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"Shri Narendra Modi addresses 29th Annual Session of FICCI Ladies Organisation (FLO) in New Delhi"
"Empowerment of women is key to enhancing entrepreneurship. Till we do not empower women, there is no change for entrepreneurship among them: Shri Modi"
"In every sphere, wherever women have got the opportunity they are two steps ahead of men and this has to be accepted: Shri Modi"
"In Indian culture, position of women is supreme. Wherever there is purity, we see Mother. The Ganga is an incarnation of the Mother, so is India. Even the cow is revered as a Mother. Position of women has always been supreme, there are no two views on this: Shri Modi"
"No question of differentiation between girl and boy child: Shri Modi"
"Shri Modi talks extensively of steps taken by Gujarat Government for empowerment of women"
"In the west, people think of Indian women as housewives. I am not convinced with this thought. In tribal dominated areas, see what women are doing for economic development. In dairy sphere, I feel the contribution of men is minimum. It is not that the women are not there in the development journey, only thing is that they are not partners in decision making process: Shri Modi"
"Shri Modi answers questions on his weaknesses, steps to strengthen handicrafts and women reservation bill"
"He (Narendra Modi) is a person whose Mantra is Teamwork: FICCI President Smt. Naina Lal Kidwai"

मातृशक्ति के सामर्थ्य, गौरव और भागीदारी के लिए श्री मोदी का आह्वान

भ्रूण हत्या के कलंक को मिटाने की अपील

गुजरात में मनोवैज्ञानिक और सर्वांगीण व्यूहरचना से महिलाओं का सशक्तिकरण

भारतीय सांस्कृतिक परंपरा और विरासत में माता का स्थान सर्वोपरि

आधुनिक भारत के निर्माण में महिलाशक्ति के सामर्थ्य को भागीदार बनाने के लिए श्री मोदी ने आर्थिक सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल दिया

महिला उद्योग साहसिकता की सफलता महिला सशक्तिकरण पर आधारित है

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में फिक्की की लेडिज विंग एफएलओ द्वारा आयोजित वार्षिक परिषद को संबोधित करते हुए आधुनिक भारत के निर्माण में मातृशक्ति के सामर्थ्य, गौरव और भागीदारी को सुनिश्चित करने की प्रेरक हिमायत की। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास में महिलाओं को भागीदार बनाने के लिए उन्हें सर्वप्रथम निर्णय में भागीदार बनाना होगा। निर्णय की इस भागीदारी की प्रथम शर्त यह है कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण किया जाए। श्री मोदी ने कहा कि गुजरात ने मनोवैज्ञानिक आधार पर नारी सशक्तिकरण की अनोखी पहल की है। देश की गणमान्य महिला उद्योग साहसिक, महिला संगठनों के आमंत्रित प्रतिनिधियों सहित भारी संख्या में महिलाएं एफएलओ के इस कार्यक्रम में मौजूद थी।

मुख्यमंत्री ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति की परंपरा और विरासत में माता के प्रति पवित्र और शुद्ध श्रद्धाभावना के संस्कारों का आविर्भाव हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत में नदी माता, गौ माता और भारत माता का स्थान सर्वोपरि रहा है, परन्तु १२०० वर्ष के गुलामी काल के परिणामस्वरूप समाज में जो विकृतियां और बुराइयां आईं उनके कारण नारी गौरव और सामर्थ्य की उपेक्षा की गई। १८वीं सदी में तो बेटियों को जन्म लेने के साथ ही दूध में डुबोकर मौत के घाट उतार दिया जाता था। इस दर्दनाक सामाजिक बुराई का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि २१वीं सदी में भी माता के गर्भ में भ्रूण हत्या करके समाज घोर पाप कर रहा है और इसके परिणामस्वरूप भविष्य में समग्र संसार चक्र बिखर जाएगा और समाज असंतुलित हो जाएगा। श्री मोदी ने इस स्थिति को बदलने के लिए मातृशक्ति को नेतृत्व लेने का आह्वान किया।

श्री मोदी ने कहा कि स्वभाव से संवेदनशील महिला, माता और बहन समय पर अपनी शक्ति का साक्षात्कार करवा सकती है। नारी शक्ति का झरना है और माता शक्ति का अंबार है। संघर्ष करते रहकर शक्ति का संचय करने वाली नारी के सामर्थ्य को श्री मोदी ने जमकर सराहा। उन्होंने कहा कि महिला उद्योग साहसिकता महिलाओं में सशक्तिकरण के बगैर संभव नहीं है। इनका सशक्तिकरण आर्थिक रूप से उन्हें शक्तिशाली बनाने पर आधारित है। महिला का आर्थिक सामर्थ्य ही उनको निर्णय में भागीदार बना सकता है। अगर भारत का भाग्य बदलना है तो देश की ५० प्रतिशत नारी शक्ति के सामर्थ्य को स्वीकार करने के साथ ही उन्हें गौरव और प्रतिष्ठा देनी होगी।

गुजरात में महिला सशक्तिकरण के प्रेरणात्मक उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री श्री मोदी ने कहा कि राज्य में लाखों परिवारों में संपत्ति महिला के नाम पर किये जाने पर कोई शुल्क नहीं लगता। इस योजना के चलते गुजरात में लाखों महिलाओं को संपत्ति का मालिक बनाया गया है। शाला में बालक के प्रवेश नामांकन के वक्त उसकी माता का नाम अनिवार्य रूप से लिखने की राज्य सरकार की नीति के परिणामस्वरूप गुजरात की मातृशक्ति को अनोखा गौरव मिला है। मुख्मयंत्री ने महिला सरपंचों के नेतृत्व में ३०० से ज्यादा महिला समरस ग्राम पंचायतों के सफल प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि गुजरात की महिलाओं ने प्रशासन में भी कुशल नेतृत्व उपलब्ध करवाया है। समाज की प्रत्येक वर्ग की महिलाओं में कोई न कोई आंतरिक शक्ति विद्यमान है और इस शक्ति को उजागर करने के लिए व्यवस्था, सुरक्षा और अवसर दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय नारी के लिए पश्चिम की विचारधारा भ्रामक है। भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में महिलाओं ने अपने आर्थिक सामर्थ्य की प्रतीति करवाई है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नारीशक्ति का प्रभुत्व स्थापित हुआ है।

समाज में बेटी-बेटे के भेदभाव को मिटाने की जागृति पर बल देते हुए श्री मोदी ने कहा कि गुजरात में बेटियों को जब भी अवसर मिला है, तब उन्होंने बेटों से भी बढ़कर हर क्षेत्र में मैदान मारा है। व्यक्ति, परिवार और समाज नारीशक्ति के गौरव और सामर्थ्य को प्रोत्साहित करने के लिए वातावरण तैयार करें तो महिलाएं उनकी उत्तम भागीदारी से स्थिति को सुधारने में निर्णायक शक्ति का योगदान दे सकती हैं। गुजरात में सफल महिला उद्योग साहसिकों की सूझबूझ वाली सफलतागाथाओं का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधीजी की अनुयायी गंगाबेन मजुमदार ने चरखे से बुनाई के लिए महिला उद्योग साहसिकता का समूह कार्यरत किया था। अहमदाबाद में इन्दुबेन खाखरावाला, जशुबेन के पिज्जा, आदिवासी महिलाओं द्वारा लिज्जत पापड़ के उद्योग और श्वेत क्रांति की मशाल समान अमूल सहकारिता में महिलाओं की भागीदारी जैसे अनेक महिला उद्यमशीलता के प्रेरणास्रोतों का श्री मोदी ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नारीशक्ति स्वयं संघर्ष करके भी सफल उद्योग साहसिक बन सकती है।

मुख्यमंत्री ने फिक्की की महिला शाखा को समग्र देश में महिला उद्योग साहसिकों की सफलतागाथा का संशोधन कर उसे पुस्तक के रूप में पेश करने तथा वेबसाइट बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि भारत में कॉरपोरेट सेक्टर की कंपनियों के परिवार की महिलाएं कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी की प्रवृत्ति का नेतृत्व लें तो उत्तम परिणाम दे सकती हैं। गुजरात में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मिशन मंगलम और सखी मंडल की प्रवृत्तियों की सफलता को प्रेरणास्रोत करार देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के समुद्रीतट पर समुद्री शैवाल (सी विड कल्टीवेशन) का पायलट प्रोजेक्ट सफल हुआ है जिसमें सागर तट पर बसने वाले सागरखेड़ु समाज की महिलाएं समुद्री शैवाल की खेती में पारंगत हुई हैं। गुजरात के आदिवासी क्षेत्र में भी महिलाओं ने सखी मंडलों द्वारा केटरिंग मैनेजमेंट के कार्य द्वारा नई आर्थिक प्रवृत्ति की दिशा दिखलाई है। इतना ही नहीं, वाड़ी प्रोजेक्ट और फूलों की खेती में आदिवासी किसान बहनों ने अपना कौशल्य दिखाते हुए फूलों-काजू के निर्यात द्वारा समृद्धि की दिशा दिखलाई है। उन्होंने कहा कि गुजरात में हस्तकला कारीगरी की परंपरागत कला में भी ग्रामीण महिलाओं ने आर्थिक प्रवृत्तियों द्वारा देश-विदेश में प्रशंसा पाई है। राज्य सरकार ने इसकी बाजार व्यवस्था तक उद्दीपक का किरदार निभाया है।

श्री मोदी ने कहा कि गुजरात में पंचायत और स्थानीय स्वराज की संस्थाओं में महिलाओं को ५० प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने वाला विधेयक विधानसभा में पास किया गया है लेकिन इसे अमल में नहीं लाया जा सका, क्योंकि गुजरात के राज्यपाल की इसे मंजूरी नहीं मिली है। मुख्यमंत्री ने भारत माता का ऋण चुकाने और देश की सेवा के लिए अपना दायित्व निभाने का प्रेरणात्मक अनुरोध करते हुए कहा कि, हम जो कुछ भी हैं उसमें समाज के किसी न किसी व्यक्ति और समुदाय का हम पर ऋण है। इस कर्ज को चुकाने के लिए भारत माता की सेवा करने के लिए हम सभी को संकल्प लेना होगा।

मुख्यमंत्री ने महिला जागृति की सराहना करते हुए कहा कि सोशल मीडिया- ट्विटर और फेसबुक जैसे तकनीकी माध्यमों के जरिए अनेक महिलाएं लैंगिग असमानता सहित विविध सामाजिक विषयों और महिलाओं की समस्याओं के संबंध में प्रो-एक्टिव भूमिका निभाते हुए नवीनतम सुझाव देती हैं। अनेक महिलाओं ने विविध विषयों पर अपने सूझाव सोशल मीडिया पर मुझसे साझा किये हैं। मुख्यमंत्री के साथ फिक्की लेडिज विंग की महिलाओं ने प्रश्नोत्तरी भी की। प्रारंभ में फिक्की लेडिज विंग की प्रमुख कविता वरदराजन ने श्री मोदी के नेतृत्व में गुजरात द्वारा विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों की सराहना करते हुए इसे देश के लिए प्रेरणास्त्रोत करार दिया और मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। फिक्की की प्रमुख नैनालाल किदवई और एफएलओ की नवनियुक्त प्रमुख मालविका ने भी मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।

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स्वतंत्र भारत के सपनों को पूरा करना हमारा लक्ष्य है: पीएम मोदी
January 23, 2022
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Also confers Subhas Chandra Bose Aapda Prabandhan Puraskars
Gujarat was the first state to enact disaster related law in 2003
“In disaster management, emphasis is on Reform along with stress on Relief, Rescue and Rehabilitation”
“Disaster management is no longer just a government job but it has become a model of 'Sabka Prayas'”
“We have a goal to fulfil the dreams of independent India. We have the goal of building a new India before the hundredth year of independence”
“It is unfortunate that after Independence, along with the culture and traditions of the country, the contribution of many great personalities was also tried to be erased”
“The freedom struggle involved ‘tapasya’ of lakhs of countrymen, but attempts were made to confine their history as well. But today the country is boldly correcting those mistakes”
“We have to move ahead taking inspiration from Netaji Subhash's 'Can Do, Will Do' spirit”

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के मेरे साथी श्री अमित शाह, श्री हरदीप पूरी जी, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, INA के सभी ट्रस्टी, NDMA के सभी सदस्यगण, jury मेम्बर्स, NDRF, कोस्ट गॉर्ड्स और IMD के डाइरेक्टर जनरल्स, आपदा प्रबंधन पुरस्कारों के सभी विजेता साथी, अन्य सभी महानुभाव, भाइयों एवं बहनों!

भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से मैं आज कोटि-कोटि नमन करता हूं। ये दिन ऐतिहासिक है, ये कालखंड भी ऐतिहासिक है और ये स्थान, जहां हम सभी एकत्रित हैं, वो भी ऐतिहासिक है। भारत के लोकतंत्र की प्रतीक हमारी संसद पास में है, हमारी क्रियाशीलता और लोकनिष्ठा के प्रतीक अनेक भवन भी हमारे साथ पास में नजर आ रहे हैं, हमारे वीर शहीदों को समर्पित नेशनल वॉर मेमोरियल भी पास है। इन सबके आलोक में आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- “मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा"। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी। ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है। नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।

साथियों,

पिछले साल से देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। आज पराक्रम दिवस के अवसर पर सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं। नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर ही इन पुरस्कारों को देने की घोषणा की गई थी। साल 2019 से 2022 तक, उस समय के सभी विजेताओं, सभी व्यक्तियों, सभी संस्थाओं को जिने आज सम्मान का अवसर मिला है। उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारे देश में आपदा प्रबंधन को लेकर जिस तरह का रवैया रहा था, उस पर एक कहावत बहुत सटीक बैठती है- जब प्यास लगी तो कुआं खोदना। और जिस मैं काशी क्षेत्र से आता हूं वहां तो एक और भी कहावत है। वो कहते हैं - भोज घड़ी कोहड़ा रोपे। यानि जब भोज का समय आ गया तो कोहड़े की सब्जी उगाने लगना। यानि जब आपदा सिर पर आ जाती थी तो उससे बचने के उपाय खोजे जाते थे। इतना ही नहीं, एक और हैरान करने वाली व्यवस्था थी जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है। हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था। इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, ऐसी जो स्थितियों पैदा होती थी। उससे निपटने का जिम्मा, उसका संबंध कृषि मंत्रालय से आता था। देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चलता रहता था। लेकिन 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, देश को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया। अब उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए। हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया। उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में Gujarat State Disaster Management Act बनाया गया। आपदा से निपटने के लिए गुजरात इस तरह का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। बाद में केंद्र सरकार ने, गुजरात के कानून से सबक लेते हुए, 2005 में पूरे देश के लिए ऐसा ही Disaster Management Act बनाया। इस कानून के बाद ही National Disaster Management Authority उसके गठन का रास्ता साफ हुआ। इसी कानून ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी देश की बहुत मदद की।

साथियों,

डिजास्टर मैनैजमेंट को प्रभावी बनाने के लिए 2014 के बाद से हमारी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा काम किया है। हमने Relief, Rescue, Rehabilitation उस पर जोर देने के साथ-साथ ही Reform पर भी बल दिया है। हमने NDRF को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया। स्पेस टेक्नालजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया। हमारे NDRF के साथी, सभी राज्यों के SDRFs, और सुरक्षा बलों के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर, एक-एक जीवन को बचाते हैं। इसलिए, आज ये पल इस प्रकार से जान की बाजी लगाने वाले, औरों की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जिंदगी का दांव लगाने वाले चाहे वो NDRF के लोग हों, चाहे SDRF के लोग हों, हमारे सुरक्षाबलों के साथी हों, ये सब के सब उनके प्रति आज आभार व्यक्त करने का, उनको salute करने का ये वक्त है।

साथियों,

अगर हम अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करते चलें, तो आपदा से निपटने की क्षमता दिनों-दिन बढ़ती चली जाती है। मैं इसी कोरोना काल के एक-दो वर्षों की बात करूं तो इस महामारी के बीच भी देश के सामने नई आपदाएँ आकर खड़ी हो गईं। एक तरफ कोरोना से तो लड़ाई लड़ ही रहे थे। अनेक जगहों पर भूकंप आए, कितने ही क्षेत्रों में बाढ़ आई। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी तटों पर cyclones आए, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिमी तटों पर cyclones आए, पहले, एक-एक साइक्लोन में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। देश ने हर चुनौती का जवाब एक नई ताकत से दिया। इसी वजह से इन आपदाओं में हम ज्यादा से ज्यादा जीवन बचाने में सफल रहे। आज बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, भारत के इस सामर्थ्य, भारत में आए इस बदलाव की सराहना कर रही हैं। आज देश में एक ऐसा end-to-end cyclone response system है जिसमें केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर के काम करती हैं। बाढ़, सूखा, cyclone, इन सभी आपदाओं के लिए वार्निंग सिस्टम में सुधार किया गया है। Disaster risk analysis के लिए एडवांस्ड टूल्स बनाए गए हैं, राज्यों की मदद से अलग अलग क्षेत्रों के लिए Disaster risk maps बनाए गए हैं। इसका लाभ सभी राज्यों को, सभी स्टेक होल्डर्स को मिल रहा है। और सबसे महत्वपूर्ण, डिजास्टर मैनेजमेंट - आपदा प्रबंधन, आज देश में जनभागीदारी और जन-विश्वास का विषय बन गया है। मुझे बताया गया है कि NDMA की ‘आपदा मित्र’ जैसी स्कीम्स से युवा आगे आ रहे हैं। आपदा मित्र के रूप में जिम्मेवारियां उठा रहे हैं। यानी जन भागीदारी बढ़ रही है। कहीं कोई आपदा आती है तो लोग विक्टिम्स नहीं रहते, वो वॉलंटियर्स बनकर आपदा का मुकाबला करते हैं। यानी, आपदा प्रबंधन अब एक सरकारी काम भर नहीं है, बल्कि ये ‘सबका प्रयास’ का एक मॉडल बन गया है।

और साथियों,

जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूँ, तो इसमें हर क्षेत्र में हो रहा प्रयास, एक holistic approach भी शामिल है। आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए, हमने अपने एजुकेशन सिस्टम में भी कई सारे बदलाव किए हैं। जो सिविल इंजीनियरिंग के कोर्सेस होते हैं, आर्किटेक्चर से जुड़े कोर्सेस होते हैं, उसके पाठ्यक्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट से जोड़ा, इन्फ्रासट्रक्चर की रचना कैसी हो उसपर विषयों को जोड़ना, ये सारे काम प्रयासरत हैं। सरकार ने Dam Failure की स्थिति से निपटने के लिए, डैम सेफ्टी कानून भी बनाया है।

साथियों,

दुनिया में जब भी कोई आपदा आती है तो उसमें लोगों की दुखद मृत्यु की चर्चा होती है, कि इतने लोगों की मृत्यु हो गई, इतना ये हो गया, इतने लोगों को हटाया गया, आर्थिक नुकसान भी बहुत होता है। उसकी भी चर्चा की जाती है। लेकिन आपदा में जो इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान होता है, वो कल्पना से परे होता है। इसलिए ये बहुत आवश्यक है कि आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ऐसा हो जो आपदा में भी टिक सके, उसका सामना कर सके। भारत आज इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। जिन क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़ या साइक्लोन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां पर पीएम आवास योजना के तहत बन रहे घरों में भी इसका ध्यान रखा जाता है। उत्तराखंड में जो चार धाम महा-परियोजना का काम चल रहा है, उसमें भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है। उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है। आपात स्थिति में ये एक्सप्रेसवे, विमान उतारने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है। यही नए भारत का विज़न है, नए भारत के सोचने का तरीका है।

साथियों,

Disaster Resilient Infrastructure की इसी सोच के साथ भारत ने दुनिया को भी एक बहुत बड़ी संस्था का विचार दिया है, उपहार दिया है। ये संस्था है- CDRI - Coalition for Disaster Resilient Infrastructure. भारत की इस पहल में ब्रिटेन हमारा प्रमुख साथी बना है और आज दुनिया के 35 देश इससे जुड़ चुके हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने Joint Military Exercise बहुत देखी है। पुरानी परंपरा है उसकी चर्चा भी होती है। लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए Joint ड्रिल की परंपरा शुरू की है। कई देशों में मुश्किल समय में हमारी डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी सेवाएँ दी हैं, मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है। जब नेपाल में भूकंप आया, इतनी बड़ी तबाही मची, तो भारत एक मित्र देश के रूप में उस दुख को बाटने के लिए जरा भी देरी नहीं की थी। हमारे NDRF के जवान वहां तुरंत पहुंच गए थे। डिजास्टर मैनेजमेंट का भारत का अनुभव सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पुरी मानवता के लिए आप सभी को याद होगा 2017 में भारत ने साउथ एशिया जियो-स्टेशनरी communication satellite को लान्च किया। weather और communication के क्षेत्र में उसका लाभ हमारे दक्षिण एशिया के मित्र देश को मिल रहा है।

साथियों,

परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हममे हौंसला है तो हम आपदा को भी अवसर में बदल सकते हैं। यही संदेश नेताजी ने हमे आजादी की लड़ाई के दौरान दिया था। नेताजी कहते थे कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना। दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके"। आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले, 2047 के पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है। और नेताजी को देश पर जो विश्वास था, जो भाव नेताजी के दिल में उभरते थे। और उनके ही इन भावों के कारण मैं कह सकता हूँ कि, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोक सके। हमारी सफलताएँ हमारी संकल्पशक्ति का सबूत हैं। लेकिन, ये यात्रा अभी लंबी है। हमें अभी कई शिखर और पार करने हैं। इसके लिए जरूरी है, हमें देश के इतिहास का, हजारों सालों की यात्रा में इसे आकार देने वाले तप, त्याग और बलिदानों का बोध रहे।

भाइयों और बहनों,

आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा। ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं। लेकिन आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है। आप देखिए, बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों को देश उनकी गरिमा के अनुरूप विकसित कर रहा है। स्टेचू ऑफ यूनिटी आज पूरी दुनिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल के यशगान की तीर्थ बन गई है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत भी हम सबने कर दी है। आदिवासी समाज के योगदान और इतिहास को सामने लाने के लिए अलग-अलग राज्यों में आदिवासी म्यूज़ियम्स बनाए जा रहे हैं। और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन से जुड़ी हर विरासत को भी देश पूरे गौरव से संजो रहा है। नेताजी द्वारा अंडमान में तिरंगा लहराने की 75वीं वर्षगांठ पर अंडमान के एक द्वीप का नाम उनके नाम पर रखा गया है। अभी दिसम्बर में ही, अंडमान में एक विशेष ‘संकल्प स्मारक’ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लिए समर्पित की गई है। ये स्मारक नेताजी के साथ साथ इंडियन नेशनल आर्मी के उन जवानों के लिए भी एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था। जिस प्रकार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है।

साथियों,

मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे। लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था। वो पल अद्भुत है, वो पल अविस्मरणीय है। मुझे खुशी है कि लाल किले में ही आजाद हिंद फौज से जुड़े एक स्मारक पर भी काम किया जा रहा है। 2019 में, 26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिकों को देखकर मन जितना प्रफुल्लित हुआ, वो भी मेरी अनमोल स्मृति है। और इसे भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि हमारी सरकार को नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का अवसर मिला।

साथियों,

नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं सकती थी। हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है। वो ये जानते थे तभी ये बात हमेशा कहते थे भारत में राष्ट्रवाद ने ऐसी सृजनात्मक शक्ति का संचार किया है जो सदियों से लोगों के अंदर सोई पड़ी थी। हमें राष्ट्रवाद भी जिंदा रखना है। हमें सृजन भी करना है। और राष्ट्र चेतना को जागृत भी रखना है। मुझे विश्वास है कि, हम मिलकर, भारत को नेताजी सुभाष के सपनों का भारत बनाने में सफल होंगे। आप सभी को एक बार फिर पराक्रम दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूं और मैं आज एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के लोगों को भी विशेष रूप से बधाई देता हूं। क्योंकि बहुत छोटे कालखंड में उन्होंने अपनी पहचान बना दी है। आज कहीं पर भी आपदा हो या आपदा के संबंधित संभावनाओं की खबरें हों, साईक्लोन जैसी। और जब एनडीआरएफ के जवान यूनिफार्म में दिखते हैं। सामान्य मानवीय को एक भरोसा हो जाता है। कि अब मदद पहुंच गई। इतने कम समय में किसी संस्था और इसकी यूनिफार्म की पहचान बनना, यानि जैसे हमारे देश में कोई तकलीफ हो और सेना के जवान आ जाएं तो सामान्य मानवीय को संतोष हो जाता है, भई बस अब ये लोग आ गये। वैसा ही आज एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने अपने पराक्रम से ये करके दिखाया है। मै पराक्रम दिवस पर नेताजी का स्मरण करते हुए, मैं एनडीआरएफ के जवानों को, एसडीआरएफ के जवानों को, उन्होंने जिस काम को जिस करुणा और संवेदनशीलता के साथ उठाया है। बहुत – बहुत बधाई देता हूं। उनका अभिनंदन करता हूं। मैं जानता हूं इस आपदा प्रबंधन के काम में, इस क्षेत्र में काम करने वाले कईयों ने अपने जीवन भी बलिदान दिए हैं। मैं आज ऐसे जवानों को भी श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने किसी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी। ऐसे सबको में आदरपूवर्क नमन करते हुए मैं आप सबको भी आज पराक्रम दिवस की अनेक – अनेक शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद !