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भारत-किर्गिस्तान ने छह अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए और आगे भी बहुआयामी सहयोग को जारी रखने पर सहमति जताई
भारत-किर्गिस्तान आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी, सांस्कृतिक सहयोग और दोनों देशों की जनता के बीच आपसी संबंध मजबूत करने पर सहमत हुए
भारत ने द्वितीय योग दिवस उत्सव का पूर्ण समर्थन करने के लिए किर्गिज पक्ष के प्रति अपना आभार व्यक्त किया
भारत-किर्गिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को बेहतर बनाने को महत्व दिया है

किर्गिज गणराज्य के राष्ट्रपति, महामहिम श्री अलमाजबेक अतामबायेव ने 18-21 दिसंबर 2016 तक भारत की राजकीय यात्रा की। सरकारी कार्यक्रम में राष्ट्रपति भवन में समारोहपूर्वक स्वागत, राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के साथ बैठक, उप राष्ट्रपति श्री एम हामिद अंसारी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के साथ बैठक; राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा भोज का आयोजन; और भारत और किर्गिज गणराज्य व्यापार मंच में भागीदारी शामिल है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अलमाजबेक अतामबायेव ने एक मैत्रीपूर्ण एवं सदभावनापूर्ण माहौल में उपयोगी विचारों का आदान-प्रदान किया और मैत्रीपूर्ण सहयोग, द्विपक्षीय संबंधं और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्थिति को कवर करने वाले मुद्दों की सम्पूर्ण श्रृंखला पर चर्चा की। 

नेताओं ने 2015 में प्रधानमंत्री मोदी की किर्गिस्तान यात्रा के बाद दोनों देशों किए समझौतों की स्थिति की समीक्षा की, द्विपक्षीय संबंधों के क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियों पर संतोष व्यक्त किया और आगे बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के लिए अपनी तत्परता की पुष्टि की।

किर्गिज़-भारत संबंधों के स्तर में सुधार लाने की समान इच्छा से प्रेरित होकर, दोनों पक्षों ने इस बात को दोहराया कि भारत और किर्गिज गणराज्य ऐसे लोकतांत्रिक देश और ऐसे भागीदार हैं जो स्वतंत्रता, लोकतंत्र, मानवाधिकार और कानून प्रशासन जैसे समान मौलिक मूल्यों को साझा कर रहे हैं।

द्विपक्षीय संबंध
राजनीतिक सहयोग

नेताओं ने इस बात को भी दोहराया कि भारत गणराज्य और किर्गिज गणराज्य के लोग प्राचीन काल से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों में बंधे हैं और 25 वर्ष पूर्व दोनों देशों के बीच के राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से इन संबंधों को विस्तृत बनाने में वृद्धि की प्रवृत्ति पर संतोष व्यक्त किया।

आपसी सम्मान के आधार पर जीवन के सभी क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, दोनों पक्षों में शांति और जन समृद्धि के लिए मिलकर काम करने के लिए सहमति जताई। भारतीय पक्ष ने अक्टूबर 2015 को किर्गिज गणराज्य में बायोमेट्रिक डेटा के उपयोग के साथ हुए संसदीय चुनावों के सफल और पारदर्शी आचरण की सराहना की।

भारत और किर्गिस्तान ने संसदीय विनिमयन के मूल्य को रेखांकित किया। भारतीय पक्ष ने किर्गिज गणराज्य की संसद के सदस्यों एवं कर्मचारियों के लिए व्यवस्थित किए जाने वाले विशेष कोर्स के दौरान अपने अनुभव को साझा करने की पेशकस की। किर्गिज पक्ष ने भारतीय पक्ष के इस विशेष भाव की सराहना की।

दोनों पक्षों के किर्गिज गणराज्य में चुनाव एवं मत संग्रह के केंद्रीय आयोग और भारत निर्वाचन आयोग के बीच चुनावी मामलों पर सहयोग पर समझौता ज्ञापन, जिसपर जुलाई 2015 में हस्ताक्षर किए गए थे, के प्रभावी कार्यान्वयन पर संतोष व्यक्त किया।

किर्गिज पक्ष ने विकास में एक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका की सराहना की। दोनों पक्षों ने सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, टेलीमेडिसिन, कृषि, जैव चिकित्सा अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण, शिक्षा और संस्कृति सहित कार्यान्वयन के अधीन परियोजनाओं के साथ साथ विविध क्षेत्रों की पाइपलाइन परियोजनाओं का उल्लेख किया।

दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का जश्न मनाने के लिए, दोनों नेताओं ने इस अवसर पर इवेंट्स की एक श्रृंखला आयोजित करने पर सहमति जताई।

रक्षा के क्षेत्र में सहयोग

दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग के विकास पर संतोष व्यक्त किया, जो दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास के उच्च स्तर को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारत द्वारा तीन आईटी केंद्रों को किर्गिज़ सैन्य संस्थानों में स्थापित किया गया है, और एक आईटी केंद्र इस समय अपग्रेड किया जा रहा है।

भारत-किर्गिज़स्तान सैन्य अभ्यास की ‘‘खंजर’’ श्रृंखला एक वार्षिक आयोजन बन गया है। ‘‘खंजर-II" अभ्यास का आयोजन मार्च 2015 को किर्गिजस्तान में किया गया था, ‘‘खंजर III’’ का आयोजन ग्वालियर, भारत में मार्च-अप्रैल 2016 में किया गया था। ‘‘खंजर - IV" अभ्यास का आयोजन फरवरी-मार्च 2017 में किर्गिस्तान में निर्धारित किया गया है।

तीसरे संयुक्त भारत किर्गीज़ सेना पर्वतारोहण अभियान का आयोजन अगस्त-सितंबर 2016 में किया गया था। 19 अधिकारियों और सैनिकों की एक संयुक्त टीम ने भारत में मध्य हिमालय में समुद्र तल से 6113 मीटर की ऊंचाई पर जोगिन-III चोटी पर चढ़ाई की। इससे पहले अभियान लद्दाख (सितम्बर 2011) में स्टॉक कांगड़ी की चोटी पर और किर्गिस्तान (3-25 अगस्त 2013) में लेनिन पीक के शिखर पर पहुंचा था।

भारत और किर्गिस्तान ने संयुक्त रूप से किर्गिज़स्तान के इसिक कुल जिले के बालीक्ची शहर में किर्गीज़ इंडिया माउंटेन प्रशिक्षण केन्द्र का निर्माण किया है। यह केंद्र किर्गिज गणराज्य के सशस्त्र बलों के कर्मियों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ साथ किर्गीज़ इंडियन ज्वाइंट माउेंन ट्रेनिंग अभ्यास का आयोजन भी करेगा।

किर्गिज़ पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए किर्गिज़ सैन्य क्षेत्र द्वितीय स्तरीय अस्पताल को लैस करने में समर्थन एवं सहायता करने के लिए भारत का धन्यवाद किया और प्रशिक्षण में सहायता के प्रस्ताव का स्वागत किया।

आर्थिक सहयोग

दोनों पक्षों ने कहा कि भारत और किर्गिस्तान के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों का वर्तमान स्तर उपलब्ध क्षमता से नीचे है और दोनों देशों के मंत्रालयों एवं विभागों को पांच वर्ष की समय सीमा के लिए इस क्षेत्र में एक व्यापक रोडमैप विकसित करने का निर्देश दिया। उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए नए तंत्र का अन्वेषण करने पर सहमति जताई।

उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि द्विपक्षीय निवेश संधि को 20 दिसंबर, 2016 की सुबह से पहले आद्यक्षर किया गया था।

दोनों पक्षों ने 27-28 नवंबर 2016 को बिशकेक में आयोजित व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी और सांस्कृतिक सहयोग पर किर्गिज़ भारतीय अंतर सरकारी आयोग की 8वीं बैठक की सफलता का उल्लेख किया। नेताओं ने आईजीसी को क्षेत्रीय मुद्दों पर विभिन्न संयुक्त कार्य समूह के ढांचे में नियमित बैठकों का आयोजन करने के साथ साथ द्विपक्षीय समझौतों के कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए निर्देशित किया।

दोनों पक्षों ने कृषि क्षेत्र में हुई प्रगति, विश्वविद्यालय से विश्वविद्यालय तक सहयोग; ड्रिप सिंचाई के लिए एक प्रदर्शन इकाई की स्थापना; और किर्गिज से भारत को सूखे मेवे, शहद और अखरोट के निर्यात को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। किर्गिज़ पक्ष ने जैविक खेती के क्षेत्र में खुशबूदार उद्योग और परामर्श स्थापित करने में भारतीय पक्ष की सहायता का स्वागत किया।

दो पक्षों ने नई दिल्ली और बिशकेक के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स की ओपनिंग और प्रभावी वीजा सुविधा की दिशा में काम करने के संकल्प के बाद दोनों देशों के बीच पर्यटन के बढ़ते प्रवाह पर संतोष व्यक्त किया।

यूरेशियन अंतरिक्ष में एकीकरण की प्रक्रिया पर विचार विमर्श के हिस्से के रूप में, किर्गिज़ पक्ष ने यूरेशियन इकोनोमिक यूनियन (ईएईयू) में शामिल होने के परिणामस्वरूप भारतीय उद्यमियों के लिए उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला। दोनों पक्षों ने उस संयुक्त अध्ययन समूह के कार्य में प्रगति का उल्लेख किया जो भारत और यूरेशियन इकोनोमिक यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते की व्यवहार्यता पर विचार कर रही है।

दोनों पक्षों ने उल्लेख किया कि अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (आईएनएसटीसी) पर माल की आवाजाही रसद मुद्दों को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा और भारत-किर्गिज़स्तान व्यापार संबंधों को बढ़ावा देगा। आईएनएसटीसी के सदस्य के रूप में, दोनों पक्षों ने आईएनएसटीसी पर मार्ग की आवाजाही को संचालित करने की दिशा में संयुक्त रूप से काम करने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने सहमति व्यक्त की कि ईरान में चाहबहार बंदरगाह किर्गिज़स्तान को भारत तक लघुतम कनेक्टिविटी प्रदान करता है।

वैज्ञानिक, तकनीकी, सांस्कृतिक सहयोग के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क

भारत पक्ष ने किर्गिज़ इंडिया माउंटेन बायो मेडिकल रिसर्च सेंटर के लिए किर्गिज गणराज्य द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की। दोनों पक्षों ने स्यूक उच्च दर्रे पर द्वितीयक चरण प्रयोगशाला के सफल समापन और इस वर्ष नवंबर व दिसंबर में परीक्षण के आयोजन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने इस क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास में सहयोग जारी रखने और अनुसंधान के दायरे का विस्तार करने पर सहमति जताई।

राष्ट्रपति अलमाजबेक अतामबायेव ने किर्गिस्तान में टेलीमेडिसिन नेटवर्क की स्थापना और किर्गिस्तान के बाकी क्षेत्रों में इसके विकास में भारत के योगदान की प्रशंसा की। दोनों पक्षों ने भारत के विशेषीकृत अस्पतालों के डॉक्टरों द्वारा किर्गिज़स्तान के नियमित दौरों सहित स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी अस्पतालों के बीच बढ़ते लिंक पर संतोष व्यक्त किया।

दोनों पक्षों ने उल्लेख किया कि चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले भारतीय छात्रों के लिए किर्गिस्तान एक लोकप्रिय गंतव्य बना हुआ है।

दोनों पक्षों ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि किर्गिस्तान राज्य संरचनाओं में काम कर रहे 1,100 से अधिक पेशेवरों ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया था। किर्गिज़ पक्ष ने आईटीईसी ढांचे में किर्गिज़स्तान के विशेषज्ञों का सतत रूप से समर्थन करने के भारत सरकार के निर्णय का स्वागत किया।

भारतीय पक्ष ने दूसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के जश्न के लिए दिए गए पूर्ण समर्थन के लिए किर्गिज़ पक्ष का आभार व्यक्त किया। किर्गिज़ पक्ष ने इस बात की सराहना की कि भारत ने पारंपरिक भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में परामर्श और शिक्षा की पेशकश करने लिए किर्गिज गणराज्य में आयुष केंद्र (आयुर्वेद केंद्र, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) का गठन किया है और पूरे किर्गिज़स्तान के प्रशिक्षकों के लिए योग शिविरों की व्यवस्था की है।

दोनों नेताओं ने संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग और दोनों देशों के बीच संस्कृतिक आदान-प्रदान पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इतिहास एवं संस्कृति वर्ष, और किर्गिस्तान में द्वितीयक विश्व घुमंतू खेलों के सफल समापन पर राष्ट्रपति जी को बधाई दी। राष्ट्रपति अतामबायेव जी ने विश्व घुमंतू खेलों सहित किर्गिस्तान के सांस्कृतिक जीवन में भारत द्वारा पूरे मन से भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया।

नेताओं ने किर्गिज़ राष्ट्रीय नाटक रंगमंच पर किर्गिज़ भाषा में महाकाव्य ‘‘महाभारत’’ पर आधारित नाटक मंचन; किर्गिजस्तान में भारत उत्सव; हस्तशिल्प मेले ’’ओईमो’’ में भारतीय कलाकारों की भागीदारी; किर्गिज भाषा में महात्मा गांधी की आत्मकथा के प्रकाशन सहित दोनों देशों में आयोजित उल्लेखनीय सांस्कृतिक महाकाव्य "महाभारत" पर आधारित नाटक का मंचन सहित दोनों देशों में आयोजित संस्कृतिक महोत्सवों के महत्व पर संतोष व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने थिएटर से थिएटर सहयोग को को मजबूत बनाने की पहल का स्वागत किया। इस यात्रा के दौरान, किर्गिज़ लोगों के वीर महाकाव्य ‘‘मानस-समेते-सेतक’’ की पहली प्रति राष्ट्रपति अतामबायेव द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दी गई। किर्गिज़ भाषा में भारतीय कविताओं के संग्रह ‘‘जीवन के रंग’’ की पहली प्रति प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रपति अतामबायेव को प्रस्तुत की गई।

दोनों नेताओं ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, व्यापार और अर्थव्यवस्था के साथ-साथ शिक्षा और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए सबसे अनुकूल स्थिति पैदा करने के लिए वीजा प्रक्रिया को उदार बनाने पर कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।

क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग

कई महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों देशों की समान स्थिति का जिक्र करते हुए, दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे सहित अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में भारत और किर्गिस्तान के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के महत्व पर बल दिया और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को मजबूत करने की आवश्यकता व्यक्त की।

दुनिया में शांति बनाए रखने में भारत के योगदान का जिक्र करते हुए, किर्गिज़ पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत के सही दावे का समर्थन किया। भारतीय पक्ष ने इस समर्थन की सतत पुनरावृत्ति के लिए किर्गिज़ पक्ष को धन्यवाद दिया।

किर्गिज़ पक्ष ने 2016-2018 अवधि के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के चुनावों में किर्गिज गणराज्य को सक्रिय सहयोग देने के लिए भारतीय पक्ष का आभार व्यक्त किया।

किर्गिज़ पक्ष ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में भारत के आसन्न पूर्ण सदस्यता का स्वागत किया। भारतीय पक्ष ने एससीओ के एक सदस्य के रूप में भारत की स्वीकृति पर राष्ट्रीय प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए किर्गिज़ की सराहना की।

दोनों नेताओं ने विश्व के साथ एशियाई महाद्वीप में आतंकवाद और उग्रवाद से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख किया और शांतिपूर्ण आर्थिक विकास के लिए एक स्थिर और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया। इस संदर्भ में, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र मसौदा व्यापक अभिसमय के अंगीकरण करने का आह्वान किया।

दोनों नेताओं ने भारत सहित विभिन्न देशों द्वारा यूएनएफसीसीसी के पेरिस समझौते के अनुसमर्थन का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने जोर देकर कहा कि समझौते का निर्देशन जलवायु परिवर्तन पर यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) के सिद्धांतों, विशेष रूप से आम लेकिन विविध जिम्मेदारी सिद्धांत (सीबीडीआर) द्वारा किया जाएगा। उन्होंने अनुबंध II देशों की पूर्व-2020 दायित्वों को पूरा करने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग करने महत्व को रेखांकित किया।

कमजोर और नाजुक पारिस्थितिकी प्रणालियों और दुर्लभ एवं गायब हो रही प्रजातियों की सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, किर्गिज़ पक्ष ने भारतीय पक्ष को सुचित किया कि बर्फ तेंदुओं के संरक्षण पर एक शिखर सम्मेलन का आयोजन किर्गिज़स्तान में सितंबर 2017 में किया गया है और शिखर सम्मेलन में भारत को आमंत्रित किया गया है।

निष्कर्ष

दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय संपर्कों पर संतोष व्यक्त किया जो प्रगतिशील वृद्धि और सहयोग के पूरे स्पेक्ट्रम को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान करेगा।

राष्ट्रपति अतामबायेव ने राजकीय यात्रा के दौरान उनके एवं उनके प्रतिनिधिमंडल के गर्मजोशी से हुए स्वागत की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को किर्गिज गणराज्य की यात्रा के लिए आमंत्रित किया जिसे प्रधानमंत्री मोदी जी ने आभार के साथ स्वीकार किया है।

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जब डबल इंजन की सरकार होती है तो काम भी दोगुनी गति से होता है: पीएम मोदी
December 07, 2021
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भारत माता की –  जय, भारत माता की –  जय, धर्म अध्यात्म अउर क्रांति क नगरी गोरखपुर क, देवतुल्य लोगन के हम प्रणाम करत बानी। परमहंस योगानंद, महायोगी गोरखनाथ जी, वंदनीय हनुमान प्रसाद पोद्दार जी, अउर महा बलीदानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल क,ई पावन धरती के कोटि-कोटि नमन। आप सब लोग जवने खाद कारखाना, अउर एम्स क बहुत दिन से इंतजार करत रहली ह, आज उ घड़ी आ गईल बा ! आप सबके बहुत-बहुत बधाई।

मेरे साथ मंच पर उपस्थित उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल जी, उत्तर प्रदेश के यशस्वी कर्मयोगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉक्टर दिनेश शर्मा, भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष श्री स्वतंत्रदेव सिंह जी, अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष और मंत्रिमंडल में हमारी साथी, बहन अनुप्रिया पटेल जी, निषाद पार्टी के अध्यक्ष भाई संजय निषाद जी, मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी श्री पंकज चौधरी जी, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री श्री जयप्रताप सिंह जी, श्री सूर्य प्रताप शाही जी, श्री दारा सिंह चौहान जी, स्वामी प्रसाद मौर्या जी, उपेंद्र तिवारी जी, सतीश द्विवेदी जी, जय प्रकाश निषाद जी, राम चौहान जी, आनंद स्वरूप शुक्ला जी, संसद में मेरे साथीगण, यूपी विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यगण, और विशाल संख्या में हमें आर्शीवाद देने के लिए आए हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों!

जब मैं मंच पर आया तो मैं सोच रहा था ये भीड़ है। यहां नजर भी नहीं पहुंच रही है। लेकिन जब उस तरफ देखा तो मैं हैरान हो गया, इतनी बड़ी तादाद में लोग और में नहीं मानता हूं शायद उनको दिखाई भी नहीं देता होगा, सुनाई भी नहीं देता होगा। इतने दूर-दूर लोग झंडे हिला रहे हैं। ये आपका प्यार, ये आपके आर्शीवाद हमें आपके लिए दिन-रात काम करने की प्रेरणा देते हैं, ऊर्जा देते हैं, ताकत देते हैं। 5 साल पहले मैं यहां एम्स और खाद कारखाने का शिलान्यास करने आया था। आज इन दोनों का एक साथ लोकार्पण करने का सौभाग्य भी आपने मुझे ही दिया है। ICMR के रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर को भी आज अपनी नई बिल्डिंग मिली है। मैं यूपी के लोगों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

गोरखपुर में फर्टिलाइजर प्लांट का शुरू होना, गोरखपुर में एम्स का शुरू होना, अनेक संदेश दे रहा है। जब डबल इंजन की सरकार होती है, तो डबल तेजी से काम भी होता है। जब नेक नीयत से काम होता है, तो आपदाएं भी अवरोध नहीं बन पातीं। जब गरीब-शोषित-वंचित की चिंता करने वाली सरकार होती है, तो वो परिश्रम भी करती है, परिणाम भी लाकर दिखाती है। गोरखपुर में आज हो रहा आयोजन, इस बात का भी सबूत है कि नया भारत जब ठान लेता है, तो इसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है।

साथियों,

जब 2014 में आपने मुझे सेवा का अवसर दिया था, तो उस समय देश में फर्टिलाइजर सेक्टर बहुत बुरी स्थिति में था। देश के कई बड़े- बड़े खाद कारखाने बरसों से बंद पड़े थे, और विदेशों से आयात लगातार बढ़ता जा रहा था। एक बड़ी दिक्कत ये भी थी कि जो खाद उपलब्ध थी, उसका इस्तेमाल चोरी-छिपे खेती के अलावा और भी कामों में गुप-चुप चला जाता था। इसलिए देशभर में यूरिया की किल्लत तब सुर्खियों में रहा करती थी, किसानों को खाद के लिए लाठी-गोली तक खानी पड़ती थी। ऐसी स्थिति से देश को निकालने के लिए ही हम एक नए संकल्प के साथ आगे बढ़े। हमने तीन सूत्रों पर एक साथ काम करना शुरू किया। एक-    हमने यूरिया का गलत इस्तेमाल रोका, यूरिया की 100 प्रतिशत नीम कोटिंग की। दूसरा-   हमने करोड़ों किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिए, ताकि उन्हें पता चल सके कि उनके खेत को किस तरह की खाद की जरूरत है और तीसरा-  हमने यूरिया के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया। बंद पड़े फर्टिलाइजर प्लांट्स को फिर से खोलने पर हमने ताकत लगाई। इसी अभियान के तहत गोरखपुर के इस फर्टिलाइजर प्लांट समेत देश के 4 और बड़े खाद कारखाने हमने चुने। आज एक की शुरुआत हो गई है, बाकी भी अगले वर्षों में शुरू हो जाएंगे।

साथियों,

गोरखपुर फर्जिलाइजर प्लांट को शुरू करवाने के लिए एक और भगीरथ कार्य हुआ है। जिस तरह से भगीरथ जी, गंगा जी को लेकर आए थे,वैसे ही इस फर्टिलाइजर प्लांट तक ईंधन पहुंचाने के लिए ऊर्जा गंगा को लाया गया है। पीएम ऊर्जा गंगा गैस पाइपलाइन परियोजना के तहत हल्दिया से जगदीशपुर पाइपलाइन बिछाई गई है। इस पाइपलाइन की वजह से गोरखपुर फर्टिलाइजर प्लांट तो शुरू हुआ ही है, पूर्वी भारत के दर्जनों जिलों में पाइप से सस्ती गैस भी मिलने लगी है।

भाइयों और बहनों,

फर्टिलाइजर प्लांट के शिलान्यास के समय मैंने कहा था कि इस कारखाने के कारण गोरखपुर इस पूरे क्षेत्र में विकास की धुरी बनकर उभरेगा। आज मैं इसे सच होते देख रहा हूं। ये खाद कारखाना राज्य के अनेक किसानों को पर्याप्त यूरिया तो देगा ही, इससे पूर्वांचल में रोज़गार और स्वरोज़गार के हजारों नए अवसर तैयार होंगे। अब यहां आर्थिक विकास की एक नई संभावना फिर से पैदा होगी, अनेक नए बिजनेस शुरू होंगे। खाद कारखाने से जुड़े सहायक उद्योगों के साथ ही ट्रांसपोर्टेशन और सर्विस सेक्टर को भी इससे बढ़ावा मिलेगा।

साथियों,

गोरखपुर खाद कारखाने की बहुत बड़ी भूमिका, देश को यूरिया के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में भी होगी। देश के अलग-अलग हिस्सों में बन रहे 5 फर्टिलाइजर प्लांट शुरू होने के बाद 60 लाख टन अतिरिक्त यूरिया देश को मिलेगा। यानि भारत को हजारों करोड़ रुपए विदेश नहीं भेजने होंगे, भारत का पैसा, भारत में ही लगेगा।

साथियों,

खाद के मामले में आत्मनिर्भरता क्यों जरूरी है, ये हमने कोरोना के इस संकट काल में भी देखा है। कोरोना से दुनिया भर में लॉकडाउन लगे, एक देश से दूसरे देश में आवाजाही रुक गई, सप्लाई चेन टूट गई। इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खाद की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गईं। लेकिन किसानों के लिए समर्पित और संवेदनशील हमारी सरकार ने ये सुनिश्चित किया कि दुनिया में फर्टिलाइज़र के दाम भले बढ़ें, बहुत बढ़ गए लेकिन वे बोझ हम किसानों की तरफ नहीं जाने देंगे। किसानों को कम से कम परेशानी हो। इसकी हमने जिम्मेवारी ली है। आप हैरान हो जाएंगे सुनके भाईयो- बहनों,  इसी साल N.P.K. फर्टिलाइज़र के लिए दुनिया में दाम बढने के कारण 43 हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा सब्सिडी हमें किसानों के लिए बढ़ाना आवश्यक हुआ और हमने किया। यूरिया के लिए भी सब्सिडी में हमारी सरकार ने 33 हज़ार करोड़ रुपए की वृद्धि की। क्यों, कि दुनिया में दाम बढ़े उसका बोझ हमारे किसानों पर न जाये। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में जहां यूरिया 60-65 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, वहीं भारत में किसानों को यूरिया 10 से 12 गुना सस्ता देने का प्रयास है।

भाइयों और बहनों,

आज खाने के तेल को आयात करने के लिए भी भारत, हर साल हज़ारों करोड़ रुपए विदेश भेजता है। इस स्थिति को बदलने के लिए देश में ही पर्याप्त खाद्य तेल के उत्पादन के लिए राष्ट्रीय मिशन शुरु किया गया है। पेट्रोल-डीजल के लिए कच्चे तेल पर भी भारत हर वर्ष 5-7 लाख करोड़ रुपए खर्च करता है। इस आयात को भी हम इथेनॉल और बायोफ्यूल पर बल देकर कम करने में जुटे हैं। पूर्वांचल का ये क्षेत्र तो गन्ना किसानों का गढ़ है। इथेनॉल, गन्ना किसानों के लिए चीनी के अतिरिक्त कमाई का एक बहुत बेहतर साधन बन रहा है। उत्तर प्रदेश में ही बायोफ्यूल बनाने के लिए अनेक फैक्ट्रियों पर काम चल रहा है। हमारी सरकार आने से पहले यूपी से सिर्फ 20 करोड़ लीटर इथेनॉल, तेल कंपनियों को भेजा जाता था। आज करीब-करीब 100 करोड़ लीटर इथेलॉन, अकेले उत्तर प्रदेश के किसान, भारत की तेल कंपनियों को भेज रहे हैं। पहले खाड़ी का तेल आता था। अब झाड़ी का भी तेल आने लगा है।  मैं आज योगी जी सरकार की इस बात के लिए सराहना करूंगा कि उन्होंने गन्ना किसानों के लिए बीते सालों में अभूतपूर्व काम किया है। गन्ना किसानों के लिए लाभकारी मूल्य, हाल में साढ़े 3 सौ रुपए तक बढ़ाया है। पहले की 2 सरकारों ने 10 साल में जितना भुगतान गन्ना किसानों को किया था, लगभग उतना योगी जी की सरकार ने अपने साढ़े 4 साल में किया है।

भाइयों और बहनों,

सही विकास वही होता है, जिसका लाभ सब तक पहुंचे, जो विकास संतुलित हो, जो सबके लिए हितकारी हो। और ये बात वही समझ सकता है, जो संवेदनशील हो, जिसे गरीबों की चिंता हो। लंबे समय से गोरखपुर सहित ये बहुत बड़ा क्षेत्र सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज के भरोसे चल रहा था। यहां के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को इलाज के लिए बनारस या लखनऊ जाना पड़ता था। 5 साल पहले तक दिमागी बुखार की इस क्षेत्र में क्या स्थिति थी, ये मुझसे ज्यादा आप लोग जानते हैं। यहां मेडिकल कॉलेज में भी जो रिसर्च सेंटर चलता था, उसकी अपनी बिल्डिंग तक नहीं थी।

भाइयों और बहनों,

आपने जब हमें सेवा का अवसर दिया, तो यहां एम्स में भी, आपने देखा इतना बड़ा एम्स बन गया। इतना ही नहीं रिसर्च सेंटर की अपनी बिल्डिंग भी तैयार है। जब मैं एम्स का शिलान्यास करने आया था तब भी मैंने कहा था कि हम दिमागी बुखार से इस क्षेत्र को राहत दिलाने के लिए पूरी मेहनत करेंगे। हमने दिमागी बुखार फैलने की वजहों को दूर करने पर भी काम किया और इसके उपचार पर भी। आज वो मेहनत ज़मीन पर दिख रही है। आज गोरखपुर और बस्ती डिविजन के 7 जिलों में दिमागी बुखार के मामले लगभग 90 प्रतिशत तक कम हो चुके हैं। जो बच्चे बीमार होते भी हैं, उनमें से ज्यादा से ज्यादा का जीवन बचा पाने में हमें सफलता मिल रही है। योगी सरकार ने इस क्षेत्र में जो काम किया है, उसकी चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। एम्स और ICMR रिसर्च सेंटर बनने से अब इंन्सेफ्लाइटिस से मुक्ति के अभियान को और मजबूती मिलेगी। इससे दूसरी संक्रामक बीमारियों, महामारियों के बचाव में भी यूपी को बहुत मदद मिलेगी।

भाइयों और बहनों,

किसी भी देश को आगे बढ़ने के लिए, बहुत आवश्यक है कि उसकी स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती हों, सर्व सुलभ हों, सबकी पहुंच में हों। वर्ना मैंने भी इलाज के लिए लोगों को एक शहर से दूसरे शहर तक चक्कर लगाते, अपनी जमीन गिरवी रखते, दूसरों से पैसों की उधारी लेते, हमने भी बहुत देखा है। मैं देश के हर गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, चाहे वो किसी भी वर्ग का हो, किसी भी क्षेत्र में रहता हो, इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए जी-जान से जुटा हूं। पहले सोचा जाता था कि एम्स जैसे बड़े मेडिकल संस्थान, बड़े शहरों के लिए ही होते हैं। जबकि हमारी सरकार, अच्छे से अच्छे इलाज को, बड़े से बड़े अस्पताल को देश के दूर-सुदूर क्षेत्रों तक ले जा रही है। आप कल्पना कर सकते हैं, आज़ादी के बाद से इस सदी की शुरुआत तक देश में सिर्फ 1 एम्स था, एक। अटल जी ने 6 और एम्स स्वीकृत किए थे अपने कालखंड में। बीते 7 वर्षों में 16 नए एम्स बनाने पर देशभर में काम चल रहा है। हमारा लक्ष्य ये है कि देश के हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज जरूर हो। मुझे खुशी है कि यहां यूपी में भी अनेक जिलों में मेडिकल कॉलेज का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। और अभी योगी जी पूरा वर्णन कर रहे थे, कहां मेडिकल कॉलेज का काम हुआ है। हाल में ही यूपी के 9 मेडिकल कॉलेज का एक साथ लोकार्पण करने का अवसर आपने मुझे भी दिया था। स्वास्थ्य को दी जा रही सर्वोच्च प्राथमिकता का ही नतीजा है कि यूपी लगभग 17 करोड़ टीके के पड़ाव पर पहुंच रहा है।

भाइयों और बहनों,

हमारे लिए 130 करोड़ से अधिक देशवासियों का स्वास्थ्य, सुविधा और समृद्धि सर्वोपरि है। विशेष रूप से हमारी माताओं-बहनों-बेटियों की सुविधा और स्वास्थ्य जिस पर बहुत ही कम ध्यान दिया गया। बीते सालों में पक्के घर, शौचालय, जिसको आप लोग इज्जत घर कहते हैं। बिजली, गैस, पानी, पोषण, टीकाकरण, ऐसी अनेक सुविधाएं जो गरीब बहनों को मिली हैं, उसके परिणाम अब दिख रहे हैं। हाल में जो फैमिली हेल्थ सर्वे आया है, वो भी कई सकारात्मक संकेत देता है। देश में पहली बार महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक हुई है। इसमें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की भी बड़ी भूमिका है। बीते 5-6 सालों में महिलाओं का ज़मीन और घर पर मालिकाना हक बढ़ा है। और इसमें उत्तर प्रदेश टॉप के राज्यों में है। इसी प्रकार बैंक खाते और मोबाइल फोन के उपयोग में भी महिलाओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

साथियों,

आज आपसे बात करते हुए मुझे पहले की सरकारों का दोहरा रवैया, जनता से उनकी बेरुखी भी बार-बार याद आ रही है। मैं इसका जिक्र भी आपसे जरूर करना चाहता हूं। सब जानते थे कि गोरखपुर का फर्टिलाइजर प्लांट, इस पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए, यहां रोजगार के लिए कितना जरूरी था। लेकिन पहले की सरकारों ने इसे शुरू करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। सब जानते थे कि गोरखपुर में एम्स की मांग बरसों से हो रही थी। लेकिन 2017 से पहले जो सरकार चला रहे थे, उन्होंने एम्स के लिए जमीन देने में हर तरह के बहाने बनाए। मुझे याद है, जब बात आर या पार की हो गई, तब बहुत बेमन से, बहुत मजबूरी में पहले की सरकार द्वारा गोरखपुर एम्स के लिए जमीन आवंटित की गई थी।

साथियों,

आज का ये कार्यक्रम, उन लोगों को भी करारा जवाब दे रहा है, जिन्हें टाइमिंग पर सवाल उठाने का बहुत शौक है। जब ऐसे प्रोजेक्ट पूरे होते हैं, तो उनके पीछे बरसों की मेहनत होती है, दिन रात का परिश्रम होता है। ये लोग कभी इस बात को नहीं समझेंगे कि कोराना के इस संकट काल में भी डबल इंजन की सरकार विकास में जुटी रही, उसने काम रुकने नहीं दिया।

मेरे प्यारे भाईयों - बहनों,

लोहिया जी, जय प्रकाश नारायण जी के आदर्शों को, इन महापुरुषों के अनुशासन को ये लोग कब से छोड़ चुके हैं। आज पूरा यूपी भलिभांति जानता है कि लाल टोपी वालों को लाल बत्ती से मतलब रहा है, उनको आपके दुख-तकलीफ से कोई लेना देना नहीं है। ये लाल टोपी वालों को सत्ता चाहिए, घोटालों के लिए, अपनी तिजोरी भरने के लिए, अवैध कब्जों के लिए, माफियाओं को खुली छूट देने के लिए। लाल टोपी वालों को सरकार बनानी है, आतंकवादियों पर मेहरबानी दिखाने के लिए, आतंकियों को जेल से छुड़ाने के लिए। और इसलिए, याद रखिए, लाल टोपी वाले यूपी के लिए रेड अलर्ट हैं, रेल अलर्ट। यानि खतरे की घंटी है!

साथियों,

यूपी का गन्ना किसान नहीं भूल सकता है कि योगी जी के पहले की जो सरकार थी उसने कैसे गन्ना किसानों को पैसे के भुगतान में रुला दिया था। किश्तों में जो पैसा मिलता था उसमें भी महीनों का अंतर होता था। उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों को लेकर कैसे-कैस खेल होते थे, क्या-क्या घोटाले किए जाते थे इससे पूर्वांचल और पूरे यूपी के लोग अच्छी तरह परिचित है।

साथियों,

हमारी डबल इंजन की सरकार, आपकी सेवा करने में जुटी है, आपका जीवन आसान बनाने में जुटी है। भाईयों – बहनों आपको विरासत में जो मुसीबतें मिली हैं। हम नहीं चाहते हैं कि आपको ऐसी मुसीबतें विरासत में आपके संतानों को देने की नौबत आये। हम ये बदलाव लाना चाहते हैं। पहले की सरकारों के वो दिन भी देश ने देखे हैं जब अनाज होते हुए भी गरीबों को नहीं मिलता था। आज हमारी सरकार ने सरकारी गोदाम गरीबों के लिए खोल दिए हैं और योगी जी पूरी ताकत से हर घर अन्न पहुंचाने में जुटे हैं। इसका लाभ यूपी के लगभग 15 करोड़ लोगों को हो रहा है। हाल ही में पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को, होली से आगे तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

साथियों,

पहले बिजली सप्लाई के मामले में यूपी के कुछ जिले VIP थे, VIP। योगी जी ने यूपी के हर जिले को आज VIP बनाकर बिजली पहुंचाने का काम किया है।आज योगी जी की सरकार में हर गांव को बराबर और भरपूर बिजली मिल रही है। पहले की सरकारों ने अपराधियों को संरक्षण देकर यूपी का नाम बदनाम कर दिया था। आज माफिया जेल में हैं और निवेशक दिल खोल कर यूपी में निवेश कर रहे हैं। यही डबल इंजन का डबल विकास है। इसलिए डबल इंजन की सरकार पर यूपी को विश्वास है। आपका ये आशीर्वाद हमें मिलता रहेगा, इसी अपेक्षा के साथ एक बार फिर से आप सबको बहुत-बहुत बधाई।मेरे साथ जोर से बोलिये, भारत माता की जय ! भारत माता की जय ! भारत माता की जय ! बहुत – बहुत धन्यवाद।