प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से 78वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित किया।
देखें कार्यक्रम की कुछ झलकियां


















प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से 78वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित किया।
देखें कार्यक्रम की कुछ झलकियां


















प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत में रचित सुभाषितम् को साझा किया, जिसमें पावन पृथ्वी को राष्ट्र की शक्ति के स्रोत के रूप में वर्णित किया गया है।
“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।
यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।
सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”
सुभाषितम् का अर्थ है कि पृथ्वी, जो महासागरों के रूप में जल से परिपूर्ण है और बाहरी रूप से जल से घिरी है, जिसे विद्वानों ने अपने ज्ञान से जाना है और जिसका हृदय विशाल आकाश में शाश्वत सत्य से ओत-प्रोत है - वह पृथ्वी एक महान राष्ट्र के रूप में हमारी ऊर्जा और शक्ति को बनाए रखे।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा;
“यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।
यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।
सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥”
यार्णवेऽधि सलिलमग्र आसीद्यां मायाभिरन्वचरन्मनीषिणः।
— Narendra Modi (@narendramodi) March 10, 2026
यस्या हृदयं परमे व्योमन्त्सत्येनावृतममृतं पृथिव्याः।
सा नो भूमिस्त्विषिं बलं राष्ट्रे दधातूत्तमे॥ pic.twitter.com/mfz8yB6SIq