प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक भागीदारी की समीक्षा की।
भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने आर्थिक संबंधो को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का वादा किया।
भारत और रूस ने घर और दुनिया में शांति और सुरक्षा को बढावा देने, समावेशी और पारदर्शी वैश्विक शासन प्रणाली को सुदृढ़ करने का वादा किया।
भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को दोहराया कि रूस भारत का प्रमुख रक्षा और रणनीतिक भागीदार बना रहेगा।
भारत और रूस ने हीरे में प्रत्यक्ष व्यापार को बढ़ावा देने की पहल का स्वागत किया।
भारत-रूस ने सफल परमाणु ऊर्जा सहयोग पर ध्यान दिया, जिसने पहले ही कुडनकुलम संयंत्र में बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है।
भारत और रूस ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास की दिशा में एक साथ काम करते रहेंगे।
भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन: दोनों देशों ने अपार क्षमता का पीछा करने के लिए बाह्य अंतरिक्ष में सहयोग करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
भारत और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार करने और इसे अधिक प्रभावी बनाने और समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के प्रतिनिधित्व की बात की।

17वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान रूस संघ के राष्ट्रपति, महामहिम श्री व्लादिमीर वी पुतिन और भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री, महामहिम श्री नरेंद्र मोदी ने आज गोवा में मुलाकात की। नेताओं ने भारत एवं रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक साझेदारी की समीक्ष की जो लम्बे समय से आपसी विश्वास में निहित है, एक दूसरे के मूल हितों और अद्वितीय जन से जन समानताओं को बेजोड़ पारस्परिक समर्थन से विशेषित है। उन्होंने आर्थिक संबंधों को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जाने, सतत विकास प्राप्त करने, घर और दुनिया भर में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने, समावेशी और पारदर्शी वैश्विक शासन को मजबूत बनाने, और साझा हित के मुद्दों पर वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने के नए अवसरों का अनुसरण करने का वचन दिया।

पिछली सदी की दूसरी छमाही के बाद से भारत के औद्योगिक विकास और तकनीकी प्रगति और रक्षा जरूरतों में रूस के महत्वपूर्ण योगदान को पीचनाकर, प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि रूस भारत का प्रमुख रक्षा और रणनीतिक भागीदार बना रहेगा, और उनके बीच की स्थायी साझेदारी बदलती विश्व व्यवस्था में शांति और स्थिरता दूत है। राष्ट्रपति पुतिन ने भारत के साथ विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक भागीदारी के लिए रूस की निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि की और आतंकवाद के खिलाफ युद्ध जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के पदों की समानता का उल्लेख किया। भारतीय पक्ष ने उरी में सेना बेस पर हुए आतंकवादी हमले की रूस की स्पष्ट निंदा की सराहना की।

पिछले शिखर सम्मेलनों का पालन

नेताओं ने दिसंबर 2014 में रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा और दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा के दौरान जारी संयुक्त वक्तव्य में प्रदर्शित रोडमैप के अनुसार 2014 के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने पिछले वर्ष के उच्च स्तरीय दौरों, संस्थागत विनिमयन और अन्य सम्पर्कों सहित द्विपक्षीय विनिमयनों पर संतोष व्यक्त किया।

आर्थिक सहयोग

नेताओं ने वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश के लिए दिसम्बर 2014 में वार्षिक सम्मेल में निर्धारित लक्ष्यों को वास्तविक बनाने के लिए लगातार अविष्कृत तरीके की आवश्यकता को स्वीकार किया और उद्देश्य की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जाताई। उन्होंने पुनः संस्थागत तंत्र के ढांचे में नियमित परामर्श पर आधारित दोनों सरकारों द्वारा सतत सुविधा के साथ साथ निर्णयों के त्वरित कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। यह स्वीकारते हुए कि दोनों राज्यों के व्यवसायियों के लिए यात्रा व्यवस्था का उदारीकरण, नए परिवहन गलियारों को मजबूत बनाने, आदि इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, पक्षों ने समय पर और प्रभावी कार्यान्वयन का आह्वान किया।

दोनों पक्षों ने 13 सितंबर 2016 को नई दिल्ली में आयोजित व्यापारिक, आर्थिक, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (आईजीसी) की 22वीं बैठक के परिणामों का स्वागत किया और आईजीसी के दौरान निर्धारित नए प्रस्तावों को शीघ्र ही अंतिम रूप देने का आह्वान किया। दोनों पक्षों ने व्यापार के आगे सहजता के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने आगे रूस और भारत में उच्च प्रौद्योगिकी निवेश की सुविधा के लिए रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के साथ भारत के राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे (एनआईआईएफ) द्वारा द्विपक्षीय निवेश कोष की स्थापना का उल्लेख किया।

दोनों पक्षों ने विशेष रूप से रूसी तेल क्षेत्र में भारत द्वारा हाल ही में निवेश का स्वागत किया और फार्मास्यूटिकल, रसायन उद्योग, खनन, मशीन निर्माण, संरचना परियोजनाओं का कार्यान्वयन, रेलवे क्षेत्र में सहयोग, उर्वरक उत्पदन, आटोमोबाइल, और विमान निर्माण के साथ साथ एक दूसरे की औद्योगिक सुविधाओं के आधुनिकीकरण में सहयोगी उपक्रम जैसे आशाजनक क्षेत्रों में नए और महत्वाकांक्षी निवेश प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों की कंपनियों का आह्वान किया। दोनों पक्षों ने कृपापूर्वक दोनों देशों के रेलवे संगठनों के बीच जारी सहयोग का आकलन किया और इसे आगे तेज करने का आह्वान किया।

उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच (16-18जून) जिसमें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने भाग लिया, अंतर्राष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी आईएनएनओपीआरओएम (11-14 जुलाई) जिसमें वाणिज्य व उद्योग राज्य मंत्री, श्रीमती निर्मला सीतारमण, (स्वतंत्र प्रभार), राजस्थान, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश ने भाग लिया, और और पूर्वी आर्थिक मंच (2-3 सितम्बर) जैसे 2016 में आयोजित बड़े व्यापारिक एवं कारोबारी इवेंट्स के दौरान सीईओ स्तर की वार्ता सहित भारत व रूस के व्यवसाय समुदाय के प्रतिनिधियों की विस्तृत वार्ता का स्वागत किया। उन्होंने ऐसी बातचीत को जारी रखने के लिए कहा और उल्लेख किया कि आईएनएनओपीआरओएम-2016 में एक भागीदार देश के रूप में भारत की भागीदारी उद्योग, वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय नवाचारों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स के बीच एक प्रतिनिधि के रूप में आईएनएनओपीआरओएम पर प्रकाश डाला। दोनों पक्षों ने 11-14 अक्टूबर, 2016 से आंध्र प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और नई दिल्ली के लिए व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए रूस संघ के उद्योग एवं व्यापार मंत्री, डनिस मेंटूरोव की सफल यात्रा का संतोष के साथ उल्लेख किया औरभारतीय-रूसी औद्योगिक सहयोग की गहनता के लिए विशाल क्षमता का उल्लेख किया। भारतीय पक्ष ने भारत में अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग सोर्सिंग शो 2017 में भागीदार देश के रूप में रूस की अनुसूचित भागीदारी का स्वागत किया और रेखांकित किया कि यह द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को जोड़ने में गति प्रदान करेगा। रूस ने सुदूर पूर्व रूसी संघ में अवसरों पर ध्यान केन्द्रित करने, 2017 में आयोजित पूर्वी आर्थिक मंच में उत्साह के साथ भाग लेने और रूस संघ के सुदूर पूर्वी क्षेत्रों के राज्यपालों एवं भारत के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच गोलमेज बैठक का आयोजन करने, कृषि, खनन, जहाजरानी आदि में व्यापार व निवेश अवसरों का अन्वेषण करने के लिए भारत सरकार के इरादों का स्वागत किया।

दोनों पक्षों ने भारत एवं रूस के बीच हीरों के प्रत्यक्ष व्यापार को प्रोत्साहित करने की पहल का स्वागत किया और नियमित रूप से कच्चे हीरे को देखकर पीजेएससी एएलआरओएसए से इस परियोजना के सक्रिय समर्थन का उल्लेख करते हुए भारत डायमंड बार्स में विशेष अधिसूचित क्षेत्र (एसएनजेड) के काम का सकारात्मक मूल्यांकन दिया। पक्षो ने पीजेएससी एएलआरओएसए के साथ दीर्घकालिक कच्चे हीरे की आपूर्ति अनुबंध पर हस्ताक्षर करके भारतीय निवासी कंपनियों की संख्या में नवीनतम वृद्धि का उल्लेख किया और तंत्र विकास के महत्व एवं द्विपक्षीय हीरा व्यापार को मजबूत बनाने के उद्देश्य से काम करने के महत्व पर बल दिया।

डेयरी उत्पदों एवं गोजातीय मांस सहित कृषि व प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए आपसी बाजारी पहुंच पर दोनों देशों के पादप और पशु चिकित्सा अधिकारियों के समझौते जैसी पहलों का सकारात्मक मूल्यांकन करके, पक्षों ने अपने-अपनी नियामक अधिकारियों के बीच चल रहे विचार-विमर्श को जारी रखने पर सहमति जताई और द्विपक्षीय व्यापार के लिए ऐसे उत्पादों की व्यापक रेंज के लिए उपायों की पेशकश की।

दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच चलने वाले माल एवं वाहनों पर व्यापार और सीमा शुल्क नियंत्रण की सुविधा के लिए पूर्व आगमन जानकारी के आदान प्रदान में सहयोग पर भारत का केन्द्रीय शुल्क और सीमा शुल्क बोर्ड औररूस की संघीय सीमा शुल्क सेवा के बीच प्रोटोकॉल के अनुसार ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के कार्यान्वयन में प्रगति का स्वागत किया। 6 अप्रैल 2015 को प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने के बाद, दोनों पक्षों के सीमा शुल्क प्रशासन ने जटिल तकनीकी मुद्दों का समाधान किया और द्विपक्षीय व्यापार का मार्ग प्रशस्त करके सीमा निर्यात घोषणाओं के आधार पर जानकारी के वास्तविक समय पूर्व आगमन को सफलतापूर्व प्रभाव में लाया।

दोनों पक्षों ने भारत गणराज्य और यूरेशियन आर्थिक संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की व्यवहार्यता पर विचार करने के लिए संयुक्त अध्ययन समूह के काम में प्रगति का उल्लेख किया।

व्यापार व्यवस्था में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका का हवाला देकर, पक्षों ने संवादाता संबंधो के विकास एवं उधार सीमा में वृद्धि के माध्यम से अपनी भागीदारी के दोनों देशों के वाणिज्यिक बैंकों द्वारा वृद्धि की आशा को व्यक्त किया। पक्षों ने बैंकिंग एवं वित्तीय मामलों पर कार्य समूहों में बैंकिंग एवं वित्तीय मामलों पर उप समूहों और बीमा क्षेत्र में भारत-रूस सहयोग के अतिरिक्त मुद्दों सहित इसके व्यापक क्षेत्र के मूल्यांकन स्वागत किया।

दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने में कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए, नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) के कार्यान्वयन पर बढ़ते केन्द्रण का स्वागत किया जो माल के स्थानांतरण के लिए लगने वाले समय को कम करके क्षेत्र में आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। स्वागत किया समय की वस्तुओं के पारगमन के लिए ले लिया है। उन्होंने आईएनएसटीसी के प्रारूप के अंतर्गत भारतीय और रूसी सीमा शुल्क अधिकारियों के बीच वार्ता में वृद्धि का स्वागत किया।

भारत-रूस "ऊर्जा ब्रिज”

दोनों पक्षों ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि मजबूत असैन्य परमाणु सहयोग, हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में सहयोग, दीर्घकालिक एलएनजी सोर्सिंग हित, हाइड्रोकार्बन ऊर्जा पाइपलाइन पर कार्य और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग ने दोनों देशों के बीच आशाजनक "ऊर्जा ब्रिज" का निर्माण किया है।

दोनों पक्षों ने इस बात की पुष्टि है कि उनका सफल परमाणु ऊर्जा सहयोग, जिसने पहले से ही कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में बिजली उत्पादन शुरू कर दिया गया है, अपनी सामरिक भागीदारी के सबसे ठोस और पर्याप्त पहलुओं में से एक है। दोनों पक्षों ने 11 दिसम्बर 2014 को हस्ताक्षरित भारत गणराज्य और रूस संघ के बीच परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग को मजबूत करने के सामरिक दृष्टिकोण" के अंतर्गत सहयोग का विस्तार करने की अपनी मंशा की पुष्टि की। इस संदर्भ में, उन्होंने संतोष के साथ उल्लेख किया कि सकारात्मक विकास की श्रृंखला को 2016 के अंत से पहले इन दस्तावेजों के समापन के लक्ष्य के साथ कुडनकुलम यूनिट 1 की पूर्ण विद्युत क्षमता की प्राप्ति, कुडनकुलम यूनिट 2 के विद्युत ग्रिड के साथ एकीकृत, कुडनकुलम यूनिट 3 और 4 के लिए साइट पर काम का प्रारंभ, और कुडनकुलम सूनिट 5 एवं 6 के लिए जनरल फ्रेमवर्क समझौते और क्रेडिट प्रोटोकॉल सहित इस वर्ष उनके असैन्य परमाणु सहयोग में चिह्नित किया गया है। 10 अगस्त, 2016 को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन द्वारा कुडनकुलम यूनिट -1 के समर्पण के बाद, दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र के यूनिट 2 को ‘‘भारत-रूस मित्रता एवं सहयोग’’ के लिए समर्पित किया और गोवा में आयोजित एक समारोह में वीडियो लिंक के माध्यम से कुडनकुलम यूनिट 3 एवं 4 के लिए ठोस नींव रखने के साक्षी बने।

भारतीय पक्ष ने बताया कि यह रूसी डिजाइन एनपीपी के निर्माण के लिए दूसरी साइट के प्रारंभिक आवंटन करने की दिशा में काम कर रहा है। दोनों पक्षों ने भारत रशियन डिजाइन यूनिट में सीरियल निर्माण के संदर्भ में नए एवं भविष्यक रशियन डिजाइन न्यूक्लीयर पावर परियोजना के लिए उपकरण व घटकों मे स्थानीय विनिर्माण के लिए भारतीय परमाणु विनिर्माण उद्योग में सक्रिय संलग्नता के साथ भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग एवं रूस के रोस्तम के बीच स्थानिकीकरण के लिए कार्य योजना के कार्यान्वयन में की गई प्रगति की प्रशंसा की। उन्होंने परमाणु ईंधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और परमाणु ऊर्जा पर तीन संयुक्त कार्य समूहों और पिछले दो सम्मेलनों के दौरान निर्धारित स्थानिकीकरण पर केन्द्रीय कार्य समूह की रूपरेखा के तहत शामिल अपने परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठानों के बीच वरिष्ठ अधिकारी स्तर की सतत वार्ता पर संतोष व्यक्त किया। भारतीय पक्ष ने मई 2016 में एटमएक्सपो की सफल मेजबानी करने के लिए रूस को बधाई दी। इस एटमएक्स्पो में वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों और भारत के सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से परमाणु उद्योग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

दोनों देशों के नेताओं ने भारतीय कंपनियों के साथ अंतिम सम्मेलन ने भारत द्वारा इसे सबसे बड़ा इक्विटी अधिग्रहण बनाकर ‘‘ट्रास-युरयाख नेफ्टेगाजोडोबायचा’’ एवं ‘‘वानकोर्नेफ्ट’’ में इक्विटी के अधिग्रहण के बाद भारतीय एवं रूसी तेल कंपनियों द्वारा की गई प्रगति पर अत्यधिक प्रशंसा की ।तेल एवं गैस सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य के साथ, रूस ने रूसी संघ के अपतटीय आर्कटिक क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं में भाग लेने के लिए अपनी रुचि व्यक्त की। दोनों पक्षों ने जलवायु परिवर्तन पर पैरिस समझौते के अनुसार सतत विकास को बढ़ावा देने के साथ साथ ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए आर्थिक रूप से कुशल और पर्यावरणक रूप से स्वच्छ ईंधन के रूप में प्राकृतिक गैस के व्यापक उपयोग का समर्थन किया।

दोनों पक्षों ने ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास की दिशा में एक साथ काम करने के लिए अपनी निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इस संदर्भ में, उन्होंने भारत में सौर ऊर्जा के निर्माण पर रूसी ऊर्जा संघ मंत्रालय की रूसी ऊर्जा एजेंसी और भारत गणराज्य के सौर ऊर्जा निगम के बीख् 24 दिसम्बर 2015 को हस्ताक्षरित ज्ञापन के अंतर्गत सौर ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत एवं विस्तृत करने की तत्परता व्यक्त की।

दोनों पक्षों ने भारत में मौजूदा ऊर्जा संयंत्रों के आधुनिकीकरण और नए ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण क्षेत्र में सहयोग के विकास में दोनों देशों की ऊर्जा क्षेत्र कंपनियों को सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

भारतीय राज्यों और रूसी क्षेत्रों के बीच सहयोग

द्विपक्षीय संबंधो का आधार देने वाले अंतर-क्षेत्रीय सहयोग के लिए अपरिमित संभावना देकर, दोनों पक्षों ने हमारे द्विपक्षीय अंतर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत बनाने और उसकी प्रभाविकता में वृद्धि करने पर सहमति जताई। 11 दिसम्बर 2011 को संयुक्त व्यक्तव्य का आह्वान करके, दोनों पक्षों ने महाराष्ट्र और स्वेडलवोस्क खंटि-मनसिस्क स्वायत्त ऑक्रग - उगरा के बीच और महाराष्ट्र एवं स्वेडलवोस्क के बीच लेख ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का स्वागत किया। उन्होंने पारस्परिक लाभों के लिए सहकारी व्यवस्था में समान रूप से प्रवेश करने के लिए अपने अन्य क्षेत्रों एवं राज्यों को भी प्रोत्साहित किया। दोनों पक्षों ने फिर वे भी अपने अन्य क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहित किया और राज्यों को इसी तरह से पारस्परिक लाभ के लिए सहकारी व्यवस्था में दर्ज करें। दोनों पक्षों ने 2017 में एक साल के समारोह के माध्यम से मुंबई और सेंट पीटर्सबर्ग के बीच सिस्टर सिटी संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर खुद को प्रतिबद्ध किया।

विज्ञान, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और शिक्षा संबंधो में सुधार

नेताओं ने सामग्री विज्ञान, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान, आदि जैसे क्षेत्रों में दोनों व्यावहारिक विज्ञान एवं मूल विज्ञान में, द्विपक्षीय वैज्ञानिक सहकारिता कार्यक्रम को मजबूत बनाने पर संतोष जाहिर किया। पक्षों ने भारत एवं रूस के राज्यों एवं क्षेत्रों के बीच वैज्ञानिक एवं तकनीकी संबंधों के विकास में सकारात्मक गतिशीलता का अवलोकन किया। पक्षों ने वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में और नवाचार क्षेत्रों में द्विपक्षीय वार्ता के अग्र विकास पर भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और रूस के एफएएसओ के बीच समझौता ज्ञापन का स्वागत किया।

दोनों पक्षों ने शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के विस्तार का उल्लेख किया। रूस एकेडेमिया भारत सरकार द्वारा शुरू अकादमिक गतिशीलता कार्यक्रम में अधिक से अधिक सक्रियता से शामिल हो रहा है और उसने वैश्विक अकादमिक नेटवर्क पहल का आह्वान किया। पक्षों ने इस पहल के अंतर्गत सहयोग को आगे ले जाने पर सहमति जताई।

भारत और रूस के बीच शैक्षिक सहयोग ने भारत गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री प्रणब मुखर्जी और रूस संघ के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, श्री दिमित्री वी. लिवानोव की उपस्थिति में उच्च शिक्षा के 9 भारतीय एवं 21 रूसी संस्थानों के प्रतिनिधियों द्वारा 8 मई 2015 को मोस्को में हस्ताक्षरित घोषणा के अंतर्गत स्थापित रूसी एवं भारतीय विश्वविद्यालयों के नेटवर्क (आरआईएन) की रचना के साथ संस्थागत समर्थन प्राप्त किया। दोनों पक्षों ने छात्रों और शिक्षकों के विनिमयन को बढ़ाने, पाठ्यक्रम के विकास, संयुक्त प्रयोगशालाओं के निर्माण, वैज्ञानिक सम्मेलनों और संगोष्ठियों के संगठन के साथ साथ संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान के संचालन और अनुसंधान संस्थानों में विकसित प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण में सहयोग में आरआईएन की तीव्र गतिविधि का उल्लेख किया। दोनों पक्षों ने आरआईएएन में दोनों देशों के भागीदार विश्वविद्यालयों की सूची के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।

दोनों पक्षों ने उच्च प्रदर्शक कम्प्यूटिंग (एचपीसी) में सहकारिता के लिए विकास एडवांस कम्प्यूटिंग केन्द्र (सी-डैक), भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और लोमोनोसोव मोस्को स्टेट यूनिवर्सिटी (एमएसयू) के बीच दिसम्बर 2015 में हस्ताक्षरित ज्ञापन में की गई प्रगति से संतुष्टि व्यक्त की। भारतीय पक्ष ने समझौता ज्ञापन में परिकल्पित से परे सुपरकम्प्यूटिंग में विभिन्न गतिविधियों के साथ इस सहकारिता को बढ़ाने में अपनी रुचि प्रकट की है।

दोनों पक्षों ने गणित के क्षेत्र मे वार्ता और मई-जून 2016 में सेंट पीटर्सबर्ग में सांख्यिकी एवं प्रायिकता में दूसरे भारतीय-रूसी संयुक्त सम्मेलन की सफल मेजबानी का जायजा लिया और इस क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता को इंगित किया।

आर्कटिक के महत्व को स्वीकार करते हुए और यह देखते हुए कि रूस आर्कटिक परिषद का एक सदस्य है और भारत मई 2013 के बाद से एक पर्यवेक्षक है, पक्षों ने तेजी से बदल रहे आर्कटिक क्षेत्र के सामने आ रही चुनौतियों (जैसे बर्फ पिघलने, जलवायु परिवर्तन, समुद्री जीवन और जैव विविधता) के अध्ययन के लिए वैज्ञानिक सहयोग की सुविधा के लिए सहमति जताई।

दोनों पक्षों ने आधुनिक फाइटोजेनेटिक जो खाद्य सुरक्षा के प्रावधान के लिए ज्ञान व रचनात्मक समाधान के सबसे महत्वपूर्ण स्त्रोत के रूप में कार्य करता है, क्षेत्र में भारत एवं रूस के बीच वार्ता और 2016 में नोवोसिबिर्स्क में आयोजित पहली अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी ‘‘खाद्य सुरक्षा के लिए पौधों में जेनेटिक एवं जीनोमिक्स’’ की सफलता का स्वागत करने के साथ साथ इस क्षेत्र में सहयोग में अग्र वृद्धि की आवश्यकता को रेखांकित किया।

अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस के रूप में 21 जून की घोषणा का स्वागत करते हुए और वर्ष 2016 में योगा इवेंट के सफल आयोजन पर टिप्पणी करते हुए, दोनों पक्षों ने योगा और आयुर्वेद के पारंपरिक भारतीय रूपों के माध्यम से स्वास्थ्य और फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करने पर सहमति जताई। दोनों पक्ष रूस में आयुर्वेदिक प्रथाओं एवं दवाओं के गुणवत्ता नियंत्रण के लिए आयुर्वेदिक अध्ययन और नियमों के विकास के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने में आपसी सहयोग की संभावना का अन्वेषण करेंगे।

अंतरिक्ष सहयोग

नेताओं ने सामाजिक रूप से उपयोगी अनुप्रयोगों और वैज्ञानिक ज्ञान को उन्नत करने के दृष्टिकोण के साथ बाह्य अंतरिक्ष में सहयोग करने के लिए अपार क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने ग्लोनस एवं एनएवीआईसी के अपने संबंधित नेविगेशन उपग्रह तारामंडल की उपयोगिता बढ़ाने के लिए एक दूसरे के क्षेत्रों में ग्राउंड स्टेशनों की स्थापना एवं उपयोग पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने जोर देकर कहा कि भारत और रूस की अंतरिक्ष एजेंसियां अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों, प्रक्षेपण यान, उपग्रह नेविगेशन, अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रहों के अन्वेषण पर अधिक सक्रियता से शामिल होंगी। दोनों पक्ष ने सबसे महत्वपूर्ण घटक के रूप में अंतरिक्ष अभियानों की सुरक्षा पर बाह्य अंतरिक्ष की गतिविधियों और नियामक प्रावधानों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए दिशानिर्देशों के से को तैयार करने के एक समेकित दृष्टिकोण पर अंतरिक्ष संयुक्त राष्ट्र समिति के वैज्ञानिक और तकनीकी उपसमिति के भीतर विस्तार करने की अपनी वचनबद्धता की पुष्टि की।

रक्षा सहयोग

दोनों देशों के बीच विशेष एवं विशेषाधिकृत रणनीतिक भागीदारी में सैन्य-तकनीकी सहयोग के योगदान को स्वीकार करते हुए नेताओं ने इस क्षेत्र में अपने सहयोग को बनाए रखने की अपनी मजबूत प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इस संदर्भ में उन्होंने सैन्य तकनीकी सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की गतिविधियों की सराहना की।

दोनों पक्षों ने 2016 में रूस के सुदूर पूर्व में धन सेना से जुड़े संयुक्त भारतीय-रूसी अभ्यास इंद्र पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने अप्रैल 2016 में भारत रक्षा मंत्री और मास्को के लिए मई - जून 2016 और नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का स्वागत किया। उन्होंने दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास और संस्थागत बातचीत का विस्तार करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

दोनों पक्षों ने संयुक्त डिजाइन, विकास और उच्च प्रौद्योगिकी सैन्य उपकरणों के उत्पादन के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख किया और इस संदर्भ में सकारात्मक रूप से भारत में केए-226टी हेलीकाप्टरों के उत्पादन के लिए संयुक्त उद्यम की स्थापना का मूल्यांकन किया।

दोनों पक्षों ने बाद में 2016 में भारत-रूस सैन्य औद्योगिक सम्मेलन आयोजित करने और द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समिति की योजना का स्वागत किया। भारत-रूस सैन्य औद्योगिक सम्मेलन रूस द्वारा आपूर्तित उपकरणों के भागों, मरम्मत और रखरखाव एवं सह उत्पादन सहित कई सैन्य उपकरणों से संबंधित मुद्दों को संबोधित करेंगा। निजी कंपनियों को भी मेक इन इंडिया पहल के तहत भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। द्विपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समिति आईटी, संचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, बाह्य अंतरिक्ष सहयोग, रिमोट सेंसिंग जैसे उच्च तकनीक क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास सहयोग से संबंधित मामलों पर ध्यान केंद्रित करेंगी।

सुरक्षा और आपदा प्रबंधन

अधिक से अधिक सुरक्षा संबंधित और आपदा प्रबंधन के सहयोग को बढ़ाने के लिए निरंतर और संस्थागत बातचीत की जरूरत को स्वीकार करते हुए, पक्षों ने मार्च 2016 में नागरिक सुरक्षा, आपात स्थिति और भारत के लिए प्राकृतिक आपदाओं के परिणामों के उन्मूलन के लिए रूसी मंत्री की सफल यात्रा का उल्लेख किया, जिसके दौरान उन्होंने आपात स्थिति की रोकथाम एवं उन्मूलन के क्षे. में सहयोग पर संयुक्त आयोग की पहली बैठक का आयोजन किया और वर्ष 2016-2017 के लिए संयुक्त कार्यान्वयन योजना पर हस्ताक्षर किए।

सितंबर 2015 में भारत में रूस के आंतरिक मामलों के मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्सेव की भारत यात्रा को याद करते हुए दोनों पक्षों ने भारत गणराज्य के आंतरिक मंत्रालय और रूस के आंतरिक मामलों के मंत्रालय के बीच सहयोग और भारत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और रूस के आंतरिक मामलों के मंत्रालय क बीच संयुक्त कार्रवाई पर एक समझौते को अंतिम रूप देने की अपनी मंशा की पुष्टि की, जो उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी का मुकाबला करने के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का आयोजन करके सर्वोत्तम प्रथाओं और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के लिए चल रहे अंतर मंत्रालयी बातचीत को विकसित करने के लिए एक समर्थकारी ढांचा प्रदान करेगा।

संस्कृति, पर्यटन और जन से जन का संबंध

दोनों पक्षों ने वर्ष 2016-2018 में भारत संस्कृति मंत्रालय और रूस संस्कृति मंत्रालय के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर शीघ्र हस्ताक्षर करने में अपनी रुचि की पुष्टि की और संस्कृति एवं कला के क्षेत्र में काम कर रहे दोनों देशों के अकादमिक एवं अनुसंधान संगठनों के बीच सांस्कृतिक सहयोग में तेजी लाने पर अपनी रुचि की पुष्टि की। 2016 में रूसी संस्कृति महोत्सव की सफलता का उल्लेख करते हुए, 2017 में रूस में भारतीय संस्कृति महोत्सव का आयोजन करने फैसला किया गया।

दोनों पक्षों ने संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में दोनों देशों की राज्य संस्थाओं के बीच सीधे संपर्क के विकास पर सितंबर 2016, नई दिल्ली में संस्कृति और पर्यटन पर संयुक्त कार्य समूह द्वारा किए गए समझौते की सराहना की।

दोनों पक्षों ने पारस्परिक आधार पर नामित विमान कंपनियों के साथ साथ अपने देशों के संबंधित प्रदेशों में चार्टर और विशेष उड़ाने भरने वाली अन्य विमान कंपनियों के विमान चालक दल को वीजा मुक्त प्रवेश, रहने और जाने की सुविधा देने के फैसले को लागू करने के लिए फैसले को लागू करने के लिए करार सम्पन्न करने के उद्देश्य से उठाए गए कदमो का स्वागत किया।

दोनों पक्षों ने वीजा व्यवस्था को उदार एवं सरल बनाने की दिशा में काम करने और जन सम्पर्क बढ़ाने के लिए समूह पर्यटन यात्रा को बढ़ावा देने पर सहमति जताई।

दोनों पक्षों ने प्रवास से संबंधित मुद्दों पर बातचीत करने के महत्व का उल्लेख किया और इस क्षेत्र में विशेष रूप से इन मुद्दों पर लगातार वार्ता के माध्यम से रूस में काम कर रहे भारतीय नागरिकों के लिए वर्क परमिट एवं अस्थायी निवास परमिट जारी करने पर सहयोग के लिए कानूनी ढांचे में सुधार करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई।

दोनों पक्षों ने भारत गणराज्य और रूस के बीच मार्च 2015 में प्रभाव में आने वाली सजायाफ्ता व्यक्तियों के हस्तांतरण पर संधि को लागू करने की गति पर संतोष व्यक्त किया और आशा व्यक्त की कि आगे के परिणामों को आने वाले समय में सजायाफ्ता व्यक्तियों के स्थानांतरण पर द्विपक्षीय संधि को लागू करके प्राप्त किया जाएगा।

दोनों पक्षों ने राज्य के कांसुलर मिशन को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए निवासी राज्यों के क्षेत्र में अपने नागरिकों एवं न्यायिक संस्थाओं के अधिकारों एवं हितों की रक्षा करने में अनुभव के विनिमयन सहित कांसुलर क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के प्रयासों को लागू करने की मंशा व्यक्त की।

जन स्तर पर समझ और सद्धभावना को बढ़ावा देने में सिनेमा की भूमिका स्वीकार करते हुए दोनों पक्षों ने 2016 को मुंबई में मास्को और रूस फिल्म महोत्सव में भारतीय फिल्म महोत्सव के आयोजन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने फिल्म संगठनों के बीच की वार्ता कर समर्थन करके और दोनों देशों के बीच ऑडियो-वीडियो कोप्रोडक्शन की संभावना का अन्वेषण करके सिनेमा के क्षेत्र में रूस-भारत सहयोग के क्षेत्र को गहन एवं विस्तृत करने पर सहमति जताई।

पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावना को समझकर और दोनों देशों के बीच पर्यटन एजेंसियों के बीच घनिष्ठ सहयोग को प्रोत्साहित करने के साथ, दोनों पक्षों ने 2018 को ’भारत और रूस के बीच पर्यटन का वर्ष’ के रूप में मनाने पर सहमति जताई। उन्होंने भारत एवं रूस पर्यटन संघ, संगठनों, उद्यमों एवं कंपनियों के बीच सीधे संपर्क और संबंध के विस्तारण सहित द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने में रूस भारतीय पर्यटन मंत्रालय, और रूसी पर्यटन एजेंसी के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया।

राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ का समारोह

नेताओं ने भारत एवं रूस के बीख् राजनयिक संबंधों के विस्तार की 70वीं वर्षगांठ को चिंहित करने के लिए 2017 में भव्य समारोह का आयोजन किया है। उन्होंने संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को राजनीतिक, रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अर्थव्यवस्था, वित्त, निवेश, संस्कृति, शिक्षा, थिंक टैंक, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, खेल, युवा, पर्यटन सहित देशों के विभिन्न क्षेत्रों के बहुमुखी संबंधों की गहराई एवं चौड़ाई का चित्रण करने वाले समारोह का आयोजन करने का निर्देश दिया है।

वैश्विक व्यवस्था और विश्व शांति

वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भारत और रूस के बीच सहयोग के महत्व को स्वीकार करते हुए दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र की केन्द्रीय भूमिका और अंतरराष्ट्रीय कानून, आम हितों, समानता, पारस्परिक सदभावना और देशों के आंतरिक मामलों में गैर हस्तक्षेप पर आधारित बहु-ध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय प्रणाली को बढ़ावा देने की अपनी इच्छा की पुष्टि की।

भारत और रूस ने समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को अधिक प्रभावी एवं प्रस्तुतिकर बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार के लिए कहा है। रूस ने परिष्कृत एवं विस्तृत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।

भारतीय पक्ष ने भूमिका शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में भारत के परिग्रहण में रूस द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की। नेताओं ने 24 जून 2016 को ताशकंद में एससीओ शिखर सम्मेलन में दायित्वों के ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया और विभिन्न क्षेत्रों में एससीओ की दक्षता और प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए एक साथ मिलकर काम करने के लिए दोनों देशों के इरादे की पुष्टि की।

नेताओं ने ब्रिक्स समूह में सहयोग के विकास पर संतोष व्यक्त किया और खुलापन, एकता, समानता, आपसी समझ, समग्रता और पारस्परिक लाभकारी सहयोग के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित ब्रिक्स की सामरिक भागीदारी को मजबूत बनाने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता और कार्यान्वयन और ब्रिक्स सहयोग एजेंडे के विस्तार की अच्छी गति की सराहना की। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग की गहनता और विविधीकरण का उल्लेख किया और ब्रिक्स एनएसए; कृषि; आपदा प्रबंधन; शिक्षा; वित्त; श्रम एवं रोजगार; विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार; और 2016 में व्यापार मंत्रियों की बैठक के परिणामों की सराहना की और स्वास्थ्य एवं दूरसंचार मंत्रियों की बैठकों के सकारात्मक परिणामों की आशा जताई। नेताओं ने 2016 में ब्रिक्स व्यापार परिषद की बैठक द्वारा उत्पन्न गति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने नए विकास बैंक के कामकाज में प्रगति और हरित एवं अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में परियोजनाओं के लिए ऋण के पहले सेट को वितरित करने के अपने फैसले का स्वागत किया। रूस ने ब्रिक्स फिल्म महोत्सव, ब्रिक्स अंडर -17 फुटबॉल टूर्नामेंट, पर्यटन पर ब्रिक्स सम्मेलन जैसे इवेंट्स पर भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता और संचालन के दौरान जन संपर्क को बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित करने की सराहना की और निरंतरता सुनिश्चित करने में भारत के प्रयासों को पूरा समर्थन देने का वादा किया और 2016 में अपनी अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स गतिविधियों के अग्र विकास और निरंतरता को सुनिश्चित करने में भारत के प्रयासों में पूर्ण समर्थन करने का वादा किया। पक्षों ने अपनी सीमा शुल्क सहयोग समिति के स्थापन करने और शुल्क मामलों पर वार्ता एवं आपसी सहायता के लिए कानूनी आधार बनाने के लिए किए गए प्रयासों सहित ब्रिक्स में सीमा शुल्क सहयोग की प्रशंसा की।

नेताओं ने ब्रिक्स आर्थिक सहयोग के विकास पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने जुलाई 2015 में उफा सम्मेलन पर ब्रिक्स आर्थिक भागीदारी के लिए रणनीति के कार्यान्वयन में प्रगति की सराहना की। रूसी पक्ष ने ई-कामर्स, ‘‘सिंगल विंडो’’, बौद्धिक संपदा अधिकारों का सहयोग, व्यापार वृद्धि और सूक्ष्म, छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों (एमएसएमई) सहयोग जैसे ब्रिक्स में रूसी प्रेसीडेंसी के अंतर्गत शुरू मुख्य पहल की प्रस्तृति में निरंतरता के लिए भारतीय पक्ष की सराहना की। पक्षों ने ब्रिक्स प्रारूप में व्यापार में गैर शुल्क बाधाओं को नष्ट करने, सेवाओं में व्यापार वृद्धि और एमएसएमई का संरचना समर्थन एवं विकास पर भारतीय पहल के संयुक्त प्रोमोशन के माध्यम से सहयोग को व्यापक करने के लिए सहमति जताई। रूसी पक्ष ने ब्रिक्स देशों में अग्र व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली में पहले ब्रिक्स व्यापार मेले के आयोजन की भी सराहना की। उन्होंने 2015 में रूस पक्ष द्वारा प्रस्तृत 2020 तक व्यापार, अर्थव्यवस्था और निवेश सहयोग के लिए ब्रिक्स रोडमैप के कार्यान्वयन के महत्व को भी रेखांकित किया। इस पर भी सहमति जताई गई कि आर्थिक और व्यापार मुद्दों पर ब्रिक्स संपर्क समूह, ब्रिक्स व्यापार परिषद और नए विकास बैंक के बीच निकट सहयोग को बढ़ाना ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।

रूस, भारत और चीन (आरआईसी) के बीच सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए, नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी विश्वास और समन्वय को मजबूत बनाने के लिए एक ठोस योगदान के रूप में 18 अप्रैल, 2016 को मॉस्को में आरआईसी मंत्रिस्तरीय बैठक के परिणामों का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप से नई चुनौतियों और खतरों का मुकाबला करने के लिए त्रिपक्षीय प्रारूप में बातचीत को मजबूत करने की अपनी इच्छा की पुष्टि की।

नेताओं ने अफगानिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर चिंता व्यक्त की और आतंक अभयारण्यों, सुरक्षित आश्रय, और आतंक का समर्थन करने के अन्य रूपों जैसे आतंकवाद खतरों एवं अवैध नशीली दवाओं के उत्पादन व तस्करी के विरूद्ध दृढ़ कार्रवाई की आवश्यकता को स्वीकार किया। दोनों पक्षों ने घरेलू सुरक्षा स्थिति को संबोधित करके, अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बलों की क्षमताओं में सुधार करके, नशीले पदार्थों की क्षमताओं के विरोध को मजबूत बनाकर, सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करके, और कनेक्टिविटी बढ़ाकर अफगानिस्तान की मदद करने के लिए रचनात्मक, अंतरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय सहयोग का आह्वान किया। भारत और रूस ने अंतर्राष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों पर आधारित अफगान नीत और अफगान के स्वामित्व वाली राष्ट्रीय सुलह प्रक्रिया की प्राप्ति की दिशा में अफगान सरकार के प्रयासों के प्रति अपना समर्थन दोहराया।

नेताओं ने दृढ़ता से सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद की निंदा की और इसके उन्मूलन को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। भारत और रूस ने आतंकवाद से उत्पन्न खतरे का उल्लेख किया और विश्वास जताया कि प्रासंगिक यूएनएससी प्रस्तावों का पूर्ण कार्यान्वयन, किसी भी दोहरे मापदंड के आवेदन या चयनात्मकता के बिना संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति इस चुनौती का मुकाबला करने में सहायक होगी। उन्होंने आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने प्रदान करने से इनकार करने की आवश्यकता और आतंकवादी विचारधारा के प्रसार के साथ साथ आतंकवाद, भर्ती, आतंकवादियों की सुरक्षित यात्रा एवं विदेशी आतंकवादी सेनानियों का नेतृत्व करने वाली कट्टरता का मुकाबला करने, सीमा प्रबंधन को मजबूत बनाने और प्रभावी कानूनी सहायता एवं प्रत्यर्पण व्यवस्था के महत्व पर बल दिया। इसके अलावा, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से ‘आतंकवाद के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन के लिए शून्य सहिष्णुता’ के सिद्धांत पर निर्मित मजबूत अंतरराष्ट्रीय कानूनी शासन की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों पक्षों ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (सीसीआईटी) के जल्द समापन की दिशा में ईमानदार प्रयास करने का निर्देश दिया।

दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) की तीव्र विस्तार भूमिका ने कुछ सुरक्षा कमजोरियों के विकास का नेतृत्व किया है जिसे राज्यों के जिम्मेदार व्यवहार के लिए सार्वभौमिक रूप से लागू नियमों के विकास के माध्यम से संबोधित करने की आवश्यकता है जिसे आईसीटी के सुरक्षित और सतत उपयोग को सुनिश्चित करना चाहिए। नेताओं ने इस क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने की आवश्यकता जताई और इस संबंध में सहयोग के लिए भारत-रूस अंतर सरकारी समझौते के समापन का स्वागत किया।

दोनों पक्षों ने दक्षिण पूर्वी यूक्रेन में जारी अस्थिरता पर चिंता व्यक्त की और 12 फरवरी, 2015 के मिंस्क समझौतों के कार्यान्वयन के लिए उपायों के पैकेज का पूरा कार्यान्वयन करके इस मुद्दे को राजनीति और बातचीत से हल करने का समर्थन किया।

दो पक्षों को विश्वास है कि सीरिया में संघर्ष की स्थिति को 30 जून 2012, की जिनेवा विज्ञप्ति के आधार पर व्यापक एवं समावेशी इंट्रा-सीरिया बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाएगा। और और प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की और समावेशी के जरिए हल किया जाना चाहिए। दोनों पक्षों ने युद्ध की समाप्ति, घेरे गए क्षेत्रों के लिए मानवीय सहायता के वितरण, और संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण के अंतर्गत इंट्रा-सीरियाई संवाद की निरंतरता को मजबूत बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। भारत ने सीरिया में स्थिति की राजनीतिक और बातचीत से हल प्राप्त करने की दिशा रूसी पक्ष के प्रयास की सराहना की।

दोनों पक्षों ने पुष्टि की है कि सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार को रोकने और बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में उनका साझा हित है। निरस्त्रीकरण पर सम्मेलन, रासायनिक हथियार निषेध संगठन जैसे प्रसंगिक अंतरराष्ट्रीय मंचों में भारत एवं रूस की रचनात्मक भागीदारी द्वारा निरस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार के लिए जिम्मेदार दृष्टिकोण प्रदर्शित किया गया है। दोनों पक्षों ने इन मुद्दों पर वार्ता एवं समन्वय को मजबूत करने की अपनी इच्छा दोहराई। रूस ने बैलिस्टिक मिसाइल प्रसार के खिलाफ हेग आचार संहिता और मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था में भारत के प्रवेश का स्वागत किया। रूस का मानना है कि भारत की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं को मजबूत करेगी और इस संबंध में उसने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए भारत के आवेदन का स्वागत किया और भारत के एनएसजी में शीघ्र प्रवेश के लिए अपने मजबूत समर्थन को दोहराया। रूस ने वासीयनार समझौते में पूर्ण सदस्यता की भारत की इच्छा का समर्थन किया।

नेताओं ने अंतरिक्ष के शस्त्रीकरण को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण और स्थायी उपयोग को सुनिश्चित करने में अपनी रूचियों के अभिसरण का उल्लेख किया और आम हितों को बढ़ावा देने के लिए वियना में बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग पर यूएन समिति, जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन और न्यूयॉर्क में महासभा की प्रथम समिति जैसे प्रासंगिक अंतर्राष्ट्रीय मंचों में एक साथ काम करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दोनों पक्षों ने जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन में बाह्य अंतरिक्ष के शस्त्रीकरण रोकथाम के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौते के समापन का आह्वान किया।

दोनों पक्षों ने आगे ग्रूप आफ टवंटी (जी -20), पूर्व एशिया शिखर सम्मेलनों, एशिया-यूरोप बैठक, आसियान क्षेत्रीय मंच, आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक के अलावा, एशिया में वार्ता एवं विश्वास निर्माण उपायों पर सम्मेलन और एशिया सहयोग वार्ता जैसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अपने परामर्शों एवं समन्वय को मजबूत करने की अपनी इच्छा को दोहराया।

भारत और रूस ने सितंबर 2016 में हांग्जो में आयोजित जी -20 शिखर सम्मेलन के परिणामों पर संतोष व्यक्त किया और वैश्विक आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए स्थिर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली को सुनिश्चित करके, वैश्विक आर्थिक प्रशासन में सुधार करके और संरचनात्मक सुधारों में तेजी लाकर जी-20 में संयुक्त प्रयासों के महत्व को उजागर किया। रूस ने अपेक में शामिल होने के लिए भारत के आवेदन के लिए अपने समर्थन को दोहराया और भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को बनाए रखने के लक्ष्य से संयुक्त रूप से समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के सार्वभौमिक मान्यता प्राप्त सिद्धांतों के आधार पर इस क्षेत्र में एक खुले, समावेशी और पारदर्शी सुरक्षा और सहयोग के विकास का समर्थन किया। इस संबंध में उन्होंने पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन की रूपरेखा के तहत एशिया प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा रूपरेखा पर सतत चर्चा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

द्विपक्षीय परिप्रेक्ष्य

भारत गणराज्य और रूस के बीच सामरिक साझेदारी की अद्वितीय प्रकृति को स्वीकार करते हुए, नेताओं ने हितधारकों में विविधता लाने और अपने लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के स्तर को प्राप्त करने के लिए भारत-रूस साझेदारी को प्रेरित करके सहयोग के मौजूदा तंत्र को मजबूत बनाने पर सहमति जताई।

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January 19, 2026
S.NoAgreements / MoUs / LoIsObjectives

1

Letter of Intent on Investment Cooperation between the Government of Gujarat, Republic of India and the Ministry of Investment of the United Arab Emirates for Development of Dholera Special Investment region

To pursue investment cooperation for UAE partnership in development of the Special Investment Region in Dholera, Gujarat. The envisioned partnership would include the development of key strategic infrastructure, including an international airport, a pilot training school, a maintenance, repair and overhaul (MRO) facility, a greenfield port, a smart urban township, railway connectivity, and energy infrastructure.

2

Letter of Intent between the Indian National Space Promotion and Authorisation Centre (IN-SPACe) of India and the Space Agency of the United Arab Emirates for a Joint Initiative to Enable Space Industry Development and Commercial Collaboration

To pursue India-UAE partnership in developing joint infrastructure for space and commercialization, including launch complexes, manufacturing and technology zones, incubation centre and accelerator for space start-ups, training institute and exchange programmes.

3

Letter of Intent between the Republic of India and the United Arab Emirates on the Strategic Defence Partnership

Work together to establish Strategic Defence Partnership Framework Agreement and expand defence cooperation across a number of areas, including defence industrial collaboration, defence innovation and advanced technology, training, education and doctrine, special operations and interoperability, cyber space, counter terrorism.

4

Sales & Purchase Agreement (SPA) between Hindustan Petroleum Corporation Limited, (HPCL) and the Abu Dhabi National Oil Company Gas (ADNOC Gas)

The long-term Agreement provides for purchase of 0.5 MMPTA LNG by HPCL from ADNOC Gas over a period of 10 years starting from 2028.

5

MoU on Food Safety and Technical requirements between Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA), Ministry of Commerce and Industry of India, and the Ministry of Climate Change and Environment of the United Arab Emirates.

The MoU provides for sanitary and quality parameters to facilitate the trade, exchange, promotion of cooperation in the food sector, and to encourage rice, food products and other agricultural products exports from India to UAE. It will benefit the farmers from India and contribute to food security of the UAE.

S.NoAnnouncementsObjective

6

Establishment of a supercomputing cluster in India.

It has been agreed in principle that C-DAC India and G-42 company of the UAE will collaborate to set up a supercomputing cluster in India. The initiative will be part of the AI India Mission and once established the facility be available to private and public sector for research, application development and commercial use.

7

Double bilateral Trade to US$ 200 billion by 2032

The two sides agreed to double bilateral trade to over US$ 200 billion by 2032. The focus will also be on linking MSME industries on both sides and promote new markets through initiatives like Bharat Mart, Virtual Trade Corridor and Bharat-Africa Setu.

8

Promote bilateral Civil Nuclear Cooperation

To capitalise on the new opportunities created by the Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Act 2025, it was agreed to develop a partnership in advance nuclear technologies, including development and deployment of large nuclear reactors and Small Modular Reactors (SMRs) and cooperation in advance reactor systems, nuclear power plant operations and maintenance, and Nuclear Safety.

9

Setting up of offices and operations of UAE companies –First Abu Dhabi Bank (FAB) and DP World in the GIFT City in Gujarat

The First Abu Dhabi Bank will have a branch in GIFT that will promote trade and investment ties. DP World will have operations from the GIFT City, including for leasing of ships for its global operations.

10

Explore Establishment of ‘Digital/ Data Embassies’

It has been agreed that both sides would explore the possibility of setting up Digital Embassies under mutually recognised sovereignty arrangements.

11

Establishment of a ‘House of India’ in Abu Dhabi

It has been agreed in Principle that India and UAE will cooperate on a flagship project to establish a cultural space consisting of, among others, a museum of Indian art, heritage and archaeology in Abu Dhabi.

12

Promotion of Youth Exchanges

It has been agreed in principle to work towards arranging visits of a group of youth delegates from either country to foster deeper understanding, academic and research collaboration, and cultural bonds between the future generations.