कृषि महोत्सव :२०१२

 कृषि महोत्सव के लाभ से कोई वंचित ना रहे: श्री मोदी

 लाखों किसानों से मुख्यमंत्री का विडियो कॉंफ्रेंस के जरिये वार्तालाप .

 मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य में चल रहे कृषि महोत्सव के दूसरे दिन आज विडियो कॉंफ्रेंस के माध्यम से २२५ तहसीलों के लाखों किसानों से वार्तालाप किया। उन्होंने किसानों से अनुरोध किया कि की गुजरात का कोई भी किसान कृषि रथ से वंचित ना रह जाए।

इस वर्ष कृषि महोत्सव के साथ पशु स्वास्थ्य मेले को भी जोड़ दिया है, इसका उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि हजारों गरीब पशुपालकों के दूधारू पशुओं का ऑपरेशन करके उनको नई जिन्दगी दी गई है। पशु स्वास्थ्य मेलों में पशुओं के स्वास्थ्य की पूरी जिम्मेदारी सरकार ने उठा ली है। ११२ पशु रोग सम्पूर्ण रूप से खत्म हो गए हैं। श्री मोदी रोजाना शाम को कृषि महोत्सव को विडियो कॉंफ्रेंस से सम्बोधित करेंगे। प्रगतिशील किसानों के सफल प्रयोग से किसानों को प्रेरणा मिले, ऐसी व्यवस्था से इस कृषि महोत्सव से जुड़े हैं, उनके सहयोग के लिए मुख्यमंत्री ने आभार जताया। उन्होंने किसानों को अपनी शक्ति का अहसास करवाने की अपील भी की।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि २००१ से पहले बिजली की ट्रांसमिशन व्यवस्था और सब स्टेशनों ली अपर्याप्त व्यवस्था थी। १२ माह में १५ सब स्टेशन बनते थे मगर आज १४०-१५० सब स्टेशन बनते हैं जिसके कारण मोटरें जलती नहीं हैं। लॉ वोल्टेज नहीं होता। बिजली आपूर्ति सातत्यपूर्ण रहती है। कच्छ और काठियावाड में भी सब स्टेशन बन गए हैं। श्री मोदी ने कहा कि वर्ष २००० तक सिर्फ ४६० करोड़ की सब्सिडी दी जाती थी जो आज बढ़कर ३००० करोड़ हो हो गई है। कांग्रेस के जमाने में पांच प्रतिशत इलेक्ट्रिक ड्युटी ली जाती थी जो इस सरकार ने खत्म कर दी है। कोयले, गैस की ईधन का सरकार पर २७०० करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ता है मगर किसानों पर कोई बोझ पड़ने नहीं दिया जाता। आन्ध्र का किसन आत्महत्या करता है लेकिन हमने किसानों का बोझ हल्का किया है। दस वर्ष में गौचर के नाम से किसानों-पशुपालकों को गुमराह करने वालों को जान लेना चाहिए कि दूध के उत्पादन में ६६ प्रतिशत कि वृद्धि हुई है।

गुजरात सरकार को बदनाम करने वालों को को चुनौती देते हुए श्री मोदी ने कहा कि वो लोग शासन चलाते थे तब बिजली उत्पादन ८७ पैसे में होता था और किसान को बिजली ५८ पैसे में मिलती थी। अब गैस, कोयला,रेल किराया,सीमेंट सब महंगा हो गया है इसलिए बिजली पैदा करने का खर्च तीन रुपए से भी ज्यादा होता है। फिर भी यह सरकार मात्र ४८ पैसे में किसान को बिजली देती है। एक दिन खेतों में भी सौर ऊर्जा से बिजली पैदा होगी। गुजरात के किसान के पास कम भूमि हो तो भी वह कृषि उत्पादन वैज्ञानिक पद्धति अपना कर ज्यादा आर्थिक लाभ हासिल करे, इसके लिए तपती गर्मी में एक लाख सरकारी, और वैज्ञानिक गावों मेहनत कर रहे हैं।

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की
June 23, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।

प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी को एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता बताया, जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का अटूट विश्वास, सार्वजनिक जीवन में साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी दृढता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में अंकित है।

डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की निस्वार्थ सेवा में समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के गहन विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने संस्कृत में रचित सुभाषितम भी साझा किया:

“न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।”

परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”

सुभाषितम् में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमरत्व कर्मों, धन-दौलत या वंश से नहीं, बल्कि त्याग और महान आदर्शों के प्रति पूर्ण समर्पण से प्राप्त होता है। वे महान आत्माएं जो राष्ट्र, समाज और सत्य के लिए अपने स्वार्थों का त्याग कर देते हैं, समय की सीमाओं को पार करते हुए जनमानस में अमर हो जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर, मैं उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। सार्वजनिक जीवन में उनका अटूट विश्वास, साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। डॉ. मुखर्जी का बलिदान हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित है। हम उनके द्वारा संजोए गए और अपनी अंतिम सांस तक सेवा किए गए मूल्यों के मार्गदर्शन में एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी दृढता की पुष्टि करते हैं।”

“निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र और समाज की सेवा में आजीवन समर्पित रहे देश की महान विभूति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को उनके बलिदान दिवस पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उनके प्रखर विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।

परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”