प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपनी आधिकारिक अमेरिका यात्रा के दौरान आज व्हाइट हाउस में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा से मुलाकात की। अपने तीसरे प्रमुख द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच गहरी होती जा रही सामरिक भागीदारी की समीक्षा की, जो स्वतंत्रता के साझा मूल्यों, लोकतंत्र, सार्वभौमिक मानवाधिकार, सहिष्णुता एवं बहुलवाद, सभी नागरिकों के लिए समान अवसर और कानून के शासन में निहित है। दोनों नेताओं ने  आर्थिक विकास और सतत विकास के नए अवसरों को आगे बढ़ाने, अपने यहां व दुनिया भर में शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने,  समावेशी, लोकतांत्रिक शासन को मजबूत बनाने तथा सार्वभौमिक मानवाधिकारों का सम्मान करने और साझा हित के मुद्दों पर वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की वचनबद्धता जताई।

प्रधानमंत्री मोदी के सितम्बर, 2014 के अमेरिका दौरे और जनवरी 2015 में राष्ट्रपति ओबामा की भारत यात्रा के दौरान जारी किए गए संयुक्त घोषणापत्र में तय किए गए रोडमैप के अनुसार, दोनों नेताओं ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने अपने सामरिक दृष्टिकोण में बढ़ रहे अभिसरण (कनवर्जन्स) की पुष्टि की और एक दूसरे की सुरक्षा एवं समृद्धि से करीब से जुड़े रहने की आवश्यकता पर बल दिया।

जलवायु एवं स्वच्छ ऊर्जा में अमेरिका-भारत का वैश्विक नेतृत्व

अमेरिका-भारत संपर्क समूह के माध्यम से पिछले दो वर्षों में दोनों सरकारों ने जो कदम उठाए हैं, उनमें अन्य बातों के  अतिरिक्त परमाणु दायित्व के मुद्दे पर ध्यान देना, परमाणु क्षति के लिए पूरक मुआवजे पर भारत के माध्यम से कन्वेंशन का सत्यापन शामिल है, इसने भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण के लिए भारतीय और अमेरिकी कंपनियों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी की एक मजबूत नींव रखी है।

असैन्य परमाणु मुद्दों पर एक दशक से बनी साझेदारी के शिखर पर, दोनों नेताओं ने भारत में वेस्टिंगहाउस द्वारा बनाए जाने वाले छह एपी 1000 संयंत्रों के प्रारंभिक कार्य की शुरुआत का स्वागत किया और भारत के इरादों का उल्लेख किया। इस परियोजना के लिए प्रतिस्पर्धी वित्तीय पैकेज उपलब्ध कराने की खातिर अमेरिका का एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक साथ में काम कर रहा है। एक बार पूरी होने के बाद यह परियोजना अपनी तरह की सबसे बड़ी परियोजना होगी। यह भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के वादे को पूरा करेगी। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक साझा प्रतिबद्धता को दर्शाएगी, जबकि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को भी घटाएगी। दोनों पक्षों ने भारतीय परमाणु विद्युत निगम और वेस्टिंगहाउस द्वारा की गई उस घोषणा का स्वागत किया जिसके अनुसार, इंजीनियरिंग एवं साइट डिजाइन का काम तुरंत शुरू हो जाएगा और दोनों पक्ष जून 2017 तक संविदात्मक व्यवस्था को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे।

भारत और अमेरिका जलवायु एवं स्वच्छ ऊर्जा के सार्वजनिक हितों को साझा करते हैं और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में करीबी सहयोगी हैं। दोनों देशों के नेतृत्व ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक कार्रवाई को प्रेरित किया और पिछले साल दिसम्बर में ऐतिहासिक पेरिस समझौते पर पहुंचने में मदद की। दोनों देश पेरिस समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के लिए मिलकर तथा दूसरों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न तात्कालिक खतरों से निपटा जा सके। भारत और अमेरिका जलवायु परिवर्तन के तकाजे को समझते हैं और जितनी जल्दी संभव हो सके पेरिस समझौते को अमल में लाने का लक्ष्य साझा करते हैं। अमेरिका ने जितनी जल्द संभव हो सकेगा इस साल समझौते में शामिल होने की तस्दीक की है। भारत ने इस साझे लक्ष्य की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। दोनों नेताओं ने 2020 से पहले न्यूनतम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन विकास रणनीति तैयार करने और लंबी अवधि की न्यूनतम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन विकास रणनीति विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। इसके अलावा, दोनों देशों ने 2016 में दाता देशों की ओर से कार्यान्वयन के साथ विकासशील देशों की मदद के लिए बहुपक्षीय कोष में वित्तीय सहायता बढ़ाकर एक एचएफसी संशोधन को अपनाने की दिशा में काम करने और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत दुबई पाथवे के अनुरूप एक महत्वकांक्षी फेजडाउन शिड्यूल का संकल्प जताया है। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय विमानन से होने वाले ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के मुद्दे से निपटने के लिए आगामी अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन असेंबली में एक सफल परिणाम तक पहुंचने के लिए एक साथ काम करने का संकल्प जताया है। इसके अलावा,  दोनों देश जी-20 के नेतृत्व में आने वाले सशक्त नतीजों के तहत अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और क्षमताओं के अनुसार भारी वाहन मानकों और दक्षता में सुधार को बढ़ावा देने का काम आगे बढ़ाएंगे।

दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन और गैस हाइड्रेट में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया।

विकास के लिए अत्यावश्यक वन्यजीव संरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान के परिप्रेक्ष्य में दोनों नेताओं ने वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने और वन्यजीव तस्करी से निपटने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का भी स्वागत किया।

स्वच्छ ऊर्जा वित्त

अमेरिका भारत सरकार के 175 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करता है। इसमें से 100 गीगावॉट सौर ऊर्जा से जुटाया जाना है। अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की शुरुआत किए जाने का स्वागत  किया है। उसने आईएसए की अहम भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि यह सौर ऊर्जा के विकास और उसके विस्तार में अहम भूमिका निभा सकता है। अमेरिका आईएसए की सदस्यता का इच्छुक है। आईएसए को मिलकर मजबूत करने के लिए सितम्बर, 2016 में भारत में होने वाले स्थापना सम्मेलन में अमेरिका और भारत आईएसए की तीसरी पहल की संयुक्त रूप से शुरुआत करेंगे, जिसका फोकस ऑफ-ग्रिड सौर ऊर्जा उपलब्धता पर रहेगा।

अमेरिका अन्य विकसित देशों के साथ संयुक्त रूप से वर्ष 2020 तक प्रति वर्ष  100 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए भी प्रतिबद्ध है, ताकि सार्थक शमन और अनुकूलन कार्रवाई के संदर्भ में विकासशील देशों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

अमेरिका अपनी तकनीकी क्षमता, संसाधनों और निजी क्षेत्र को साथ लाने के लिए प्रतिबद्ध है और भारत के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश को प्रेरित करने के लिए संयुक्त रूप से नए प्रयास कर रहा है। इसमें ऐसे प्रयास शामिल हैं, जो आईएसए के अन्य सदस्य देशों के लिए एक मॉडल बनें। भारत और अमेरिका ने विशेष रूप से आज 20 मिलियन डॉलर के भारत स्वच्छ ऊर्जा कोष (यूएसआईसीईएफ) की पहल की घोषणा की। इसे भारत और अमेरिका समान रूप से समर्थन दे रहे हैं। इसके तहत 2020 तक एक लाख परिवारों तक स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा आधारित बिजली पहुंचाने के लिए 400 मिलियन डॉलर जुटाए जाने की उम्मीद है। यह उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसके तहत अमेरिका और भारत को स्वच्छ ऊर्जा का हब बनाया जाना है। इसमें समन्वय तंत्र अग्रणी वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी करते हुए अमेरिकी सरकार के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करेगा। जिससे भारत में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होगी। 40 मिलियन डॉलर का अमेरिका-भारत उत्प्रेरक सौर कोष कार्यक्रम, भारत और अमेरिका द्वारा समान रूप से समर्थित है। यह छोटे पैमाने पर अक्षय ऊर्जा निवेश को जरूरी तरलता (लिक्विडिटी) प्रदान करेगा। विशेष रूप से ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों और गरीबों के बीच, जो ग्रिड से जुड़े हुए नहीं हैं। यह एक बिलियन डॉलर तक की परियोजनाओं को गति प्रदान कर सकता है। इसमें भारतीय जरूरतों के अनुसार हाउसहोल्डिंग सपोर्ट का विस्तार किया जाना है। इसमें छत पर सौर पैनल लगाने को बढ़ावा देना और "ग्रीनिंग द ग्रिड" के लिए यूएसएड के साथ सफल सहयोग को जारी रखना है।

अमेरिका और भारत मिशन इनोवेशन के उन लक्ष्यों को लेकर भी प्रतिबद्ध हैं, जिसे उन्होंने पेरिस में सीओपी-21 के दौरान संयुक्त रूप से लांच किया था। इसके तहत दोनों देश अगले पांच साल में स्वच्छ ऊर्जा के अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) में निवेश को दोगुना करेंगे। दोनों नेताओं ने अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में सहयोग करने के लिए अपनी वचनबद्धता दोहराई है। इसमें स्मार्ट ग्रिड और ग्रिड भंडारण में 30 मिलियन डॉलर के सार्वजनिक-निजी अनुसंधान की घोषणा की गई है।

वैश्विक अप्रसार को मजबूत बनाना

राष्ट्रपति ने वाशिंगटन डीसी में परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन 2016 के दौरान मौलिक योगदान और सक्रिय भागीदारी के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया  और 2018 में सामूहिक विनाश के हथियार एवं आतंकवाद पर एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के प्रस्ताव का स्वागत किया। भारत और अमेरिका रासायनिक, जैविक, परमाणु और रेडियोलॉजिकल सामग्री के उपयोग से जुड़े आतंकी खतरे का संयुक्त रूप से मुकाबला करेंगे।

दोनों नेताओं ने सामूहिक विनाश के हथियारों और उनके प्रसार को रोकने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता को याद किया। अब दोनों को भारत के मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) में प्रवेश करने का इंतजार है। राष्ट्रपति ओबामा ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने के लिए भारत के आवेदन का स्वागत किया। उन्होंने इस बात की फिर पुष्टि की है कि भारत इसकी सदस्यता के लिए तैयार है। अमेरिका ने एनएसजी में शामिल सभी देशों से इस महीने के अंत में होने वाले परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के पूर्ण सत्र (प्लीनरी) में भारत के आवेदन का समर्थन करने के लिए कहा है। अमेरिका ने ‘ऑस्ट्रेलिया ग्रुप एंड वासेनार अरेंजमेंट’ में भी भारत की प्रारंभिक सदस्यता के लिए अपने समर्थन को दोहराया है।

डोमेन की सुरक्षाः भूमि,  समुद्र,  हवा, अंतरिक्ष  और साइबर

दोनों नेताओं ने एशिया प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र के लिए अमेरिका-भारत संयुक्त सामरिक विजन 2015 के तहत सहयोग की एक रूपरेखा के पूरा होने की सराहना की। यह आने वाले वर्षों में सहयोग के लिए एक गाइड के रूप में काम करेगा। दोनों इस बात पर दृढ़ हैं कि अमेरिका और भारत को एशिया प्रशांत एवं हिंद महासागर क्षेत्र में प्राथमिकता वाले भागीदार के रूप में एक-दूसरे को देखना चाहिए।

उन्होंने समुद्री सुरक्षा वार्ता की उद्घाटन बैठक का स्वागत किया। समुद्री सुरक्षा और समुद्री अधिकार क्षेत्र को लेकर जागरुकता के कारण,  समुद्री "व्हाइट शिपिंग" सूचना के आदान-प्रदान के लिए एक तकनीकी व्यवस्था बनाए जाने का दोनों नेताओं ने स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका-भारत के सहयोग की पुष्टि की। दोनों ने नेवीगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने, ओवरफ्लाइट (ऊपर से उड़ान भरने), अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार संसाधनों के दोहन, जिसमें समुद्र के नियमों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन शामिल है, की बात दोहराई। साथ ही क्षेत्रीय विवादों का निपटान शांतिपूर्ण तरीके से करने की बात कही।

उन्होंने दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग, विशेष रूप से संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचए/डीआर) को बढ़ावा दिए जाने की सराहना की। दोनों नेताओं ने ऐसे समझौतों का पता लगाए जाने की इच्छा व्यक्त की जो व्यावहारिक तरीके से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और विस्तार देने में मददगार हों। इस संबंध में ‘लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ (एलईएमओए) के पाठ को अंतिम रूप दिए जाने का स्वागत किया।

इन तथ्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए कि अमेरिका एवं भारत के बीच रक्षा संबंध स्थिरता का भरोसा दिला सकते हैं और रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है, अमेरिका भारत को एक प्रमुख रक्षा भागीदार मानता है। इस तरह :

अमेरिका भारत के साथ प्रौद्योगिकी को सुविधाजनक ढंग से साझा करने का क्रम उस स्‍तर तक जारी रखेगा, जो उसके निकटतम सहयोगियों एवं भागीदारों के अनुरूप होगा। दोनों नेताओं के बीच हुई सहमति के तहत भारत की लाइसेंस मुक्‍त पहुंच अब दोहरे उपयोग वाली अनेक तकनीकों तक संभव हो पाएगी। भारत ने अपने निर्यात नियंत्रण उद्देश्‍यों को आगे बढ़ाने के लिए जो कदम उठाने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की है उसी के अनुरूप यह संभव होगा। 

भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के साथ-साथ मजबूत रक्षा उद्योगों के विकास एवं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ इसके एकीकरण को अपना समर्थन व्‍यक्‍त करते हुए अमेरिका अपने कानून के अनुरूप उन परियोजनाओं, कार्यक्रमों एवं संयुक्‍त उद्यमों के लिए वस्‍तुओं एवं तकनीकों के निर्यात को सुविधाजनक बनाने का सिलसिला आगे भी जारी रखेगा, जो आधिकारिक अमेरिका–भारत रक्षा सहयोग के अंतर्गत आते हैं।

दोनों नेताओं ने भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के समर्थन में आपसी सहयोग बढ़ाने और रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्‍यापार पहल (डीटीटीआई) के तहत प्रौद्योगिकियों के सह-विकास एवं सह-उत्‍पादन के विस्‍ता‍रीकरण के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की है। उन्‍होंने नौसेना प्रणालियों, हवाई प्रणालियों और अन्‍य हथियार प्रणालियों को कवर करने वाली सहमति प्राप्‍त वस्‍तुओं को शामिल करने के लिए नये डीटीटीआई कार्य दलों के गठन का स्‍वागत किया। दोनों नेताओं ने विमान वाहक प्रौद्योगिकी सहयोग पर गठित संयुक्‍त कार्यदल के तहत एक सूचना आदान-प्रदान अनुलग्‍नक के मूल पाठ को अंतिम रूप देने की घोषणा की।

राष्‍ट्रपति ओबामा ने भारत में रक्षा पीओडब्‍ल्‍यू/एमआईए लेखांकन एजेंसी (डीपीएए) से जुड़े मिशनों को भारत सरकार द्वारा दिए गए समर्थन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का धन्‍यवाद किया, जिसमें एक रिकवरी मिशन भी शामिल है, जिसके फलस्‍वरूप द्वितीय विश्‍व युद्ध से ही लापता अमेरिकी सैन्‍य सेवा के सदस्‍यों के अवशेषों को हाल ही में स्‍वदेश वापस भेजा गया है। दोनों नेताओं ने भावी डीपीएए मिशनों के लिए अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा की।

अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले राष्‍ट्रों के रूप में भारत और अमेरिका ने यह बात स्‍वीकार की कि बाह्य अंतरिक्ष को मानव प्रयासों का एक ऐसा सीमांत होना चाहिए जो सदा ही विस्तारशील हो। उन्‍होंने पृथ्वी अवलोकन, मंगल ग्रह की खोज, अंतरिक्ष शिक्षा और मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ने की उम्‍मीद जताई। दोनों नेताओं ने सूर्य की भौतिकी पर इसरो-नासा कार्यदल के गठन के साथ-साथ पृथ्‍वी अवलोकन उपग्रह संबंधी आंकड़ों के आदान-प्रदान के लिए एक सहमति पत्र को अंतिम रूप दिए जाने की दिशा में हुई प्रगति का स्‍वागत किया।

दोनों नेताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि साइबरस्‍पेस की बदौलत आर्थिक विकास एवं प्रगति संभव है। उन्‍होंने इंटरनेट गवर्नेंस से जुड़े बहु-हितधारक मॉडल के तहत एक स्‍पष्‍ट, अंतरप्रचालनीय, सुरक्षित एवं विश्‍वसनीय इंटरनेट के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की। उन्‍होंने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की और निकट भविष्‍य में अमेरिका-भारत साइबर संबंधों की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए हुई आपसी सहमति का स्‍वागत किया। उन्‍होंने महत्‍वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास, साइबर अपराध, सरकारी एवं गैर-सरकारी तत्‍वों द्वारा दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधियों पर अंकुश लगाने, क्षमता सृजन और साइबर सुरक्षा से जुड़े अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में साइबर सहयोग बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की। इसके साथ ही उन्‍होंने बाजार पहुंच सहित प्रौद्योगिकी एवं उससे संबंधित सेवाओं के व्‍यापार के सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श जारी रखने की बात कही। उन्‍होंने इंटरनेट गवर्नेंस से जुड़े फोरम में आपसी विचार-विमर्श और भागीदारी को जारी रखने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की, जिनमें आईसीएएनएन, आईजीएफ और अन्‍य फोरम भी शामिल हैं। उन्‍होंने इन सभी फोरम में दोनों देशों के हितधारकों की सक्रिय भागीदारी को अपना समर्थन देने की बात कही। दोनों नेताओं ने संयुक्‍त राष्‍ट्र चार्टर सहित अंतर्राष्‍ट्रीय कानून को लागू किये जाने के आधार पर साइबरस्‍पेस में स्थिरता को बढ़ावा देने, शांतिकाल में राष्‍ट्रों के उत्‍तरदायी से जुड़े व्‍यवहार के स्‍वैच्छिक मानकों को बढ़ावा देने और राष्‍ट्रों के बीच विश्‍वास वृद्धि के व्‍यावहारिक उपायों के विकास एवं क्रियान्‍वयन के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता जताई।

इस संदर्भ में उन्‍होंने इन स्‍वैच्छिक मानकों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की कि किसी भी राष्‍ट्र को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए अथवा ऐसी ऑनलाइन गतिविधि को जानबूझकर बढ़ावा नहीं देना चाहिए, जिससे महत्‍वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता हो अथवा आम जनता को सेवाएं मुहैया कराने के मार्ग में बाधाएं उत्‍पन्‍न होती हों; किसी भी राष्‍ट्र को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए अथवा जानबूझकर ऐसी किसी गतिविधि को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, जिससे राष्‍ट्रीय कम्‍प्‍यूटर सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर आवश्‍यक कदम उठाने वालों के सामने मुश्किलें पैदा हों या उन्‍हें अपने ऐसे दलों का उपयोग नहीं करना चाहिए, जो नुकसान पहुंचाने के मकसद से किसी ऑनलाइन गतिविधि को अंजाम देते हों; हर राष्‍ट्र को अपने घरेलू कानून और अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप सहयोग करना चाहिए, अपने क्षेत्र से होने वाली किसी दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधि को रोकने के लिए अन्‍य राष्‍ट्रों से मदद हेतु अनुरोध करना चाहिए; किसी भी राष्‍ट्र को ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए अथवा व्‍यापार से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं अथवा अन्‍य गोपनीय व्‍यावसायिक सूचनाओं सहित बौद्धिक संपदा की आईसीटी आधारित चोरी के लिए जानबूझकर किये जाने वाले ऐसे कार्यों में अपनी ओर से सहयोग नहीं देना चाहिए, जिसका उद्देश्‍य अपनी कंपनियों अथवा वाणिज्यिक क्षेत्रों को प्रतिस्‍पर्धा के लिहाज से बढ़त प्रदान करना हो।

आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के खिलाफ एक साथ खड़े होने का संकल्प

दोनों नेताओं ने मानव सभ्यता के खिलाफ बढ़ रहे आतंकवाद को बड़ी चुनौती मानते हुए हाल ही में घटी आतंकवादी घटनाओं की निंदा की। उन्होंने पेरिस से पठानकोट, ब्रुसेल्स से काबुल में हुए हमलों की निंदा की।की। उन्होंने अपने प्रयासों में और तेजी लाने का संकल्प लिया।दोनों नेताओं ने कहा कि हम जैसे अन्य देश मिलकर आतंकवाद का मिलकर मुकाबला करेंगे। विश्व में कहीं भी जो इसकी संरचना को पनपने का मौका दे रहा है या फिर उसे सहायता देने का काम कर रहा है।

जनवरी 2015 में भारत-अमेरिका के साझा बयान में लिए गए संकल्प के अनुसार 21 वीं शताब्दी में आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत और अमेरिका के रिश्तों को परिभाषित करना है, ठीक वैसा ही सितंबर2015 में दोनों देशों के साझा बयान में घोषणा की गई कि दोनों देश आतंकवाद को परास्त करने के लिए अपने संबंधों को और मजबूत करेंगे।

नेताओं ने विश्व समुदाय के खिलाफ बड़ी चुनौती बन चुके आतंकवादी संगठन जैसे अल कायदा,जैश ए मोहम्मद, लश्कर ए तैयबा, डी कंपनी और इनके सहयोगी संगठन के खिलाफ आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। इस संदर्भ में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आतंकवाद प्रतिरोध को लेकर होने वाली भारत-अमेरिका की संयुक्त कार्यसमूह की बैठक में उन क्षेत्रों को भी चिन्हित करें जहां और भी सहयोग किया जा सकता है।

भारत-अमेरिका की आतंकवाद प्रतिरोध पर साझा प्रयासों को दोनों नेताओं ने सराहा, आतंकवाद से जुड़ी जरूरी सूचनाओं के आदान-प्रदान पर सहमति बन जाने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने पाकिस्तान से 2008 में मुंबई हमलों और 2016 में पठानकोट हमलों के दोषियों पर कार्रवाई के लिए कहा

दोनों नेताओं ने अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र की व्यापक सभा को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। यह संगठन आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग के ढांचे को मजबूत बनाता है।

आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूती प्रदान करना 

दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के मजबूत और विस्तार लेते आर्थिक संबंधों का उल्लेख किया। साथ ही आर्थिक विकास के लिए सतत समर्थन और ग्राहकों की मांग व नई नौकरियों का सजन, कौशल विकास और अपने अपने देशों में नई खोज को लेकर आपसी सहयोग बढ़ाना है।

द्पक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए  सामान और सेवा के निर्बाध प्रवाह के लिए  नए अवसरों को खोजने की बात कही। दोनों अर्थव्यवस्थाओं में नई नौकरियों और संपन्नता को बढ़ाने के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रंखला में एक होकर काम करने की बात कही। भारत में इस साल के अंत में होनेवाली दूसरी वार्षिक रणनीतिक और वाणिज्यिकी वार्ता में इस संबंध में उठाये जाने वाले ठोस कदमों की जानकारी पर भी चर्चा की।

उन्होंने व्यापार नीति फोरम (टीपीएफ) के तहत व्यापार और निवेश के मुद्दों पर हुई वृद्धि की सराहना की और बाद में इस वर्ष होनेवाली अगली TPF के लिए ठोस परिणामों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने भारत की स्मार्ट सिटी कार्यक्रम में अमेरिका की निजी क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी का स्वागत किया।

नेताओं ने भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के 1.5 अरब लोगों के बीच मजबूत दोस्ती की सराहना की और समृद्ध द्विपक्षीय भागीदारी के लिए अमेरिका ने ठोस नींव प्रदान की है। ध्यान देने योग्य बात है कि पर्यटन,व्यापार, और शिक्षा के लिए दो-जिस तरह से अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई, 2015 में भारत से संयुक्त राज्य अमेरिका में दस लाख से अधिक यात्री, और ठीक इतनी ही संख्या में अमेरिकाल से भारत के लिए लोगों ने यात्राएं की। दोनों नेताओं ने देशों के बीच पेशेवरों, निवेशकों और व्यापार यात्रियों, छात्रों, के अधिक से अधिक आवाजाही की सुविधा के लिए कईमुद्दों को सुलझाया। आवाजाही को आसान करने के लिए उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय शीघ्र यात्री पहल ( जिसे ग्लोबल प्रवेश कार्यक्रम के रूप में जाना जाता है) पर समझौता किया और अगले तीन महीनों में भारत के वैश्विक प्रविष्टि कार्यक्रम में प्रवेश के लिए प्रक्रियाओं को पूरा करने के समझौता पर हस्ताक्षर किया जाएगा।

दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका टोटलाइजेशन समझौते को अगस्त 2015 और जून 2016 में दोनों देशों में फलदाई आदान प्रदान के तत्व को मान्यता दी, इस साल भी यह जारी रहेगी। नई खोज के लिए एक अनुकूल वातावरण को बढ़ावा देने और उद्यमियों को सशक्त बनाने के महत्व को स्वीकार करते हुए अमेरिका ने 2017 में ग्लोबल उद्यमिता शिखर सम्मेलन में भारत की मेजबानी का स्वागत किया।

नेताओं ने बौद्धिक संपदा पर उच्च स्तरीय कार्य समूह के तहत बौद्धिक संपदा अधिकार पर सहयोग का स्वागत किया और क्षेत्र में नई खोज और रचनात्मकता के द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के लिए काम करके बौद्धिक संपदा अधिकार के मुद्दों पर ठोस प्रगति करने के लिए दोनों देशों ने अपनी प्रतिबद्धता की बात कही।

अमेरिका ने एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग मंच में भारत की शामिल होने की  इच्छा का स्वागत किया। भारत एशियाई अर्थव्यवस्था का एक गतिशील हिस्सा है

विज्ञान, तकनीक और स्वास्थय के क्षेत्र में सहयोग

नेताओं ने  विज्ञान के सबसे मौलिक सिद्धांतों की खोज में अपने देशों के आपसी सहयोग की बात कही। भविष्य में भारत में एक लेजर गुरुत्वीय तरंग वेधशाला (LIGO) के निर्माण पर सहयोग करने के लिए सहमति जताई। धन और परियोजना के निरीक्षण के लिए भारत और अमेरिका की संयुक्त निगरानी दल बनाने की योजना का स्वागत किया।

नेताओं ने सितंबर 2016 में वाशिंगटन डी.सी. में होनेवाले हमारे महासागर सम्मेलन में भारत की भागीदारी की बात कही, इस सम्मेलन में भारत पहली बार शामिल हो रहा है। महासागर वार्ता से समुद्री विज्ञान, समुद्र ऊर्जा,प्रबंध और रक्षा सागर जैव विविधता, समुद्री प्रदूषण, और सागर संसाधनों के सतत उपयोग में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में मजबूती मिलेगी।

नेताओं ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंडा और इसके उद्देश्यों के समय पर क्रियान्वयन के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री ने संचालन समूह पर भारत की भूमिका समझी, माइक्रोबियल प्रतिरोध और टीकाकरण के क्षेत्र में अपने नेतृत्व का उल्लेख किया। राष्ट्रपति ने अमेरिका के समर्थन की प्रतिबद्धता दोहराई , और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से एक संयुक्त बाह्य मूल्यांकन साझा करने के लिए प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।

नेताओं ने माना कि वैश्विक खतरा बहु दवा प्रतिरोधी तपेदिक (एमडीआर-टीबी) से वैश्विक खतरा है, टीबी के क्षेत्र में सहयोग जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और संबंधित प्रथाओं को साझा करने के लिए भी प्रतिबद्धता प्रकट की।

वैश्विक नेतृत्व

नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर काम करने के साथ ही संयुक्त राष्ट्र की क्षमता को अधिक प्रभावी ढंग से वैश्विक विकास और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने संकल्प को दोहराया। सितंबर 2015 में सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा के ऐतिहासिक एजेंडे और अपनी सार्वभौमिकता को पहचानने के साथ, नेताओं ने इस महत्वाकांक्षी एजेंडा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर को लागू करने और सतत विकास लक्ष्यों के प्रभावी उपलब्धि के लिए एक सहयोगात्मक साझेदारी में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। 

नेताओं ने संशोधित संयुक्त सुरक्षा परिषद के लिए भारत के स्थायी सदस्य के रूप में अपने समर्थन की पुष्टि की। दोनों पक्षों ने यह सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सुरक्षा परिषद यूएन चार्टर के अनुरूप प्रभावी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र के अंतर सरकारी वार्ता (आईजीएन) सुरक्षा परिषद सुधार पर अपने प्रयासों की प्रतिबद्धता जताई।

नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना पर नेताओं की शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन का स्वागत किया और तीसरे देशों में संयुक्त राष्ट्र शांति क्षमता निर्माण के प्रयासों को मजबूत बनाने के लिए इस वर्ष प्रतिभागियों के लिए नई दिल्ली में में आयोजन किया जाएगा। अफ्रीका के दस देशों से अफ्रीकी भागीदारों के लिए सह आयोजन पहली बार संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना कोर्स के तहत किया जा रहा है। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों को मजबूत बनाने के लिए चल रहे सुधार के प्रयासों के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

अफ्रीका के साथ हुए अपने-अपने द्विपक्षीय समझौतों जैसे कि अमेरिकी-अफ्रीकी नेता शिखर सम्‍मेलन और भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्‍मेलन को ध्‍यान में रखते हुए दोनों नेताओं ने यह बात रेखांकित की कि अमेरिका और भारत इस महाद्वीप में समृद्धि एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अफ्रीका में भागीदारों के साथ काम करने में साझा रुचि रखते हैं। दोनों नेताओं ने विभिन्‍न क्षेत्रों में अफ्रीकी भागीदारों के साथ त्रिपक्षीय सहयोग का स्‍वागत किया, जिनमें कृषि, स्‍वास्‍थ्‍य, ऊर्जा, महिलाओं का सशक्तिकरण और वैश्विक विकास के लिए त्रिपक्षीय सहयोग पर मार्गदर्शक सिद्धांतों के वक्‍तव्‍य के तहत स्‍वच्‍छता भी शामिल हैं। दोनों नेताओं ने अफ्रीका के साथ-साथ एशिया के अलावा अन्‍य क्षेत्रों में भी अमेरिका-भारत वैश्विक विकास सहयोग को बढ़ाने के अवसर मिलने की उम्‍मीद जताई।


दोनों देशों की जनता के बीच संपर्क बढ़ाना 

दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के देश में अतिरिक्‍त वाणिज्‍य दूतावास खोलने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की। भारत सिएटल में एक नया वाणिज्‍य दूतावास खोलेगा। इसी तरह अमेरिका भारत में आपसी सहमति वाले स्‍थान पर एक नया वाणिज्‍य दूतावास खोलेगा।

दोनों नेताओं ने घोषणा की कि अमेरिका और भारत वर्ष् 2017 के लिए यात्रा एवं पर्यटन भागीदार देश होंगे और उन्‍होंने एक-दूसरे के नागरिकों के लिए वीजा को सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की।

दोनों देशों के बीच मजबूत शैक्षणिक एवं सांस्‍कृतिक संबंधों का उल्‍लेख करते हुए दोनों नेताओं ने अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय विद्यार्थियों की बढ़ती संख्‍या का स्‍वागत किया, जो वर्ष 2014-15 में 29 प्रतिशत बढ़कर तकरीबन 133,000 विद्यार्थियों के स्‍तर पर पहुंच गई। दोनों नेताओं ने भारत में पढ़ाई के लिए अमेरिकीविद्यार्थियों को कहीं ज्‍यादा अवसर मिलने की उम्‍मीद जताई। दोनों नेताओं ने वैश्‍वि‍क जलवायु परिवर्तन की साझा चुनौती से निपटने के लिए जलवायु विशेषज्ञों का एक समूह विकसित करने हेतु फुलब्राइट-कलाम जलवायु फेलोशिप के माध्यम से अपनी-अपनी सरकारों के संयुक्त प्रयासों की भी सराहना की। दोनों देशों के ज्‍यादा-से-ज्‍यादा लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने के अपने आपसी लक्ष्य का उल्‍लेख करते हुए दोनों नेताओं ने दोनों देशों के नागरिकों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए नए सिरे से अपने प्रयासों को तेज करने का इरादा व्‍यक्‍त किया जो कानूनी प्रणालियों के दृष्टिकोण में अंतर के कारण उभर कर सामने आते हैं। इनमें सीमा पार विवाह, तलाक और बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत की प्राचीनकालीन वस्‍तुओं को स्वदेश वापस भेजे जाने का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सांस्‍कृतिक वस्‍तुओं की चोरी एवं तस्‍करी की समस्‍या से निपटने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करने की भी प्रतिबद्धता जताई।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने शालीन निमंत्रण और गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए राष्‍ट्रपति ओबामा का धन्‍यवाद किया। उन्‍होंने राष्‍ट्रपति ओबामा को अपनी सुविधानुसार भारत आने का निमंत्रण दिया।

भारत और अमेरिका के साइबर संबंध की रूपरेखा पर तथ्‍य पत्र

भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध में साइबर मुद्दों पर सहयोग एक महत्‍वपूर्ण मुद्दा है। दोनों देशों के बीच सामरिक साइबर संबंध हैं जिसमें दोनों देशों के साझा मूल्‍य, समान दृष्टिकोण और साइबर स्‍पेस के लिए साझा सिद्धांत प्रतिबिंबित होते हैं। दोनों पक्ष व्‍यापक स्‍तर पर सहयोग को साइबर क्षेत्र में बढ़ाने तथा इसे सांस्‍थनिक बनाने के मूल्‍यों को मानते हैं। इस संदर्भ में दोनों पक्ष निम्‍नलिखित साझा सिद्धांतों के आधार पर एक ढांचे को पूरा करने का इरादा रखते हैं।

भारत-अमेरिका साइबर संबंध के साझा सिद्धांतों में निम्‍नलिखित शामिल हैं:

• स्‍पष्‍ट, अंत:प्रचालनीय,सुरक्षित और विश्‍वसनीय साइबरस्‍पेस माहौल के लिए वचनबद्धता

• व्‍यापार , वाणिज्‍य और आर्थिक विकास तथा नवाचार के लिए इंटरनेट को इंजन के रूप में बढ़ावा देने की वचनबद्धता

• स्‍वतंत्र सूचना प्रवाह को बढ़ावा देने की वचनबद्धता

• साइबर सुरक्षा और साइबर अपराध के मामले में निजी तथा सरकारी अधिकारियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की वचनबद्धता

• साइबर खतरों से मुकाबला करने तथा साइबर सुरक्षा को प्रोत्‍साहन देने के महत्‍व और द्विपक्षीय तथा अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग को मान्‍यता प्रदान करना

• सांस्‍कृतिक एवं भाषाई विविधता का आदर करना

• एक ऐसी रूपरेखा के माध्‍यम से अंतर्राष्‍ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने की वचनबद्धता जो साइबरस्‍पेस के क्षेत्र में किसी राष्‍ट्र के आचरण और साइबरस्‍पेस के क्षेत्र में उसके उत्‍तरदायी व्‍यवहार के स्‍वैच्छिक मानदंडों को बढ़ावा देने पर अंतर्राष्‍ट्रीय कानूनों खासकर संयुक्‍त राष्‍ट्र चार्टर के अमल को मान्‍यता देती हो

• इंटरनेट संचालन के बहु हितधारकों वाले मॉडल के प्रति वचनबद्धता जो अपने हितधारकों तथा सरकार सहित, सिविल सोसाइटी और निजी क्षेत्र के प्रति पारदर्शी और उत्‍तरदायी हो तथा इनके बीच सहयोग को प्रोत्‍साहित करे

राष्‍ट्रीय सुरक्षा से संबंधित साइबर सुरक्षा मामलों में सरकार की प्रमुख भूमिका को मान्‍यता

• साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में क्षमता निर्माण सहयोग तथा शोध एवं विकास के महत्‍व को मान्‍यता देना तथा महत्‍व के प्रति साझा वचनबद्धता

• दोनों देशों के बीच साइबर अपराध से मुकाबले के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच गहरे सहयोग को बढ़ावा देने की वचनबद्धता

• ऑनलाइन मौलिक स्‍वतंत्रता, मानवाधिकारों के प्रति आदर और इन्‍हें बढ़ावा देने के प्रति वचनबद्धता

• महत्‍वपूर्ण सूचना तंत्र की सुरक्षा और इसके लचीलेपन को मजबूत करने में सहयोग का इरादा। इन साझा सिद्धांतों को आगे बढ़ाने में दोनों पक्षों के बीच सहयोग के मुख्‍य क्षेत्रों में निम्‍नलिखित अपेक्षित हैं: -साइबर सुरक्षा की सर्वश्रेष्‍ठ कार्यकुशलता की पहचान, सहयोग,साझा करना तथा इनका क्रियान्‍वयन

-दुर्भावनापूर्ण साइबर सुरक्षा के खतरे, आक्रमण की गतिविधियों के समय जब मौजूदा द्विपक्षीय व्‍यवस्‍था को दृढ़ता से लागू करना हो तो वास्‍तविक समय या इसके आसपास की सूचना को साझा करना तथा सूचना के आदान-प्रदान में सुधार के लिए समुचित तंत्र की स्‍थापना करना

-आईसीटी संरचनाओं तथा अंतर्राष्‍ट्रीय एवं घरेलू कानूनों के तहत इन संरचनाओं की सूचनाओं के प्रति दृढ़ता की सुरक्षा और साइबर खतरे को कम करने तथा व्‍यावहारिक सहयोग के लिए संयुक्‍त तंत्र का विकास करना

-साइबर सुरक्षा से संबंधित शोध एवं विकास, साइबर सुरक्षा मानक और मान्‍यता देने की प्रक्रिया सहित सुरक्षा जांच संबंधी ऐसे विषयों पर आगे की सलाह –मशविरा करने सहित साइबर सुरक्षा उत्‍पादों के विकास के क्षेत्र में बढ़ावा देने में सहयोग करना

-पारस्‍परिक एवं स्‍वैच्छिक आधार पर आईसीटी संरचनाओं की सुरक्षा में योगदान देने वाले व्‍यावहारिक उपायों का क्रियान्‍वयन तथा इनकी विस्‍तृत चर्चा

• साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग को निरंतर बढ़ाना। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यशालाओं,वार्तालाप,कार्यविधि और कार्यप्रणाली में बढ़ोतरी करना और आवश्यकता होने पर परामर्श करना सम्मिलित हैं

• संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों द्वारा कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता में वृद्धि करना। इसमें अमेरिका और भारत के संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक सबूतों हेतु उचित अनुरोध के लिए मसौदा तैयार करना भी सम्मिलित है

• साइबर सुरक्षा,साइबर अपराधों पर रोकथाम संबंधी प्रयासों,डिजिटल न्यायिक और कानूनी रूपरेखा के क्षेत्र में संयुक्त रूप से कौशल विकास और क्षमता विकास कार्यक्रमों की शुरुआत करना

• साइबरस्पेस में राष्ट्रों के मार्गदर्शन के लिए अंर्तराष्ट्रीय कानूनों की प्रासंगिकता को प्रोत्साहन प्रदान करना और साइबरस्पेस में राष्ट्रों पर इसे लागू करने की ओर खोज करना

• शांतिकाल में राष्ट्रों के उत्तरदायी व्यवहार के लिए स्वैच्छिक मानकों को प्रोत्साहन प्रदान करना। इसमें अंर्तराष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में सूचना और दूरसंचार के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र के सरकारी विशेषज्ञ दल द्वारा चिन्हित किए गए मानक भी सम्मिलित हैं।

स्वैच्छिक नियमों के प्रति प्रतिबद्धता जिसके अंतर्गत

• दोनों राष्ट्र किसी भी ऐसी ऑनलाइन गतिविधि का संचालन या जानबूझकर समर्थन नहीं करेंगे जिससे जानबूझकर महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे को नुकसान पहुंचे या अन्य किसी रूप में नागरिकों को सेवा प्रदान करने में महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे के उपयोग में नुकसान पहुंचे

• दोनों राष्ट्र साइबर घटनाओं की प्रतिक्रिया में राष्ट्रीय सीएसआईआरटी को रोकने संबंधी किसी भी गतिविधि का संचालन या जानबूझकर सहयोग गतिविधि नहीं करेंगे। दोनों राष्ट्र हानिकारक ऑनलाइन गतिविधि के लिए सीएसआईआरटी का उपयोग भी नहीं करेंगे

• दोनों राष्ट्र एक-दूसरे के क्षेत्र से साइबर अपराधों की जांच, इलेक्ट्रॅानिक सबूतों को एकत्र करने और एक- दूसरे के क्षेत्र से होने वाली दुर्भावनापूर्ण साइबर गतिविधि की गंभीरता को कम करने में सहयोग के अनुरोध पर एक-दूसरे के साथ अपने घरेलू अधिनियमों और अंर्तराष्ट्रीय अनुग्रहों के अनुरूप आपसी सहयोग करेंगे

• दोनों राष्ट्र बौद्धिक संपदा की आईसीटी आधारित चोरी का संचालन या जानबूझकर सहयोग नहीं करेंगे। इसमें कंपनियों या व्यावसायिक क्षेत्र को प्रतिर्स्पधात्मक लाभ देने के उद्देश्य से व्यापारिक राज और अन्य गोपनीय व्यापारिक सूचना आदि सम्मिलित हैं

• कंपनियों की आधिकारिक मान्यता सहित दूरसंचार सुरक्षा संबंधी मुद्दों जैसे दूरसंचार उपकरण सुरक्षा मानकों और परीक्षण में पारस्परिक सहयोग करना

• अंतर्राष्ट्रीय साइबर स्थिरता और साइबर गतिविधि को अस्थिर करने में साझा और सहभागी तालमेल का विकास करना

• आईसीटी उत्पादों और सेवाओं की सुरक्षा में प्रयोगकर्ता के विश्वास में वृद्धि के लिए आपूर्ति श्रृंखला के एकीकरण को समर्थन देने के लिए रणनीति पर विचार-विमर्श करना और साझा करना

• घटना पर प्रतिक्रिया संबंधी सर्वश्रेष्‍ठ अभ्‍यास पर वार्ता को बढ़ावा देने का क्रम जारी रखना

• विशिष्‍ट सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए साइबर सुरक्षा के परिदृश्‍य की प्राथमिकता को शामिल करते हुए संयुक्‍त टेबलटॉप अभ्‍यास की सुविधा मुहैया कराना

• इंटरनेट संचालन प्रणाली के बहु हितधारकों वाले मॉडल को समर्थन देना

• आईसीएएनएन, आईजीएफ और अन्‍य संस्‍थाओं सहित इंटरनेट संचालन प्रणाली मंचों से हमारी वार्ता और उनकी सहभागिता तथा दोनों देशों के इन मंचों की सक्रिय भागीदारी को समर्थन देना

• अंतर्राष्‍ट्रीय साइबर अपराध के क्षेत्र में प्रभावी सहयोग के लिए परामर्श करना तथा कदम उठाना

• भारत में महत्‍वपूर्ण इंटरनेट संरचनाओं को मजबूत करना

• दोनों देशों द्वारा नियंत्रण की चाहत वाली तकनीक के दोहरे उपयोग सहित तकनीक पहुंच नीति की साझा समझ सुनिश्चित करने के लिए द्विपक्षीय उच्‍च तकनीक सहयोग समूह के माध्‍यम से काम करना

• भारत-अमेरिका साइबर संबंध की पूर्ण रूपरेखा पर 60 दिनों के भीतर हस्‍ताक्षर होने की उम्‍मीद है।

 

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प्रधानमंत्री मोदी की ‘अमर उजाला' के साथ बातचीत
May 20, 2024

प्रश्न 1- चुनाव पांचवें चरण में पहुंच गया है। आज की स्थिति में आप भाजपा को अकेले और एनडीए को कहां खड़ा पाते हैं?

उत्तर-2024 का चुनाव शुरू होने से पहले एक बात की चर्चा विशेष तौर पर की जा रही थी, कि दुनिया में पहली बार किसी सरकार की तीसरी पारी को लेकर लोगों में अभूतपूर्व उत्साह दिख रहा है। चार चरणों के चुनाव के बाद मैं ये विश्वास के साथ कह सकता हूं, कि जिस ऊर्जा और जिस उत्साह के साथ भारत के लोगों ने इस चुनावी मिशन को शुरू किया था, वो कहीं से भी कम नहीं हुआ है। हर चरण के चुनाव के साथ लोगों का ये संकल्प और मजबूत हुआ है कि भाजपा को 370 और एनडीए को 400 सीटें देनी है।

सीटों की ये गिनती लोगों के बीच से ही आई है। ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं बल्कि इनके साथ लोगों की भावनाएं भी जुड़ी हैं। केंद्र की भाजपा सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को खत्म किया, इससे लोगों ने मन बनाया कि भाजपा को 370 सीटों पर जीत दिलानी है। यहीं से एनडीए के लिए 400 सीटों का नारा बुलंद हुआ।

आज जब मैं देश के अलग-अलग हिस्सों में रैलियों के लिए जाता हूं, तो ये देखता हूं कि लोगों ने 4 जून, 400 पार के नारे को आत्मसात कर लिया है। ये नारा, अपनी भावना प्रकट करने का माध्यम बन गया है। इसीलिए, मैं विश्वास के साथ कह पा रहा हूं कि देश में तीसरी बार 400 से ज्यादा सीटों के साथ एनडीए की सरकार बनने जा रही है।

प्रश्न 2- आपने एक हालिया साक्षात्कार में एनडीए प्लस में बीजद और वाईएसआरसीपी को शामिल किया है। जबकि स्थिति यह है कि भाजपा का ओडिशा में बीजद से चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं हो पाया। आंध्रप्रदेश में आप जिस टीडीपी के साथ गठबंधन में हैं, वाईएसआरसीपी उसकी प्रतिद्वंद्वी है। क्या आपके कहने का आशय है कि भविष्य में भी ये दोनों दल पहले की तरह संसद में आपका सहयोग करते रहेंगे?

उत्तर- इनमें से अधिकतर पार्टियों के खिलाफ हम पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं। हां, आपकी ये बात सही है कि इन पार्टियों ने देशहित के मुद्दों पर हमें सपोर्ट किया है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में हमें राज्य के विकास की चिंता है। हम वहां के लोगों को भ्रष्टाचार और अराजकता से बाहर लाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि आंध्र और ओडिशा के लोगों को भी केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। हम चाहते हैं कि दोनों राज्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज गति से विस्तार हो, युवाओं को रोजगार के अवसर मिले, महिलाओं को सुरक्षा का एहसास हो।भाजपा का संकल्प है कि इन राज्यों में भाजपा की सरकार बनने के बाद वहां की संस्कृति और परंपराओं को और समृद्ध किया जाएगा। मैंने ओडिशा के लोगों को गारंटी दी है कि 10 जून को ओडिशा की मिट्टी से निकला व्यक्ति सीएम पद की शपथ लेगा। भाजपा उड़िया संस्कृति और गौरव की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रश्न 3- कांग्रेस समेत विपक्ष का कहना है कि मोदी तीसरी बार आए तो संविधान बदल देंगे? आपने कहा भी कि ऐसा कुछ नहीं होना है? इसके बावजूद इस मुद्दे को विपक्ष छोड़ नहीं रहा है?

उत्तर- भाजपा विकास के नारे को लेकर जनता के बीच जा रही है। जब हम विकसित भारत की बात करते हैं, तो जनता का हम पर विश्वास और मजबूत होता है। क्योंकि लोगों ने हमारे 10 साल में विकास को धरातल पर उतरते देखा है। लेकिन जब लोग कांग्रेस के 60 साल को देखते हैं तो निराशा से भर जाते हैं। लोगों में इस बात का आक्रोश है कि कांग्रेस ने देश के 60 साल खराब कर दिए।

आप देखेंगे कि इंडी अलायंस के आखिरी 10 साल को अब भी लोग घोटालों के लिए याद करते हैं। इनके पास ना तो देश के लिए कोई विजन है, ना बेहतर भविष्य के लिए कोई योजना। ये लोग उस सोच के व्यक्ति हैं कि जब अपनी लकीर बड़ा ना कर पाओ तो दूसरे की छोटी करने में जुट जाओ। इंडी गठबंधन पूरी ताकत लगाकर यही कर रहा है। वो झूठ और प्रपंच की राजनीति करके चुनाव जीतना चाहता है। इंडी गठबंधन ने झूठ की पूरी फैक्ट्री ही खोल दी है। वहीं से संविधान पर भी इनका झूठ बाहर आया है।

कांग्रेस अपना पाप छिपाने के लिए झूठ का सहारा ले रही है। संविधान के साथ सबसे ज्यादा छेड़छाड़ कांग्रेस के कार्यकाल में ही हुआ है। 6 दशकों में संविधान की आत्मा को बार-बार चोट पहुंचाने का काम कांग्रेस ने किया है। और ये काम कांग्रेस ने संविधान बनने के साथ ही शुरू कर दिया था। कांग्रेस ने सबसे पहले संविधान की मूल प्रति पर प्रहार किया, उसमें बदलाव कर दिया। फिर संविधान की आत्मा पर प्रहार किया और अभिव्यक्ति की आजादी पर पहरा लगाने की कोशिश की। फिर संविधान की भावना पर बार-बार प्रहार किया और राज्यों की चुनी हुई सरकारों को हटा दिया। कांग्रेस के सिर पर इमरजेंसी लगाकर संविधान को खत्म कर देने का सबसे बड़ा पाप है। कांग्रेस किसी तरह इस पाप को धोना चाहती है, लेकिन देश की जनता इस सत्य को नहीं भूल सकती। अब पूरा इंडी गठबंधन हम पर ये आरोप चिपकाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिल रही।

प्रश्न 4- विपक्ष तीन मुद्दे पूरे जोर से उठा रहा है। आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा, कभी चुनाव नहीं होंगे और संघ के लोगों ने संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है?

उत्तर- इस चुनाव में विपक्ष का कोई मुद्दा चल नहीं रहा। इसलिए आप देख रहे होंगे कि चार चरणों के चुनाव के बाद अब विपक्ष के मुद्दे बदलने लगे हैं। उनके सामने विश्वसनीयता का संकट है। शहजादे के बोले गए शब्दों को जनता गंभीरता से नहीं लेती। कांग्रेस का इकोसिस्टम जिन बातों को लोगों के बीच फैलाने में जुटा है, उसका जमीन पर कोई प्रभाव नहीं है। उल्टे हमें उनकी साजिशों को बेनकाब करने का अवसर मिल गया।

अब देखिए, कांग्रेस का इतिहास ही आरक्षण विरोध का रहा है। एससी, एसटी आरक्षण के खिलाफ नेहरू जी ने मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी थी। जब ओबीसी आयोग के गठन की बात आई तो राजीव जी ने सक्रियता नहीं दिखाई। बाद में भाजपा के सहयोग से सरकार बनी तो ओबीसी आयोग का गठन हुआ। कांग्रेस ने कई मौकों पर SC/ST/OBC के आरक्षण में सेंध लगाने की कोशिश की। संयुक्त आंध्र प्रदेश में इनकी कोशिश कोर्ट की वजह से कामयाब नहीं हुई। कर्नाटका में ये अपने मंसूबों में कामयाब हो गए। वहां मुसलमानों को पिछड़ी जाति में शामिल करके आरक्षण में सेंधमारी कर दी। धर्म आधारित ये आरक्षण देकर कांग्रेस किसका नुकसान कर रही है? हमारे दलित, पिछड़े और वंचित भाई-बहनों का। अब तो इंडी गठबंधन के नेता खुलकर SC/ST/OBC का हक छीनकर पूरा का पूरा आरक्षण मुस्लिम समाज को देने की बात कर रहे हैं। संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण देने पर रोक है, इसके बावजूद इंडी गठबंधन तुष्टीकरण के लिए आरक्षण में सेंध लगा रहा है।

विपक्ष संविधान, चुनाव, संस्थानों की स्वतंत्रता को लेकर झूठी बातें फैला रहा है, और उम्मीद कर रहा है कि जनता उसकी बात सुन लेगी। लेकिन उनका ये दांव काम नहीं कर रहा। अब उनमें हड़बड़ाहट दिख रही है, तभी तो वो हमारे जिन कार्यों का मजाक उड़ाते थे, अब चार चरण के चुनाव के बाद वही काम करने का वादा करने लगे हैं। चुनाव के बाद जिनका भविष्य जेल में कटने वाला है, वो भाजपा के भविष्य पर अनुमान बांट रहे हैं। ऐसी खोखली बातों का जनता पर कोई असर नहीं होता।

"हमारी योजनाओं के लाभार्थियों में बड़ी संख्या मुस्लिम समाज की है। उन्हें भी लगता है कि भाजपा सरकार है, तो उन्हें सारी सुविधाएं मिल रही हैं। यह सरकार नहीं होती तो उन्हें इन मूलभूत चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ता। पिछले 10 साल में हर वर्ष 5 करोड़ पर्सन-ईयर रोजगार सृजित हुए...बेरोजगारी दर 6% से घटकर 3% रह गई। विपक्ष बेरोजगारी और महंगाई को मुद्दा बना रहा है।"

इस चुनाव के बाद विपक्ष स्थायी रूप से बेरोजगार होने जा रहा है। जहां तक देश के युवाओं की बात है, तो उनके लिए पिछले 10 वर्षों में रोजगार के अनेक नए अवसर बने हैं। हमने रोजगार मेले के माध्यम से लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। अर्थव्यवस्था मजबूत होने से प्राइवेट सेक्टर आगे बढ़ रहा है और रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। हमने युवाओं के लिए कई ऐसे नए सेक्टर खोले हैं, जिनमें पहले मौका नहीं मिलता था। जैसे स्पेस सेक्टर, ड्रोन सेक्टर में नए अवसर बने हैं। आज देश में सवा लाख से ज्यादा स्टार्टअप हैं, इनसे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर बन रहे हैं। मुद्रा लोन ने करोड़ों उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया और अब वे लोग जॉब क्रिएटर्स की भूमिका में हैं। देश में क्रिएटर इकनॉमी बड़ी हो रही है। युवाओं को गेमिंग के फील्ड में नए अवसर मिल रहे हैं।

हाल ही में स्कॉच ग्रुप की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें बताया गया है कि माइक्रो फाइनेंस के कारण स्वरोजगार के अनेक अवसर बने हैं। आज इन्फ्रास्ट्रक्चर के जो इतने काम हो रहे हैं, उनका संबंध भी रोजगार से है। इतने निर्माण, इतने उत्पादन, इतनी सेवाओं के लिए कितना श्रम चाहिए, आप अंदाजा लगा सकते हैं। ये श्रम रोजगार के माध्यम से ही तो मिल रहा है। स्कॉच की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 10 साल में हर वर्ष 5 करोड़ पर्सन-ईयर रोजगार पैदा हुए है।

ईपीएफओ के मुताबिक पिछले सात साल में 6 करोड़ नए सदस्य इसमें जुड़े हैं। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) का डाटा बताता है कि 2017 में जो बेरोजगारी दर 6% थी, वह अब 3% रह गई है। इससे यह भी पता चलता है कि शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी दर घटी है।

पिछले 10 वर्षों में हमारी सरकार महंगाई पर काबू रख पाने में सफल रही। यूपीए के समय महंगाई डबल डिजिट में हुआ करती थी। लेकिन आज हम छोटी-छोटी चीजों की कीमतों को काबू करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। आज दुनिया युद्ध की परिस्थितियों से घिरी है, इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ना तय था। लेकिन हमारी सरकार ने अपने लोगों के हितों को प्राथमिकता दी और उन पर महंगे पेट्रोल-डीजल का बोझ नहीं पड़ने दिया।

कोविड के बाद पूरी दुनिया महंगाई से जूझ रही है, बहुत से देशों में महंगाई दर दहाई अंकों में है। भारत उन देशों में शामिल है, जहां महंगाई दर कम है। हमारी कोशिश रही है कि गरीब और मध्यवर्ग के लिए महंगाई दर हमेशा सीमा में रहे। आज जन औषधि केंद्र की वजह से दवाइयों का खर्च 70 प्रतिशत तक कम हो गया है। देश में हर गरीब परिवार को 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त मिलने की गारंटी है।

आपने हाल ही में मुस्लिमों से आत्ममंथन के आग्रह के साथ सत्ता में बैठाने-उतारने की मानसिकता से बाहर निकलने का आह्वान किया था। यह कैसे संभव होगा, क्या आप कहना चाहते हैं कि मुसलमान बिरादरी में सामाजिक स्तर पर सुधार की जरूरत है?
मेरे लिए, देश का हर नागरिक समान है। हमें उसकी बेहतरी की चिंता है, उसके दुख व दर्द से सरोकार है। मैं उन्हें धर्म, जाति व वर्ग में बांटकर नहीं देखता। मेरी सरकार का मूल मंत्र भी यही है। आज देश की किसी भी योजना में यह नहीं पूछा जाता कि लाभार्थी का नाम, जाति या पंथ क्या है। जो योजना है, सबके लिए हैं। इसीलिए माताएं-बहनें, गरीब, युवा और किसान, चट्टान की तरह मेरे पीछे खड़े दिखते हैं। यही मेरी असली ताकत हैं, इन्हीं से मुझे प्रेरणा और शक्ति मिलती है।

प्रश्न 5- विपक्ष बेरोजगारी और मंहगाई को मुद्दा बना रहा है।

उत्तर- इस चुनाव के बाद विपक्ष स्थायी रूप से बेरोजगार होने जा रहा है। जहां तक देश के युवाओं की बात है तो उनके लिए पिछले 10 वर्षों में रोजगार के अनेक नए अवसर बने हैं। हमने रोजगार मेले के माध्यम से लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। अर्थव्यवस्था मजबूत होने से प्राइवेट सेक्टर आगे बढ़ रहा है और रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं। हमने कई ऐसे नए सेक्टर युवाओं के लिए खोले हैं, जिनमें पहले मौका नहीं मिलता था। जैसे स्पेस सेक्टर, ड्रोन सेक्टर में नए अवसर बने हैं। आज देश में सवा लाख से ज्यादा स्टार्टअप्स हैं, इनसे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर बन रहे हैं। मुद्रा लोन ने करोड़ों उद्यमियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया और अब वे लोग जॉब क्रिएटर्स की भूमिका में हैं। देश में क्रिएटर इकॉनॉमी बड़ी हो रही है। युवाओं को गेमिंग के फील्ड में नए अवसर मिल रहे हैं।

हाल ही में SKOCH ग्रुप की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें बताया गया है कि माइक्रो फाइनेंस के कारण स्वरोजगार के अनेक अवसर बने हैं। आज इंफ्रास्ट्रक्चर के जो इतने काम हो रहे हैं, उनका संबंध भी रोजगार से है। इतने निर्माण, इतने उत्पादन, इतनी सेवाओं के लिए कितना श्रम चाहिए, आप अंदाजा लगा सकते हैं। ये श्रम रोजगार के माध्यम से ही तो मिल रहा है। SKOCH की रिपोर्ट बताती है कि पिछले 10 साल में हर वर्ष 5 करोड़ पर्सन-ईयर रोजगार पैदा हुए है।EPFO के मुताबिक पिछले सात साल में 6 करोड़ नए सदस्य इसमें जुड़े हैं। PLFS का डेटा बताता है कि 2017 में जो बेरोजगारी दर 6% थी, वो अब 3% रह गई है। इससे ये भी पता चलता है कि शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी दर घटी है।

पिछले 10 वर्षों में हमारी सरकार महंगाई को काबू रख पाने में सफल रही। यूपीए के समय महंगाई डबल डिजिट में हुआ करती थी। लेकिन आज हम छोटी-छोटी चीजों की कीमतों को काबू करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। आज दुनिया युद्ध की परिस्थितियों से घिरी है, इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ना तय था। लेकिन हमारी सरकार ने अपने लोगों के हितों को प्राथमिकता दी और उन पर महंगे पेट्रोल-डीजल का बोझ नहीं पड़ने दिया।

कोविड के बाद पूरी दुनिया मंहगाई से जूझ रही है, बहुत से देशों में महंगाई दर दहाई अंकों में है। भारत उन देशों में शामिल है, जहां महंगाई दर कम है। हमारी कोशिश रही है कि गरीब और मध्यमवर्ग के लिए महंगाई हमेशा सीमा में रहे। आज जन औषधि केंद्र की वजह से दवाइयों का खर्च 70 प्रतिशत तक कम हो गया है। देश में हर गरीब परिवार को 5 लाख रुपए तक इलाज मुफ्त मिलने की गारंटी है।

प्रश्न 6- आपने 2014 के चुनाव में कहा था मुझे मां गंगा ने बुलाया है। इस बार कहा मुझे मां गंगा ने गोद ले लिया है। क्या इसका यह अर्थ लगाया जाए कि काशी अब प्रधानमंत्रीजी की स्थायी कर्मभूमि है?

उत्तर- देखिए, वाराणसी मैं बहुत समय से आता रहा हूं। जब पार्टी के संगठन के लिए काम करता था तो बहुत बार यहां आना होता था। मैं जब भी गंगा मां को देखता हूं तो मुझे एक आत्मीय अनुभूति होती है। मुझे मां गंगा का हमेशा सानिध्य मिला है, और जबसे मेरी मां गई हैं, तब से तो मेरे लिए गंगा ही मां रह गई हैं। 2014 में जब मैं यहां आया था, तो मैंने कहा था कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है। 10 वर्षों में मेरे अंदर ये भावना प्रबल हुई है कि मां गंगा ने मुझे गोद ले लिया है। इसलिए काशी के प्रति मैं अलग तरह की जिम्मेदारी महसूस करता हूं।

हर सनातनी के मन में एक बार काशी दर्शन की इच्छा रहती है, और ये मेरा सौभाग्य है कि मैं महादेव की नगरी और मां गंगा की सेवा कर पा रहा हूं। यहां के देवतुल्य लोग, उनका स्नेह मेरे लिए सत्ता, संसदीय सीट, एमपी, पीएम से कहीं बड़ा है। मैं काशीवासियों के प्रेम का कर्जदार हूं और ये कर्ज मैं अंतिम सांस तक उतारना नहीं चाहता। इसके बदले मैं लगातार उनकी सेवा करना चाहता हूं।

प्रश्न 7- वाराणसी में बीते 10 वर्षों में इतने सारे नए प्रोजेक्ट्स पूरे हुए हैं। बनारस जैसे इतने प्राचीन शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर काम करना आपके लिए कितना चुनौतीपूर्ण रहा है।

उत्तर- वाराणसी आज दुनिया में अर्बन डेवलपमेंट की मॉडल सिटी कही जा सकती है। 2014 में जब मैं बनारस आया था, तो यहां का विकास एक बड़ी जिम्मेदारी थी। गलियां संकरी थीं, सड़कों पर काम नहीं हुआ था, रेलवे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर भी ऐसे ही थे। हमने फेज वाइज चीजें बदलीं। एक नया मॉडल बनाकर काम किया।

दुनिया भर में बनारस की पहचान उसकी गलियां हैं। हमने गलियों में बिजली के लटके हुए तार हटवाना शुरू किया। गलियों की सफाई के लिए प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से काम शुरू कराए। सीवेज सिस्टम में ऐसी पाइप थीं, जो अंग्रेजों के जमाने से लगी थीं। इसलिए सीवर ओवरफ्लो से गलियों में, सड़कों पर पानी जमा होता था। उनको बदलवाना शुरू किया। आपको याद होगा, मैंने वाराणसी के अस्सी घाट पर स्वच्छता नवरत्नों की घोषणा की थी। ऐसे ही घाटों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई पर फोकस किया।

इसके बाद काम शुरू हुआ, इंफ्रास्ट्रक्चर पर। वाराणसी में बाहरी गाड़ियों से जाम ना लगे, इसके लिए रिंग रोड बनी। शहर में जो बाहर से आने वाले लोग हैं, उनके लिए नैशनल हाइवे के नेटवर्क को बेहतर किया। बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, बंगाल और एमपी से जो लोग इलाज के लिए बनारस आते हैं, उनके लिए कैंसर हॉस्पिटल और ट्रॉमा सेंटर बना। शहर में ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुधारने के लिए कमांड सेंटर बना। रेलवे स्टेशन सुधारे गए, एयरपोर्ट पर काम हुआ। अब रोप वे बन रहा है, अर्बन ई बस चल रही है, वंदे भारत जैसी ट्रेन है।

घाटों पर नई सुविधाएं बनीं। बाबा विश्वनाथ का कॉरिडोर बना। क्रूज सर्विस शुरू कराई गई। दशाश्वमेध घाट पर नया बिजनेस प्लाजा बनाया गया। तो इन सब से बनारस की इकॉनमी को बहुत बल मिला। आज जो टूरिस्ट आते हैं, उनको सभी तरह की सुविधाएं मिलती हैं। बनारस शहर में जाम का संकट एक बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि शहर का घनत्व बहुत ज्यादा है। लोगों को सहूलियत और स्पीड दोनों कैसे दे सकें, उसके लिए काम कर रहे हैं।

जबसे मेरी मां गई हैं, तबसे गंगा ही मेरे लिए मां रह गई हैं...इसलिए काशी के प्रति मैं अलग तरह की जिम्मेदारी महसूस करता हूं और यहां के विकास के लिए प्रितबद्ध हूं। इसी भावना से यहां की पंरपरा व संस्कृति को ध्यान में रखकर विकास के सभी कार्य किए जा रहे हैं। इस नगरी को दुनिया के अतिथियों के लिए भी तैयार किया गया है।

प्रश्न 8- काशी की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए 10 वर्षों में बहुत सारे प्रयास हुए हैं। काशी की संस्कृति को संरक्षित करते हुए विकास करने का काम कैसे किया गया है?

उत्तर-10 साल में बनारस ने मुझे बनारसी बना दिया है, इसलिए मैं बनारसी होने के नाते ये समझता हूं कि मेरी नगरी में संस्कृति और परंपरा का महत्व क्या है।

हमने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को भव्य रूप दिया, लेकिन उसकी ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व का ध्यान रखा। कॉरिडोर में माता अहिल्या की प्रतिमा लगाई गई, मंदिर के गर्भगृह स्वर्ण मंडित हुए, गंगा घाट से बाबा विश्वनाथ का धाम जोड़ा गया। काल भैरव मंदिर से काशी विश्वनाथ और फिर काशी विश्वनाथ से दशाश्वमेध घाट के बीच की जो सड़क थी, उसका सुंदरीकरण किया गया। यानि जो व्यक्ति महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, असम जैसे राज्यों से काशी आए तो, उसे वही काशी दिखाई दे जिसे उसने पुराणों और कथाओं में सुना है।

काशी का दुर्गाकुंड धाम विकसित किया गया। रविदास मंदिर जिस स्थान पर है, उसका विकास किया गया। सारनाथ का स्तूप जहां है, उस इलाके को हेरिटेज सिटी के मॉडल पर विकसित किया गया। अब हम काशी के मणिकर्णिका घाट को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से विकसित कर रहे हैं। लेकिन इन सब में हमने उस पौराणिकता, उस भावना का ध्यान रखा है जिसे मन में लेकर लोग यहां आते हैं।

काशी बहुसंस्कृति की नगरी है। यहां अनेक वर्गों, भाषाओं और प्रांतों के लोग रहते हैं। इसी काशी में हमने काशी तमिल संगमम, काशी तेलुगु संगमम जैसे ऐतिहासिक आयोजन किए। इसी काशी में जी-20 की बैठक हुई। इसी काशी में प्रवासी भारतीय सम्मेलन हुआ। ये अतिथि जब काशी आए तो उन्होंने देखा कि दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी कितनी अलग है। काशी में हमने विकास किया, साथ ही परंपराएं भी संरक्षित की। काशी को दुनिया के सामने रखा, साथ ही काशी को दुनिया के अतिथियों के लिए तैयार भी किया।

प्रश्न 9- चुनाव प्रचार में आपने पहली बार अदाणी—अंबानी का नाम लिया। आपने कहा कि चुनाव घोषित होने के बाद राहुल ने इन्हें गाली देना बंद कर दिया है? आपके ऐसा कहने का वास्तविक अभिप्राय क्या था?

उत्तर- इसका जवाब आपको मुझसे नहीं कांग्रेस से पूछना चाहिए। वैसे भी इस बात का जवाब अधीर रंजन जी पहले ही दे चुके हैं। राजनीतिक फिरौती वसूलने के लिए कांग्रेस ऐसे आरोप लगाती रहती है। कांग्रेस के पास अपना कुछ बचा नहीं है, इन दिनों उन पर माओवादी सोच हावी है।

आजादी के बाद लेफ्ट पार्टियां कांग्रेस को टाटा-बिड़ला की सरकार कहते थे। ये वामदलों का ही आइडिया है, जिसे शहजादे हम पर चिपकाने की कोशिश करते हैं। लेकिन ये आइडिया काम नहीं कर रहा, क्योंकि लोग जानते हैं कि भाजपा की सरकार आने के बाद उनको घर मिला। भाजपा सरकार में ही मुफ्त राशन, शौचालय, बिजली-पानी, गैस कनेक्शन की सुविधा मिली। भाजपा की सरकार में ही गरीब को मुफ्त इलाज का भरोसा मिला। हमने जनधन खाते खुलवाए, हमने गरीब के हक का पैसा सीधे उसके खाते में भेजना शुरू किया। इससे कांग्रेस का कमीशन तंत्र फेल हो गया, इसी वजह से वो हमारे बारे में अनाप-शनाप बोलते रहते हैं।


प्रश्न 10- आपने हाल ही में मुस्लिमों से आत्ममंथन के आग्रह के साथ सत्ता में बैठाने-उतारने की मानसिकता से बाहर निकलने का आह्वान किया है। यह कैसे होगा, क्या आप कहना चाहते हैं कि मुसलमान बिरादरी में सामाजिक स्तर पर सुधार की जरूरत है?

उत्तर- मेरे लिए, देश का हर नागरिक समान है। हमें उसकी बेहतरी की चिंता है, उसके दुख दर्द से सरोकार है। मैं उन्हें धर्म, जाति, वर्ग में बांटकर नहीं देखता। मेरी सरकार का मूल मंत्र भी यही है। आज देश की किसी भी योजना में ये नहीं पूछा जाता कि लाभार्थी का नाम, जाति या पंथ क्या है। जो योजना है सबके लिए हैं। इसीलिए माताएं-बहनें, गरीब, युवा और किसान, चट्टान की तरह मेरे पीछे खड़े दिखते हैं। यही मेरी असली ताकत हैं, इन्हीं से मुझे प्रेरणा और शक्ति मिलती है।

मुस्लिम समाज को सोचना चाहिए कि उन्हें कांग्रेस के 6 दशक में क्या मिला और पिछले 10 साल में उन्हें क्या-क्या सुविधाएं मिलीं। कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने उन्हें वोटबैंक समझकर उनका इस्तेमाल किया है। ये लोग मुस्लिम समाज को गरीब रखना चाहते हैं। अपनी रोज की जिंदगी में इतना उलझा कर रखना चाहते हैं कि वो अपना भला-बुरा ना समझ पाए। तुष्टीकरण की नीति से मुस्लिम समाज का भला नहीं हो सकता।

प्रश्न 11- 2014 में जब आप सत्ता में आए, तब यह धारणा बनाई गई कि अब भारत के मुस्लिम देशों से रिश्ते प्रभावित होंगे। इसके उलट अरब-खाड़ी देशों से हमारे संबंध बेहतर हुए हैं। सभी प्रमुख मुस्लिम देशों ने आपको अपने यहां का सर्वोच्च सम्मान दिया है। अबुधाबी में पहली बार मंदिर का निर्माण हुआ है। बावजूद इसके देश के मुसलमानों में आपके और आपकी पार्टी के प्रति बेरुखी का भाव क्यों है?

उत्तर- मैं आपकी इस बात से बिलकुल सहमत नहीं हूं कि देश के मुस्लिम समाज के मन में भाजपा के प्रति बेरुखी का भाव है। तीन तलाक की दहशत से जिन बेटियों को मुक्ति मिली है उनसे पूछिए। सिर्फ बेटियां ही नहीं, उनके परिवार ने भी राहत की सांस ली है। अब किसी पिता को ये डर नहीं है कि बेटी अगर लौट आई तो उसके भविष्य का क्या होगा। किसी भाई को ये चिंता नहीं है कि अगर बहन को उसके पति ने तीन तलाक दे दिया, तो उस पर अपना और उसके परिवार को पालने का बोझ आ जाएगा।

हमने बिना मेहरम के हज यात्रा की व्यवस्था शुरू की। हमने हज यात्रा के लिए वीआईपी कोटा खत्म किया। इससे सामान्य मुस्लिम परिवारों को बहुत सुविधा हुई है। हमारी योजनाओं के लाभार्थियों में बड़ी संख्या मुस्लिम समाज की है। उन्हें भी लगता है कि ये सरकार है तो उन्हें सारी सुविधाएं मिल रही हैं। ये सरकार नहीं होती तो उन्हें इन मूलभूत चीजों के लिए संघर्ष करना पड़ता।

देश का मुस्लिम समाज ये भी देख रहा है कि अरब देशों के भारत से संबंध बेहतर हुए हैं। जो मुस्लिम युवा उन देशों में काम करते हैं, वो भी अपने परिवार को बताते हैं कि पिछले 10 वर्षों में वहां उनका सम्मान कितना बढ़ गया है। मैंने हमेशा कहा है कि विदेशों में जो सम्मान मुझे मिलता है, वो मेरा नहीं 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। इस सम्मान का हकदार देश का हर नागरिक है।

प्रश्न 12- चुनाव में अमित शाह जी सहित कई फेक वीडियो आए। चरित्रहनन व दोषारोपण का यह तरीका बड़ी चिंता का विषय बने हैं। क्या कहना है?

उत्तर- मैं तथ्यों के साथ पिछली सरकार के घोटाले, नेताओं के बयान और कांग्रेस की नाकामियां सामने रखता हूं, तो उसे काउंटर करने के लिए फेक नरैटिव गढ़ते हैं। इन पर बोफोर्स का दाग है, जिसे धोने के लिए राफेल का झूठ लेकर आए इन पर हेलीकॉप्टर घोटाले का दाग है, जिसे हटाने के लिए HAL का झूठ लेकर आए। इन पर इमरजेंसी का दाग है, जिसे मिटाने के लिए मुझे तानाशाह कहते रहते हैं।

कांग्रेस और उसका इकोसिस्टम हमेशा से ही झूठ को हथियार बनाकर चुनाव लड़ता आया है। टेक्नॉलॉजी के दौर में उन्होंने अपने झूठे प्रचार को भी हाईटेक बना लिया है। लेकिन वो ये भूल जाते हैं कि आज टेक्नॉलॉजी सबके लिए है। हर किसी के पास इंटरनेट पर जाकर सच जानने की सुविधा है। इसलिए इनका झूठ भी कुछ भी मिनटों में बेनकाब हो जाता है।

प्रश्न 13- तीसरी बार सत्ता में आने पर आप बहुत बड़े-बड़े निर्णय की बात करते हैं? यह आपका आत्मविश्वास ही है कि आपने सत्ता में आने पर 100 दिन के काम का एजेंडा भी तैयार करने को कह दिया है। लोगों में बड़ी उत्सुकता है कि आखिर चुनाव बाद पहले सौ दिनों में क्या होने वाला है?

उत्तर– ये लोगों के विश्वास का सम्मान है। देश ने मन बना लिया है कि तीसरी बार एनडीए की सरकार बनानी है। जब देश ने मन बना लिया है तो काम करने लिए समय की बर्बादी क्यों करना। हमारे पास 100 दिनों का एक्शन प्लान पहले से है, जिस पर काम जारी है। इसमें मैंने 25 दिन और जोड़ दिए हैं। मुझे देशभर के युवाओं के संदेश मिल रहे हैं। जिसमें वो अगले 5 वर्ष और अगले 25 वर्षों के रोडमैप पर अपने सुझाव दे रहे हैं। मैंने तय किया है कि 100 दिनों के अलावा 25 दिन युवाओं के सुझाव पर अमल के होंगे।

हमारा एक्शन प्लान एक लंबी एक्सससाइज के बाद तैयार हुआ है। इसमें हमने मंत्रियों, विशेषज्ञों और लाखों लोगों की राय ली है। हमारा लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत का निर्माण है। इसके लिए एक-एक पल कीमती है। मैं अभी ये कह सकता हूं कि 10 साल में विकास के जो काम हुए हैं, उसके स्केल और स्पीड में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होने वाली है।

प्रश्न 14- नई सरकार के सामने बड़े काम होंगे। एक राष्ट्र-एक चुनाव पर सहमति बनाना, नारी वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण पर अमल और 2026 में होने वाला परिसीमन। इन प्राथमिकताओं पर क्या कहेंगे?

उत्तर-आप जिन कार्यों की बात कर रहे हैं वो हमारा दायित्व है। हमारी सरकार इन सभी विषयों को अंतिम परिणाम तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार कानूनों को पास करा कर ठंडे बस्ते में नहीं डालती है। कांग्रेस सरकार सिर्फ नाम करने के लिए कानून बनाती थी, उन्हें नोटीफाइ करने में दशकों लग जाते थे।

हमने जो कानून बनाए हैं, उनके परिणाम अगले 5 वर्षों में आपको दिखने लगेंगे। नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है। ये अधिकार पाने के लिए आधी आबादी को लंबा इंतजार करना पड़ा। सामाजिक न्याय की बात करने वालों ने इसे रोककर रखा था। लेकिन भाजपा की सरकार ने इसे संभव कर दिखाया। हम हर वो काम करने वाले हैं, जिससे देशवासियों का जीवन सुगम हो और 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को शक्ति मिले।

प्रश्न 15- पंजाब में इस बार आप अकेले चुनाव लड़ रहे हैं। किसान आंदोलन अभी भी चुनौती बना हुआ है। भाजपा के लिए वहां कितनी संभावनाएं आप देख रहे हैं?

उत्तर- पंजाब के लोगों में राष्ट्र प्रथम की भावना सर्वोपरि है। पंजाब के सिख भाई-बहन, पंजाब के किसान, व्यवसायी, युवा जानते हैं कि केंद्र की भाजपा सरकार देश से जुड़े फैसले लेती है। हमारी सरकार सिख गुरुओं के जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेकर काम करती है। पिछले 10 वर्षों में हमने सिख गुरुओं की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हमने गुरु नानक देव जी, गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोविंद सिंह जी का प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया है। हमारे कार्यकाल में करतारपुर कॉरिडोर खोला गया। हमें अफगानिस्तान से पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब को भारत लाने का सौभाग्य मिला।

किसानों के लिए हमारी सरकार ने बीज से बाजार तक की सुविधा बनाई है। खाद और फर्टिलाइजर की बोरी जो दुनिया मे 3000 रुपए से ज्यादा की मिल रही है, वो हमारे किसानों को 300 रुपए से भी कम में मिल रही है। सिंचाई के लिए व्यवस्था की जा रही है। हम किसानों की छोटी से छोटी जरुरत का ध्यान रख रहे हैं।

पंजाब जांबाज योद्धाओं और बहादुर सैनिकों की धरती है। पंजाब के जो युवा देश की सेना में शामिल हैं, वो जानते हैं कि पिछले 10 वर्षों में कैसे सेना का मनोबल ऊंचा हुआ है। आज देश में एक मजबूत सरकार है, जो दुश्मनों को जवाब देना जानती है। आज देश में एक ऐसी सरकार है, जो अपने एक सैनिक के लिए भी दुश्मन से टकराने का हौसला रखती है। केंद्र की भाजपा सरकार अपने सैनिकों की हर सुविधा का ख्याल रख रही है।
भाजपा जहां भी चुनाव लड़ रही है, वहां अपने रिपोर्ट कार्ड पर वोट मांग रही है। मुझे विश्वास है कि पंजाब में हमें लोगों का समर्थन मिलेगा।

किसानों के लिए हमारी सरकार ने बीज से बाजार तक की सुविधा बनाई है। खाद और फर्टिलाइजर की बोरी, जो दुनिया में 3000 रुपये से ज्यादा की मिल रही है, वह हमारे किसानों को 300 रुपये से भी कम में मिल रही है।

प्रश्न 16- भाजपा के एजेंडे में राम मंदिर, अनुच्छेद-370 और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे थे। दो वादे आपने पूरे कर दिए। अब समान नागरिक संहिता पर कब तक?

उत्तर- देश के कई राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू है। उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने अपने यहां समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया है। इससे वहां किसी को कोई परेशानी नहीं है। विपक्ष भी इसके खिलाफ नहीं बोल पा रहा। यूसीसी संविधान की भावना के अनुरूप है। हमारे संविधान निर्माता भी चाहते थे कि देश में एक तरह की नागरिक संहिता हो। समान नागरिक संहिता हमारे संकल्प पत्र का हिस्सा है, और इसे लेकर हम प्रतिबद्ध हैं। मुझे आशा है कि जब हम सदन में इसे लेकर आएंगे तो विपक्ष इसका समर्थन करेगा।

प्रश्न 17- काशी-तमिल संगमम, संसद में सेंगोल की स्थापना, राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से ठीक पहले आपका भगवान राम से जुड़े दक्षिण भारत के स्थलों का दौरा। इसे किस रूप में देखा जाए। क्या आप देश की सांस्कृतिक पहचान की भी लड़ाई लड़ रहे हैं? या फिर जैसा विपक्ष कहता है कि यह बस दक्षिण में पार्टी का आधार बढ़ाने की राजनीति मात्र है?

उत्तर-आजादी के बाद कांग्रेस ने विदेशी शासकों से सिर्फ सत्ता नहीं ली, बल्कि उनके शासन के मंत्र को भी अपना लिया। बांटो और राज करो की नीति पर चलकर ही कांग्रेस ने दशकों तक राज किया। कांग्रेस की विभाजनकारी राजनीति को धर्म, जाति, भाषा, संप्रदाय, क्षेत्र का बंटवारा शक्ति देता है।

पिछले 10 वर्षों में मेरी सरकार ने एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना से काम किया है। मैंने तमिल संस्कृति और आजादी के पहले पल के प्रतीक के तौर पर सेंगोल की स्थापना नई संसद में की। लेकिन इसका महत्व एक प्रतीक से कहीं ज्यादा है। ये आज के भारत को अपनी प्राचीन परंपराओं से जोड़ता है। ये भारत के हर नागरिक को गर्व का एहसास कराता है। संसद में सेंगोल की स्थापना उस साजिश पर चोट है, जिसके तहत आजादी के बाद कई पीढ़ियों में देश की संस्कृति को लेकर हीन भावना भर दी गई। आज मैं बड़े गर्व से दक्षिण भारत का पोशाक धारण करता हूं। जब नॉर्थ ईस्ट जाता हूं तो गर्व से वहां के कपड़े पहनता हूं। मैं यूएन जाकर तमिल बोलता हूं।

मेरे लिए वो भी बहुत गौरव का क्षण था, जब नौसेना के एपोलेट्स और ध्वज पर शिवाजी की विरासत के चिह्नों को जगह दी गई। मुझे बहुत खुशी हुई जब असम के महान योद्धा लसित बोरफुकन की भव्य और विशाल प्रतिमा स्थापित हुई। भाजपा सरकार के प्रयासों से लसित बोरफुकन की 400वीं जयंती पूरे देश ने मनाई। हमारी सरकार आदिवासी गौरव से जन-जन को जोड़ने के लिए जनजातीय संग्रहालय बनवा रही है।

प्राण प्रतिष्ठा से पहले जब मैंने दक्षिण के राज्यों में अनुष्ठान किया तो मैंने पाया कि पूरा देश रामभक्ति के एक ही सूत्र से बंधा है। उनमें भाषा का भेद है, लेकिन भावना एक है। उनके तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन उसमें मूल तत्व एक ही है। मेरे इन कार्यों के पीछे अगर कोई राजनीतिक उद्देश्य देख रहा है, तो उसे याद दिलाना चाहूंगा कि पुदुचेरी में हमारी सरकार है। कर्नाटका में हम सरकार में रह चुके हैं। भाजपा दक्षिण भारत में सबसे बड़ी पार्टी है। हमने दक्षिण में भी वैसे ही प्रचार किया, जैसे देश के दूसरे हिस्सों में किया। और वहां हमें जिस तरह का समर्थन मिल रहा है, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि दक्षिण भारत के नतीजे लोगों को चौंकाएंगे।

काशी बहुसंस्कृति की नगरी है। यहां अनेक वर्गों, भाषाओं और प्रांतों के लोग रहते हैं। इसी काशी में हमने काशी तमिल संगमम, काशी तेलुगु संगमम जैसे ऐतिहासिक आयोजन किए। इसी काशी में जी-20 की बैठक हुई। इसी काशी में प्रवासी भारतीय सम्मेलन हुआ। ये अतिथि जब काशी आए तो उन्होंने देखा कि दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी कितनी अलग है।

Following is the clipping of the interview: