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"Shri Modi says development is solution to all problems. Gives Mantra of' Ek Bharat, Shreshtha Bharat'"
"For me secularism means India First! Whatever we do, it must be for India: Shri Modi"
"Under Atal Bihari Vajpayee’s leadership there was an atmosphere all around the world that India will do something: Shri Modi"
"Gujarat has created a new ray of hope in this atmosphere of darkness: Shri Modi"
"Winning or losing elections must never be our aim. When we get a mandate of five years, we must serve the people selflessly: Shri Modi"

“इंडिया फर्स्ट” ही है सच्ची धर्मनिरपेक्षता – मुख्यमंत्री

“एक भारत-श्रेष्ठ भारत” का मंत्र साकार करें

वैश्विक मंदी और निराशा के माहौल में गुजरात ने बताया विकास की राजनीति और अर्थव्यवस्था की सफलता का मार्ग

ओएफबीजेपी का सफल आयोजन, श्री मोदी के उद्बोधन से समग्र दुनिया प्रभावित

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के शिकागो और न्यूजर्सी में भारतीय जनसमुदाय को गांधीनगर से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रेरक संबोधन करते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है और भारत की युवाशक्ति दुनिया का भाग्य बदलने का सामर्थ्य रखती है। भारत को विश्व गुरु बनाने के स्वामी विवेकानंद के संकल्प को साकार करने के लिए श्री मोदी ने देशवासियों से प्रत्येक कार्य में “इंडिया फर्स्ट” का संकल्प करने की अपील की।

“एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की सर्वोपरिता का विश्व को दर्शन कराने का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, “मेरे मुताबिक धर्मनिरपेक्षता की सच्ची व्याख्या है- इंडिया फर्स्ट। हमारा प्रत्येक कर्तव्य भारत देश को सामर्थ्य प्रदान करने वाला और देशभक्ति के स्वाभिमान से परिपूर्ण होना चाहिए। सवा सौ करोड़ भारतीयों के लिए “इंडिया फर्स्ट” का संकल्प ही धर्मनिरपेक्षता की शक्ति है।” श्री मोदी ने सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के विनियोग से गांधीनगर स्थित मुख्यमंत्री निवासस्थान से अमेरिका और कनाडा के गुजराती परिवारों सहित भारतीयों के विशाल समुदाय को कम्युनिटी आउटरिच प्रोग्राम के तहत संबोधित किया।

ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी की ओर से आयोजित श्री नरेन्द्र मोदी के इस ५० मिनट के देशभक्ति की चेतना जगाने वाले उद्बोधन का रविवार सुबह साढ़े छह बजे अमेरिकी चैनल टीवी एशिया पर सीधा प्रसारण हुआ था, जिसे दुनिया भर में बसने वाले भारतीयों ने बड़ी शिद्दत से निहारा। भारत की भी प्रमुख राष्ट्रीय टीवी चैनलों ने भी इसका सीधा प्रसारण किया था। समग्र विश्व में मुख्यमंत्री के इस प्रसारण को लेकर जिज्ञासा और उत्सुकता का माहौल था, जो श्री मोदी की दुनिया में एक राष्ट्रीय राजपुरुष की प्रतिभा की परिचायक है।

श्री मोदी ने शिवरात्रि पर्व के साथ ही आज गंगातट पर आध्यात्मिक महाकुंभ के समापन अवसर का निर्देश करते हुए कहा कि, करोड़ों जनों की श्रद्धा और सेवा के इतने विराट आयोजन की यह ऐतिहासिक घटना भारत की समाजशक्ति और सामर्थ्य की अनुभूति कराती है। लेकिन दुर्भाग्य से विश्व में इसका उम्मीद के मुताबिक प्रचार नहीं हुआ।

शिवभक्ति की आध्यात्म भूमिका के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि शांतिमय सह अस्तित्व और प्रकृति प्रेम भारत की संस्कृति के साथ जुड़ी आध्यात्मिकता है। दुनिया आज ग्लोबल वार्मिंग के संकट से घिरी हुई है, ऐसे में मनुष्य को इससे बचाने का कल्याण मार्ग भारतीय संस्कृति के परमात्मा के विविध देवी-देवताओं के स्वरूप में दृष्टिगोचर होता है। शिव जी के परिवार में पशु-पक्षी, वृक्ष, नदी आदि तत्वों के संवादपूर्ण सह अस्तित्व का सिद्धांत है। प्रकृति के तत्वों के साथ तादात्म्य रखते हुए ही मानव जाति का कल्याण हो सकता है। हमारे समाज जीवन में व्याप्त कटुता, बुराई और विकृतियों को विषपान के रूप में पचाकर वाणी और व्यवहार में अमृत प्रकट हो, ऐसे संस्कार की शोध भारत की आध्यात्मिकता में है।

प्रवासी भारतीयों को प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में बसने वाले भारतीयों के भारत के साथ नाते को जोड़ने के लिए देश की धरती, संस्कृति, परंपरा और भाषा के साथ सातत्यपूर्ण संबंध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे हम कहीं भी बसे हों, भारत के लोगों और देश के प्रति संवेदना हमारे कर्तव्य से प्रकट होनी चाहिए।

हिन्दुस्तान का नौजवान देश ही नहीं बल्कि दुनिया का भविष्य बदलने का माद्दा रखता है, ऐसा भरोसा जताते हुए श्री मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने देश के युवाओं को भारत माता की भक्ति के लिए प्रतिबद्धता की जो प्रेरणा दी थी वह आज विवेकानंद जी की १५०वीं जन्मतिथि वर्ष में भी उतनी ही प्रासंगिक है। उन्होंने याद दिलाया कि सवा सौ वर्ष पहले विवेकानंद जी ने भारत माता की आजादी के लिए युवाओं को प्रेरणा दी थी।

श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि २१वीं सदी में भारत और चीन के बीच ही सर्वोपरिता की प्रतिस्पर्धा है और भारत में विश्व का नेतृत्व करने की पूरी क्षमता है। उन्होंने कहा कि १९वीं सदी में पराधीन होने के कारण भारत औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व नहीं कर सका था।बीसवीं सदी का पूर्वार्ध आजादी की जंग में बीता और उत्तरार्ध में ऐसा आशावादी माहौल निर्मित हुआ कि सौ करोड़ का देश विश्व को नेतृत्व प्रदान कर सकता है। २१वीं सदी के पहले दशक के प्रारंभ में वाजपेयी जी की एनडीए सरकार ने पोखरण में परमाणु विस्फोट कर भारत की शक्ति और स्वाभिमान को जगाया, लेकिन दुर्भाग्य से २१वीं सदी के इस पहले ही दशक में यह विश्वास बदल गया।

भारत की इज्जत पर बट्टा लगाने वाले सांप्रत संकटों के वातावरण का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि चारों ओर अंधकार और निराशा के माहौल में दूर-सुदूर प्रकाश से टिमटिमाता दीप गुजरात ने विकास की सफलता से प्रज्जवलित कर बताया है। उन्होंने कहा कि गुजरात के इस एक दशक के विकास, सुशासन और समाज शक्ति को विकास में जोड़ने के प्रयासों से भरोसा पैदा हुआ है कि, निराशा की चाहे जैसी भी स्थिति हो उसे बदला जा सकता है। समूचा विश्व आर्थिक मंदी की गिरफ्त में था और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी इसका गंभीर असर पड़ा था, ऐसे में एकमात्र गुजरात ने आर्थिक मंदी में से बाहर निकलने की सफलता का मंत्र दुनिया को बताया। १८९३ की शिकागो की विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद और गांधी जी के सहपाठी और उनके नौजवान गुजराती साथी वीरचंदभाई गांधी ने भारतीय संस्कृति, धर्म और संस्कार के मूल्यों का वैश्विक प्रभाव स्थापित किया। इस प्रसंग की भूमिका पेश करते हुए श्री मोदी ने कहा कि विवेकानंद जी के साथ वीरचंदभाई गांधी ने गांधी जी से पहले भारत भक्ति का प्रभाव विदेश में खड़ा किया, इसीलिए शिकागो में वीरचंदभाई गांधी की प्रतिमा स्थापित हुई है। हमारे पूर्वजों की इस महान विरासत के वारिस के तौर पर हिन्दुस्तान के नौजवानों को उनके अधूरे सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध होना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने विवेकानंद के १५०वें जयंती वर्ष में भारत के युवाओं के कौशल विकास के लिए भारत सरकार द्वारा १,००० करोड़ रुपये के बजट प्रावधान की तुलना में एक छोटा राज्य होने के बावजूद गुजरात सरकार द्वारा इस युवाशक्ति वर्ष में कौशल विकास के लिए ८०० करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि दो वर्ष से गुजरात ने युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर कौशल विकास के अवसर उपलब्ध करा कर युवाशक्ति के सामर्थ्य का सशक्तिकरण किया है।

उन्होंने कहा कि गुजरात ने दुनिया को यह कर दिखाया है कि चाहे जैसी भी समस्या हो, उसे विकास की राजनीति से हल किया जा सकता है। हमारे पास क्या नहीं है? “हम कर सकते हैं, हम करेंगे” (वी केन, वी विल) का अभिगम होना चाहिए। विकास के मुद्दे पर चुनाव जीता जा सकता है, यह गुजरात ने ही साबित किया है। विकास को वोट कर गुजरातियों ने साबित किया है कि विकास ही सभी समस्याओं का समाधान है। नतीजा यह कि, आज गुजरात अपने विकास की सफलता की वजह से देश एवं दुनिया में चर्चित है। श्री मोदी ने कहा कि चुनाव जीतो या हारो लेकिन निरंतर जन-सेवा और विकास की राजनीति में ही कार्यरत रहो, तो सरकार से यदि कोई भूल या गलती होती है तो विकास की वजह से जनता उसे माफ कर देगी। बारह वर्ष के निरंतर शासन में जनविश्वास और जनभागीदारी की शक्ति ने हमें हमारी निष्ठा और निरंतर काम करने की ऊर्जा में बल प्रदान किया है। मेरे छह करोड़ गुजराती ही मेरा परिवार है। उनका सुख-दुःख ही मेरा सुख-दुःख है। छह करोड़ गुजराती विश्वास से समर्थन देकर गुजरात की विकास यात्रा में शामिल हैं।

श्री मोदी ने कहा कि गुजराती दुनिया में बेस्ट टुरिस्ट माने जाते हैं लेकिन गुजरात कभी बेस्ट टुरिस्ट डेस्टीनेशन नहीं रहा। हालांकि गुजरात के पास सोमनाथ, द्वारका, पोरबंदर-गांधी आश्रम, गिर के सिंह जैसा पर्यटन वैभव है। मैं विश्व में बसने वाले प्रत्येक भारतीयों से आह्वान करता हूं कि प्रति वर्ष दस गैर भारतीय परिवारों को भारत में पर्यटन के लिए प्रेरित करें। गुजरात को बेस्ट टुरिस्ट डेस्टीनेशन और भारत को सुपर टुरिस्ट डेस्टीनेशन के तौर पर विश्व के समक्ष पेश करने की अपील भी उन्होंने की।

मुख्यमंत्री ने ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी को इस प्रकार के भारतीय स्वाभिमान जगाने वाले कार्यक्रम के आयोजन के लिए अभिनंदन देते हुए कहा कि, एक भारत-श्रेष्ठ भारत का संकल्प करें। भारत माता को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने को प्रतिबद्ध बनें।अमेरिका के शिकागो एवं न्यूजर्सी में आयोजित इन समांतर सभाओं में सर्वश्री जयेश पटेल, चंद्रकांत पटेल, एचआर शाह, महेशभाई मेहता सहित अन्य महानुभावों ने भारत के सार्वजनिक जीवन में श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हासिल लोकप्रियता को विरल करार देते हुए “स्टैंडिंग ओवेशन” से उनका अभिवादन किया।

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सरकार कृषि में 'टेक्नोलॉजी कल्चर' लाने पर विशेष जोर दे रही है: पीएम मोदी
March 06, 2026
इस वर्ष के केंद्रीय बजट ने कृषि और ग्रामीण परिवर्तन को नई दिशा प्रदान की है: प्रधानमंत्री
सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है, प्रमुख प्रयासों से किसानों के जोखिम कम हुए हैं और उन्हें बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है: प्रधानमंत्री
यदि हम उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा दें, तो यह कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल देगा: प्रधानमंत्री
निर्यात-उन्मुख उत्पादन बढ़ने से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित होगा: प्रधानमंत्री
मत्स्य पालन ग्रामीण समृद्धि के लिए एक उच्च मूल्य और उच्च प्रभाव वाला क्षेत्र और निर्यात वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन सकता है: प्रधानमंत्री
सरकार एग्रीस्टैक के माध्यम से कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित कर रही है: प्रधानमंत्री
प्रौद्योगिकी तभी परिणाम देती है जब सिस्टम इसे अपनाएं हैं, संस्थान इसे एकीकृत करें हैं और उद्यमी इस पर नवाचार करें: प्रधानमंत्री

नमस्कार !

बजट वेबिनार सीरीज के तीसरे वेबिनार में, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। इससे पहले, टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स और इकोनॉमिक ग्रोथ जैसे अहम विषयों पर दो वेबिनार हो चुके हैं। आज, Rural Economy और Agriculture जैसे अहम सेक्टर पर चर्चा हो रही है। आप सभी ने बजट निर्माण में अपने मूल्यवान सुझावों से बहुत सहयोग दिया, और आपने देखा होगा बजट में आप सबके सुझाव रिफ्लेक्ट हो रहे हैं, बहुत काम आए हैं। लेकिन अब बजट आ चुका है, अब बजट के बाद उसके full potential का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और सरल तरीके से बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो। बजट का पाई-पाई पैसा जिस हेतु से दिया गया है, उसको परिपूर्ण कैसे करें? जल्द से जल्द कैसे करें? आपके सुझाव ये वेबिनार के लिए बहुत अहम है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा, ये सब हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। एग्रीकल्चर, भारत की लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट जर्नी का Strategic Pillar भी है, और इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है। करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पीएम किसान सम्मान निधि मिली है। MSP में हुए Reforms से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के क्लेम सेटल किए गए हैं। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है, और उन्हें एक बेसिक इकोनॉमिक सिक्योरिटी मिली है। इससे कृषि क्षेत्र का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज खाद्यान्न और दालों से लेकर तिलहन तक देश रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है। लेकिन अब, जब 21वीं सदी का दूसरा क्वार्टर शुरू हो चुका है, 25 साल बीत चुके हैं, तब कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना भी उतना ही आवश्यक है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं। मुझे विश्वास है, इस वेबिनार में आप सभी के बीच हुई चर्चा, इससे निकले सुझाव, बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।

साथियों,

आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं, ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा आवश्य़क है। हमारे पास Diverse Climate है, हमें इसका पूरा फायदा उठाना है। एग्रो क्लाइमेटिक जोन, उस विषय में हम बहुत समृद्ध है। इस साल का बजट इन सब बातों के लिए अनगिनत नए अवसर देने वाला बजट है। प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की दिशा तय करता है, और एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ को बढ़ावा देता है। बजट में हमने high value agriculture पर फोकस किया है। नारियल, काजू, कोको, चंदन, ऐसे उत्पादों के regional-specific promotion की बात कही है, और आपको मालूम है, दक्षिण के हमारे जो राज्य हैं खासकर केरल है, तमिलनाडु है, नारियल की पैदावार बहुत करते हैं। लेकिन अब वो क्रॉप, वो सारे पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उसकी वो क्षमता नहीं रही है। केरल के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो, तमिलनाडु के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो। इसलिए इस बार कोकोनट पर एक विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट की तरफ देखें, अगरवुड बहुत कम लोगों को मालूम है, जो ये अगरबत्ती शब्द है ना, वो अगरवुड से आया हुआ है। अब हिमालयन राज्यों में टेम्परेट नट क्रॉप्स, और इन्हें बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। जब एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्रोडक्शन बढ़ेगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार सृजन होगा। इस दिशा में एक coordinated action कैसे हो, आप सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर जरूर मंथन करें। अगर हम मिलकर High Value Agriculture को स्केल करते हैं, तो ये एग्रीकल्चर को ग्लोबली कंपेटिटिव सेक्टर में बदल सकता है। एग्री experts, इंडस्ट्री और किसान एक साथ कैसे आएं, किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए किस तरह से गोल्स सेट किए जाएं, क्वालिटी, ब्रांडिंग और स्टैंडर्ड्स, ऐसे हर पहलू, इन सबको कैसे प्रमोट किया जाए, इन सारे विषयों पर चर्चा, इस वेबिनार को, इसके महत्व को बढ़ाएंगे। मैं एक और बात आपसे कहना चाहूंगा। आज दुनिया हेल्थ के संबंध में ज्यादा कॉनशियस है। होलिस्टिक हेल्थ केयर और उसमें ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड, इस पर बहुत रुचि है। भारत में हमें केमिकल फ्री खेती पर बल देना ही होगा, हमें नेचुरल फार्मिंग पर बल देना होगा। नेचुरल फार्मिंग से, केमिकल फ्री प्रोडक्ट से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे लिए एक राजमार्ग बन जाता है। उसके लिए सर्टिफिकेशन, लेबोरेटरी ये सारी व्यवस्थाएं सरकार सोच रही है। लेकिन आप लोग इसमें भी जरूर अपने विचार रखिए।

साथियों,

एक्सपोर्ट बढ़ाने में एक बहुत बड़ा फैक्टर फिशरीज सेक्टर का पोटेंशियल भी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश भी है। आज हमारे अलग-अलग तरह के जलाशय, तालाब, ये सब मिलाकर लगभग 4 लाख टन मछली उत्पादन होता है। जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना मौजूद है। अब विचार कीजिए आप, 4 लाख टन से हम अतिरिक्त 20 लाख टन जोड़ दें, तो हमारे गरीब मछुआरे भाई-बहन हैं, उनकी जिंदगी कैसी बदल जाएगी। हमारे पास Rural Income को डायवर्सिफाई करने का अवसर है। फिशरीज एक्सपोर्ट ग्रोथ का बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है, दुनिया में इसकी मांग है। इस वेबिनार से अगर बहुत ही प्रैक्टिकल सुझाव निकलते हैं, तो कैसे रिज़रवॉयर, उसकी पोटेंशियल की सटीक मैपिंग की जाए, कैसे क्लस्टर प्लानिंग की जाए, कैसे फिशरीज डिपार्टमेंट और लोकल कम्युनिटी के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन हो, तो बहुत ही उत्तम होगा। हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, एक्सपोर्ट, उसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स, हर स्तर पर हमें नए बिजनेस मॉडल विकसित करने ही होंगे। ये Rural Prosperity, ग्रामीण समृद्धि के लिए, वहां की हाई वैल्यू, हाई इम्पैक्ट सेक्टर के रूप में परिवर्तित करने का एक अवसर है हमारे लिए, और इस दिशा में भी हम सबको मिलकर काम करना है, और आप आज जो मंथन करेंगे, उसके लिए, उस कार्य के लिए रास्ता बनेगा।

साथियों,

पशुपालन सेक्टर, ग्रामीण इकोनॉमी का हाई ग्रोथ पिलर है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर है, Egg प्रोडक्शन में हम दूसरे स्थान पर है। हमें इसे और आगे ले जाने के लिए ब्रीडिंग क्वालिटी, डिजीज प्रिवेंशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। एक और अहम विषय पशुधन के स्वास्थ्य का भी है। मैं जब One Earth One Health की बात करता हूं, तो उसमें पौधा हो या पशु, सबके स्वास्थ्य की बात शामिल है। भारत अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर है। फुट एंड माउथ डिजीज, उससे पशुओं को बचाने के लिए सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत टेक्नोलॉजी का विस्तार किया जा रहा है। हमारी सरकार में अब पशुपालन क्षेत्र के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का भी लाभ मिल रहा है। निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की शुरुआत भी की गई है, और आपको ये पता है हम लोगों ने गोबरधन योजना लागू की है। गांव के पशुओं के निकलने वाला मलमूत्र है, गांव का जो वेस्ट है, कूड़ा-कचरा है। हम गोबरधन योजना में इसका उपयोग करके गांव भी स्वच्छ रख सकते हैं, दूध से आय होती है, तो गोबर से भी आय हो सकती है, और एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में गैस सप्लाई में भी ये गोबरधन बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। ये मल्टीपर्पज बेनिफिट वाला काम है, और गांव के लिए बहुत उपयोगी है। मैं चाहूंगा कि सभी राज्य सरकारें इसको प्राथमिकता दें, इसको आगे बढ़ाएं।

साथियों,

हमने पिछले अनुभवों से समझा है कि केवल एक ही फसल पर टिके रहना किसान के लिए जोखिम भरा है। इससे आय के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए, हम crop diversification पर फोकस कर रहे हैं। इसके अलावा, National Mission on Edible Oils And Pulses, National Mission on Natural Farming, ये सभी एग्रीकल्चर सेक्टर की ताकत बढ़ा रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है, राज्यों का भी एक बड़ा एग्रीकल्चर बजट होता है, हमें राज्यों को भी निरंतर प्रेरित करना है कि वो अपना दायित्व निभाने में, हम उनको कैसे मदद दें, हमारे सुझाव उनको कैसे काम आएं। राज्य का भी एक-एक पैसा जो गांव के लिए, किसान के लिए तय हुआ है, वो सही उपयोग हो। हमें बजट प्रावधानों को जिला स्तर तक मजबूत करना होगा। तभी नई पॉलिसीज का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सकता है।

साथियों,

ये टेक्नोलॉजी की सदी है और सरकार का बहुत जोर एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी कल्चर लाने पर भी है। आज e-NAM के माध्यम से मार्केट एक्सेस का डेमोक्रेटाइजेशन हुआ है। सरकार एग्रीस्टैक के जरिए, एग्रीकल्चर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। इसके तहत डिजिटल पहचान, यानी किसान आईडी बनाई जा रही है। अब तक लगभग 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बन चुकी है, और लगभग 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे किया गया है। भारत-विस्तार जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म, रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और किसानों के बीच की दूरी कम कर रहे हैं।

लेकिन साथियों,

टेक्नोलॉजी तभी परिणाम देती है, जब सिस्टम उसे अपनाएं, संस्थाएं उसे इंटीग्रेट करें और एंटरप्रेन्योर्स उस पर इनोवेशन खड़ा करें। इस वेबिनार में आपको इससे जुड़े सुझावों को मजबूती से सामने लाना होगा। हम टेक्नोलॉजी को कैसे सही तरीके से इंटीग्रेट करें, इस दिशा में इस वेबिनार से निकले सुझावों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

हमारी सरकार ग्रामीण समृद्धि के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद, इसने रूरल इकोनॉमी को निरंतर मजबूत किया है। लखपति दीदी अभियान की सफलता को भी हमें नई ऊंचाई देनी है। अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक, 2029 तक 3 करोड़ में और 3 करोड़ जोड़ना है, और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। ये लक्ष्य और तेजी से कैसे प्राप्त किया जाए, इसे लेकर भी आपके सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।

साथियों,

देश में स्टोरेज का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। लाखों गोदाम बनाए जा रहे हैं। स्टोरेज के अलावा एग्री एंटरप्रेन्योर्स प्रोसेसिंग, सप्लाई चैन, एग्री-टेक, एग्री-फिनटेक, एक्सपोर्ट, इन सब में इनोवेशन और निवेश बढ़ाना आज समय की मांग है। मुझे विश्वास है आज जो आप मंथन करेंगे, उससे निकले अमृत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आप सबको इस वेबिनार के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जमीन से जुड़े हुए विचार, जड़ों से जुड़े हुए विचार, इस बजट को सफल बनाने के लिए, गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बहुत काम आएंगे। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।