरित विकास और परिनियोजन पर सहमति व्यक्त की। उल्लेखनीय है कि क्षमता निर्माण, ऊर्जा का उपयोग और सुरक्षा हासिल करने में एक अनिवार्य तत्व है, भारत स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा संचरण के क्षेत्रों में, नवीकरणीय ऊर्जा के ग्रिड एकीकरण, ग्रिड प्रबंधन और ऊर्जा दक्षता के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहायता करेगा। भारत ने इस दिशा में, एलईडी स्मार्ट सड़क प्रकाश व्यवस्था और घरेलू उपयोग के लिए एलईडी बल्ब के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता की पेशकश की है।

दोनों नेताओं ने सतत विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए बहुपक्षीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने के लिए और नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की स्थिति मजबूत करने तथा संयुक्त राष्ट्र पुर्नवास की तैयारियों के रूप में, अक्टूबर 2016 में हैबिटेट III सम्मेलन के आयोजन के लिए एक साथ काम करने पर सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और उसके प्रमुख अंगों में चल रहे सुधारों को संस्था को, अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, पारदर्शी और कुशल बनाने के प्रति अपनी दृष्टिकोण के मजबूत समर्थन को दोहराया, ताकि यह समकालीन दुनिया के असंख्य चुनौतियों से अधिक प्रभावी ढंग से निपट सके। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी सदस्यता दोनों श्रेणियों में शीघ्र सुधार के महत्व पर बल दिया, ताकि यह वर्तमान वास्तविकताओं और कार्यों को जवाबदेह, प्रतिनिधिक और प्रभावी ढंग से दर्शा सके।

हिंद महासागर में दोनों देशों के साझा हितों और ब्लू अर्थव्यवस्था के महत्व को देखते हुए, दोनों नेता समुद्र आधारित संसाधनों की सतत प्रबंधन और निकासी पहल को आगे बढ़ाने के लिए सहमत हुए। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के हिंद महासागर रिम संघ (आईओआरए) से जुड़े होने की महत्व की पुष्टि की और ब्लू अर्थव्यवस्था में सहयोग पर समझौते को अंतिम रूप देने और इस दिशा में काम करने पर सहमत हुए।
भारत के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति उहुरू केन्याता और केन्या के लोगों के प्रति उनके और प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को राजकीय यात्रा के दौरान गर्मजोशी से स्वागत और आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने राष्ट्रपति केन्याटा को उनके पिछले तीन वर्षों के दौरान मजबूत और ध्यान केंद्रित नेतृत्व के तहत पहल और उपलब्धियों की सफलता के लिए बधाई दी। भारत के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति केन्याटा को भारत का दौरा करने का निमंत्रण दिया, जिसको उन्होंने स्वीकार कर लिया।
राष्ट्रपति केन्याटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके प्रतिनिधिमंडल को केन्या यात्रा के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के निमंत्रण को स्वीकार किया और वादा किया कि उचित समय पर वह भारत की यात्रा करेंगे।

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पीएम मोदी ने 52वीं PRAGATI मीटिंग की अध्यक्षता की
June 24, 2026
प्रधानमंत्री ने सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरिडोर और मेट्रो रेल क्षेत्रों से जुड़ी लगभग 30,000 करोड़ रुपये लागत वाले चार प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की, जो चार राज्यों में फैली हुई हैं
प्रधानमंत्री ने कुशल योजना निर्माण के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उपयोग तथा पोर्टल पर परियोजनाओं, उपयोगिताओं और अवसंरचना संबंधी आंकड़ों को समय पर अपडेट करने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने मंत्रालयों और राज्य सरकारों से लंबित मुद्दों का मिशन मोड में समाधान करने और उनकी कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने को कहा
प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित नवीनतम डिजिटल प्रौद्योगिकियों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया
प्रधानमंत्री ने साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित शिकायतों की समीक्षा की तथा समयबद्ध कार्रवाई, समन्वित प्रतिक्रिया और ई-जीरो एफआईआर पंजीकरण व्यवस्था पर जोर दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सेवा तीर्थ में 'प्रगति' की 52वीं बैठक की अध्यक्षता की। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित यह बहु-माध्यम मंच केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों को निर्बाध रूप से एकीकृत कर सक्रिय शासन और समयबद्ध क्रियान्वयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने सड़क, बिजली, औद्योगिक कॉरीडोर और मेट्रो रेल क्षेत्रों से संबंधित चार महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की। लगभग 30,000 करोड़ रुपये लागत वाली ये परियोजनाएं चार राज्यों में फैली हुई हैं। आर्थिक विकास, क्षेत्रीय संपर्क, औद्योगिक प्रगति और जनकल्याण की दृष्टि से महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा समयसीमा, विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, समस्याओं के समाधान और समय पर पूरा होने पर विशेष ध्यान देते हुए की गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में देरी न केवल लागत बढ़ाती है, बल्कि लोगों और उद्योगों को समय पर मिलने वाले लाभों से भी वंचित कर देती है। उन्होंने संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को लंबित मुद्दों का मिशन मोड में समाधान करने तथा उच्चतम स्तर पर उनकी सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रभावी योजना और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने परियोजनाओं के विवरण, उपयोगिताओं, अवसंरचना परतों, स्वीकृतियों और अन्य क्षेत्रीय सूचनाओं को पोर्टल पर नियमित एवं समय पर अपडेट करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मंच पर जमीनी स्तर की नवीनतम स्थिति दिखाई देनी चाहिए ताकि रूकावटों के बारे में पहले से पता चल सके और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर हो तथा विश्वसनीय एवं वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर निर्णय लिए जा सकें।

प्रधानमंत्री ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित नवीनतम डिजिटल तकनीकों के उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जागरूकता, रोगियों के फॉलो-अप और सामुदायिक सहभागिता के लिए एनसीसी कैडेटों और ‘माय भारत’ स्वयंसेवकों की एक टीम गठित करने का सुझाव दिया।

प्रधानमंत्री ने साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित शिकायतों की भी समीक्षा की। उन्होंने नागरिकों को ठगने के लिए डिजिटल मंचों के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की और कहा कि ऐसे मामलों का सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा समन्वित, संवेदनशील और समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी समस्या के समाधान के लिए एक विभाग या एजेंसी से दूसरी एजेंसी के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट जवाबदेही, त्वरित प्रतिक्रिया, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, बैंकों और डिजिटल मंचों के बीच बेहतर समन्वय तथा जन-जागरूकता अभियानों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में वित्तीय नुकसान को रोकने और लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए समय पर कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी हितधारकों से रोकथाम, रिपोर्टिंग, जांच और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों को साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित पंजीकरण और प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।