भारतीय जनता पार्टी 6 अप्रैल को अपना 42वां स्थापना दिवस मना रही है। जनसंघ से भाजपा तक की यात्रा उल्लेखनीय रही है, जहां पार्टी और उसके नेताओं ने राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों, गैर-पक्षपात आदि को परिभाषित करने वाली राह का अनुसरण किया। अपनी विचारधारा और सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए भाजपा लगातार मजबूत होती गई है।
हम दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन और “एकात्म मानववाद” तथा “अंत्योदय” की विचारधाराओं से प्रेरणा लेते हैं। हमारा दर्शन श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा प्रचारित “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” के विचार पर भी आधारित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार और पार्टी “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के लिए प्रतिबद्ध है।
भाजपा की सभी सरकारें, बिना किसी भेदभाव या पक्षपात के समाज के सभी वर्गों की उन्नति और खुशहाली सुनिश्चित करने के संकल्प के तहत काम करती हैं, पार्टी का मार्गदर्शक सिद्धांत गरीबों का उत्थान और सशक्तीकरण है।
आज़ादी के बाद, कांग्रेस की सरकारों ने, पहले जवाहरलाल नेहरू और बाद में अन्य प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में, तुष्टीकरण की नीति अपनाई, साथ ही पश्चिम की नकल करने की पागलपन भरी होड़ भी लगाई। यह जनसंघ ही था जिसने इसका विरोध किया और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकीकरण का प्रचार किया। राष्ट्र ने यह भी महसूस किया कि जनसंघ वास्तव में भारत की “आत्मा” का प्रतिनिधित्व करता है।
हमारे नेताओं की कड़ी मेहनत, दृढ़ निश्चय और दृढ़ निश्चय ने हमें आगे बढ़ने में मदद की। एक समय में दो सांसदों से लेकर अब हमारे पास लोकसभा में 300 से ज़्यादा सांसद हैं। आज, भाजपा ने 17 राज्यों में सरकार बनाई है और उसके पास 1,300 से ज़्यादा विधायक और 400 से ज़्यादा सांसद हैं। हमने राज्यसभा में भी 100 सांसदों का आंकड़ा पार कर लिया है, जो एक सराहनीय उपलब्धि है।
अगस्त 2014 में जब अमित शाह ने पार्टी अध्यक्ष का पद संभाला था, तब भाजपा के सदस्यों की संख्या मात्र 3.5 करोड़ थी। आज, इसके सदस्यों की संख्या रिकॉर्ड 18 करोड़ है।
जनसंघ और भाजपा के खिलाफ यह दुष्प्रचार किया गया कि वे दक्षिणपंथी राजनीतिक दल हैं। फिर कहा गया कि वे अमीरों और पूंजीपतियों की पार्टी हैं। लेकिन महज चार दशकों में भाजपा घर-घर की पार्टी बन गई और इसका श्रेय हमारे नेताओं; मुखर्जी से लेकर उपाध्याय तक, अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर नरेन्द्र मोदी तक को जाता है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, कच्छ से लेकर कामरूप तक के लोग भाजपा को अपना आशीर्वाद दे रहे हैं। आज सही मायने में भाजपा ही एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी है।
1972 में वाजपेयी ने स्पष्ट रूप से कहा था, "हम न तो बाएं जा रहे हैं और न ही दाएं; हम सीधे जा रहे हैं। और हम देश को एक व्यवहार्य और मजबूत राजनीतिक विकल्प देने के लिए कड़ी मेहनत करना जारी रखेंगे।" यह बात अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अच्छी तरह से स्थापित हो चुकी है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने बार-बार यह झूठ फैलाने की कोशिश की कि भाजपा अगड़ी जातियों की पार्टी है। लेकिन भाजपा ने अपनी विचारधारा पर चलते हुए समाज के सभी वर्गों का समर्थन और प्यार जीता। आज भाजपा के पास सबसे ज्यादा दलित और पिछड़ी जाति के विधायक और सांसद हैं, जबकि मोदी सरकार में दलित और पिछड़ी जाति के मंत्रियों का प्रतिनिधित्व सबसे ज्यादा है।
कांग्रेस और कुछ अन्य दलों ने हमेशा डॉ. अंबेडकर का विरोध किया, हालांकि वे राजनीतिक लाभ के लिए उनके काम का इस्तेमाल करने से कभी नहीं कतराते थे। यह भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी ही हैं जिन्होंने सही मायने में उन्हें उचित पहचान और मान्यता दी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने जातिवाद, तुष्टिकरण, वंशवाद, भाई-भतीजावाद और सांप्रदायिकता की राजनीति को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया है। उत्तर प्रदेश इसका एक बेहतरीन उदाहरण है।
आज़ादी के बाद कांग्रेस ने महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक, रवींद्रनाथ टैगोर और सरदार पटेल जैसे हमारे महान नेताओं की विचारधाराओं को नकार दिया। इसने “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” जैसे राष्ट्रवादी नारों से भी खुद को दूर कर लिया। भगवान राम का नाम लेना अपराध बन गया। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने बिना सोचे-समझे तुष्टीकरण को बढ़ावा देकर देश में तबाही मचाई, जिससे हमारी राष्ट्रीय अखंडता को खतरा पैदा हुआ।
लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद परिदृश्य तेजी से बदल गया। हमने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को फिर से स्थापित किया, तुष्टीकरण की नीति को ध्वस्त किया और आतंकवाद और उग्रवाद से सख्ती से मुकाबला किया। इसके साथ ही, हमने राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता में निहित समतामूलक समाज का निर्माण किया है। हमारी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में दशकों पुराने विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण; जम्मू-कश्मीर का एकीकरण जिसने इसके तेजी से विकास का मार्ग प्रशस्त किया; और मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के अभिशाप से मुक्त करके उन्हें सशक्त बनाना शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छता को हर भारतीय के जीवन का अभिन्न अंग बनाकर गांधीवादी जीवन शैली को अपनाया। उन्होंने उज्ज्वला योजना, आवास योजना, गरीब कल्याण अन्न योजना और जल जीवन मिशन जैसी गरीब हितैषी नीतियों को सफलतापूर्वक लागू करके अंबेडकर के मिशन को भी साकार किया। मोदी सरकार ने हमारे समाज के गरीब और पिछड़े वर्गों को बिजली, पानी, गैस कनेक्शन, शौचालय और सबसे बढ़कर एक शक्तिशाली स्वास्थ्य बीमा योजना देकर सशक्त बनाया। किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों का ख्याल रखा गया है, जबकि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी कई योजनाओं का लाभ मिला है।
पार्टी की इस बड़ी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को जाता है। भाजपा मानवता की सेवा और भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
लेखक का नाम: अनिल बलूनी
डिस्क्लेमर
यह आर्टिकल सबसे पहले द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ था।
यह उस प्रयास का हिस्सा है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और उनके लोगों पर प्रभाव के बारे में किस्से, विचार या विश्लेषण को संकलित करता है।


