आम आदमी से मुख्यमंत्री तक का सफर

Published By : Admin | September 16, 2016 | 23:55 IST

श्री नरेंद्र मोदी एक सीनियर कैमरामैन गोपाल बिश्ट के दाह संस्कार में थे। स्वर्गीय माधवराव सिंधिया की दुर्भाग्यपूर्ण हवाई दुर्घटना में उनके साथ मारे गए पत्रकारों में बिश्ट भी शामिल थे। मोदी दाह संस्कार में ही थे, तभी उन्हें प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई का फोन आया।

अटल जी ने पूछा, “भई कहां हो?”

श्री मोदी ने कहा, “मैं शमशान में हूं।” इस पर अटल जी ने कहा, “तुम शमशान में हो, मैं तुमसे अब क्या बात करूं” लेकिन उन्होंने श्री मोदी को अपने आवास पर मिलने के लिए शाम को बुलाया।

जब श्री मोदी अटल जी से मिले तो प्रधानमंत्री ने कहा, “दिल्ली ने तुम्हें बहुत मोटा बना दिया है! तुम्हें गुजरात वापस जाना चाहिए!”

इस संदेश को श्री मोदी अच्छी तरह समझ गए, हालांकि वो इस निर्णय से आश्चर्यचकित थे। जो कभी विधायक भी न बना हो, उस पर पार्टी इतनी बड़ी जिम्मेदारी देने का भरोसा कर रही थी। लेकिन जब प्रधानमंत्री खुद इस बात के लिए जोर दे रहे हों, तो कौन इनकार कर सकता था।

इस बारे में श्री मोदी खुद बताते हैं, “मैं कई वर्षों से गुजरात में नहीं था। मैंने पार्टी के अपने साथियों को फोन मिलाया और उनसे कहा – तुम मुझे बुला तो रहे हो, लेकिन मैं रहूंगा कहां, क्योंकि मेरे पास तो घर नहीं है। उन्होंने कहा कि आप चिंता मत कीजिए हम सर्किट हाउस में एक कमरा बुक करवा देंगे, तो मैंने उनसे कहा कि आप कमरा जरूर बुक करवाइए, लेकिन मैं कोई एमएलए नहीं हूं, इसलिए मैं उस कमरे का पूरा किराया दूंगा!”

इस तरह श्री मोदी की गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पारी शुरू हुई। वो राज्य की सबसे अधिक समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बने और उन्होंने चार बार मुख्यमंत्री पद की शपथ की, जो एक रिकॉर्ड है।

 

डिस्कलेमर :

यह उन कहानियों या खबरों को इकट्ठा करने के प्रयास का हिस्सा है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव पर उपाख्यान / राय / विश्लेषण का वर्णन करती हैं।

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उस चहलकदमी में दिखा कार्यकर्ताओं के प्रति पीएम मोदी का गहरा सम्मान: नितिन नबीन जी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष
January 21, 2026

पटना में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान हुई एक ऐसी घटना ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नबीन जी पर गहरी छाप छोड़ी और नेतृत्व का एक शांत लेकिन बेहद प्रभावशाली सबक दिया।

देशभर से वरिष्ठ नेता एक बड़े कार्यक्रम के लिए पटना पहुँच रहे थे। नितिन नबीन जी उस टीम में शामिल थे, जिसकी जिम्मेदारी एयरपोर्ट पर नेताओं का स्वागत करने और तय प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें उनके वाहनों तक पहुँचाने की थी। जैसे-जैसे नेता आते गए, वे सामान्य प्रक्रिया के तहत सीधे अपनी गाड़ियों की ओर बढ़ते गए।

जब प्रधानमंत्री मोदी जी पहुँचे, तो उनका स्वागत किया गया और उनसे गाड़ी की ओर चलने का अनुरोध किया गया। लेकिन आगे बढ़ने से पहले वे रुक गए और पूछा कि क्या बाहर कार्यकर्ता खड़े हैं। जब उन्हें बताया गया कि वहाँ कई कार्यकर्ता इंतजार कर रहे हैं, तो उन्होंने तुरंत कहा कि वे पहले उनसे मिलना चाहेंगे।

प्रधानमंत्री जी ने गाड़ी में बैठने के बजाय पैदल चलना चुना। उनकी गाड़ी पीछे-पीछे चलती रही थी, वे स्वयं हर कार्यकर्ता से मिले, अपने हाथों से माला स्वीकार की, सम्मान में हाथ जोड़कर अभिवादन किया और वहाँ मौजूद प्रत्येक कार्यकर्ता का अभिवादन स्वीकार किया। सभी से मिलने के बाद ही वे अपनी गाड़ी में बैठे और वहाँ से रवाना हुए।

हालाँकि ये बहुत छोटा स्मरण है, लेकिन यह व्यवहार सभी के मन पर गहरी और स्थायी छाप छोड़ गया। प्रधानमंत्री जी आसानी से कार में बैठकर हाथ हिला सकते थे, लेकिन उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ चलना और व्यक्तिगत रूप से उनका सम्मान करना चुना। यह क्षण उनकी संवेदनशीलता और इस विश्वास को दर्शाता है कि प्रत्येक कार्यकर्ता, चाहे उसका पद कुछ भी हो, सम्मान का पात्र है।

नितिन नबीन जी बताते हैं कि इस घटना ने उन्हें नेतृत्व का सही अर्थ सिखाया। नरेन्द्र मोदी जी के लिए नेतृत्व की नींव विनम्रता, भावनात्मक जुड़ाव और जमीनी स्तर से लगातार संपर्क में निहित है। कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान और खुला संवाद केवल दिखावे के लिए नहीं हैं, बल्कि सभी कार्यकर्ताओं, नेताओं और पूरे संगठन के मूल मूल्य हैं।

यह सोच, जहाँ कार्यकर्ताओं के साथ सम्मान और अपनापन रखा जाता है, भाजपा की संगठनात्मक संस्कृति की पहचान है। यही परंपरा पार्टी की जड़ों को मजबूत करती है और आम लोगों को राष्ट्रीय जिम्मेदारियाँ को निभाने के लिए तैयार करती है।