लोकरक्षक पुलिस संवर्ग प्रशिक्षणार्थियों का शानदार दीक्षांत समारोह

मुख्यमंत्री ने किया पासिंग परेड का सलामी निरीक्षण

सेवा-सुरक्षा और सहायता का उत्तम दायित्व निभाएं : मुख्यमंत्री

लोकरक्षक संवर्ग के 473 प्रशिक्षणार्थियों में 150 कन्याओं और 160 स्नातकों सहित 57 स्नातकोत्तरों की सामथ्र्यवान शक्ति की श्री मोदी ने की सराहना

गांधीनगर, सोमवार: मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को गुजरात पुलिस अकादमी-कराई में नवप्रशिक्षित 473 लोकरक्षक पुलिस संवर्ग के प्रशिक्षणार्थियों की शानदार दीक्षांत परेड का सलामी निरीक्षण करते हुए कहा कि गुजरात पुलिस दल आज देश का सबसे सुशिक्षित टेक्नोसेवी युवा पुलिस दल बन गया है।उन्होंने आम नागरिक की सेवा-सुरक्षा और सहायता का उत्तम दायित्व निभाने को ओज एवं तेज प्रकट करने का आह्वान नवप्रशिक्षितों से किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति के प्रशंसनीय सेवा पुलिस पदक विजेता 30 पुलिस अधिकारियों जिसमें राज्य के पुलिस प्रमुख से लेकर कांस्टेबल का समावेश होता है, को सेवा पदक से अलंकृत कर उन्हें अभिनंदन दिया।

                उन्होंने कहा कि गुजरात पुलिस दल के बुनियादी कैडर में शामिल टेक्नोसेवी स्नातकोत्तर और स्नातक युवाशक्ति भविष्य में पुलिस की सभी कैडरों के लिए नई ताकत और सामथ्र्यवान साबित होगी।

                मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात पुलिस दल के आधुनिकीकरण के साथ ही पुलिस प्रशिक्षण का सर्वग्राही ढांचा आधुनिकतम और पेशेवर बना दिया गया है। पुराने परंपरागत पुलिस प्रशिक्षण के व्यवस्थापन को तेज गति से बदल रहे कानून और व्यवस्था को बनाए रखने तथा आम जनता की सुरक्षा की चुनौतियों के खिलाफ मुस्तैद पुलिस दल का मानव विकास व्यवस्थापन करने की रूपरेखा उन्होंने दी।

श्री मोदी ने कहा कि राज्य में पुलिस प्रशिक्षण में स्थगितता नहीं वरन् प्रशिक्षण के नये आयाम जोड़े गये हैं। चार पुलिस प्रशिक्षण संस्थाओं में गुणात्मक परिवर्तन कर आधुनिक पुलिस प्रशिक्षण के उत्कृष्ट केंद्रों के तौर पर नये परिमाण दिये हैं। इतना ही नहीं, अब तो हर जिले में पुलिस प्रशिक्षण की आधुनिक सुविधा का ढांचा खड़ा किया जा रहा है, जिसमें वरिष्ठ और अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में गुजरात पुलिस दल की सभी कैडरों के लिए उत्तम ट्रेनिंग का संस्थागत ढांचा खड़ा हो जाएगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की तेज रफ्तार के बीच गुजरात में विविध क्षेत्रों में सेवा-नौकरी के व्यापक अवसरों और मांग के बावजूद राज्य के पुलिस दल में गुजरात की कन्याओं सहित सुशिक्षित जवान शामिल हो रहे हैं, इससे पुलिस दल और शासन व्यवस्था में नई शक्ति का संचार होगा। उन्होंने कहा कि वर्दी की शान के साथ महिलाशक्ति भी अपने सामथ्र्य के बूते सुरक्षा सेवा में तेजी से अपना कौशल साबित कर रही हैं।

     उन्होंने कहा कि भूतकाल में पुलिस दल में भर्ती अत्यंत सीमित थी, बावजूद इसके इस प्रक्रिया में भ्रष्ट रीति-नीति की अनेक शिकायतें और शोषण की बातें जगजाहिर हैं। लेकिन इस सरकार ने सात वर्षों के दौरान पुलिस महकमें में विभिन्न कैडरों के तहत 26,000 भर्तियां संपूर्ण पारदर्शिता और योग्य गुणवत्ता के आधार पर की। सामान्य परिवारों के युवाओं सहित कुल दस वर्ष में तीन लाख युवाओं को इस पारदर्शी पद्घति के जरिए सरकारी नौकरी मिली है

मुख्यमंत्री ने पुलिस दल की सभी कैडरों से शारीरिक सौष्ठव, फिजिकल फिटनेस के लिए योग-प्राणायाम पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का अनुरोध किया। लोकरक्षक पुलिस दल के सुशिक्षित युवाओं और महिलाओं का संविधान और तिरंगे की नई शक्ति बनने का आह्वान उन्होंने किया।

प्रारंभ में मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षणार्थियों को संविधान और कर्तव्यों की शपथ दिलाई।

इस मौके पर गृह राज्य मंत्री प्रफुलभाई पटेल, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वरेश सिन्हा, पुलिस महानिदेशक चितरंजन सिंह समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले पुलिस लोकरक्षकों के परिजन उपस्थित थे।

गुजरात पुलिस अकादमी के प्रभारी निदेशक टी.एस. बिस्त ने स्वागत भाषण दिया, जबकि संयुक्त निदेशक अतुल करवल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!