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म्यांमार संघीय गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति यू हतिन क्याव के आमंत्रण पर भारत गणतंत्र के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी दिनांक 5 से 7 सितंबर, 2017 के दौरान म्‍यांमार संघीय गणतंत्र की अपनी पहली द्विपक्षीय राजकीय यात्रा पर हैं। यह यात्रा दोनों देशों के नेताओं के बीच निरंतर उच्‍च स्‍तरीय बातचीत का हिस्‍सा है और यह पिछले वर्ष भारत में म्‍यांमार के महामहिम यू हतिन क्याव और महामहिम स्‍टेट काउंसलर डाव आंग सान सू की क्रमागत राजकीय दौरों के अनुक्रम में है।

प्रधानमंत्री मोदी का दिनांक 5 सितंबर, 2017 को नाई पाई टौ में राष्‍ट्रपति भवन में राजकीय स्‍वागत किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने म्‍यांमार के राष्‍ट्रपति से शिष्‍टाचारिक भेंट की, जिन्‍होंने प्रधानमंत्री मोदी के सम्‍मान में एक स्‍टेट बेंकुएट की मेज़बानी की। 6 सितम्‍बर, 2017 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अगुवाई में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने म्‍यांमार की स्‍टेट काउंसिलर डाव आंग सान सू की, की अगुवाई में म्‍यांमार प्रतिनिधिमंडल से द्विपक्षीय बातचीत की। बातचीत अच्‍छे, सौहार्द और सकारात्‍मक वातावरण में हुई, जैसा कि दोनों देशों के बीच घनिष्‍ठ और मित्रतापूर्ण संबंध हैं। उसके बाद, स्‍टेट काउंसिलर और भारत के प्रधानमंत्री ने स्‍वास्‍थ्‍य, संस्‍कृति, क्षमता विकास, समुद्री सुरक्षा तथा प्रमुख संस्‍थाओं के बीच सहयोग के क्षेत्र में विभिन्‍न दस्‍तावेजों पर हस्‍ताक्षर कर उनका आदान-प्रदान किया, और तत्‍पश्‍चात एक संयुक्‍त प्रेस वार्ता आयोजित की गई।

नाई पाई टौ में अपनी आधिकारिक गतिविधियों के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी बागान और यांगून में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता वाले स्थानों पर जाएंगे। बागान में, वह पवित्र और ऐतिहासिक आनंद मंदिर का दौरा करेंगे, जहां भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण के विशेषज्ञ के मार्गदर्शन के तहत भारतीय और म्यांमार के पुरातत्वविदों द्वारा पुनर्स्थापना कार्य किया जा रहा है। यांगून में, वह शहीदों के मोसोलियम में जनरल आंग सैन की स्मृति में श्रंद्धाजलि अर्पित करेंगे और बोग्योक आंग सैन संग्रहालय के साथ-साथ अन्य प्रमुख स्थलों का भी दौरा करेंगे। वह यांगून में अपनी यात्रा के दौरान भारतीय मूल के लोगों तथा प्रवासी भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत करेंगे।

वार्ता के दौरान, दोनों नेताओं ने क्रमशः अगस्त और अक्टूबर 2016 में भारत में म्यांमार के राष्ट्रपति और स्‍टेट काउंसिलर की अति सफल यात्राओं के बाद की नई स्थितियों की समीक्षा की। उन्होंने वर्तमान में आधिकारिक आदान-प्रदान, आर्थिक, व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों की समीक्षा के साथ-साथ जन-जन के बीच आदान-प्रदानों की समीक्षा की, जो म्यांमार की स्वतंत्र, सक्रिय और तटस्‍थ विदेश नीति और भारत की ‘प्रेगमेटिक एक्‍ट ईस्‍ट एंड नेबरहुड फर्स्‍ट पॉलीसीज़’ के बीच सामंजस्य को दर्शाती है। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के आपसी हित में द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहरा एवं व्यापक बनाने के लिए नए अवसरों की खोज करने की कटिबद्धता व्‍यक्‍त की। उन्होंने क्षेत्र की शांति, सामूहिक समृद्धि और इनसे भी आगे विकास के लिए अपनी आम आकांक्षाओं पर पुन: जोर दिया।

भारत के प्रधानमंत्री ने म्यांमार सरकार द्वारा शांति और राष्ट्रीय सुलह के लिए किए गए उपायों की सराहना की और म्यांमार सरकार की मौजूदा शांति प्रक्रिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि म्यांमार में शांति और स्थिरता भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और उन्‍होंने म्यांमार में लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने तथा लोकतांत्रिक संघीय गणराज्य के उद्भव के लिए म्यांमार सरकार को भारत के लगातार समर्थन की बात दोहराई।

दोनों नेताओं ने अपनी सीमाओं पर मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की और आतंकवाद एवं उग्रवाद जनित विभिन्न घटनाओं पर, जो दोनों देशों के संबंधित सीमाओं में घटी हैं, अपनी चिंता व्यक्त की। इस बात को स्‍वीकार करते हुए कि आतंकवाद इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है, दोनों पक्षों ने आंतकवाद की उसके समस्‍त रूपों व स्‍वरूपों की दृष्टि से निंदा की और यह सहमति व्यक्त की कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई ने केवल आतंकवादियों, आतंकवादी संगठनों और उनके नेटवर्कों पर ही लक्षित होनी चाहिए, बल्कि उनकी पहचान कर उन्‍हें दंड दिया जाना चाहिए तथा उन देशों एवं इकाइयों के खिलाफ सख्‍त कदम उठाए जाने चाहिए, जो आतंकवाद को प्रोत्साहित करते हैं, उन्‍हें अपना समर्थन देते हैं या आतंकवाद को वित्त प्रदान करते हैं, आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों को पनाह देते हैं, और उनके दोषों को झूठ बोलकर छिपाते हुए उन्‍हें आश्रय प्रदान करते हैं। म्यांमार ने भारत में अमरनाथ यात्रा के दौरान हाल ही में बर्बर आतंकवादी हमलों तथा सीमाओं से आतंकवादियों द्वारा चलाई गई विभिन्न आतंकी गतिविधियों की भी निंदा की। भारत ने उत्तरी राखीन राज्य में हाल के आतंकवादी हमलों की निंदा की, जिसमें म्यांमार सुरक्षा बलों के कई सदस्यों ने अपनी जान गंवा दी थी। दोनों पक्षों ने यह स्‍वीकार किया कि आतंकवाद मानव अधिकारों का उल्लंघन करता है और इसलिए, आतंकवादियों को शहीद मानने जैसी सोच का घोर विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए चयनात्मक और आंशिक दृष्टिकोण को समाप्त करने तथा इस संबंध में, संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर अतिशीघ्र व्यापक शिखरवार्ता को अंतिम रूप देने और उसे अपनाने के लिए संयुक्त रूप से आग्रह किया।

यह स्‍वीकार करते हुए कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कॉमन सीमा पर सुरक्षा और स्थिरता को कायम रखना बहुत जरूरी है, म्यांमार ने भारत की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता के प्रति अपने समर्थन को दोहराया, और दृढ़तापूर्वक कहा कि वह भारत सरकार के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कृत्य करने के लिए किसी भी विद्रोही समूह को म्यांमार की धरती का इस्तेमाल नहीं करने की अपनी नीति को समर्थन देता रहेगा। भारत सरकार की समान सोच के लिए म्यांमार ने उसकी सराहना की।

दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच पहले से सीमांकित सीमा का सम्‍मान करने की बात दोहराई और मौजूदा द्विपक्षीय कार्यप्रणालियों एवं परामर्शों के माध्यम से शेष सीमा संबंधी मुद्दों को हल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

दोनों पक्षों ने अपने करीबी पड़ोस में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की और समुद्री सुरक्षा में गहन द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की विशेष आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। उन्‍होंने दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी और गहरे रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति जताई, और इस संदर्भ में, भारत में म्यांमार के रक्षा बलों के कमांडर-इन-चीफ की हालिया सफल यात्रा से संतुष्टि व्‍यक्‍त की। नियमित समन्वित गश्त पहलों के माध्यम से संस्थागत सहयोग के अलावा, दोनों पक्षों ने गैर-पारंपरिक सुरक्षा क्षेत्रों, जैसे कि मानवीय सहायता और आपदा राहत में द्विपक्षीय समुद्री सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमति जतार्ह, जो कि वैश्विक धरोहरों के रूप में बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

दोनों पक्षों ने यह प्रतिबद्धता की कि म्यांमार और भारत दोनों देशों के बीच पहले से हासिल की गई पारस्परिक समझ और बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों को बनाए रखेंगे और वे दोनों देशों के लोगों एवं क्षेत्र के हित में आगामी वर्षों में एक अच्छे और भरोसेमंद पड़ोसियों के रूप में एक दूसरे के साथ खड़े रहेंगे।

दोनों पक्षों ने निरंतर उच्च स्तरीय आदान-प्रदान दौरों पर संतोष व्यक्त किया जिनके कारण शेष द्विपक्षीय मुद्दों की बेहतर पारस्परिक समझ को बढ़ावा मिला। उन्‍होने उच्चतम राजनीतिक स्तरों पर किए गए निर्णयों की प्रभावी अनुवर्ती कार्रवाई के लिए सुरक्षा और रक्षा, व्यापार और वाणिज्य, बिजली और ऊर्जा, सीमा प्रबंधन और कनेक्टिविटी आदि क्षेत्रों में क्षेत्रीय विशिष्ट संस्थागत कार्यप्रणालियों को निरंतर रूप से कायम रखने की सराहना की। उन्होंने भारत और म्यांमार के सांसदों के बीच उत्कृष्ट आदान-प्रदानों पर भी संतोष प्रकट किया और उन्‍हें इस तरह की बातचीत को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

म्यांमार पक्ष ने भारत द्वारा उसके सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रयास में समर्थन हेतु दी गई समस्‍त सहायता के लिए भारत सरकार की सराहना की। दोनों पक्षों ने मौजूदा सहयोग परियोजनाओं की समीक्षा की, जो भारत सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता से चल रही हैं, और इस बात पर गौर किया कि ये परियोजनाएं सीधे म्यांमार के लोगों के लाभ से जुड़ी हैं। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि इन्हें तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार को बुनियादी ढांचा बनाने और मानव संसाधन क्षमता विकसित करने के प्रयासों के लिए भारत की आबद्ध प्रतिबद्धता दोहराई। पाकोकु और मिंगयान में भारतीय सहायता से स्थापित औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों के सकारात्मक अनुभव की ओर संकेत देते हुए, म्यांमार ने क्रमश: मॉनीवा और थेटॉन में दो और केंद्र विकसित करने तथा आईटीसी, मिंगयान के लिए एक परिपूर्ण पंचवर्षीय रखरखाव के लिए वर्तमान में दी जा रही सहायता के लिए भारत का धन्यवाद किया। म्‍यांमार ने म्यांमार-भारत उद्यमशीलता विकास केंद्र और यांगून में अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण केंद्र का उन्नयन करने के लिए भारत द्वारा दी गई सहायता की भी प्रशंसा की। दोनों पक्षों ने म्यांमार में उपयुक्त स्थान पर एक तारामंडल की स्थापना की दिशा में भी चर्चा जारी रखने पर सहमति व्‍यक्‍त की और यह स्‍वीकार किया कि यह एक मूल्यवान संस्था होगी जो म्यांमार युवाओं के बीच एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करेगी।

दोनों पक्षों ने इस विचार को साझा किया कि राखीनी राज्य में विकास और सुरक्षा में कार्य करने हेतु अनेक आयाम उपलब्‍ध हैं। इस संदर्भ में, दोनों पक्षों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और संबद्ध गतिविधियों, कृषि प्रसंस्करण, सामुदायिक विकास, छोटे पुलों का निर्माण, सड़कों का उन्नयन, छोटी बिजली परियोजनाएं, आजीविका गतिविधि, प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना, घरेलू शिल्प को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण तथा सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्रों में दो प्रकार की परियोजनाओं, अर्थात बुनियादी ढांचा और सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं को आरंभ कर राज्य में समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास लाने पर सहमति प्रकट की। म्यांमार ने राखीनी राज्य विकास कार्यक्रम के अंतर्गत भारत की सहायता की पेशकश का स्वागत किया और दोनों पक्ष अगले कुछ महीनों के भीतर कार्यान्वयन संबंधी तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने पर सहमत हुए।

दोनों पक्षों ने कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को देखकर, विशेष रूप से, येजि़न कृषि विश्वविद्यालय में स्थापित उन्नत कृषि अनुसंधान और शिक्षा केंद्र की स्थापना में तथा कृषि अनुसंधान विभाग में स्‍थापित राइस बायो पार्क की स्थापना में तेजी से हुई प्रगति के लिए संतुष्टि व्‍यक्‍त की। म्यांमार ने उसके देश के उम्मीदवारों के लिए कृषि विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन और डॉक्टरेट की शिक्षा को सुविधाजनक बनाने के लिए भारत द्वारा दी गई सहायता की भी प्रशंसा की।

दोनों पक्षों ने म्यांमार के न्यायिक अधिकारियों, सैन्य कर्मियों और पुलिस बल के लिए चल रहे क्षमता विकास कार्यक्रमों पर संतोष व्यक्त किया। म्यांमार ने म्यांमार इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी और भारत-म्यांमार सेंटर फॉर एन्हांसमेंट ऑफ आईटी स्किल्स के लिए भारत द्वारा विस्तारित अवधि तक सहायता देने के लिए उसका धन्यवाद किया। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि भारत फॉरिन सर्विस इंस्‍टीट्यूट, नई दिल्‍ली में म्यांमार के राजनयिकों को नियमित रूप से प्रशिक्षण प्रदान करेगा। म्यांमार ने केन्द्रीय हिंदी संस्थान में प्रशिक्षण के लिए प्रत्‍येक वर्ष दो म्यांमार राजनयिकों के नामांकन के लिए भारत की पेशकश का स्वागत किया, जबकि 150 म्यांमार सिविल सेवक पांच वर्षों की अवधि के लिए प्रत्‍येक वर्ष भारतीय प्रशिक्षण संस्थानों में अंग्रेजी भाषा में प्रशिक्षण प्राप्‍त करेंगे।

म्यांमार पुलिस के प्रशिक्षण संबंधी बुनियादी ढांचे और क्षमता विकास को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, दोनों नेताओं ने भारत सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ म्यांमार में यामेथिन में महिला पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र के उन्नयन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की। म्यांमार ने यंगून में पुलिस अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए भारत की पेशकश का स्वागत किया और यह निर्णय लिया गया कि इस संबंध में तौर-तरीकों को संयुक्त रूप से रूपरेखा दी जाएगी।

म्यांमार ने अपने देश में विभिन्न परियोजनाओं को सपोर्ट करने के लिए भारत का धन्यवाद किया, जिसके फलस्‍वरूप कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट तथा अन्य सड़क और पुल निर्माण परियोजनाओं जैसी द्विपक्षीय और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को पूर्ण रूप से वित्तपोषित अनुदान सहायता परियोजनाओं के रूप में बढ़ावा मिलता है। म्यांमार ने स्टिवी बंदरगाह और पलेटवा अंतर्देशीय जल परिवहन टर्मिनल पर निमार्ण कार्य पूरा हो जाने और म्यामांर पत्तन प्राधिकरण एवं अंतर्देशीय जल परिवहन को छह कार्गो बार्जिज़ को सौंपने के साथ कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट पर किए गए पर्याप्त निमार्ण कार्य की प्रगति की सराहना की। दोनों पक्ष एक बंदरगाह ऑपरेटर की नियुक्ति पर समझौता ज्ञापन करने पर सहमत हुए, जिसमें म्यांमार के अन्य अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों में अपनाई गई प्रैक्टिस के अनुसार बंदरगाह के संचालन और रखरखाव के लिए दोनों देशों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। इससे पोर्ट और आईडब्ल्यूटी बुनियादी ढांचे को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकेगा और आस-पास के क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा मिलेगा, भले ही परियोजना के अंतिम घटक के रूप में, पलेटवा से ज़ोरिनपुई की सड़क निर्माणाधीन है। दोनों पक्षों ने संतोष व्यक्त किया कि सड़क पर काम पहले से ही चल रहा है और ज़ोरिनपूई और पलेटवा के जरिए परियोजना कर्मियों, निर्माण सामग्री तथा पूरी सीमा पर उपकरणों के परिवहन में सुविधा देने पर सहमत जताई। उन्होंने यह भी कहा कि तमू-काईगोन-कलेवा रोड पर और ट्राईलेटरल हाईवे के कलवा-यार्गी क्षेत्र पर पुल का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा। दोनों पक्ष रिह-टेडिम सड़क के एलाइमेंट और डीपीआर निर्माण पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने कहा कि उपलब्ध एलओसी के अंतर्गत पुटाओ-मिटकीना और एलेथेक्‍या-अहंगमौ सड़कों के निर्माण पर अगले कदम म्यामांर द्वारा डीपीआर उपलब्ध कराये जाने के बाद उठाए जाएंगे। म्यांमार के अनुरोध के जवाब में, भारत ने रिहखवादर-जौखाथर पुल और बवेनू पुल के लिए डीपीआर तैयार करने के लिए अपनी सहमति व्‍यक्‍त की।

दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में परियोजनाओं की समीक्षा की और यांगून चिल्ड्रन अस्पताल और सिट्वे जनरल अस्पताल के उन्नयन पर तथा मोनीवा जनरल अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा हो जाने पर अपनी संतुष्टि व्‍यक्‍त की। दोनों पक्ष पारस्परिक रूप से निर्णय किए जाने वाले तौर-तरीकों के आधार पर, एक प्रमुख भारतीय अस्पताल समूह के सहयोग से नाई पाई टौ में एक अत्याधुनिक अस्पताल को स्थापित व चालू करने हेतु परामर्श शुरू करने पर सहमत हुए।

दोनों पक्षों ने 2012 में म्यांमार को भारत द्वारा दिए गए 500 मिलियन अमेरिकी डॉनर के रियायती ऋण के उपयोग की प्रगति पर विचार-विमर्श किया। इस बात पर गौर करते हुए कि लाइन ऑफ क्रेडिट के अंतर्गत आरंभ की जाने वाली परियोजनाओं से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भौतिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने में तथा कृषि और परिवहन में क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी,दोनों पक्षों ने आपस में सहमत परियोजनाओं का तेजी से कार्यान्‍वयन करने का संकल्प लिया।

दोनों पक्षों ने व्यक्त किया कि इन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए, कनेक्टिविटी से संबंधित संस्थागत व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर स्‍थापित किए जाने की आवश्यकता है। इस संबंध में, उन्होंने एक द्विपक्षीय समझौता किए जाने की महत्ता को स्‍वीकार किया, जिससे मोटर वाहन यातायात, यात्री और कार्गो दोनों को सीमा पार करने में सहजता प्राप्‍त होगी।

दोनों पक्षों ने भारत और म्यांमार के बीच बिजली और ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्कों का अधिक से अधिक एकीकरण करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। म्यांमार ने अपने ऊर्जा क्षेत्र में अन्वेषण और उत्पादन दोनों के आधार पर भारत की भागीदारी का स्वागत किया और भारतीय कंपनियों को पेट्रोकेमिकल्स एवं पेट्रोलियम उत्पादों, विपणन ढांचे तथा एलपीजी टर्मिनलों की स्थापना के लिए निविदाओं में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने बताया कि अग्रणी तेल और गैस कंपनियां म्यांमार में अपने कार्यालय खोलने की प्रक्रिया में हैं। दोनों पक्षों ने भू-सीमा पर म्यामांमार को डीज़ल की आपूर्ति पर नुमालीगड़ रिफाइनरी ऑफ इंडिया और परामी एनर्जी ग्रुप ऑफ म्‍यांमार द्वारा किए गए समझौते की सराहना करते हुए कहा कि इससे उत्तर म्यांमार के लोगों को पेट्रोलियम उत्पाद सस्ती कीमतों पर और अधिक सुलभता के साथ मिलेंगे, और म्यांमार में पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण और खुदरा मार्केटिंग में सहयोग करने के लिए दोनों पक्षों को प्रोत्साहन मिलेगा। हाई स्‍पीड डीजल का पहला कन्‍साइन्‍मेंट 4 सितंबर 2017 को म्यांमार पहुंचा।

भारत ने परंपरागत एवं नवीकरणीय ऊर्जा आधारित ऊर्जा विकास परियोजनाओं और म्यांमार सरकार द्वारा चिन्हित की गई परियोजनाओं के लिए तकनीकी और परियोजना-विशिष्‍ट सहायता देने के लिए भी अपनी इच्‍छा जताई। म्यांमार में सौर पार्क के विकास के लिए व्यवहार्यता अध्ययन करने की पूर्ववर्ती पेशकश के अतिरिक्त, भारत ने म्यांमार में सौर विकिरण संसाधन के आकलन करने की भी पेशकश की। दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में सहयोग करने की कार्यप्रणालियों पर चर्चा की। म्यांमार ने प्रमुख नगरों में तथा म्‍यांमार द्वारा नाई पई टौ, बागो क्षेत्र और राखीन राज्य में चिन्हित भवनों में एलईडी-आधारित ऊर्जा लाइटिंग शुरू करने के लिए एनर्जी एफिसियेंसी सर्विसिस लिमि. ऑफ इंडिया के जरिए आरंभ की जा रही परियोजनाओं के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के लिए भारत का धन्‍यवाद किया। भारत ने बिजली व्यापार में अपने अनुभवों को साझा किया और म्यांमार के साथ इस क्षेत्र में संभावित सहयोग की समीक्षा करने की रुचि व्यक्त की। यह सहमति की गई कि इन मुद्दों तथा अन्य प्रासंगिक मुद्दों पर ज्‍वाइंट स्‍टीरिंग कमेटी ऑन पावर एंड अदर फोरम्‍स की शीघ्र होने वाली बैठक में विचार-विमर्श किया जाएगा। सहभागी देशों को प्राप्त होने वाले असीम लाभों को ध्यान में रखते हुए, म्यांमार ने अंतर्राष्ट्रीय सोलर एलायंस की स्थापना के लिए फ्रेमवर्क समझौते में शामिल होने हेतु भारत के सुझाव पर सावधानीपूर्वक विचार करने का वचन दिया।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के वर्तमान स्तर की समीक्षा की और यह सहमति व्यक्त की कि द्विपक्षीय निवेश और व्‍यापार में ग्रोथ की संभावना है। इस संबंध में, उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार को और अधिक सुगम बनाने के लिए सभी व्यापार अवरोधों को दूर कर, बाजार पहुंच को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जून 2017 में भारत में नई दिल्ली में आयोजित म्यांमार-भारत संयुक्त व्यापार समिति की 6वीं बैठक में निष्कर्षों पर सहमति व्यक्त की और सीमा व्यापार समिति तथा सीमा हाट समिति पर बैठकों को जारी रखने के लिए सहमति जताई।

भारत ने मानकीकरण, निरीक्षण और गुणवत्ता की सिफारिशों, अनुसंधान एवं विकास, मानव संसाधन विकास तथा क्षमता विकास जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए म्यांमार के कपड़ा क्षेत्र को विकसित करने के लिए उसके द्वारा मांगे गए सहयोग की अभिरूचि का स्वागत किया।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार के लिए दालों के महत्व तथा म्यांमार के किसानों और भारतीय उपभोक्ताओं के लिए इस व्‍यापार के निहितार्थों को स्‍वीकार किया। इस संदर्भ में, म्‍यांमार की स्‍टेट काउंसलर ने भारत द्वारा जारी की गई हाल की अधिसूचना पर गहरी चिंता जताई, जिसमें विभिन्न श्रेणियों की दालों पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाए गए थे, और उन्‍होंने भारत के प्रधानमंत्री से म्यांमार से दोस्ती की प्रतिबद्धताओं एवं दोनो देशों के लोगों व राष्‍ट्रों के दीर्घकालिक हितों को ध्‍यान में रखते हुए म्‍यांमार से आयातों पर सभी प्रतिबंधों को हटाए का अनुरोध किया। भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संबंध में दीर्घकालिक व्यवस्थाएं करना महत्वपूर्ण है जिससे भविष्य में दोनों देशों के लोगों के हितों की रक्षा की जा सके।

दोनों पक्षों ने सीमा पार करने संबंधी समझौते की सफल वार्ता और उसे अंतिम रूप देने का स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच आम भू-सीमा पर लोगों की आवाजाही को विनियमन और सुसंगत बनाने में मदद करेगा, और इस तरह द्विपक्षीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, और दोनों पक्षों ने इस समझौते पर हस्‍ताक्षर करने के लिए औपचारिकताओं को शीघ्रता से पूरा करने के लिए अपने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया। दोनों देशों के नेताओं ने भारत के इम्फाल से म्यांमार में मंडाले तक दोनों देशों के बीच एक समन्वित बस सेवा शुरू करने के लिए शीघ्र बातचीत करने तथा समझौता करने के लिए सहमति जताई।

उन्होंने इस विचार को साझा किया कि दोनों देशों के बीच बढ़ते हवाई संपर्क से जन-जन के संपर्कों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और निवेश प्रवाह को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों के नेताओं ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि भारत की वित्तीय और तकनीकी सहायता के साथ पाकोक्‍कु हवाई अड्डे या कालई हवाई अड्डे के विकास के लिए म्यांमार के नागरिक उड्डयन विभाग (डीसीए) के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से भारत के नागर विमानन प्राधिकरण द्वारा एक डीपीआर तैयार किया जाएगा। उन्होंने भारत में म्यांमार के वायु यातायात नियंत्रकों के लिए विशिष्‍ट प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों के संबंध में भारत सरकार की पेशकश का स्वागत किया। दोनों देशों के नेताओं ने म्यांमार में तमू और मंडाले के बीच रेल संपर्क के निर्माण की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए भी अपने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया। यह सहमति हुई कि भारत की एक टीम को तमु और मंडाले के बीच रेल लिंक के अध्ययन और डीपीआर तैयार करने के लिए भेजा जाएगा।

दोनों पक्षों ने मानव तस्करी के पीड़ितों के बचाव और पुनर्वास के लिए पारस्परिक रूप से सहमत प्रक्रियाओं की स्थापना की महत्ता को स्‍वीकार किया। इस संदर्भ में, उन्होंने मानवीय तस्करी की रोकथाम के लिए सहयोग पर समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने का स्वागत किया और जल्द से जल्द इसे संपन्‍न करने की इच्‍छा प्रकट की।

दोनों नेताओं ने भारत और म्यांमार के लोगों के बीच घनिष्‍ठ संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने में संस्कृति की आवश्‍यकता पर जोर दिया और 2017-20 की अवधि के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (सीईपी) पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सीईपी से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। भारत ने यह भी पुष्टि की कि म्यांमार के पुरातत्वविदों के लिए भारतीय पुरातत्व संस्थान, नई दिल्ली में उच्‍च अध्ययन हेतु वार्षिक रूप से 2 स्लॉट्स उपलब्ध कराए जाएंगे।

भारतीय पक्ष ने बताया कि भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा बोधगया में किंग मिन्‍डॉन और म्यांमार के राजा बग्याइडाव के मंदिरों एवं पत्थर की शिलालेखों को परिरक्षित और संरक्षित करने के लिए चालू की गई यह परियोजना अपनी पूर्णता के अग्रिम चरण पर है और यह दिसंबर 2017 तक पूरी हो जाएगी। म्यांमार पक्ष ने इस सूचना का स्वागत करते हुए कहा कि ये मंदिर भारत-म्यांमार सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं।

म्यांमार ने बागान की विरासत को परिरक्षित और संरक्षित करते हुए उसके सामाजिक-आर्थिक विकास में भारत की सहायता का स्वागत किया। बागान की प्रमुख विरासतों में भारत के पुरातात्विक सर्वेक्षण के माध्यम से बागान में 92 प्राचीन पैगोडा एवं संरचनाओं को पुनर्स्थापित और संरक्षित करने की परियोजना है। इस संबंध में दोनों पक्षों ने एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने का स्वागत किया। भारत-म्यांमार सहयोग परियोजनाओं के रूप में आरंभ की जाने वाली अन्य परियोजनाओं में म्यांमार शिल्प, खाद्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों, एलईडी-आधारित स्‍ट्रीट लाइटिंग, टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए वर्षा जल संचयन, बागान के लोगों के लिए वैकल्पिक आय सृजन हेतु प्रशिक्षण तथा चिन्हित विद्यालयों के उन्‍नयन के लिए एक हब के रूप में "बागान हाट" की स्थापना करने से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।

म्यांमार ने ई-वीज़ा को छोड़कर, म्यांमार के नागरिकों को सभी श्रेणियों में नि:शुल्‍क वीजा देने के लिए भारत सरकार द्वारा लिए गए निर्णय की काफी प्रशंसा की।

म्यांमार सरकार ने भारत में विभिन्न अपराधों के लिए वर्तमान में कारावास की सजा काट रहे 40 म्यांमार नागरिकों को विशेष माफ़ी देने के फैसले के लिए भारत का धन्यवाद दिया। इस भावाभिव्‍यक्ति को म्यांमार सरकार और उनके लोगों दोनों द्वारा, विशेष रूप से उन लोगों के परिवार वालों ने जिन्‍हें भारतीय जेलों से रिहा किया जाएगा, की जमकर तारीफ की।

लोकतंत्र को बढ़ावा और समर्थन देने में मीडिया द्वारा निभाई भूमिका के महत्व को स्वीकार करते हुए, दोनों पक्षों ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और म्यांमार प्रेस काउंसिल के बीच सहयोग पर समझौता ज्ञापन संपन्‍न किए जाने का स्वागत किया। इस समझौते के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यकलापों से पत्रकारों के बीच आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलेगा और भारत तथा म्यांमार में राजनीतिक और आर्थिक विकास की समझ को बेहतर रूप से बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी।

दोनों पक्षों ने पारस्परिक हितों को अधिकतम करने तथा व्यापार, परिवहन और ऊर्जा सहित सभी क्षेत्रों में पारस्परिक लाभ का न्यायसंगत रूप से बराबरी का हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को और अधिक गहरा बनाने हेतु अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने दोनों देशों के सभी लोगों के जीवन और आजीविका में सुधार लाने के लिए विभिन्न क्षेत्रीय/उप-क्षेत्रीय सहयोगी पहलों की महत्ता को स्वीकार किया।

भारत और म्यांमार ने संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य बहुपक्षीय संगठनों में मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने आम हित के बहुपक्षीय मुद्दों पर अपनी-अपनी ओर से समन्वय की महत्ता को रेखांकित किया। दोनों पक्षों ने मजबूत संयुक्त राष्ट्र की महत्ता पर जोर देते हुए सुरक्षा परिषद के यथाशीघ्र सुदृढ़ीकरण की आवश्‍यकता पर बल दिया। उन्होंने सुरक्षा परिषद के व्यापक सुधारों के लिए अंतर-सरकारी वार्ताओं को सपोर्ट करने हेतु अपनी प्रतिबद्धता का पुन: उल्‍लेख किया। भारत द्वारा विस्तारित एवं सुदृढ़ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने हेतु किए जा रहे प्रयासों में म्यांमार ने अपने समर्थन को दोहराया। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साथ काम करने, विशेष रूप से कार्यान्‍वयन के संबंध में, जैसा कि एसडीजी 2030 में निहित किया गया है, के आयामों को मजबूती प्रदान करने के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी ओर से कार्य करने वाली विशेष एजेंसियों की निष्पक्षता एवं तटस्‍था के महत्व पर जोर दिया।

दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों को सुदृढ़ और सबल बनाने तथा अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में विकासशील देशों की आवाज़ और भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

भारत और म्यांमार ने इस क्षेत्र में अच्छे पड़ोसी होने का एक उदाहरण स्थापित करने हेतु एक दृढ़ वचनबद्धता व्यक्त की। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देश प्रगति करते हुए एक साथ आगे बढ़े। इसलिए, उन्‍होंने दोनों देशों के लोगों के साझा हितों को बढ़ावा देने के लिए सहमति व्‍यक्‍त की ताकि दोनों देशों के लोग आपसी हितकारी अंतर-आश्रित वातावरण में एक साथ सौहार्द से रह सकें।

प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार में अपने प्रवास के दौरान उन्‍हें और उनके प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी और विनीत मेज़बानी करने के लिए म्यांमार के राष्ट्रपति का धन्यवाद किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्‍टेट काउंसलर डाव आंग सान सू की को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने के लिए आमंत्रित भी किया। म्यांमार की स्‍टेट काउंसलर ने इस निमंत्रण की गहन रूप से प्रशंसा की।

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Prime Minister participates in 16th East Asia Summit on October 27, 2021
October 27, 2021
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Prime Minister Shri Narendra Modi participated in the 16th East Asia Summit earlier today via videoconference. The 16th East Asia Summit was hosted by Brunei as EAS and ASEAN Chair. It saw the participation of leaders from ASEAN countries and other EAS Participating Countries including Australia, China, Japan, South Korea, Russia, USA and India. India has been an active participant of EAS. This was Prime Minister’s 7th East Asia Summit.

In his remarks at the Summit, Prime Minister reaffirmed the importance of EAS as the premier leaders-led forum in Indo-Pacific, bringing together nations to discuss important strategic issues. Prime Minister highlighted India’s efforts to fight the Covid-19 pandemic through vaccines and medical supplies. Prime Minister also spoke about "Atmanirbhar Bharat” Campaign for post-pandemic recovery and in ensuring resilient global value chains. He emphasized on the establishment of a better balance between economy and ecology and climate sustainable lifestyle.

The 16th EAS also discussed important regional and international issues including Indo-Pacifc, South China Sea, UNCLOS, terrorism, and situation in Korean Peninsula and Myanmar. PM reaffirmed "ASEAN centrality” in the Indo-Pacific and highlighted the synergies between ASEAN Outlook on Indo-Pacific (AOIP) and India’s Indo-Pacific Oceans Initiative (IPOI).

The EAS leaders adopted three Statements on Mental Health, Economic recovery through Tourism and Sustainable Recovery, which have been co-sponsored by India. Overall, the Summit saw a fruitful exchange of views between Prime Minister and other EAS leaders.