प्रधानमंत्री द्वारा 500 और 1000 रुपये के विमुद्रीकरण के फैसले पर लोगों ने ऐतिहासिक संख्या में अपने विचार भेजे
केवल 100 घंटों को भीतर 10 लाख से ज्यादा लोगों ने सर्वे में हिस्सा लिया
प्रधानमंत्री की कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में लोगों ने एक बार फिर से अपना भरोसा जताया

श्री नरेन्द्र मोदी भागीदारी वाले सुशासन में विश्वास रखते हैं और नागरिकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद करके ही उनकी राय हासिल करते हैं। ‘नरेन्द्र मोदी मोबाइल एप’ पर सरकार के 500 और 1000 के नोट को बंद करने के फैसले को लेकर राय मांगी गई थी जिसके बाद लोगों ने ऐतिहासिक रूप से अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। इसे 22 नवम्बर 2016 को लॉन्च किया गया था और मात्र सौ घंटों में ही सर्वे में लाखों नागरिकों ने अपनी भूमिका अदा करते हुए अपने विचार और सुझावों को देने का काम किया। प्रत्यक्ष लोकतंत्र में पूरी दुनिया में की गई यह सबसे बड़ी एक्सरसाइज़ है।

पूछे गए सवालों के पहले 24 घंटों में प्राप्त रिस्पॉन्स को यहां पर प्रकाशित किया गया है।  जो दो सैद्धान्तिक सवाल सर्वे में पूछे गए वो निम्न प्रकार से हैः-

  • आप सरकार के 500 और 1000 के नोट के विमुद्रीकरण के फैसले के बारे में क्या सोचते हैं? जवाब देने के लिए “बहुत अच्छा” से लेकर “बहुत खराब” तक पांच विकल्प दिए गए थे।

  • क्या आप भ्रष्टाचार, काले धन, आतंकवाद और नकली पैसों के खिलाफ लड़ी जाने वाली हमारी लड़ाई में होने वाली असुविधा से परेशान हैं? इस सवाल का जवाब देने के लिए “हां” से लेकर “बिल्कुल नहीं” तक तीन विकल्प दिए गए थे।

इन जवाबों के लिए अभी तक 9.63 लाख (पहले 100 घंटों में प्राप्त रिस्पॉन्स) की प्रतिक्रिया को दर्शाया गया है। इसके अलावा कुल 36 राज्यों की जनता के आधार पर उनकी प्रतिक्रिया का विश्लेषण किया गया है। विश्लेषण की मुख्य बातें निम्नप्रकार से हैः-

  • 9.6 लाख से अधिक लोगों ने सर्वे में भागीदारी दिखाते हुए अपने विचार साझा किए। अभी तक पूरे देश का मूड जानने के लिए किया गया यह सर्वे सबसे बड़ा सर्वे है।
  • विमुद्रीकरण के फैसले का समर्थन करने वाले 92% लोग हैं जिन्होंने कि या तो फैसले को “अच्छा” बताया या फिर “बहुत अच्छा” बताया।
  • 91% लोग ऐसे थे जिन्होंनें यह कहा कि सरकार के इस फैसले से वो कतई भी नाराज़ नहीं हैं। भले ही उन्हें असुविधा ही क्यों न हो रही हो। उन्होंने यह भी कहा कि काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए भी यह फैसला कारगर होगा।
  • पश्चिम बंगाल, ओड़ीशा, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, गुजरात, जम्मू व कश्मीर और उत्तरप्रदेश के लोगों ने केन्द्र सरकार के विमुद्रीकरण के इस फैसले को राष्ट्रीय औसत से ऊपर बताया।
  • 36 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में से 35 में से 85% से अधिक लोगों ने कहा कि उन्हें असुविधा होने के बावजूद भी कोई नाराज़गी नहीं है। भले ही उन्होंने असुविधा का भी सामना किया हो, फिर भी भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ लड़ाई में वो सरकार के साथ हैं।

कुछ राज्यों में सवालों के रिस्पॉन्स की हाईलाइट निम्नप्रकार से हैः-

सरकार का 08 नवम्बर को नोटबंदी का फैसला भारत को विकास की नई ऊंचाईयों तक लेकर जाने के उद्देश्य से लिया गया फैसला है। अब वह समय था जब भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर था और काला धन भी बहुत ही अधिक बाज़ार में था। भारत में लोगों को छोटी अवधि के लिए दुख होगा लेकिन लंबी अवधि के लिए भारत में लोगों को फायदा पहुंचाने वाला निर्णय है। सरकार के इस फैसले से भारत विकास की एक नई और मज़बूत राह पर चलेगा।

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतः ही सर्वे में भाग लेने वाले सभी भागीदारों को लिखा और विचार साझा करने के लिए समय निकालने के लिए लोगों का धन्यवाद किया। दिए गए सुझावों में से बहुत में तो सरकार द्वारा पिछले दिनों लिए गए महत्वपूर्ण फैसले लेने के लिए दिशा दी। सुशासन में भागीदारी के लिए यह एक बेहतरीन अभिव्यक्ति रही है जोकि भारत को विकास की नई ऊचाईंयों तक लेकर जाने वाली रही हैं। हम भारतीय नागरिकों से लगातार डायलॉग में भागीदारी देने के लिए आग्रह करते हैं।

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम साझा करते हुए स्वास्थ्य और प्रसन्‍नता के लिए हंसी की शक्ति पर प्रकाश डाला
February 04, 2026

Prime Minister Shri Narendra Modi today shared an inspiring message rooted in ancient wisdom, emphasizing the timeless value of laughter as the best medicine.

Quoting a Sanskrit verse on X, the Prime Minister underscored that:

"औषधेष्वपि सर्वेषु हास्यं श्रेष्ठं वदन्ति ह।
स्वाधीनं सुलभं चैवारोग्यानन्दविवर्धनम्।। "