फिक्की के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की
प्रधानमंत्री ने इंडस्ट्रीज से उनके सीएसआर पहल के तहत साफ-सफाई की दिशा में और अधिक सक्रिय होने का आग्रह किया
प्रधानमंत्री ने फिक्की से आग्रह किया कि वह भारतीय उद्योग को कृषि उत्पादों, कपड़ा और रक्षा विनिर्माण आदि प्रमुख क्षेत्रों में विकास की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करे

भारतीय वाणिज्‍य और उद्योग मंडल संघ (फिक्‍की) के 11 सदस्‍यीय प्रतिनिधिमंडल ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी से भेंट की।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्‍यों ने व्‍यवसाय को आसान बनाने, और मेक इन इंडिया पहल सहित केन्‍द्र सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्‍न कदमों की सराहना की।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्‍यों ने फिक्‍की के तत्‍वावधान में भारत स्‍वच्‍छता गठबंधन की शुरूआत के बारे में भी प्रधानमंत्री को जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने उद्योग से आग्रह किया कि वह सीएसआर पहल के अंतर्गत सफाई के प्रति और अधिक सक्रिय बने।



प्रधानमंत्री ने फिक्‍की से आग्रह किया कि वह प्रमुख क्षेत्रों जैसे कृषि उत्‍पादों, वस्‍त्र और रक्षा संबंधी निर्माण में वृद्धि की दिशा में कार्य करे। उन्‍होंने प्रमुख उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे रेलवे सहित बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के लिए केन्‍द्र सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्‍न कदमों का लाभ उठाएं।

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कैबिनेट ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने को मंजूरी दी
May 05, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज संसद में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन करके भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना है।

बिंदुवार विवरण:

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में 4 की वृद्धि अर्थात् 33 से बढ़ाकर 37 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) करने का प्रावधान है।

प्रमुख प्रभाव:

न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि से सर्वोच्च न्यायालय अधिक कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, जिससे त्वरित न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

व्यय:

न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर होने वाला व्यय भारत की संचित निधि से पूरा किया जाएगा।

पृष्ठभूमि:

भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 (1) में अन्य बातों के साथ-साथ यह प्रावधान किया गया है कि “भारत का एक सर्वोच्च न्यायालय होगा जिसमें भारत का एक मुख्य न्यायाधीश और संसद के कानून द्वारा अधिक संख्या निर्धारित न किए जाने तक सात से अधिक अन्य न्यायाधीश नहीं होंगे…”।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए 1956 में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के तहत एक अधिनियम पारित किया गया था। अधिनियम की धारा 2 में न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 10 निर्धारित की गई थी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1960 द्वारा बढ़ाकर 13 कर दिया गया था और सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा बढ़ाकर 17 कर दिया गया था। हालांकि, मंत्रिमंडल द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) को 1979 के अंत तक 15 न्यायाधीशों तक सीमित था, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश के अनुरोध पर इस सीमा को हटाया दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 1986 ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 कर दी। इसके बाद, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2008 ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को मूल अधिनियम में सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम, 2019 के माध्यम से संशोधन करके अंतिम बार 30 से बढ़ाकर 33 (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) कर दिया गया था।