प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस तथ्य का श्रेय दिया जाता है कि वह शायद पहले राजनीतिक नेता थे, जिन्होंने सोशल मीडिया के महत्व को समझा और 2014 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए इसका फायदा उठाया। उन्होंने 'मन की बात' के माध्यम से रेडियो का उपयोग करते हुए देशवासियों को प्रेरित करने के लिए इस टूल का उपयोग करना अभी भी जारी रखा है।

मैं यह आश्वस्त कर सकता हूं कि यह पीएम मोदी ने दिसंबर में ही कोरोना वायरस महामारी के खतरे को भांप लिया, जब चीन इससे संक्रमित था। उस समय भारत में कोरोना का एक भी केस नहीं था लेकिन प्रधानमंत्री हर कैबिनेट मीटिंग के बाद हमलोगों को बताते थे कि वायरस और संक्रमण चीन में नहीं रुकेंगे। वे इसकी गंभीरता पर जोर देते थे और कहते थे कि यह सब जगह फैल जाएगा क्योंकि हर कोई बिना तैयारी के है और इसलिए उनका जोर इस बात पर था कि भारत को खुद इसके लिए कैसे तैयार करना है।

भारत ने आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जल्द स्क्रीनिंग शुरू की। जिन यात्रियों के संक्रमित होने का संदेह था जिन्हें मानेसर में गृह मंत्रालय की एक फैसिलिटी में रखा गया था। जब हमें एहसास हुआ कि स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है। उस दिन से पीएम ने महामारी से लड़ने के लिए भारत को तैयार करने के लिए अपनी योजनाओं को लागू करना शुरू कर दिया। यहां कुछ बड़े बदलावों के बारे में हैं जिसे उन्होंने अपनी दूरदर्शिता के साथ किए हैं।

समर्पित कोविड-19 अस्पतालों का कोई कंसेप्ट नहीं था। आज हमारे पास लगभग 700 समर्पित कोविड-19 अस्पताल हैं, जिनमें 200,000 से अधिक आसोलेशन बेड्स और 15,000 इंटेंसिव केयर बेड्स हैं।

कोविड-19 रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत सुरक्षात्मक उपकरण (पीपीई) महत्वपूर्ण है। पीपीई निर्माण के लिए भारत के पास कोई सुविधा नहीं थी। प्रारंभ में आयात के लिए बड़े पैमाने पर आदेश दिए गए। अब हमारे पास भारत में 39 कारखाने हैं जो पीपीई का निर्माण कर रहे हैं। 2.2 मिलियन से अधिक पीपीई किट पहले ही वितरित किए जा चुके हैं।

हमलोग सिर्फ मास्क का निर्माण नहीं कर रहे, बल्कि छह मिलियन मास्क पहले ही वितरित किए जा चुके हैं। जबकि कई नए कारखानों ने एन 95 मास्क पर काम करना शुरू कर दिया है। छोटी इकाइयों ने होम मेड मास्क तैयार करना शुरू कर दिया है।

हमारे पास टेस्टिंग के लिए केवल एक लैब पुणे में थी। हमारी टेस्टिंग कैपेसिटी सिर्फ 4,000 प्रति दिन थी। अब कोविड-19 टेस्ट करने और रिजल्ट देने के लिए लगभग 300 लैब्स हैं। अब हम एक दिन में 80,000 से अधिक टेस्टिंग कर सकते हैं।

प्रारंभ में केवल 8,400 वेंटिलेटर्स थे। शुरूआती ऑर्डर के साथ अब हमारे पास लगभग 30,000 वेंटिलेटर्स हैं। इंडियन मैन्युफैक्चर्स ने वेंटिलेटर का उत्पादन शुरू कर दिया है। हम उम्मीद करते हैं कि घरेलू स्तर पर लगभग 30,000 वेंटिलेटर का उत्पादन किया जाएगा।

यहां तक कि जब उन्होंने तैयारियों का नेतृत्व किया, तब प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के साथ जुड़े रहे, विभिन्न नेताओं से बात की और एक दूसरे के अनुभवों को साझा किया और भारतीय संदर्भ में जिसे उपयोगी और उपयुक्त पाया उसे लागू किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन के प्रभाव को पहचाना। इसलिए, उन्होंने गरीबों को मदद करने के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये का एक बड़े पैकेज का ऐलान किया। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम है, जिसके तहत 800 मिलियन लोगों को पांच किलो गेहूं और चावल 2/3 रुपये प्रति किलो दिए जाते हैं। अप्रैल, मई और जून के लिए पीएम ने प्रति व्यक्ति 15 किलो चावल / गेहूं और तीन किलो दाल मुफ्त देने का फैसला किया। इसने सभी कमजोर भारतीय परिवारों के लिए बुनियादी राशन का ख्याल रखा।

कम आय वाले समूहों की लगभग 200 मिलियन महिलाओं को उनके जन-धन खातों में तीन महीने के लिए 500 रुपये प्रति माह की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना के माध्यम से सहायता प्रदान की गई। इसके अलावा पीएम-किसान योजना के तहत 84 मिलियन किसानों को 2,000 रुपये हस्तांतरित किए गए, उज्ज्वला एलपीजी योजना के 80 मिलियन लाभार्थियों को तीन सिलेंडर मुफ्त दिए गए। पीएम ने भविष्य निधि से निकासी की सुविधा दी और करीब एक करोड़ श्रमिकों ने करीब 36 करोड़ रुपये की निकासी की।

प्रधानमंत्री ने छोटे व्यवसायों और श्रमिकों को यह वादा करके मदद भी प्रदान की कि मालिक और कार्यकर्ता के भविष्य निधि योगदान को तीन महीने के लिए सरकार द्वारा जमा किया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी रेपो दरों में विभिन्न उपायों के माध्यम से 4 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी जारी की है। मध्यम वर्ग को ईएमआई और अन्य अनिवार्य सबमिशन को टालने की सुविधा दी गई थी। केंद्र ने कोविड-19 के समर्पित उपचार के लिए 15,000 करोड़ रुपये दिए और राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरसी) के रूप में 11,000 करोड़ रुपये जारी किए। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की मदद के लिए 31,000 करोड़ रुपये भी जारी किए गए थे और सभी राज्यों को इसे जल्द से जल्द वितरित करने के लिए कहा गया।

प्रधानमंत्री ने तेज गति, अधिक बुआई और किसानों को जल्द से जल्द पैसे दिए जाने की सुविधा सुनिश्चित कर खेती से लेकर बाजार तक कृषि गतिविधियों को पूरा संचालन किया। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि कृषि अर्थव्यवस्था ने सामान्य रूप से काम करना शुरू कर दिया।

नेशनल लॉकडाउन एक व्यापक निर्णय है। यह कभी सफल नहीं हो सकता जब तक कि लोग स्वेच्छा से भाग न लें। पीएम ने लोगों के साथ एक निरंतर संवाद बनाए रखा है, यहां तक कि सबसे गरीब लोगों ने भी माना कि पीएम उनके लिए काम कर रहे हैं। यही कारण है कि वे उन्हें लंबे लॉकडाउन, गतिविधियों के निलंबन और परिणामी कठिनाई के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार कर सकते थे। जनता कर्फ्यू और उनके द्वारा स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की सराहना ने लोगों को कोविड-19 से लड़ने और उनमें अनुशासन स्थापित करने में मदद की।

पीएम ने सुरक्षित रहने के लिए सरल चार कदम भी दिए - मास्क पहनना, नियमित रूप से हाथ धोना, सामाजिक दूरी बनाए रखना और घर पर रहना। नागरिकों ने बड़े पैमाने पर इसका पालन किया है।

यह सब दर्शाता है कि पीएम मोदी ने पहले से योजना बनाई, विस्तार से योजना बनाई, सावधानीपूर्वक अभ्यास किया, प्रभावी ढंग से संवाद किया और दुनिया को लूप में रखा। इसलिए भारत कई अन्य एडवांस अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर कोरोना वायरस संकट का प्रबंधन करने में सफल रहा है।

 

लेखक का नाम : प्रकाश जावड़ेकर

डिस्कलेमर :

यह आर्टिकल पहली बार Hindustan Times में पब्लिश हुआ था।

यह उन कहानियों या खबरों को इकट्ठा करने के प्रयास का हिस्सा है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव पर उपाख्यान / राय / विश्लेषण का वर्णन करती हैं।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Republic Day sales see fastest growth in five years on GST cuts, wedding demand

Media Coverage

Republic Day sales see fastest growth in five years on GST cuts, wedding demand
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
उस चहलकदमी में दिखा कार्यकर्ताओं के प्रति पीएम मोदी का गहरा सम्मान: नितिन नबीन जी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष
January 21, 2026

पटना में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान हुई एक ऐसी घटना ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नबीन जी पर गहरी छाप छोड़ी और नेतृत्व का एक शांत लेकिन बेहद प्रभावशाली सबक दिया।

देशभर से वरिष्ठ नेता एक बड़े कार्यक्रम के लिए पटना पहुँच रहे थे। नितिन नबीन जी उस टीम में शामिल थे, जिसकी जिम्मेदारी एयरपोर्ट पर नेताओं का स्वागत करने और तय प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें उनके वाहनों तक पहुँचाने की थी। जैसे-जैसे नेता आते गए, वे सामान्य प्रक्रिया के तहत सीधे अपनी गाड़ियों की ओर बढ़ते गए।

जब प्रधानमंत्री मोदी जी पहुँचे, तो उनका स्वागत किया गया और उनसे गाड़ी की ओर चलने का अनुरोध किया गया। लेकिन आगे बढ़ने से पहले वे रुक गए और पूछा कि क्या बाहर कार्यकर्ता खड़े हैं। जब उन्हें बताया गया कि वहाँ कई कार्यकर्ता इंतजार कर रहे हैं, तो उन्होंने तुरंत कहा कि वे पहले उनसे मिलना चाहेंगे।

प्रधानमंत्री जी ने गाड़ी में बैठने के बजाय पैदल चलना चुना। उनकी गाड़ी पीछे-पीछे चलती रही थी, वे स्वयं हर कार्यकर्ता से मिले, अपने हाथों से माला स्वीकार की, सम्मान में हाथ जोड़कर अभिवादन किया और वहाँ मौजूद प्रत्येक कार्यकर्ता का अभिवादन स्वीकार किया। सभी से मिलने के बाद ही वे अपनी गाड़ी में बैठे और वहाँ से रवाना हुए।

हालाँकि ये बहुत छोटा स्मरण है, लेकिन यह व्यवहार सभी के मन पर गहरी और स्थायी छाप छोड़ गया। प्रधानमंत्री जी आसानी से कार में बैठकर हाथ हिला सकते थे, लेकिन उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ चलना और व्यक्तिगत रूप से उनका सम्मान करना चुना। यह क्षण उनकी संवेदनशीलता और इस विश्वास को दर्शाता है कि प्रत्येक कार्यकर्ता, चाहे उसका पद कुछ भी हो, सम्मान का पात्र है।

नितिन नबीन जी बताते हैं कि इस घटना ने उन्हें नेतृत्व का सही अर्थ सिखाया। नरेन्द्र मोदी जी के लिए नेतृत्व की नींव विनम्रता, भावनात्मक जुड़ाव और जमीनी स्तर से लगातार संपर्क में निहित है। कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान और खुला संवाद केवल दिखावे के लिए नहीं हैं, बल्कि सभी कार्यकर्ताओं, नेताओं और पूरे संगठन के मूल मूल्य हैं।

यह सोच, जहाँ कार्यकर्ताओं के साथ सम्मान और अपनापन रखा जाता है, भाजपा की संगठनात्मक संस्कृति की पहचान है। यही परंपरा पार्टी की जड़ों को मजबूत करती है और आम लोगों को राष्ट्रीय जिम्मेदारियाँ को निभाने के लिए तैयार करती है।