Chief Minister Narendra Modi today released the book ‘Bharat Nu Samvidhan’. The book is the Gujarati version of the Constitution of India. This one is the fourth edition of the book and is published by the state’s Parliamentary Affairs and Legal department.

Law Minister Dilip Sanghani, Minister of State for Law Pradipsinh Jadeja, Chief Secretary A K Joti, Secretary to Law Mr. Goti and officials of Parliamentary Affairs department were present on the occasion.

The fourth edition has been published after a gap of 17 years and all the amendments made in the constitution during this time have been incorporated in the book. Chief Minister exuded faith that the effort of publishing the Indian Constitution in the local language will prove helpful to the people in understanding the laws of the nation and in conveying the inbuilt spirit of the Constitution.

The book includes all the amendments till the 95th one in 2009. The book is available to public through all government book sellers.

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मंत्रिमंडल ने ₹28,840 करोड़ के कुल खर्च वाली रीजनल कनेक्टिविटी योजना - संशोधित उड़ान योजना को मंजूरी दी
March 25, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सरकार के बजटीय सहयोग से 28,840 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक दस वर्षों की अवधि के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना - संशोधित उड़ान के शुभारंभ और कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी है।

प्रभाव:

  • कम सेवा प्राप्त और सेवा से वंचित क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय हवाई संपर्क में सुधार।
  • दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में आर्थिक विकास, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा।
  • आम नागरिकों के लिए सस्ती हवाई यात्रा का समर्थन।
  • दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन कार्रवाई और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार।
  • क्षेत्रीय हवाई अड्डों और एयरलाइन संचालकों के लिए अधिक व्यवहार्यता और स्थिरता।
  • आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी एयरोस्पेस क्षेत्र को बढ़ावा।

  • कसित भारत 2047 लक्ष्य की ओर प्रगति।

इस योजना के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं:

(ए) हवाई अड्डों का विकास (पूंजीगत व्यय)

संशोधित उड़ान योजना के तहत, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए मौजूदा अनुपलब्ध हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डों को विकसित करने का प्रस्ताव है, जो इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के विस्तार और भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी विमानन इकोसिस्‍टम में बदलने के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप है, जिसके लिए अगले आठ वर्षों में कुल 12,159 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।

(बी) हवाई अड्डों का संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम)

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) के अंतर्गत आने वाले हवाई अड्डों के निरंतर संचालन एवं रखरखाव की उच्च लागत और सीमित राजस्व स्रोतों को देखते हुए, योजना के तहत तीन वर्षों के लिए प्रति हवाई अड्डे 3.06 करोड़ रुपये प्रति वर्ष और प्रति हेलीपोर्ट/वाटर एयरोड्रॉम 0.90 करोड़ रुपये प्रति वर्ष की अधिकतम सीमा के साथ संचालन एवं रखरखाव संबंधी सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है, जिसका अनुमान लगभग 441 हवाई अड्डों के लिए 2,577 करोड़ रुपये है।

(सी) आधुनिक हेलीपैडों का विकास

पहाड़ी, दूरस्थ, द्वीपीय और विकासशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए, योजना के तहत 15 करोड़ रुपये प्रति हेलीपैड की लागत से 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का प्रस्ताव है, जिसकी कुल आवश्यकता अगले आठ वर्षों में (मुद्रास्फीति-समायोजित) 3,661 करोड़ रुपये होगी। यह योजना प्राथमिकता वाले और विकासशील जिलों पर केंद्रित है ताकि अंतिम-मील कनेक्टिविटी और आपातकालीन कार्रवाई में सुधार किया जा सके।

(डी) व्यवहार्यता में कमी के समाधान हेतु निधि (वीजीएफ)

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के तहत, एयरलाइन संचालकों को आवंटित मार्गों पर परिचालन के लिए विजिबिलिटी फंड (वीजीएफ) के रूप में वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। दीर्घकालीन बाजार के बदलाव की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, एयरलाइन संचालकों को 10 वर्षों में 10,043 करोड़ रुपये की विजिबिलिटी फंड सहायता प्रस्तावित की गई है।

(ई) आत्मनिर्भर भारत विमान अधिग्रहण

दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में संचालन के लिए आवश्यक छोटे फिक्स्ड-विंग विमानों और हेलीकॉप्टरों की कमी को दूर करने और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए, इस योजना में पवन हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए दो एचएएल डोर्नियर विमान खरीदने का भी प्रस्ताव है।

पृष्ठभूमि:

मूल उड़ान योजना अक्टूबर 2016 में हवाई यात्रा को किफायती बनाने और टियर-2 और टियर-3 शहरों से कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। नौ वर्षों के कार्यान्वयन के दौरान:

  • 28 फरवरी, 2026 तक 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्टों और वाटर एयरोड्रॉम पर 663 मार्गों को चालू कर दिया गया है।
  • अब तक 341 लाख से अधिक उड़ानें संचालित की जा चुकी हैं, जिनमें 162.47 लाख यात्रियों ने यात्रा की है।
  • दूरस्थ, पहाड़ी और द्वीपीय क्षेत्रों में संपर्क स्थापित हो गया है, जिससे पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और आपातकालीन सेवाओं को बढ़ावा मिला है।

  • इस योजना ने क्षेत्रीय एयरलाइनों और विविध फ्लीट के संचालन में वृद्धि पर जोर दिया है, जिससे संशोधित उड़ान योजना के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ है।