ग्रामीण इलाकों में सुलभ सड़कें और संपर्क सुविधाएं बुनियादी मानवीय जरूरतें हैं, खासकर गरीबों के लिए। वे गरीबी कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 2014 से पहले, हमारे गांव दुर्गम इलाकों और कमजोर परिवहन व्यवस्था की वजह से सामाजिक-आर्थिक विकास में पिछड़े थे। इन क्षेत्रों को बुनियादी विकास का भी अभाव था, जिसका लाभ केवल कुछ ही राज्यों को मिला था। उस समय ज्यादातर गांव बाजार, स्कूल, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य सामाजिक और कारोबारी सेवाओं तक पहुंच पाने के लिए इंतजार कर रहे थे। गरीबी कम करने और आजीविका बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों तक पहुंच दुर्लभ थी। महिला-पुरुष समानता और सामाजिक समावेशीकरण सिर्फ मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा दस्तखत किए सलाहकारी कागजात में ही सिमटा हुआ था।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में छह लाख से अधिक गांवों में से आधे से अधिक संपर्क रहित बस्तियों को जोड़ने के लिए बारहमासी सड़क संपर्क प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण कार्य विरासत में मिला। 2014 में केवल 55% गांव ही सड़क के माध्यम से जुड़े थे।
2014 में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने "सर्वोपरि नागरिक और सक्रिय शासन" नामक एक विजन प्रस्तुत किया। इसका उद्देश्य देश को अभूतपूर्व गति से विकास की राह पर ले जाना था।
प्रधानमंत्री मोदी, भारत के सभी हिस्सों को, जमीनी या डिजिटल रूप से जोड़ने के लिए वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने संबोधनों में कई बार यह बात दोहराई है कि भारत के विकासशील देश होने की कहानी अब बीते जमाने की बात हो गई है। 2014 के बाद से ग्रामीण सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट ने परिवहन की दक्षता बढ़ाने में मदद की है। यात्रा समय में कमी से आम लोगों और उद्योगों दोनों को लाभ हुआ है।
भारत सरकार ने गरीबी से लड़ने के लिए एक रणनीति के तहत संपर्क रहित बस्तियों को जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) शुरू की। मोदी सरकार ने न केवल संपर्क लक्ष्यों को पूरा करने के लिए काम किया, बल्कि उच्च और सुसंगत टेक मैनेजमेंट स्टैंडर्ड का पालन करते हुए ग्रामीण सड़क नेटवर्क के स्थायी प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास किए।
PMGSY ग्रामीण जीवन में परिवर्तन ला रही है। यह ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा, परिवहन और शिक्षा के अवसर उपलब्ध करा कर उनके जीवन स्तर को ऊपर उठा रही है। 2023 तक, 99% गांव सड़कों से जुड़ चुके हैं। 2013-14 में जहां प्रतिदिन 11.6 किलोमीटर सड़क बनाई जा रही थी, वहीं 2022-23 में यह गति बढ़कर 28.3 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई है। जुलाई 2023 तक कुल 7,42,398 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया है, जबकि मार्च 2014 तक यह संख्या 3,81,393 किलोमीटर थी। योजना के तहत अब ग्रामीण विकास केंद्रों की बढ़ती यातायात आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 5.5 मीटर चौड़ी ग्रामीण सड़कें बनाई जा रही हैं।
2023 के वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में PMGSY के सड़क निर्माण लक्ष्य को महत्वपूर्ण रूप से पार कर लिया गया। इस अवधि में 6,403 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया, जो 6,000 किलोमीटर के लक्ष्य को 106 प्रतिशत से अधिक पार कर गया। यह उपलब्धि उल्लेखनीय है क्योंकि यह पूंजीगत खर्च बढ़ाने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के अनुरूप है। यह ग्रामीण विकास, आर्थिक विकास और भारत में ग्रामीण आबादी की बेहतर स्थिति की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यह अच्छी तरह से क्रियान्वित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स द्वारा देश में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता को प्रदर्शित करता है। स्वाभाविक रूप से, बेहतर सड़क संपर्क एग्रीकल्चर सप्लाई चेन को बेहतर बनाता है, जिससे किसान अपने उत्पादों को बाजारों में अधिक कुशलता से पहुंचा सकते हैं। इससे फसल कटाई के बाद नुकसान कम होता है और किसानों की आय बढ़ती है। सड़क निर्माण लक्ष्यों को पार करने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं, बाजारों और शिक्षा तक पहुंच में सुधार हुआ है। कोई आश्चर्य नहीं कि उपरोक्त और इसी तरह के अन्य सकारात्मक गुणक प्रभावों के कारण, नीति आयोग पुष्टि करता है कि पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है।
प्रगति (Pro-Active Governance and Timely Implementation - PRAGATI) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने के बाद लाखों करोड़ के रुके हुए प्रोजेक्ट तेजी से पूरे होने लगे। इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण अभूतपूर्व स्पीड और स्केल पर हुआ। सिस्टम में एक स्थायी परिवर्तन लाया गया, जिसका असर इंफ्रास्ट्रक्चर के सभी क्षेत्रों, विशेष रूप से सड़क क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और विजन में आज भारत प्रो-एक्टिव गवर्नेंस की राष्ट्रीय सफलता का उत्सव मना रहा है। पूरा राष्ट्रीय नेतृत्व स्वामी विवेकानंद, सरदार पटेल और डॉ बीआर अंबेडकर जैसे अपने आदर्शों के हर शब्द पर खरा उतरा है, जिन्होंने यह संदेश फैलाया कि जब विशेषाधिकार टूटते हैं और समानता सुनिश्चित होती है तो समाज का विकास होता है। भारत समावेशी और अविश्वसनीय रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, बड़ी उपलब्धियों को हासिल करते हुए हम सभी को गौरवान्वित कर रहा है।




