"Shri Narendra Modi addresses NRIs across 53 USA cities to commemorate 53rd Gujarat Day celebrations"
"I am happy that you are celebrating this Gujarat event globally: Shri Modi"
"I bow to everyone who worked and gave their lives for Gujarat. I assure we will never forget their dreams: Shri Modi"
"Development in Gujarat not due to an individual but due to collective efforts of 6 crore people of Gujarat: Shri Modi"
"Greatest crisis our country is facing is that of trust deficit. Need of the hour is to rebuild the confidence of the people: CM"
"Country is moving to new crisis and this happens when rulers are weak: Shri Modi"
"China withdraws its forces from our territory but why are Indian forces withdrawing from Indian territory? Why did we retreat? Asks Shri Modi"

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उत्तरी अमेरिका में गुजरात दिवस 

महोत्सव के जन आन्दोलन में सहभागी बने

अभूतपूर्व उत्साह से उमड़े भारतीय- गुजराती समुदाय श्री मोदी के 100 मिनट के प्रेरणादायी विकास चिंतन से प्रभावित

 मदर्स डे मातृशक्ति की भारतीय संस्कृति में अनोखी महिमा: पृथ्वी माता- भारत माता- मातृशक्ति अपरम्पार

भारत की दुर्दशा के लिए देश के वर्तमान शासकों की नीति, नियत और नैतिकता जिम्मेदार 

 साम्प्रत हिन्दुस्तान में भरोसे का संकट खड़ा हो गया है- श्री मोदी 

गुजरात के विकास में 6 करोड़ गुजरातियों का भरोसा

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह अमेरिका में बसे भारतीयों और गुजराती समुदायों को वीडियो कांफ्रेंस से सम्बोधित करते हुए कहा कि सवा सौ करोड़ भारतवासियों को भरोसे के अभाव के संकट में धकेलने के लिए वर्तमान शासकों की नीति, नियत और नैतिकता को सम्पूर्णतया जिम्मेदार बतलाया। गांधीनगर स्थित अपने आवास से अमेरिका के 20 शहरों में एक साथ वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से गुजरात दिवस महोत्सव के अभूतपूर्व आनंद में सहभागी बने मुख्यमंत्री ने गुजरात के विकास विजन की सर्व समावेशक भूमिका के चिंतन से सभी को प्रभावित किया। आज सुबह श्री मोदी के राष्ट्र के समक्ष चुनौतियां, गुजरात का विकास व्यूह और साम्प्रत समस्याओं के समाधान विषयक 100 मिनट के वार्तालाप- संवाद का सीधा प्रसारण टीवी चैनलों द्वारा दुनिया के लाखों दर्शकों ने निहारा।

मुख्यमंत्री ने प्रारम्भ में मदर्स डे के वैश्विक महोत्सव का उल्लेख करते हुए मातृशक्ति की अपार महिमा की भारतीय संस्कृति की महानता का बखान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ही अनेक संकटों के बीच टिकी है, इसकी वजह मातृशक्ति का गौरव है। हमने माता भूमि: पुत्रो अहम् पृथ्वी व्याम् का मंत्र अपनी जीवनशैली में आत्मसात् किया हुआ है। पृथ्वी माता, भारत माता और परिवार की मातृशक्ति की भवना के साथ अपना अटूट नाता रहा है। समग्र विश्व में परिवार संस्था टूट गई है, इसकी चिंता की जा रही है जबकि भारत में पारिवारिक व्यवस्था के धरोहर का मातृशक्ति द्वारा जतन हो रहा है।

परिवार में माता के त्याग, तपस्या और जहर पीकर अमृत का पान करवाने वाली माता की भावना का अवमूल्यन नहीं होना चाहिए। पृथ्वी माता हो, भारत माता हो या परिवार की मातृशक्ति हो- हमारी संस्कृति में ही कुछ बात ऐसी है कि हमारी हस्ती मिट नहीं सकती।इस मातृशक्ति की महिमा का गौरवगान करना ही हमारा दायित्व नहीं है, हमारे डीएनए में यह भावना सदैव होनी चाहिए।

देश के सवा सौ करोड़ भारतवासियों को निराशा के वातावरण में धकेल देने वाले वर्तमान शासकों की दुर्बलता और विफल विदेश नीति की कड़ी आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 21 वीं सदी किसकी होगी? इस चर्चा में भारत के बारे में दुनिया की जो आशा जागी थी वह और भारतवासियों के सपने चकनाचूर हो गए हैं। आज देश की दुर्दशा ऐसी हो गई है कि हमारी सेना के जवानों के सिर काटकर ले जाने वाले देश के प्रधानमंत्री कु बुलाकर उसे चिकन बिरयानी खिलाई जाती है! चीन हमारी भूमि में घुसपैठ करके समझौता करके वापस लौटे, यह तो समझ में आता है, परंतु हिन्दुस्तान की ही धरती पर भारत की सेना को पीछे क्यों धकेला जाता है? श्री मोदी ने कहा कि युपीए सरकार पूना, हैदराबाद बम धमाकों, कोयला घोटाला जैसे हर मोर्चे पर विफल रही है। भारत की प्रतिष्ठा घट रही है और आज हिन्दुस्तान की स्थिति यह हो गई है कि कि किसी को किसी पर भरोसा नहीं रहा है। जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं उनकी व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रिया, इरादे, नीतियां, नियत और नैतिकता पर से देशवासियों का भरोसा उठ गया है। इसे पुन:स्थापित करने का संकत सबसे बड़ा है।

हिन्दुस्तान के नेताओं, राजनैतिक दलों और नीतियों पर से देशवासियों का भरोसा तोड़ने वालों ने देश को संकट में धकेल दिया है। ऐसे माहौल में 6 करोड़ गुजरातियों ने गुजरात की वर्तमान सरकार पर भरोसा रखा है और इसलिए ही गुजरात की विकासयात्रा तेज गति से आगे बढ़ती ही रही है। गुजरात विरोधियों के अनेक झूठों की भरमार के बीच भी महात्मा गांधी और सरदार पटेल का स्मरन करके गुजरात में विकास के आचरण के लिए छह करोड़ गुजरातियों ने अपनी शक्ति का दायित्व निभाया है।

गुजरात के विकास की चहुंओर चर्चा क्यों हो रही है, इसकी विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए श्री मोदी ने कहा कि, उन्हें स्वयं को जो सम्मान मिल रहा है उसके हकदार सिर्फ और सिर्फ गुजरात को प्रेम करने वाले दुनियाभर में बसे भारतीयों और छह करोड़ गुजरातियों का परिश्रम है। गुजरातियों ने अपने संस्कारों और समाज सेवा से सभी का दिल जीत लिया है। गुजराती ग्लोबल कम्युनिटी है और गुजरात की शक्ति का दर्शन करवाने वाले गुजराती ही सच्चे कल्चरल एम्बेसडर (सांस्कृतिक राजदूत) हैं।

मुख्यमंत्री ने गुजरात के विकास की सफलताओं और उपलब्धियों का राज बतलाते हुए कहा कि गुजरात ने विकास को सीमा में नहीं बांधा है। गुजरातियों ने वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को आत्मसात् किया है। 1600 किलोमीटर लम्बा समुद्रतट वैश्विक व्यापार का प्रवेशद्वार बन गया है। ग्लोबल इकॉनॉमी के मन्दी के वातावरण में भी गुजरात ने पहल करके मार्ग बताया है। गुजरात की स्थापना में तत्कालीन अहमदाबाद के कांग्रेस हाउस में से गोलियां बरसाईं गई थी और मासूम विद्यार्थियों- जवानों की शहादत हुई थी तब महागुजरात आन्दोलन सफल हुआ था। इसका उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन शहीदों को वन्दन करने का यह गुजरात दिवस का अवसर है।

इन्दुलाल याज्ञिक की अगुवाई में हुए महागुजरात आन्दोलन के इतिहास को भुला देने वाले आज भी गुजरात की प्रगति के खिलाफ झूठ फैलाते रहे हैं परंतु, गुजरात ने तो सबका साथ सबका विकास मंत्र को साकार कर विकास को सर्वस्पर्शी, सर्वसमावेशक बनाया है। गुजरात के विकास के केन्द्र में गरीब और आम आदमी है और महात्मा गांधी तथा पंडित दीनदयालजी के अंत्योदय और गरीबतम व्यक्ति के जीवनस्तर में सुधार लाने के संकल्प के साथ विकास किस तरह किया गया, इसकी श्री मोदी ने जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि गुजरात में ढांचागत सुविधा उत्तर से दक्षिण तक पहले भी थी मगर उद्योगों के अंकलेश्वर- वापी के गोल्डन कॉरिडोर के विकास से सरकारें खुश होती थीं। मगर इस सरकार ने नव प्रगतिपथ के व्युहात्मक आयोजन द्वारा पूर्व के आदिवासी पट्टे से पश्चिम के समुद्री तट तक विकास को जोड़ दिया। फॉरेंसिक साइंस लैब पहले भी थी मगर दुनिया की प्रथम फॉरेंसिक साइंस युनिवर्सिटी हमारी सरकार ने बनाई। कहने का मतलब यह है कि, मैं यह कभी नहीं कहता कि मोदी नहीं थे तब तक गुजरात का विकास नहीं हुआ था। मैं यह कहना चाहता हूं कि 40 साल में गुजरात के विकास की जो स्थिति थी उसे सर्वांगीण बनाकर, आम आदमी को विकास के फल में भागीदार बनाकर, विकास की सर्वतोमुखी गति तेज बनाकर आज गुजरात ने दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। यह नरेन्द्र मोदी ने खुद नहीं बनाई है बल्कि 6 करोड़ गुजरातियों के पुरुषार्थ का यह परिणाम है। पतंग की खोज नरेन्द्र मोदी ने नहीं की मगर पतंग से रोजी-रोटी कमाने वाले गरीब परिवारों को पतंगोत्सव द्वारा ही आजीविका से ऊंचाई पर ले जाया गया है।

श्री मोदी ने कहा कि गीर के सिंह पहले भी थे। सोमनाथ और द्वारिका पहले भी थी मगर पर्यटन स्थल नहीं थे। कच्छ के रेगिस्तान में विश्व के पर्यटकों की लाइन लगवाने वाले रणोत्सव में नरेन्द्र मोदी ने सफेद चूना नहीं लगाया बल्कि पर्यटन का विकास करके कच्छ की हस्तकला और पर्यटन द्वारा रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध करवाए गये हैं। 18,000 गांवों में 24 घंटे थ्री फेज बिजली देकर गरीब, ग्रामिण व्यक्ति के जीवन में विकास का प्रकाश फैलाया गया है।

गुजरात पर कुपोषण की समस्या का दोषारोपण करने वाले भले ही गालियां दें, झूठ फैलाएं मगर सीएजी रिपोर्ट में कुपोषण घटाने में सबसे तेज 32 प्रतिशत का सुधार करने वाला राज्य पूरे देश में सिर्फ गुजरात है। माता और बालक की मृत्यु दर में कमी करके चिरंजीवी योजना से हजारों गरीब माताओं और बालकों की जिन्दगी, स्वास्थ्य सुरक्षित बनाकर गुजरात ने विकास के केन्द्र में मानव कल्याण को रखा है। दुनिया में सबसे बड़ी नर्मदा की पाइपलाइन से पीने का पानी उपलब्ध करवाने में, टेक्नोलॉजी द्वारा विकास में पारदर्शिता की प्रतिती करवाने में गुजरात ने अपनी क्षमता साबित की है। मगर दस साल से 24 घंटे सिर्फ झूठ बोलकर गुजरात को बदनाम करने वालों को मै यह कहना चाहता हूं कि भारत सरकार ने ही गुजरात को कई अवार्ड दिये हैं।

मुख्यमंत्री ने नर्मदा नदी पर लौहपुरुष सरदार पटेल की दुनिया की सबसे विरात प्रतिमा- स्टेच्यु ऑफ युनिटी के निर्माण में सभी भारतीयों से योगदान की अपील की। श्री मोदी के साथ अमेरिका में बसे भारतीयों ने प्रश्नोत्तरी की। श्री मोदी ने कहा कि गुजरात ने वैश्विक मन्दी में भी विकास दर को बरकरार रखा है। कृषि, उद्योग और सर्विस सेक्टर के संतुलित विकास से अर्थव्यवस्था पर कभी विपरीत असर नहीं पड़ता। गुजरात में नारी सशक्तिकरण, युवाओं के स्कील डवलपमेंट और प्राकृतिक संसाधनों के अधिकतम उपयोग से गुजरात की अर्थव्यवस्था किस तरह मजबूत बनी, उन्होंने इसकी जानकारी दी।

सबका साथ सबका विकास अर्थात् विकास में सबकी भागीदारी किस तरह आम आदमी के जीवन को बदलने में सफल हो सकती है इसके अनेक उदाहरण श्री मोदी ने दिए। उन्होंने गुजरात दिवस महोत्सव के आयोजकों भरत बाराई, महेन्द्र पटेल और रमेश भाई पटेल को ELIS ISELAND अवार्ड का गौरव हासिल करने पर बधाई दी।

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सरकार कृषि में 'टेक्नोलॉजी कल्चर' लाने पर विशेष जोर दे रही है: पीएम मोदी
March 06, 2026
इस वर्ष के केंद्रीय बजट ने कृषि और ग्रामीण परिवर्तन को नई दिशा प्रदान की है: प्रधानमंत्री
सरकार ने कृषि क्षेत्र को लगातार मजबूत किया है, प्रमुख प्रयासों से किसानों के जोखिम कम हुए हैं और उन्हें बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है: प्रधानमंत्री
यदि हम उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा दें, तो यह कृषि को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदल देगा: प्रधानमंत्री
निर्यात-उन्मुख उत्पादन बढ़ने से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित होगा: प्रधानमंत्री
मत्स्य पालन ग्रामीण समृद्धि के लिए एक उच्च मूल्य और उच्च प्रभाव वाला क्षेत्र और निर्यात वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन सकता है: प्रधानमंत्री
सरकार एग्रीस्टैक के माध्यम से कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना विकसित कर रही है: प्रधानमंत्री
प्रौद्योगिकी तभी परिणाम देती है जब सिस्टम इसे अपनाएं हैं, संस्थान इसे एकीकृत करें हैं और उद्यमी इस पर नवाचार करें: प्रधानमंत्री

नमस्कार !

बजट वेबिनार सीरीज के तीसरे वेबिनार में, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं। इससे पहले, टेक्नोलॉजी, रिफॉर्म्स और इकोनॉमिक ग्रोथ जैसे अहम विषयों पर दो वेबिनार हो चुके हैं। आज, Rural Economy और Agriculture जैसे अहम सेक्टर पर चर्चा हो रही है। आप सभी ने बजट निर्माण में अपने मूल्यवान सुझावों से बहुत सहयोग दिया, और आपने देखा होगा बजट में आप सबके सुझाव रिफ्लेक्ट हो रहे हैं, बहुत काम आए हैं। लेकिन अब बजट आ चुका है, अब बजट के बाद उसके full potential का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और सरल तरीके से बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो। बजट का पाई-पाई पैसा जिस हेतु से दिया गया है, उसको परिपूर्ण कैसे करें? जल्द से जल्द कैसे करें? आपके सुझाव ये वेबिनार के लिए बहुत अहम है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा, ये सब हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। एग्रीकल्चर, भारत की लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट जर्नी का Strategic Pillar भी है, और इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है। करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पीएम किसान सम्मान निधि मिली है। MSP में हुए Reforms से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के क्लेम सेटल किए गए हैं। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है, और उन्हें एक बेसिक इकोनॉमिक सिक्योरिटी मिली है। इससे कृषि क्षेत्र का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज खाद्यान्न और दालों से लेकर तिलहन तक देश रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है। लेकिन अब, जब 21वीं सदी का दूसरा क्वार्टर शुरू हो चुका है, 25 साल बीत चुके हैं, तब कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना भी उतना ही आवश्यक है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं। मुझे विश्वास है, इस वेबिनार में आप सभी के बीच हुई चर्चा, इससे निकले सुझाव, बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।

साथियों,

आज दुनिया के बाजार खुल रहे हैं, ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ओरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा आवश्य़क है। हमारे पास Diverse Climate है, हमें इसका पूरा फायदा उठाना है। एग्रो क्लाइमेटिक जोन, उस विषय में हम बहुत समृद्ध है। इस साल का बजट इन सब बातों के लिए अनगिनत नए अवसर देने वाला बजट है। प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की दिशा तय करता है, और एक्सपोर्ट स्ट्रेंथ को बढ़ावा देता है। बजट में हमने high value agriculture पर फोकस किया है। नारियल, काजू, कोको, चंदन, ऐसे उत्पादों के regional-specific promotion की बात कही है, और आपको मालूम है, दक्षिण के हमारे जो राज्य हैं खासकर केरल है, तमिलनाडु है, नारियल की पैदावार बहुत करते हैं। लेकिन अब वो क्रॉप, वो सारे पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उसकी वो क्षमता नहीं रही है। केरल के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो, तमिलनाडु के किसानों को अतिरिक्त लाभ हो। इसलिए इस बार कोकोनट पर एक विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा।

साथियों,

नॉर्थ ईस्ट की तरफ देखें, अगरवुड बहुत कम लोगों को मालूम है, जो ये अगरबत्ती शब्द है ना, वो अगरवुड से आया हुआ है। अब हिमालयन राज्यों में टेम्परेट नट क्रॉप्स, और इन्हें बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। जब एक्सपोर्ट ओरिएंटेड प्रोडक्शन बढ़ेगा, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए रोजगार सृजन होगा। इस दिशा में एक coordinated action कैसे हो, आप सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर जरूर मंथन करें। अगर हम मिलकर High Value Agriculture को स्केल करते हैं, तो ये एग्रीकल्चर को ग्लोबली कंपेटिटिव सेक्टर में बदल सकता है। एग्री experts, इंडस्ट्री और किसान एक साथ कैसे आएं, किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए किस तरह से गोल्स सेट किए जाएं, क्वालिटी, ब्रांडिंग और स्टैंडर्ड्स, ऐसे हर पहलू, इन सबको कैसे प्रमोट किया जाए, इन सारे विषयों पर चर्चा, इस वेबिनार को, इसके महत्व को बढ़ाएंगे। मैं एक और बात आपसे कहना चाहूंगा। आज दुनिया हेल्थ के संबंध में ज्यादा कॉनशियस है। होलिस्टिक हेल्थ केयर और उसमें ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड, इस पर बहुत रुचि है। भारत में हमें केमिकल फ्री खेती पर बल देना ही होगा, हमें नेचुरल फार्मिंग पर बल देना होगा। नेचुरल फार्मिंग से, केमिकल फ्री प्रोडक्ट से दुनिया के बाजार तक पहुंचने में हमारे लिए एक राजमार्ग बन जाता है। उसके लिए सर्टिफिकेशन, लेबोरेटरी ये सारी व्यवस्थाएं सरकार सोच रही है। लेकिन आप लोग इसमें भी जरूर अपने विचार रखिए।

साथियों,

एक्सपोर्ट बढ़ाने में एक बहुत बड़ा फैक्टर फिशरीज सेक्टर का पोटेंशियल भी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश भी है। आज हमारे अलग-अलग तरह के जलाशय, तालाब, ये सब मिलाकर लगभग 4 लाख टन मछली उत्पादन होता है। जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना मौजूद है। अब विचार कीजिए आप, 4 लाख टन से हम अतिरिक्त 20 लाख टन जोड़ दें, तो हमारे गरीब मछुआरे भाई-बहन हैं, उनकी जिंदगी कैसी बदल जाएगी। हमारे पास Rural Income को डायवर्सिफाई करने का अवसर है। फिशरीज एक्सपोर्ट ग्रोथ का बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है, दुनिया में इसकी मांग है। इस वेबिनार से अगर बहुत ही प्रैक्टिकल सुझाव निकलते हैं, तो कैसे रिज़रवॉयर, उसकी पोटेंशियल की सटीक मैपिंग की जाए, कैसे क्लस्टर प्लानिंग की जाए, कैसे फिशरीज डिपार्टमेंट और लोकल कम्युनिटी के बीच मजबूत कोऑर्डिनेशन हो, तो बहुत ही उत्तम होगा। हैचरी, फीड, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग, एक्सपोर्ट, उसके लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स, हर स्तर पर हमें नए बिजनेस मॉडल विकसित करने ही होंगे। ये Rural Prosperity, ग्रामीण समृद्धि के लिए, वहां की हाई वैल्यू, हाई इम्पैक्ट सेक्टर के रूप में परिवर्तित करने का एक अवसर है हमारे लिए, और इस दिशा में भी हम सबको मिलकर काम करना है, और आप आज जो मंथन करेंगे, उसके लिए, उस कार्य के लिए रास्ता बनेगा।

साथियों,

पशुपालन सेक्टर, ग्रामीण इकोनॉमी का हाई ग्रोथ पिलर है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मिल्क प्रोड्यूसर है, Egg प्रोडक्शन में हम दूसरे स्थान पर है। हमें इसे और आगे ले जाने के लिए ब्रीडिंग क्वालिटी, डिजीज प्रिवेंशन और साइंटिफिक मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। एक और अहम विषय पशुधन के स्वास्थ्य का भी है। मैं जब One Earth One Health की बात करता हूं, तो उसमें पौधा हो या पशु, सबके स्वास्थ्य की बात शामिल है। भारत अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर है। फुट एंड माउथ डिजीज, उससे पशुओं को बचाने के लिए सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत टेक्नोलॉजी का विस्तार किया जा रहा है। हमारी सरकार में अब पशुपालन क्षेत्र के किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड का भी लाभ मिल रहा है। निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एनिमल हसबेंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड की शुरुआत भी की गई है, और आपको ये पता है हम लोगों ने गोबरधन योजना लागू की है। गांव के पशुओं के निकलने वाला मलमूत्र है, गांव का जो वेस्ट है, कूड़ा-कचरा है। हम गोबरधन योजना में इसका उपयोग करके गांव भी स्वच्छ रख सकते हैं, दूध से आय होती है, तो गोबर से भी आय हो सकती है, और एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में गैस सप्लाई में भी ये गोबरधन बहुत बड़ा योगदान दे सकता है। ये मल्टीपर्पज बेनिफिट वाला काम है, और गांव के लिए बहुत उपयोगी है। मैं चाहूंगा कि सभी राज्य सरकारें इसको प्राथमिकता दें, इसको आगे बढ़ाएं।

साथियों,

हमने पिछले अनुभवों से समझा है कि केवल एक ही फसल पर टिके रहना किसान के लिए जोखिम भरा है। इससे आय के विकल्प भी सीमित हो जाते हैं। इसलिए, हम crop diversification पर फोकस कर रहे हैं। इसके अलावा, National Mission on Edible Oils And Pulses, National Mission on Natural Farming, ये सभी एग्रीकल्चर सेक्टर की ताकत बढ़ा रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं एग्रीकल्चर स्टेट सब्जेक्ट है, राज्यों का भी एक बड़ा एग्रीकल्चर बजट होता है, हमें राज्यों को भी निरंतर प्रेरित करना है कि वो अपना दायित्व निभाने में, हम उनको कैसे मदद दें, हमारे सुझाव उनको कैसे काम आएं। राज्य का भी एक-एक पैसा जो गांव के लिए, किसान के लिए तय हुआ है, वो सही उपयोग हो। हमें बजट प्रावधानों को जिला स्तर तक मजबूत करना होगा। तभी नई पॉलिसीज का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सकता है।

साथियों,

ये टेक्नोलॉजी की सदी है और सरकार का बहुत जोर एग्रीकल्चर में टेक्नोलॉजी कल्चर लाने पर भी है। आज e-NAM के माध्यम से मार्केट एक्सेस का डेमोक्रेटाइजेशन हुआ है। सरकार एग्रीस्टैक के जरिए, एग्रीकल्चर के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है। इसके तहत डिजिटल पहचान, यानी किसान आईडी बनाई जा रही है। अब तक लगभग 9 करोड़ किसानों की किसान आईडी बन चुकी है, और लगभग 30 करोड़ भूमि पार्सलों का डिजिटल सर्वे किया गया है। भारत-विस्तार जैसे AI आधारित प्लेटफॉर्म, रिसर्च इंस्टीट्यूशंस और किसानों के बीच की दूरी कम कर रहे हैं।

लेकिन साथियों,

टेक्नोलॉजी तभी परिणाम देती है, जब सिस्टम उसे अपनाएं, संस्थाएं उसे इंटीग्रेट करें और एंटरप्रेन्योर्स उस पर इनोवेशन खड़ा करें। इस वेबिनार में आपको इससे जुड़े सुझावों को मजबूती से सामने लाना होगा। हम टेक्नोलॉजी को कैसे सही तरीके से इंटीग्रेट करें, इस दिशा में इस वेबिनार से निकले सुझावों की बहुत बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

हमारी सरकार ग्रामीण समृद्धि के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वामित्व योजना, पीएम ग्रामीण सड़क योजना, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मदद, इसने रूरल इकोनॉमी को निरंतर मजबूत किया है। लखपति दीदी अभियान की सफलता को भी हमें नई ऊंचाई देनी है। अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक, 2029 तक 3 करोड़ में और 3 करोड़ जोड़ना है, और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। ये लक्ष्य और तेजी से कैसे प्राप्त किया जाए, इसे लेकर भी आपके सुझाव महत्वपूर्ण होंगे।

साथियों,

देश में स्टोरेज का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। लाखों गोदाम बनाए जा रहे हैं। स्टोरेज के अलावा एग्री एंटरप्रेन्योर्स प्रोसेसिंग, सप्लाई चैन, एग्री-टेक, एग्री-फिनटेक, एक्सपोर्ट, इन सब में इनोवेशन और निवेश बढ़ाना आज समय की मांग है। मुझे विश्वास है आज जो आप मंथन करेंगे, उससे निकले अमृत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी। आप सबको इस वेबिनार के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि जमीन से जुड़े हुए विचार, जड़ों से जुड़े हुए विचार, इस बजट को सफल बनाने के लिए, गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बहुत काम आएंगे। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।