कथाकार रमेशभाई ओझा की जन्मभूमि देवका में मुख्यमंत्री

ने किया दिव्य देवका विद्यापीठ का लोकार्पण

गुजरात के समुद्रतट पर आकार लेगा भव्य और नया गुजरात : श्री मोदी

अहमदाबाद, बुधवार: मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को सौराष्ट्र के समुद्रतट पर राजुला के निकट स्थित देवका में श्री रमेशभाई ओझा च्भाईश्रीज् द्वारा स्थापित देवका विद्यापीठ का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि भविष्य के नये और भव्य गुजरात का निर्माण (न्यू गुजरात विदिन गुजरात) समुद्रतट पर ही होने वाला है। गुजरात का 1600 किलोमीटर लंबा समुद्रीतट हिन्दुस्तान की समृद्घि का प्रवेशद्वार बनने जा रहा है। ऐसे में, देवका विद्यापीठ की भारतीय संस्कृति पर आधारित शिक्षा का महत्व कितना बढ़ जाएगा, इसे आज बहुतेरे लोग समझ नहीं सकते।

गौरतलब है कि, देवका की इस भूमि पर श्री रमेशभाई ओझा च्भाईश्रीज् ने जन्म लिया और यहीं पले-बढ़े। जन्मभूमि का ऋण चुकाने को उन्होंने 40 बीघा जमीन पर दाताओं के सहयोग से भारतीय ऋणि-गुरुकुल शिक्षा की परंपरा को आत्मसात करने के लिए देवका विद्यापीठ का निर्माण किया।

श्रीमद भागवत महोत्सव के अवसर पर व्यासपीठ पर बिराजमान प्रसिद्घ कथाकार श्री रमेशभाई ओझा का आशीर्वाद प्राप्त कर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में इतनी ऊंचाई, मान-सम्मान और प्रतिष्ठा हासिल करने के पश्चात अपने वतन की धरा पर यह भागवत सप्ताह और देवका विद्यापीठ की दिव्यता का निर्माण कर उन्होंने जीवन के विरल क्षण का साक्षात्कार किया है। भीतर यदि दिव्यता हो, तो ही ऐसे भव्य विद्याधाम का सृजन संभव हो सकता है। ऐसे दिव्य विचार को मूर्तिमंत करने मेें सहयोग के लिए उन्होंने दाताओं को अभिनंदन दिया।

शिक्षा को समाज और राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति का आधार करार देते हुए मुख्यमंत्री ने ऋषि-मुनियों द्वारा प्रस्थापित गुरुकुल शिक्षा की महान परंपरा की भूमिका पेश की। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए जान न्यौछावर करने वाले देशभक्तों के लिए सशस्त्र क्रांतिसंग्राम के प्रणेता स्व. श्यामजी कृष्ण वर्मा ने शिक्षा संस्था स्थापित करने का विचार दिया था। इसी तरह महात्मा गांधीजी ने भी अंग्रेजों की माया-छाया और विचार-प्रभाव से मुक्त देशभक्ति और मूलभूत शिक्षा के आचार-विचार के साथ आजादी के मतवालों के लिए गुजरात विद्यापीठ की स्थापना की थी। श्री रमेशभाई ओझा ने भी देवका विद्यापीठ के निर्माण के लिए भारतीय संस्कृति की शिक्षा का संकल्प किया है।

        मुख्यमंत्री ने गुजरात की विकासयात्रा में शिक्षा और मानव संसाधन विकास को दिये महत्व की रूपरेखा पेश करते हुए कहा कि, उनके लिए मुख्यमंत्री पद के शपथ कार्यक्रम से ज्यादा आनंद की बात गरीब परिवार के बालक या बालिका के शाला प्रवेश का अवसर है। कन्या केळवणी यात्रा और शाला प्रवेशोत्सव के सफल आयोजन से शिक्षा समाजजीवन में कैसे बदलाव ला सकती है, इसकी प्रेरणा उन्होंने दी।

च्भाईश्रीज् ने कहा कि देवका विद्यापीठ के विशाल निर्माण के पीछे उनका संकल्प और दाताओं का सहयोग तथा आसपास के सभी गांवों का जनता का प्रेम जुड़ा है। उन्होंने कहा कि बेटा-बेटी संस्कारी बने, पढ़-लिखकर जीवन सफल बनाएं, देश की सेवा करें, इसके लिए आर्थिक विकास के साथ शिक्षा का विकास अनिवार्य है। गुजरात के विकास में मुख्यमंत्री का यशस्वी नेतृत्व, देश की सेवा के लिए भी मिलता रहे, ऐसा आशीर्वाद उन्होंने दिया।

इस अवसर पर सांदीपनी ट्रस्ट के पदाधिकारी, संत-महंत, दाता परिवार तथा भागवत सप्ताह का रसपान करने आए विशाल भाविक-भक्त और परिवार उपस्थित थे।

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