म्यांमार संघीय गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति यू हतिन क्याव के आमंत्रण पर भारत गणतंत्र के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी दिनांक 5 से 7 सितंबर, 2017 के दौरान म्‍यांमार संघीय गणतंत्र की अपनी पहली द्विपक्षीय राजकीय यात्रा पर हैं। यह यात्रा दोनों देशों के नेताओं के बीच निरंतर उच्‍च स्‍तरीय बातचीत का हिस्‍सा है और यह पिछले वर्ष भारत में म्‍यांमार के महामहिम यू हतिन क्याव और महामहिम स्‍टेट काउंसलर डाव आंग सान सू की क्रमागत राजकीय दौरों के अनुक्रम में है।

प्रधानमंत्री मोदी का दिनांक 5 सितंबर, 2017 को नाई पाई टौ में राष्‍ट्रपति भवन में राजकीय स्‍वागत किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने म्‍यांमार के राष्‍ट्रपति से शिष्‍टाचारिक भेंट की, जिन्‍होंने प्रधानमंत्री मोदी के सम्‍मान में एक स्‍टेट बेंकुएट की मेज़बानी की। 6 सितम्‍बर, 2017 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अगुवाई में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने म्‍यांमार की स्‍टेट काउंसिलर डाव आंग सान सू की, की अगुवाई में म्‍यांमार प्रतिनिधिमंडल से द्विपक्षीय बातचीत की। बातचीत अच्‍छे, सौहार्द और सकारात्‍मक वातावरण में हुई, जैसा कि दोनों देशों के बीच घनिष्‍ठ और मित्रतापूर्ण संबंध हैं। उसके बाद, स्‍टेट काउंसिलर और भारत के प्रधानमंत्री ने स्‍वास्‍थ्‍य, संस्‍कृति, क्षमता विकास, समुद्री सुरक्षा तथा प्रमुख संस्‍थाओं के बीच सहयोग के क्षेत्र में विभिन्‍न दस्‍तावेजों पर हस्‍ताक्षर कर उनका आदान-प्रदान किया, और तत्‍पश्‍चात एक संयुक्‍त प्रेस वार्ता आयोजित की गई।

नाई पाई टौ में अपनी आधिकारिक गतिविधियों के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी बागान और यांगून में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता वाले स्थानों पर जाएंगे। बागान में, वह पवित्र और ऐतिहासिक आनंद मंदिर का दौरा करेंगे, जहां भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण के विशेषज्ञ के मार्गदर्शन के तहत भारतीय और म्यांमार के पुरातत्वविदों द्वारा पुनर्स्थापना कार्य किया जा रहा है। यांगून में, वह शहीदों के मोसोलियम में जनरल आंग सैन की स्मृति में श्रंद्धाजलि अर्पित करेंगे और बोग्योक आंग सैन संग्रहालय के साथ-साथ अन्य प्रमुख स्थलों का भी दौरा करेंगे। वह यांगून में अपनी यात्रा के दौरान भारतीय मूल के लोगों तथा प्रवासी भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत करेंगे।

वार्ता के दौरान, दोनों नेताओं ने क्रमशः अगस्त और अक्टूबर 2016 में भारत में म्यांमार के राष्ट्रपति और स्‍टेट काउंसिलर की अति सफल यात्राओं के बाद की नई स्थितियों की समीक्षा की। उन्होंने वर्तमान में आधिकारिक आदान-प्रदान, आर्थिक, व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों की समीक्षा के साथ-साथ जन-जन के बीच आदान-प्रदानों की समीक्षा की, जो म्यांमार की स्वतंत्र, सक्रिय और तटस्‍थ विदेश नीति और भारत की ‘प्रेगमेटिक एक्‍ट ईस्‍ट एंड नेबरहुड फर्स्‍ट पॉलीसीज़’ के बीच सामंजस्य को दर्शाती है। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के आपसी हित में द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहरा एवं व्यापक बनाने के लिए नए अवसरों की खोज करने की कटिबद्धता व्‍यक्‍त की। उन्होंने क्षेत्र की शांति, सामूहिक समृद्धि और इनसे भी आगे विकास के लिए अपनी आम आकांक्षाओं पर पुन: जोर दिया।

भारत के प्रधानमंत्री ने म्यांमार सरकार द्वारा शांति और राष्ट्रीय सुलह के लिए किए गए उपायों की सराहना की और म्यांमार सरकार की मौजूदा शांति प्रक्रिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि म्यांमार में शांति और स्थिरता भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और उन्‍होंने म्यांमार में लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने तथा लोकतांत्रिक संघीय गणराज्य के उद्भव के लिए म्यांमार सरकार को भारत के लगातार समर्थन की बात दोहराई।

दोनों नेताओं ने अपनी सीमाओं पर मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की और आतंकवाद एवं उग्रवाद जनित विभिन्न घटनाओं पर, जो दोनों देशों के संबंधित सीमाओं में घटी हैं, अपनी चिंता व्यक्त की। इस बात को स्‍वीकार करते हुए कि आतंकवाद इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है, दोनों पक्षों ने आंतकवाद की उसके समस्‍त रूपों व स्‍वरूपों की दृष्टि से निंदा की और यह सहमति व्यक्त की कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई ने केवल आतंकवादियों, आतंकवादी संगठनों और उनके नेटवर्कों पर ही लक्षित होनी चाहिए, बल्कि उनकी पहचान कर उन्‍हें दंड दिया जाना चाहिए तथा उन देशों एवं इकाइयों के खिलाफ सख्‍त कदम उठाए जाने चाहिए, जो आतंकवाद को प्रोत्साहित करते हैं, उन्‍हें अपना समर्थन देते हैं या आतंकवाद को वित्त प्रदान करते हैं, आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों को पनाह देते हैं, और उनके दोषों को झूठ बोलकर छिपाते हुए उन्‍हें आश्रय प्रदान करते हैं। म्यांमार ने भारत में अमरनाथ यात्रा के दौरान हाल ही में बर्बर आतंकवादी हमलों तथा सीमाओं से आतंकवादियों द्वारा चलाई गई विभिन्न आतंकी गतिविधियों की भी निंदा की। भारत ने उत्तरी राखीन राज्य में हाल के आतंकवादी हमलों की निंदा की, जिसमें म्यांमार सुरक्षा बलों के कई सदस्यों ने अपनी जान गंवा दी थी। दोनों पक्षों ने यह स्‍वीकार किया कि आतंकवाद मानव अधिकारों का उल्लंघन करता है और इसलिए, आतंकवादियों को शहीद मानने जैसी सोच का घोर विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए चयनात्मक और आंशिक दृष्टिकोण को समाप्त करने तथा इस संबंध में, संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर अतिशीघ्र व्यापक शिखरवार्ता को अंतिम रूप देने और उसे अपनाने के लिए संयुक्त रूप से आग्रह किया।

यह स्‍वीकार करते हुए कि सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कॉमन सीमा पर सुरक्षा और स्थिरता को कायम रखना बहुत जरूरी है, म्यांमार ने भारत की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता के प्रति अपने समर्थन को दोहराया, और दृढ़तापूर्वक कहा कि वह भारत सरकार के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कृत्य करने के लिए किसी भी विद्रोही समूह को म्यांमार की धरती का इस्तेमाल नहीं करने की अपनी नीति को समर्थन देता रहेगा। भारत सरकार की समान सोच के लिए म्यांमार ने उसकी सराहना की।

दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच पहले से सीमांकित सीमा का सम्‍मान करने की बात दोहराई और मौजूदा द्विपक्षीय कार्यप्रणालियों एवं परामर्शों के माध्यम से शेष सीमा संबंधी मुद्दों को हल करने की आवश्यकता पर बल दिया।

दोनों पक्षों ने अपने करीबी पड़ोस में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की और समुद्री सुरक्षा में गहन द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने की विशेष आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की। उन्‍होंने दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी और गहरे रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति जताई, और इस संदर्भ में, भारत में म्यांमार के रक्षा बलों के कमांडर-इन-चीफ की हालिया सफल यात्रा से संतुष्टि व्‍यक्‍त की। नियमित समन्वित गश्त पहलों के माध्यम से संस्थागत सहयोग के अलावा, दोनों पक्षों ने गैर-पारंपरिक सुरक्षा क्षेत्रों, जैसे कि मानवीय सहायता और आपदा राहत में द्विपक्षीय समुद्री सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमति जतार्ह, जो कि वैश्विक धरोहरों के रूप में बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

दोनों पक्षों ने यह प्रतिबद्धता की कि म्यांमार और भारत दोनों देशों के बीच पहले से हासिल की गई पारस्परिक समझ और बढ़ते द्विपक्षीय संबंधों को बनाए रखेंगे और वे दोनों देशों के लोगों एवं क्षेत्र के हित में आगामी वर्षों में एक अच्छे और भरोसेमंद पड़ोसियों के रूप में एक दूसरे के साथ खड़े रहेंगे।

दोनों पक्षों ने निरंतर उच्च स्तरीय आदान-प्रदान दौरों पर संतोष व्यक्त किया जिनके कारण शेष द्विपक्षीय मुद्दों की बेहतर पारस्परिक समझ को बढ़ावा मिला। उन्‍होने उच्चतम राजनीतिक स्तरों पर किए गए निर्णयों की प्रभावी अनुवर्ती कार्रवाई के लिए सुरक्षा और रक्षा, व्यापार और वाणिज्य, बिजली और ऊर्जा, सीमा प्रबंधन और कनेक्टिविटी आदि क्षेत्रों में क्षेत्रीय विशिष्ट संस्थागत कार्यप्रणालियों को निरंतर रूप से कायम रखने की सराहना की। उन्होंने भारत और म्यांमार के सांसदों के बीच उत्कृष्ट आदान-प्रदानों पर भी संतोष प्रकट किया और उन्‍हें इस तरह की बातचीत को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

म्यांमार पक्ष ने भारत द्वारा उसके सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रयास में समर्थन हेतु दी गई समस्‍त सहायता के लिए भारत सरकार की सराहना की। दोनों पक्षों ने मौजूदा सहयोग परियोजनाओं की समीक्षा की, जो भारत सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता से चल रही हैं, और इस बात पर गौर किया कि ये परियोजनाएं सीधे म्यांमार के लोगों के लाभ से जुड़ी हैं। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि इन्हें तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार को बुनियादी ढांचा बनाने और मानव संसाधन क्षमता विकसित करने के प्रयासों के लिए भारत की आबद्ध प्रतिबद्धता दोहराई। पाकोकु और मिंगयान में भारतीय सहायता से स्थापित औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्रों के सकारात्मक अनुभव की ओर संकेत देते हुए, म्यांमार ने क्रमश: मॉनीवा और थेटॉन में दो और केंद्र विकसित करने तथा आईटीसी, मिंगयान के लिए एक परिपूर्ण पंचवर्षीय रखरखाव के लिए वर्तमान में दी जा रही सहायता के लिए भारत का धन्यवाद किया। म्‍यांमार ने म्यांमार-भारत उद्यमशीलता विकास केंद्र और यांगून में अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण केंद्र का उन्नयन करने के लिए भारत द्वारा दी गई सहायता की भी प्रशंसा की। दोनों पक्षों ने म्यांमार में उपयुक्त स्थान पर एक तारामंडल की स्थापना की दिशा में भी चर्चा जारी रखने पर सहमति व्‍यक्‍त की और यह स्‍वीकार किया कि यह एक मूल्यवान संस्था होगी जो म्यांमार युवाओं के बीच एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करेगी।

दोनों पक्षों ने इस विचार को साझा किया कि राखीनी राज्य में विकास और सुरक्षा में कार्य करने हेतु अनेक आयाम उपलब्‍ध हैं। इस संदर्भ में, दोनों पक्षों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और संबद्ध गतिविधियों, कृषि प्रसंस्करण, सामुदायिक विकास, छोटे पुलों का निर्माण, सड़कों का उन्नयन, छोटी बिजली परियोजनाएं, आजीविका गतिविधि, प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना, घरेलू शिल्प को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण तथा सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्रों में दो प्रकार की परियोजनाओं, अर्थात बुनियादी ढांचा और सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं को आरंभ कर राज्य में समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास लाने पर सहमति प्रकट की। म्यांमार ने राखीनी राज्य विकास कार्यक्रम के अंतर्गत भारत की सहायता की पेशकश का स्वागत किया और दोनों पक्ष अगले कुछ महीनों के भीतर कार्यान्वयन संबंधी तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने पर सहमत हुए।

दोनों पक्षों ने कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को देखकर, विशेष रूप से, येजि़न कृषि विश्वविद्यालय में स्थापित उन्नत कृषि अनुसंधान और शिक्षा केंद्र की स्थापना में तथा कृषि अनुसंधान विभाग में स्‍थापित राइस बायो पार्क की स्थापना में तेजी से हुई प्रगति के लिए संतुष्टि व्‍यक्‍त की। म्यांमार ने उसके देश के उम्मीदवारों के लिए कृषि विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन और डॉक्टरेट की शिक्षा को सुविधाजनक बनाने के लिए भारत द्वारा दी गई सहायता की भी प्रशंसा की।

दोनों पक्षों ने म्यांमार के न्यायिक अधिकारियों, सैन्य कर्मियों और पुलिस बल के लिए चल रहे क्षमता विकास कार्यक्रमों पर संतोष व्यक्त किया। म्यांमार ने म्यांमार इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी और भारत-म्यांमार सेंटर फॉर एन्हांसमेंट ऑफ आईटी स्किल्स के लिए भारत द्वारा विस्तारित अवधि तक सहायता देने के लिए उसका धन्यवाद किया। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि भारत फॉरिन सर्विस इंस्‍टीट्यूट, नई दिल्‍ली में म्यांमार के राजनयिकों को नियमित रूप से प्रशिक्षण प्रदान करेगा। म्यांमार ने केन्द्रीय हिंदी संस्थान में प्रशिक्षण के लिए प्रत्‍येक वर्ष दो म्यांमार राजनयिकों के नामांकन के लिए भारत की पेशकश का स्वागत किया, जबकि 150 म्यांमार सिविल सेवक पांच वर्षों की अवधि के लिए प्रत्‍येक वर्ष भारतीय प्रशिक्षण संस्थानों में अंग्रेजी भाषा में प्रशिक्षण प्राप्‍त करेंगे।

म्यांमार पुलिस के प्रशिक्षण संबंधी बुनियादी ढांचे और क्षमता विकास को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, दोनों नेताओं ने भारत सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ म्यांमार में यामेथिन में महिला पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र के उन्नयन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की। म्यांमार ने यंगून में पुलिस अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए भारत की पेशकश का स्वागत किया और यह निर्णय लिया गया कि इस संबंध में तौर-तरीकों को संयुक्त रूप से रूपरेखा दी जाएगी।

म्यांमार ने अपने देश में विभिन्न परियोजनाओं को सपोर्ट करने के लिए भारत का धन्यवाद किया, जिसके फलस्‍वरूप कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट तथा अन्य सड़क और पुल निर्माण परियोजनाओं जैसी द्विपक्षीय और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को पूर्ण रूप से वित्तपोषित अनुदान सहायता परियोजनाओं के रूप में बढ़ावा मिलता है। म्यांमार ने स्टिवी बंदरगाह और पलेटवा अंतर्देशीय जल परिवहन टर्मिनल पर निमार्ण कार्य पूरा हो जाने और म्यामांर पत्तन प्राधिकरण एवं अंतर्देशीय जल परिवहन को छह कार्गो बार्जिज़ को सौंपने के साथ कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट पर किए गए पर्याप्त निमार्ण कार्य की प्रगति की सराहना की। दोनों पक्ष एक बंदरगाह ऑपरेटर की नियुक्ति पर समझौता ज्ञापन करने पर सहमत हुए, जिसमें म्यांमार के अन्य अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों में अपनाई गई प्रैक्टिस के अनुसार बंदरगाह के संचालन और रखरखाव के लिए दोनों देशों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। इससे पोर्ट और आईडब्ल्यूटी बुनियादी ढांचे को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकेगा और आस-पास के क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा मिलेगा, भले ही परियोजना के अंतिम घटक के रूप में, पलेटवा से ज़ोरिनपुई की सड़क निर्माणाधीन है। दोनों पक्षों ने संतोष व्यक्त किया कि सड़क पर काम पहले से ही चल रहा है और ज़ोरिनपूई और पलेटवा के जरिए परियोजना कर्मियों, निर्माण सामग्री तथा पूरी सीमा पर उपकरणों के परिवहन में सुविधा देने पर सहमत जताई। उन्होंने यह भी कहा कि तमू-काईगोन-कलेवा रोड पर और ट्राईलेटरल हाईवे के कलवा-यार्गी क्षेत्र पर पुल का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा। दोनों पक्ष रिह-टेडिम सड़क के एलाइमेंट और डीपीआर निर्माण पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने कहा कि उपलब्ध एलओसी के अंतर्गत पुटाओ-मिटकीना और एलेथेक्‍या-अहंगमौ सड़कों के निर्माण पर अगले कदम म्यामांर द्वारा डीपीआर उपलब्ध कराये जाने के बाद उठाए जाएंगे। म्यांमार के अनुरोध के जवाब में, भारत ने रिहखवादर-जौखाथर पुल और बवेनू पुल के लिए डीपीआर तैयार करने के लिए अपनी सहमति व्‍यक्‍त की।

दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में परियोजनाओं की समीक्षा की और यांगून चिल्ड्रन अस्पताल और सिट्वे जनरल अस्पताल के उन्नयन पर तथा मोनीवा जनरल अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा हो जाने पर अपनी संतुष्टि व्‍यक्‍त की। दोनों पक्ष पारस्परिक रूप से निर्णय किए जाने वाले तौर-तरीकों के आधार पर, एक प्रमुख भारतीय अस्पताल समूह के सहयोग से नाई पाई टौ में एक अत्याधुनिक अस्पताल को स्थापित व चालू करने हेतु परामर्श शुरू करने पर सहमत हुए।

दोनों पक्षों ने 2012 में म्यांमार को भारत द्वारा दिए गए 500 मिलियन अमेरिकी डॉनर के रियायती ऋण के उपयोग की प्रगति पर विचार-विमर्श किया। इस बात पर गौर करते हुए कि लाइन ऑफ क्रेडिट के अंतर्गत आरंभ की जाने वाली परियोजनाओं से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भौतिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने में तथा कृषि और परिवहन में क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी,दोनों पक्षों ने आपस में सहमत परियोजनाओं का तेजी से कार्यान्‍वयन करने का संकल्प लिया।

दोनों पक्षों ने व्यक्त किया कि इन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए, कनेक्टिविटी से संबंधित संस्थागत व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर स्‍थापित किए जाने की आवश्यकता है। इस संबंध में, उन्होंने एक द्विपक्षीय समझौता किए जाने की महत्ता को स्‍वीकार किया, जिससे मोटर वाहन यातायात, यात्री और कार्गो दोनों को सीमा पार करने में सहजता प्राप्‍त होगी।

दोनों पक्षों ने भारत और म्यांमार के बीच बिजली और ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्कों का अधिक से अधिक एकीकरण करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। म्यांमार ने अपने ऊर्जा क्षेत्र में अन्वेषण और उत्पादन दोनों के आधार पर भारत की भागीदारी का स्वागत किया और भारतीय कंपनियों को पेट्रोकेमिकल्स एवं पेट्रोलियम उत्पादों, विपणन ढांचे तथा एलपीजी टर्मिनलों की स्थापना के लिए निविदाओं में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। भारत ने बताया कि अग्रणी तेल और गैस कंपनियां म्यांमार में अपने कार्यालय खोलने की प्रक्रिया में हैं। दोनों पक्षों ने भू-सीमा पर म्यामांमार को डीज़ल की आपूर्ति पर नुमालीगड़ रिफाइनरी ऑफ इंडिया और परामी एनर्जी ग्रुप ऑफ म्‍यांमार द्वारा किए गए समझौते की सराहना करते हुए कहा कि इससे उत्तर म्यांमार के लोगों को पेट्रोलियम उत्पाद सस्ती कीमतों पर और अधिक सुलभता के साथ मिलेंगे, और म्यांमार में पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण और खुदरा मार्केटिंग में सहयोग करने के लिए दोनों पक्षों को प्रोत्साहन मिलेगा। हाई स्‍पीड डीजल का पहला कन्‍साइन्‍मेंट 4 सितंबर 2017 को म्यांमार पहुंचा।

भारत ने परंपरागत एवं नवीकरणीय ऊर्जा आधारित ऊर्जा विकास परियोजनाओं और म्यांमार सरकार द्वारा चिन्हित की गई परियोजनाओं के लिए तकनीकी और परियोजना-विशिष्‍ट सहायता देने के लिए भी अपनी इच्‍छा जताई। म्यांमार में सौर पार्क के विकास के लिए व्यवहार्यता अध्ययन करने की पूर्ववर्ती पेशकश के अतिरिक्त, भारत ने म्यांमार में सौर विकिरण संसाधन के आकलन करने की भी पेशकश की। दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में सहयोग करने की कार्यप्रणालियों पर चर्चा की। म्यांमार ने प्रमुख नगरों में तथा म्‍यांमार द्वारा नाई पई टौ, बागो क्षेत्र और राखीन राज्य में चिन्हित भवनों में एलईडी-आधारित ऊर्जा लाइटिंग शुरू करने के लिए एनर्जी एफिसियेंसी सर्विसिस लिमि. ऑफ इंडिया के जरिए आरंभ की जा रही परियोजनाओं के प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के लिए भारत का धन्‍यवाद किया। भारत ने बिजली व्यापार में अपने अनुभवों को साझा किया और म्यांमार के साथ इस क्षेत्र में संभावित सहयोग की समीक्षा करने की रुचि व्यक्त की। यह सहमति की गई कि इन मुद्दों तथा अन्य प्रासंगिक मुद्दों पर ज्‍वाइंट स्‍टीरिंग कमेटी ऑन पावर एंड अदर फोरम्‍स की शीघ्र होने वाली बैठक में विचार-विमर्श किया जाएगा। सहभागी देशों को प्राप्त होने वाले असीम लाभों को ध्यान में रखते हुए, म्यांमार ने अंतर्राष्ट्रीय सोलर एलायंस की स्थापना के लिए फ्रेमवर्क समझौते में शामिल होने हेतु भारत के सुझाव पर सावधानीपूर्वक विचार करने का वचन दिया।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के वर्तमान स्तर की समीक्षा की और यह सहमति व्यक्त की कि द्विपक्षीय निवेश और व्‍यापार में ग्रोथ की संभावना है। इस संबंध में, उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार को और अधिक सुगम बनाने के लिए सभी व्यापार अवरोधों को दूर कर, बाजार पहुंच को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जून 2017 में भारत में नई दिल्ली में आयोजित म्यांमार-भारत संयुक्त व्यापार समिति की 6वीं बैठक में निष्कर्षों पर सहमति व्यक्त की और सीमा व्यापार समिति तथा सीमा हाट समिति पर बैठकों को जारी रखने के लिए सहमति जताई।

भारत ने मानकीकरण, निरीक्षण और गुणवत्ता की सिफारिशों, अनुसंधान एवं विकास, मानव संसाधन विकास तथा क्षमता विकास जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए म्यांमार के कपड़ा क्षेत्र को विकसित करने के लिए उसके द्वारा मांगे गए सहयोग की अभिरूचि का स्वागत किया।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार के लिए दालों के महत्व तथा म्यांमार के किसानों और भारतीय उपभोक्ताओं के लिए इस व्‍यापार के निहितार्थों को स्‍वीकार किया। इस संदर्भ में, म्‍यांमार की स्‍टेट काउंसलर ने भारत द्वारा जारी की गई हाल की अधिसूचना पर गहरी चिंता जताई, जिसमें विभिन्न श्रेणियों की दालों पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगाए गए थे, और उन्‍होंने भारत के प्रधानमंत्री से म्यांमार से दोस्ती की प्रतिबद्धताओं एवं दोनो देशों के लोगों व राष्‍ट्रों के दीर्घकालिक हितों को ध्‍यान में रखते हुए म्‍यांमार से आयातों पर सभी प्रतिबंधों को हटाए का अनुरोध किया। भारत के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संबंध में दीर्घकालिक व्यवस्थाएं करना महत्वपूर्ण है जिससे भविष्य में दोनों देशों के लोगों के हितों की रक्षा की जा सके।

दोनों पक्षों ने सीमा पार करने संबंधी समझौते की सफल वार्ता और उसे अंतिम रूप देने का स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच आम भू-सीमा पर लोगों की आवाजाही को विनियमन और सुसंगत बनाने में मदद करेगा, और इस तरह द्विपक्षीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, और दोनों पक्षों ने इस समझौते पर हस्‍ताक्षर करने के लिए औपचारिकताओं को शीघ्रता से पूरा करने के लिए अपने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया। दोनों देशों के नेताओं ने भारत के इम्फाल से म्यांमार में मंडाले तक दोनों देशों के बीच एक समन्वित बस सेवा शुरू करने के लिए शीघ्र बातचीत करने तथा समझौता करने के लिए सहमति जताई।

उन्होंने इस विचार को साझा किया कि दोनों देशों के बीच बढ़ते हवाई संपर्क से जन-जन के संपर्कों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और निवेश प्रवाह को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। दोनों देशों के नेताओं ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि भारत की वित्तीय और तकनीकी सहायता के साथ पाकोक्‍कु हवाई अड्डे या कालई हवाई अड्डे के विकास के लिए म्यांमार के नागरिक उड्डयन विभाग (डीसीए) के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से भारत के नागर विमानन प्राधिकरण द्वारा एक डीपीआर तैयार किया जाएगा। उन्होंने भारत में म्यांमार के वायु यातायात नियंत्रकों के लिए विशिष्‍ट प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों के संबंध में भारत सरकार की पेशकश का स्वागत किया। दोनों देशों के नेताओं ने म्यांमार में तमू और मंडाले के बीच रेल संपर्क के निर्माण की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए भी अपने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया। यह सहमति हुई कि भारत की एक टीम को तमु और मंडाले के बीच रेल लिंक के अध्ययन और डीपीआर तैयार करने के लिए भेजा जाएगा।

दोनों पक्षों ने मानव तस्करी के पीड़ितों के बचाव और पुनर्वास के लिए पारस्परिक रूप से सहमत प्रक्रियाओं की स्थापना की महत्ता को स्‍वीकार किया। इस संदर्भ में, उन्होंने मानवीय तस्करी की रोकथाम के लिए सहयोग पर समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने का स्वागत किया और जल्द से जल्द इसे संपन्‍न करने की इच्‍छा प्रकट की।

दोनों नेताओं ने भारत और म्यांमार के लोगों के बीच घनिष्‍ठ संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने में संस्कृति की आवश्‍यकता पर जोर दिया और 2017-20 की अवधि के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (सीईपी) पर हस्ताक्षर किए जाने के साथ संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सीईपी से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। भारत ने यह भी पुष्टि की कि म्यांमार के पुरातत्वविदों के लिए भारतीय पुरातत्व संस्थान, नई दिल्ली में उच्‍च अध्ययन हेतु वार्षिक रूप से 2 स्लॉट्स उपलब्ध कराए जाएंगे।

भारतीय पक्ष ने बताया कि भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा बोधगया में किंग मिन्‍डॉन और म्यांमार के राजा बग्याइडाव के मंदिरों एवं पत्थर की शिलालेखों को परिरक्षित और संरक्षित करने के लिए चालू की गई यह परियोजना अपनी पूर्णता के अग्रिम चरण पर है और यह दिसंबर 2017 तक पूरी हो जाएगी। म्यांमार पक्ष ने इस सूचना का स्वागत करते हुए कहा कि ये मंदिर भारत-म्यांमार सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण पहलू हैं।

म्यांमार ने बागान की विरासत को परिरक्षित और संरक्षित करते हुए उसके सामाजिक-आर्थिक विकास में भारत की सहायता का स्वागत किया। बागान की प्रमुख विरासतों में भारत के पुरातात्विक सर्वेक्षण के माध्यम से बागान में 92 प्राचीन पैगोडा एवं संरचनाओं को पुनर्स्थापित और संरक्षित करने की परियोजना है। इस संबंध में दोनों पक्षों ने एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने का स्वागत किया। भारत-म्यांमार सहयोग परियोजनाओं के रूप में आरंभ की जाने वाली अन्य परियोजनाओं में म्यांमार शिल्प, खाद्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों, एलईडी-आधारित स्‍ट्रीट लाइटिंग, टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए वर्षा जल संचयन, बागान के लोगों के लिए वैकल्पिक आय सृजन हेतु प्रशिक्षण तथा चिन्हित विद्यालयों के उन्‍नयन के लिए एक हब के रूप में "बागान हाट" की स्थापना करने से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।

म्यांमार ने ई-वीज़ा को छोड़कर, म्यांमार के नागरिकों को सभी श्रेणियों में नि:शुल्‍क वीजा देने के लिए भारत सरकार द्वारा लिए गए निर्णय की काफी प्रशंसा की।

म्यांमार सरकार ने भारत में विभिन्न अपराधों के लिए वर्तमान में कारावास की सजा काट रहे 40 म्यांमार नागरिकों को विशेष माफ़ी देने के फैसले के लिए भारत का धन्यवाद दिया। इस भावाभिव्‍यक्ति को म्यांमार सरकार और उनके लोगों दोनों द्वारा, विशेष रूप से उन लोगों के परिवार वालों ने जिन्‍हें भारतीय जेलों से रिहा किया जाएगा, की जमकर तारीफ की।

लोकतंत्र को बढ़ावा और समर्थन देने में मीडिया द्वारा निभाई भूमिका के महत्व को स्वीकार करते हुए, दोनों पक्षों ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और म्यांमार प्रेस काउंसिल के बीच सहयोग पर समझौता ज्ञापन संपन्‍न किए जाने का स्वागत किया। इस समझौते के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यकलापों से पत्रकारों के बीच आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलेगा और भारत तथा म्यांमार में राजनीतिक और आर्थिक विकास की समझ को बेहतर रूप से बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी।

दोनों पक्षों ने पारस्परिक हितों को अधिकतम करने तथा व्यापार, परिवहन और ऊर्जा सहित सभी क्षेत्रों में पारस्परिक लाभ का न्यायसंगत रूप से बराबरी का हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को और अधिक गहरा बनाने हेतु अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने दोनों देशों के सभी लोगों के जीवन और आजीविका में सुधार लाने के लिए विभिन्न क्षेत्रीय/उप-क्षेत्रीय सहयोगी पहलों की महत्ता को स्वीकार किया।

भारत और म्यांमार ने संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य बहुपक्षीय संगठनों में मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने आम हित के बहुपक्षीय मुद्दों पर अपनी-अपनी ओर से समन्वय की महत्ता को रेखांकित किया। दोनों पक्षों ने मजबूत संयुक्त राष्ट्र की महत्ता पर जोर देते हुए सुरक्षा परिषद के यथाशीघ्र सुदृढ़ीकरण की आवश्‍यकता पर बल दिया। उन्होंने सुरक्षा परिषद के व्यापक सुधारों के लिए अंतर-सरकारी वार्ताओं को सपोर्ट करने हेतु अपनी प्रतिबद्धता का पुन: उल्‍लेख किया। भारत द्वारा विस्तारित एवं सुदृढ़ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने हेतु किए जा रहे प्रयासों में म्यांमार ने अपने समर्थन को दोहराया। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक साथ काम करने, विशेष रूप से कार्यान्‍वयन के संबंध में, जैसा कि एसडीजी 2030 में निहित किया गया है, के आयामों को मजबूती प्रदान करने के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी ओर से कार्य करने वाली विशेष एजेंसियों की निष्पक्षता एवं तटस्‍था के महत्व पर जोर दिया।

दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों को सुदृढ़ और सबल बनाने तथा अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में विकासशील देशों की आवाज़ और भागीदारी को बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

भारत और म्यांमार ने इस क्षेत्र में अच्छे पड़ोसी होने का एक उदाहरण स्थापित करने हेतु एक दृढ़ वचनबद्धता व्यक्त की। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देश प्रगति करते हुए एक साथ आगे बढ़े। इसलिए, उन्‍होंने दोनों देशों के लोगों के साझा हितों को बढ़ावा देने के लिए सहमति व्‍यक्‍त की ताकि दोनों देशों के लोग आपसी हितकारी अंतर-आश्रित वातावरण में एक साथ सौहार्द से रह सकें।

प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार में अपने प्रवास के दौरान उन्‍हें और उनके प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी और विनीत मेज़बानी करने के लिए म्यांमार के राष्ट्रपति का धन्यवाद किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्‍टेट काउंसलर डाव आंग सान सू की को पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर भारत आने के लिए आमंत्रित भी किया। म्यांमार की स्‍टेट काउंसलर ने इस निमंत्रण की गहन रूप से प्रशंसा की।

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Text of PM’s remarks in the Lok Sabha
April 16, 2026

आदरणीय अध्यक्ष जी,

इस महत्वपूर्ण विधेयक पर आज सुबह से चर्चा प्रारंभ हुई है। काफी साथी यहां से भी जिन मुद्दों को स्पर्श किया गया है, उसको तथ्यों से और तर्क से सदन को जरूर जानकारी देंगे। और इसलिए मैं उन विषयों में जाना नहीं चाहता।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

राष्ट्र के जीवन में कुछ महत्वपूर्ण पल आते हैं और उस समय की समाज की मनोस्थिति और नेतृत्व की क्षमता, उस पाल को कैप्चर करके एक राष्ट्र की अमानत बना देती है, एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती है। मैं समझता हूं कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में यह वैसे ही पल हैं। आवश्यकता तो यह थी कि 25-30 साल पहले जब से यह विचार सामने आया, आवश्यकता महसूस हुई, हम इसको लागू कर देते और हम आज उसको काफी परिपक्वता तक पहुंचा देते हैं। और आवश्यकता के अनुसार उसमें समय-समय पर सुधार भी होते और यही तो लोकतंत्र की ब्‍यूटी होती है। हमारी, हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी हैं। हमारी हजारों साल की लोकतंत्र की एक विकास यात्रा रही है, और उस विकास यात्रा में एक नया आयाम जोड़ने का एक शुभ अवसर सदन के हम सभी साथियों को मिला है। और मैंने प्रारंभ में कहा है कि हम सब भाग्यवान हैं कि हमें ऐसे महत्वपूर्ण और देश की आधी आबादी को इस राष्ट्र निर्माण की नीति निर्धारण प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। यह हम लोगों के लिए सौभाग्य है और मैं चाहता हूं कि मेरे सभी माननीय सांसद, मैं इधर-उधर की आज बात नहीं करना चाहता हूं, हम सभी सांसद इस महत्वपूर्ण अवसर को जाने ना दें। हम भारतीय सब मिलकर के देश को नई दिशा देने जा रहे हैं। हमारी शासन व्यवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने के लिए जा रहे हैं और मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की राजनीति की भी, उसके रूप स्वरूप को तो तय करने ही करने वाला है, लेकिन यह देश की दिशा और दशा भी तय करने वाला है, इतने महत्वपूर्ण मोड़ पर हम खड़े हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विश्व में भी आज भारत की स्वीकृति हम सब महसूस कर रहे हैं और यह हम सबके लिए गौरव का पल है। एक समय हमारे पास आया है, और इस समय को हमने एक विकसित भारत के संकल्प के साथ जोड़ा है। और मैं पक्का मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब केवल उत्तम प्रकार के रेल, रास्ते, इंफ्रास्ट्रक्चर या कुछ आर्थिक प्रगति के आंकड़े, सिर्फ इतने से ही विकसित भारत की सीमित कल्पना वाले हम लोग नहीं हैं। हम चाहते हैं कि विकसित भारत, जिसके नीति निर्धारण में सबका साथ सबका विकास का मंत्र समाहित हो। देश की 50% जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने, यह समय की मांग है। हम पहले ही देरी कर चुके हैं, कारण कोई भी होंगे, जिम्‍मेवार कोई भी होंगे, लेकिन इस सच्चाई को हमें स्वीकार करना होगा कि जब हम अकेले मिलते हैं, तब मानते हैं हां यार! लेकिन जब सामूहिक रूप से मिलते हैंं, मुझे याद है जब इसकी प्रक्रिया चली थी, सभी दलों से मिलना हुआ है, एक दल को छोड़कर के, जिन-जिन से मिलना हुआ है, हर एक ने सैद्धांतिक विरोध नहीं किया है। बाद में जाकर के जो कुछ भी हुआ होगा, राजनीतिक दिशा पकड़ी जा रही है। लेकिन जो राजनीतिक दिशा में ही सोचते हैं, मैं उनको भी एडवाइस करना चाहूंगा, एक मित्र के रूप में एडवाइस करता हूं और सबको काम आएगी। हमारे देश में जबसे वूमेन रिजर्वेशन को लेकर चर्चा हुई है और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, हर चुनाव में महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिस ने विरोध किया है, जिस-जिस ने विरोध किया है, देश की महिलाओं ने उन्हें माफ नहीं किया है। उनका हाल बुरे से बुरा किया है। लेकिन यह भी देखिए कि 24 का चुनाव में ऐसा नहीं हुआ। क्यों नहीं हुआ? यह इसलिए नहीं हुआ कि 24 में सबने सहमति से इसको पारित किया, तो यह विषय ही नहीं रहा। किसी के पक्ष में पॉलिटिकल फायदा नहीं हुआ, किसी का नुकसान भी नहीं हुआ। सहज रूप से जो मुद्दे थे, उन मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ा, क्योंकि 24 में सब साथ में थे। कुछ लोग यहां हैं, कुछ लोग नहीं है, लेकिन सब साथ में थे। आज भी मैं कहता हूं, अगर हम सब साथ में जाते हैं, तो इतिहास गवाह है कि यह किसी एक के राजनीतिक पक्ष में नहीं जाएगा। यह देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा, देश के सामूहिक निर्णय शक्ति के पक्ष में जाएगा और हम सब उसके यश के हकदार होंगे। ना ट्रेजरी बैंक इसका हकदार रहेगा, ना मोदी उसका हकदार रहेगा, यहां बैठे हुए सब हकदार रहेंगे और इसलिए जिन लोगों को इसमें राजनीति की बू आ रही है, मैं चाहूंगा कि वह खुद के परिणामों को पिछले 30 साल में देख लें। फायदा उनका भी इसी में है, रास्ता दिखा रहा हूं कि इसी में फायदा है कि जो नुकसान हो रहा है, उससे बच जाओगे और इसलिए मैं समझता हूं कि इसमें राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मुझे याद है, तब तो मैं शासकीय व्यवस्था की राजनीति में नहीं था, मैं एक एक संगठन के कार्यकर्ता के नाते काम करता था। उस समय एक चर्चा सुनने को मिलती थी गलियारों में कि देखिए यह कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण देना है, तो बहुत आराम से दे देते हैं। लेकिन पंचायतों में आरक्षण देना है, तो आराम से देते हैं क्योंकि उसमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है। उसको लगता है, हम सुरक्षित है यार, वहां दे दो। यह उस समय गलियारों में बहुत चर्चा थी कि बोले यह कभी नहीं करेंगे यहां बैठे हुए, क्यों? क्योंकि उनका कुछ जाएगा और इसलिए और बाकी पंचायत का हो जाता है, 50% तक पहुंच गए।

मैं राजनीतिक दृष्टि से और भी एक बात समझाना चाहता हूं साथियों,

आज से 25 साल, 30 साल पहले जिसने भी विरोध किया, तो विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना, पिछले 25-30 साल में ग्रास रूट लेवल पर पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत कर के आई हुई बहनों में एक political consciousness है, वह ओपिनियन मेकर हैं ग्रास रूट लेवल पर, 30 साल पहले वह शांत रहती थी, बोलती नहीं थी, समझती थी, बोलती नहीं थी। आज वह वोकल है और इसलिए अब जो भी पक्ष-विपक्ष होगा, वो जो लाखों बहनें कभी ना कभी पंचायत में काम कर चुकी हैं, प्रतिनिधित्व कर चुकी है, जनता के सुख-दुख की समस्याओं को गहराई से देखा है, वह आंदोलित है। वह कहती हैं कि झाड़ू-कचरा वाले काम में तो हमें जोर देते हो, वह तो परिवार में भी पहले होता था, अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो और निर्णय प्रक्रियाएं विधानसभा में और पार्लियामेंट में होती हैं। और इसलिए मैं राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, मैं किसी भी संसद की बात करता हूं, किसी भी एमलए की बात करता हूं, यह दल वो दल की बात मैं नहीं कर रहा हूं। जो भी राजनीतिक जीवन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं, उनको यह मानकर चलना पड़ेगा कि पिछले 25-30 साल में लाखों बहनें ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33% का नहीं, वहां भी वह आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली हैं और इसलिए जो आज विरोध करेंगे उसको लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी, लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। और इसलिए राजनीतिक समझदारी भी इसी में है कि हम ग्रास रूट लेवल पर महिलाओं की जो पॉलिटिकल लीडरशिप खड़ी हुई है, उसको आपने अब कंसीडर करना पड़ेगा। यहां मैंने सुना, हमारे मुलायम सिंह जी थे तब से एक विषय चला रहे हैं, उनके परिवार वाले भी चला रहे हैं। आप देश की बहनों पर भरोसा करो ना, उनकी समझदारी पर भरोसा करो, एक बार 33% बहनों को यहां आने दो, आकर के उनको निर्णय करने दो, किसको देना है, किसको नहीं देना है, इस वर्ग को देना है, उस वर्ग को देना है, करेंगे वह निर्णय, हम उनके सामर्थ्य पर आशंका क्यों करते हैं भाई? एक बार आने तो दो! उनको आने तो दो! जब आएंगे, तो 34 में और धर्मेंद्र जी, धर्मेंद्र जी मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी। यह बात सही है, मैं अति पिछड़े समाज से आता हूं। धर्मेंद्र जी, मैं आपका बहुत आभारी हूं और अखिलेश जी मेरे मित्र हैं, तो कभी-कभी मदद कर देते हैं। यह बात सही है कि मैं अति पिछडे समाज से आता हूं, लेकिन मेरा दायित्व समाज के सबको साथ लेकर के चलने का है और यही मेरे संविधान ने मुझे यही रास्ता दिखाया है। मेरे लिए, मेरे लिए संविधान ही सर्वोपरि है और इसलिए और यह संविधान की ताकत है कि मेरे जैसा अत्यंत छोटे समाज का अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को इतना बड़ा दायित्व देश ने दिया है। और इसलिए मैं तो देशवासियों का ऋणी हूँ और मैं तो संविधान निर्माताओं का ऋणी हूँ कि जिसके कारण आज मैं यहां हूं।

लेकिन आदरणीय अध्यक्ष जी!

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज जीवन के हर एक क्षेत्र में हम देखें कि नारी शक्ति देश के गौरव को बढ़ाने वाले, परचम लहराने में कहीं पीछे नहीं हैं जी। हम गर्व कर सकें, इस प्रकार से जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में आज हमारी माताएं-बहनें बहुत बड़ा योगदान, हमारी बेटियां तो कमाल कर रही हैं, जीवन के हर क्षेत्र में! इतना बड़ा सामर्थ्‍य, उसको हम हिस्सेदारी से रोकने के लिए क्यों इतनी ताकत खपा रहे हैं जी, उनके जुड़ने से सामर्थ्‍य बढ़ने वाला है और इसलिए मैं आज अपील करने आया हूं आपके पास कि इसको राजनीति के तराजू से मत तौलिये। यह राष्ट्रहित का निर्णय है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज का हमारा यह, हमारे सामने यह अवसर एक साथ बैठकर के, एक दिशा में सोच करके विकसित भारत बनाने में हमारी नारी शक्ति की भागीदारी को एक खुले मन से निर्णय करने का अवसर है, स्वीकार करने का अवसर है और मैंने जैसा पहले भी कहा कि आज पूरा देश और विशेष करके नारी शक्ति, हमारे निर्णय तो देखेंगी, लेकिन निर्णय से ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी। और इसलिए हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से एक प्रकार से इस अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना, उस पर कोई राजनीतिक रंग नहीं लगे और इसलिए वह कभी राजनीतिक इशू भी नहीं बना, एक अच्छी स्थिति है। अब सवाल यह है कि हमें कितने समय तक इसको रोकना है, अब यहां जो लोग जनसंख्या वगैरा के विषय उठाते हैं, क्या आपको मालूम नहीं है, मैं चाहूंगा कि अमित भाई अपने भाषण में इन सारी चीजों को उल्‍लेख करेंगे, जब कि हमने जनगणना के संबंध में कब-कब क्या-क्या किया था, बाद में कोविड आया, उसके कारण क्या मुसीबत आई, कैसे रुकावटें आई। यह सारी बात हम सबके सामने हैं, इसमें कोई विषय नहीं है। लेकिन पिछले दिनों जब हम 23 में चर्चा कर रहे थे, तब भी व्यापक रूप से बात यह थी कि इसको जल्दी करो, हर कोई कह रहा था जल्दी करो। अब 24 में संभव नहीं था क्योंकि इतने कम समय में यह करना मुश्किल था। अब 29 में हमारे पास अवसर है, अगर हम उन 29 में भी नहीं करते, तो स्थिति क्या बनेगी, हम कल्पना कर सकते हैं, तो फिर हम देश की माताओं-बहनों को यह विश्वास नहीं बना पाएंगे कि हम सचमुच में यह प्रयास सच्चे अर्थ से कर सकते हैं। और इसलिए समय की मांग है कि अब हम ज्यादा विलंब ना करें, इस दरमियान राजनीतिक दल के लोगों से, संविधान के जानकार लोगों से, जो महिलाओं में एक्टिविस्ट के नाते काम करने वाले, ऐसे लोगों से भी कई चर्चाएं हुई, कुछ लोगों ने खुद होकर के भी सुझाव दिए। सारा मंथन करते-करते यहां भी सभी दलों से लगातार बातें करके होती रही हैं। स्ट्रक्चरल वे में भी हुई है, इनफॉर्मल वे में भी हुई है और उसमें से आखिर बनाए हुए यह कुछ रास्ता निकालना होगा, ताकि हम हमारी माताओं-बहनों की शक्ति को जोड़ सकते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा। यहां बैठ करके हमें किसी को संविधान ने देश को टुकड़ों में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है। जो शपथ लेकर के हम बैठे हैं ना, हम सबको एक राष्ट्र के रूप में विचार करना हमारा दायित्व बनता है। चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी, हम टुकड़ों में ना सोच सकते हैं, ना टुकड़ों में हम निर्णय कर सकते हैं। और इसलिए निराधार रूप में, जिसमें कोई सच्चाई नहीं, रत्ती भर सच्चाई नहीं, सिर्फ राजनीतिक लाभ लेने के लिए जो बवंडर खड़ा किया जा रहा है, मैं आज बड़ी जिम्मेवारी के साथ इस सदन में इस पवित्र जगह से कहना चाहता हूं, क्या यह दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हो, बड़े राज्य हो, मैं आज यह जिम्मेवारी से कहना चाहता हूं कि यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी, यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी, भूतकाल में जो सरकारें रहीं और जिनके कालखंड में जो परिसीमन हुआ और जो अनुपात उस समय से चला आ रहा है, तो उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात पर होगी। अगर गारंटी शब्द चाहिए, तो मैं गारंटी शब्द उपयोग करता हूं। वादा की बात करते हो, तो मैं वादा शब्द उपयोग करता हूं। अगर तमिल में कोई अच्छा शब्द हो, तो वो भी मैं बोलने के लिए तैयार हूं, क्योंकि जब नियत साफ है, तो फिर शब्दों का खेल करने की हमें जरूरत नहीं है जी।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं आज सदन के सभी साथियों को यह भी कहना चाहता हूं कि साथियों, हम भ्रम में ना रहे, हम उस अहंकार में ना रहे हैं और मैं हम शब्द का उपयोग कर रहा हूं। मैं और तुम की बात नहीं कर रहा हूं मैं, हम इस भ्रम में ना रहें कि हम देश की नारी शक्ति को हम कुछ दे रहे हैं, जी नहीं। उसका हक है; और हमने, हमने कई दशकों से उसको रोका हुआ है, आज उसका प्रायश्चित करके हमें उस पाप में से मुक्ति पाने का यह अवसर है। हम सब जानते हैं, हर एक ने कैसे चालाकी की हर बार, चतुराई की, बिल्कुल हम तो इसके पक्ष में ही है, लेकिन; हम इसके साथ ही हैं, लेकिन; हर बार कोई ना कोई टेक्निकल पूंछ लगा दी इसको और इसको रोका गया है। हर बार ऐसे ही चीजें लाई गई हैं। हिम्मत नहीं हैं कि हम 33% महिलाओं के आरक्षण का विरोध कर पाए, वह तो जमाना चला गया, आपको करना नहीं है, लेकिन कहने की हिम्मत भी नहीं है। और इसलिए टेक्निकल बहानेबाजी, यह करो तो यह, वो करो तो वो, ढिकना करो तो, अब देश की नारी को यह नहीं समझा पाओगे, सदन में नंबर का खेल क्या होता है, वह तो समय तय करेगा, लेकिन यह पक्का है कि अब इन भांति-भांति के बहानेबाजी, भांति-भांति टेक्निकल मुद्दों के आधार पर चीजों को उलझा करके तीन दशक तक इसको अड़ंगे डालें हमने फंसा-फंसा कर रखा, आपने जो अचीव करना था, कर लिया, अब छोड़ दो ना भाई! तीन दशक कम पढ़ते हैं क्या रोकने में, तीन दशक तक आपने रोका, फिर भी कुछ कर नहीं पाए, तो अब तो करो।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं ना कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। अरे भाई, इनको बोलने दीजिए, वहां पर बेचारे के मुंह पर ताला लगा हुआ है, वहां बंगाल में कोई बोलने नहीं देता उसको।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आदरणीय अध्यक्ष जी,

देखिए इसका अगर विरोध करेंगे, तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। लेकिन साथ चलेंगे, तो किसी को भी नहीं होगा, यह लिखकर रखो। किसी को नहीं होगा, क्योंकि फिर अलग पहलू हो जाता है, फिर किसी को फायदा नहीं होता। और इसलिए हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही यह पारित हो जाए, मैं कल advertisement दे करके सबका धन्यवाद करने के लिए तैयार हूं, सबकी फोटो छपवाने के लिए तैयार हूं, क्रेडिट आप ले लो चलो! क्रेडिट की चिंता है क्या जी? ले लो ना क्रेडिट, आपको जिसकी फोटो छपवानी है, सरकारी खर्चे से हम करवा देंगे। सामने से, सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूँ।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारी संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी यह सिर्फ आंकड़ों का खेल या एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार, इतना सीमित नहीं है। लोकतंत्र की जननी के रूप में, मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में यह निर्णय भारत का कमिटमेंट है, यह सांस्कृतिक कमिटमेंट है और इसी कमिटमेंट के कारण पंचायतों में यह व्यवस्था बनी और अब तो 20 से अधिक राज्‍यों में 50% हुआ है और हमने अनुभव किया है, मुझे लंबे अरसे तक, मुझे लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का जनता ने अवसर दिया और उसी कालखंड में ग्रासरूट लेवल पर वूमेन लीडरशिप को मैंने देखा है। मेरा अनुभव है कि संवेदनशीलता के साथ समस्याओं के समाधान में उनका कमिटमेंट बहुत ही परिणामकारी रहते थे, विकास की यात्रा को गति देने में रहते थे और उस अनुभव के आधार पर मैं कहता हूं कि इस सदन में उनकी आवाज नई शक्ति बनेगी, नई सोच जुड़ेगी, देश की दिशा में एक संवेदनशीलता जुड़ेगी, तथ्य और तर्क के आधारों पर अनुभव जब जुड़ता है, तब मैं समझता हूं उसका सामर्थ्य अनेक गुना बढ़ जाता है और सदन कितना समृद्ध होता है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

हमारे देश में अनुभवी नारी शक्ति की कोई कमी नहीं है, सामर्थ्यवान में कोई कमी नहीं है, हम भरोसा करें, वह कंट्रीब्यूट करेंगी, बहुत अच्छा कंट्रीब्यूट करेंगी और आज भी जितनी हमारी बहनें यहां हैं, जब भी उनको अवसर मिला है, उन्होंने बहुत अच्छे ढंग से अपनी बात बताई है, सदन को समृद्ध किया है।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

आज देश में वर्तमान में, देश में 650 से ज्यादा पंचायत हैं, डिस्ट्रिक्ट पंचायत, करीब पौने तीन सौ महिलाएं उसका नेतृत्व कर रही हैं और केंद्र के कैबिनेट मिनिस्टर से ज्यादा उनके पास जिम्मेदारी और धन और व्यवस्था होती है, काम करती हैं जी। करीब 6700 ब्लॉक पंचायतों में 2700 से अधिक ब्लॉक पंचायत ऐसी हैं, जिसका नेतृत्व महिलाओं के हाथ में है। आज देश में 900 से अधिक शहरों में अर्बन लोकल बॉडीज की हेड के रूप में मेयर्स हों या स्टैंडिंग कमेटी का काम देखने वाली बहनें हैं, उनकी ताकत है। और मैं मानता हूं कि आज देश जो प्रगति कर रहा है, उस प्रगति में इनका भी महत्वपूर्ण योगदान है, उस ऋण को हमें स्वीकार करने का यह अवसर है। और जब यह अनुभव सदन के साथ जड़ेगा, तब वह अनेक गुना ताकत बढ़ा देगा।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

एक लंबी प्रतीक्षा यानी एक प्रकार से हम सबके लिए यह सवालिया निशान पैदा हो, ऐसी परिस्थिति हम ही लोगों ने पैदा की है। यह अवसर है कि हम पुरानी जो कुछ भी मर्यादा रही होंगी, मुश्किलें रही होंगी, उससे बाहर निकले, हिम्मत के साथ हम आगे बढ़े और नारी शक्ति का राष्ट्र के विकास में उनकी सहभागिता को हम सुनिश्चित करें और मैं पक्का मानता हूं कि अगर आज हम मिलकर के निर्णय करते हैं और मैं तो आग्रह करूंगा कि हमें सर्व सहमति से इसको को आगे बढ़ना चाहिए और जब सर्वसम्मति से बढ़ता है, तो ट्रेजरी बैंक पर एक दबाव रहता है जी, उनको भी लगता है कि नहीं भाई सबको सबका इसमें हक है, हर एक की बात मान के चलो, कोई नुकसान नहीं है। सामूहिक शक्ति से तो अनेक परिणाम हमें अच्छे मिलते हैं।

आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं ज्यादा समय न लेते हुए इतना ही कहूंगा कि इसको राजनीति के तराजू से ना तोलें। हम जब भी कुछ निर्णय करने जा रहे हैं, तो देश के, इतने बड़े देश का आधा जिम्मा जो उठा रहे हैं, उनका भी कोई हक बनता है यहां आने का, हमें रोकना नहीं चाहिए। और दूसरा संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी, संख्या के संबंध में भी एक मत पहले से बनता आया था, चर्चा थी कि साहब यह जो है, इनका कम मत करो, अधिक कर दो, तो जल्दी हो जाएगा। वह अधिक वाला विषय अब आया है कि चलो भाई पहले जो संख्या थी 33% और बढ़ा दो, ताकि किसी को ऐसा ना लगे कि मेरा हक चला गया। एक नई शक्ति जुड़ेगी, अतिरिक्त शक्ति जुड़ेगी और अब सदन के रचना भी तो अब, जो पहले से हमने सोच कर रखा है, जगह तो बना ली है।

और आदरणीय अध्यक्ष जी,

मैं लाइटर वे में जरूर कहना चाहूंगा, हर एक के अपने राजनीतिक कारण होते हैं और पराजय का डर जरा हैरान करने वाला होता है। लेकिन अपने यहां जब कोई भी शुभ काम होता है, उसको नजर ना लग जाए, इसलिए काला टीका लगाने की परंपरा है। मैं आपका धन्यवाद करता हूं काला टीका लगाने के लिए!

बहुत-बहुत धन्यवाद!