"Shri Narendra Modi delivers Shri Ram Keynote Oration at Delhi University’s Prestigious Shri Ram College of Commerce"
"Development alone is the solution to all problems: Shri Modi"
"I am sure the youth of India will fulfill Swami Vivekananda’s dream of Jagad Guru Bharat: Shri Modi"
"This is my 4th term as Chief Minister and from experience I can say that with the same laws, same rules, regulations, same people, we can move ahead & do lots: Shri Modi"
"I want that this nation does not see youth as new age voter but they are the New Age Power: Shri Modi"
"Our development model is based on 3 aspects- development of agriculture, industry and services sector. We want all 3 sectors to grow where each supports the other so that state economy is never in trouble: CM"
"Optimists say the glass is half full, pessimists say the glass is half empty- I say, this glass full- filled half with air, half with water: Shri Modi"
"Let us make the world our market and send our goods to the world: Shri Modi"
"I feel Government has no business to be in business. I believe in minimum government, maximum Governance: Shri Modi"
"Shri Modi receives standing ovation after his address. Record numbers of students attend the lecture"

दिल्ली में श्री राम मेमोरियल ओरेशन के माध्यम से युवाओं को मुख्यमंत्री का दिशा दर्शक संबोधन

युवाओं को न्यू एज वोटर के तौर पर नहीं बल्कि न्यू एज ऑफ पॉवर के रूप में देखें राजनीतिज्ञ - मुख्यमंत्री

दो हजार से अधिक युवाओं ने श्री नरेन्द्र मोदी का अभूतपूर्व उत्साह और उमंग से स्वागत किया

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की युवा पीढ़ी को विश्व में हिन्दुस्तान के सामर्थ्य का साक्षात्कार कराने का प्रेरक आह्वान बुधवार को नई दिल्ली में श्री राम मेमोरियल ओरेशन के माध्यम से दिया। व्यापार प्रबंध के शिक्षा क्षेत्र में भारत की प्रख्यात श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स की ओर से आयोजित बिजनेस कॉन्क्लेव-२०१३ के समापन समारोह में २००० से अधिक युवक-युवतियों ने पूरे जोशो-खरोश के साथ मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

हिन्दुस्तान की युवा पीढ़ी की शक्ति और सामर्थ्य पर संपूर्ण भरोसा व्यक्त करते हुए श्री मोदी ने कहा कि २१वीं सदी ज्ञानयुग है और भारत के पास ऐसी सक्षम युवाशक्ति है, जिससे वह एक बार फिर ज्ञान की इस सदी में विश्व की मनुष्यजाति को नेतृत्व प्रदान कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, उन्हें पूरी श्रद्धा है कि सवा सौ वर्ष पूर्व स्वामी विवेकानंद ने अपने बौद्धिक, आध्यात्मिक ज्ञान कौशल से समग्र विश्व को चकित कर दिया था और उनकी १५०वीं जन्म जयंती के अवसर पर भारत की युवाशक्ति ही भव्य एवं दिव्य भारत का निर्माण कर सकती है। श्री मोदी ने कहा कि, वे पूर्ण रूप से आशावादी हैं और देश की आजादी के बाद के छह दशक में भारत में व्याप्त निराशा और हताशा के माहौल को बदलने के लिए युवाशक्ति पर संपूर्ण भरोसा रखते हैं। उन्होंने कहा कि आज से डेढ़ दशक पूर्व हिन्दुस्तान की छवि गरीब, पीड़ित और पिछड़े देश की थी, जिसे बदलने में इस देश के युवाओं ने अपनी शक्ति का साक्षात्कार करवाया है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान के लिए दुनिया का दृष्टिकोण बदलने में कोई राजनेता नहीं बल्कि युवा ही सफल रहे हैं।

गुजरात ने यह भरोसा दिलाया है कि किसी भी व्यवस्था और स्थिति को बदला जा सकता है। गुजरात की धरती पर से ही आजादी के आंदोलन की दो अलग-अलग विचारधाराओं ने नेतृत्व किया था, परिणामस्वरूप सशस्त्र क्रांतिकारियों तथा महात्मा गांधी व सरदार पटेल के अहिंसक आंदोलन से देश को स्वराज्य मिला। लेकिन आजादी के ६० वर्षों पश्चात आज भी हम सुराज्य की अनुभूति नहीं कर सके। बिना सुशासन सुराज्य नहीं आता और सुशासन (गुड गवर्नेंस) की दिशा में गुजरात ने देश और दुनिया को प्रतीति करवाई है। गुजरात का गुड गवर्नेंस मॉडल प्रो-पीपुल प्रोएक्टिव गुड गवर्नेंस (पी२जी२)फार्मुले पर आधारित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हिन्दुस्तान विश्व का सर्वाधिक युवा देश है और देश की आबादी का ६५ फीसदी हिस्सा ३५ वर्ष तक की आयुसीमा वाली युवाशक्ति का है। हिन्दुस्तान के सम्मुख आज सबसे बड़ी चुनौती देश में मौजूद विपुल अवसरों को युवाओं को उपलब्ध करवाने की है। उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति की वजह से ही यह देश बर्बाद हुआ है और अब समय की मांग है कि देश को विकास की राजनीति के मार्ग पर ले चलें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वर्तमान राजनीति में युवाओं को न्यू एज वोटर समझा जाता है, लेकिन यही युवा देश का भविष्य हैं और मैं उन्हें न्यू एज ऑफ पॉवर के रूप में मानता हूं।

श्री मोदी ने कहा कि २१वीं सदी ज्ञान की सदी है और इस ज्ञान सदी में भारत ही विश्व का नेतृत्व करेगा, लेकिन इसके लिए स्किल, स्पीड और स्केल की जरूरत है। इस सन्दर्भ में मुख्यमंत्री ने गुड गवर्नेंस के नये आयामों, नई मानसिकता, जनसहयोग और परिस्थिति में बदलाव की सफलतागाथा के अनेक दृष्टांत पेश किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व की प्रगतियात्रा में यदि भारत को अपनी सर्वोपरिता स्थापित करनी है तो सुराज्य की अनुभूति करवानी ही होगी। आज देश में व्याप्त निराशा के वातावरण को देखते हुए सभी ऐसा महसूस करते हैं कि स्थिति को बदला नहीं जा सकता। लेकिन मैं पूरी तरह से आशावादी हूं। कोई भी ग्लास पानी से आधा भरा हुआ है या आधा खाली है, इसे देखने की दो दृष्टि होती हैं, और मेरी सोच कुछ अलग है। मैं मानता हूं कि यह ग्लास आधा पानी से और आधा हवा से भरा हुआ है। गुजरात में वही व्यवस्था, वही संविधान, वही सरकारी तंत्र, मानवशक्ति और संसाधन होने के बावजूद हमने सुराज्य की दिशा में स्थिति को बदलने में सफलता हासिल की है। इस सन्दर्भ में उन्होंने मिनिमम गवर्मेंट और मेक्सिमम गवर्नेंस की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास कर गुजरात ने देश को विकास की राजनीति का मार्ग बतलाया है। उन्होंने कहा कि हम गरीब या पिछड़े नहीं हैं। हमारे पास बौद्धिक सामर्थ्य वाली विश्व की सबसे युवाशक्ति और प्राकृतिक संसाधन हैं।

जरूरत इस बात की है कि इस युवा और प्राकृतिक संसाधन का विकास के लिए विनियोग किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र के समान हिस्से पर होना चाहिए, जिसे गुजरात ने सफलतापूर्वक साबित कर बताया है। पानी की कमी से जूझता गुजरात आज कृषि क्षेत्र में १० वर्ष के दौरान १० फीसदी की सातत्यपूर्ण विकास दर वाला राज्य बना है। उन्होंने कहा कि गुजरात में हर दो वर्ष में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट आयोजित होती है। वहीं, मेरी सरकार के करीबन एक लाख कर्मचारी भरी दुपहरी में गांव-गांव खेतों में जाकर किसानों को लैब टू लैण्ड की वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित करते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि किसानों को जमीन सुधार के लिए सॉइल हैल्थ कार्ड दिये गए हैं। इन सबके चलते किसान और पशुपालक समृद्धि की ओर अग्रसर हैं। पशु स्वास्थ्य मेलों के चलते करीब १२० पशुरोगों का खात्मा हुआ है और दूध के उत्पादन में ८० फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। दस वर्ष पूर्व २३ लाख गांठ कपास गुजरात में उत्पादित होता था, जो आज बढ़कर एक करोड़ २३ लाख गांठ तक जा पहुंचा है। गुजरात के किसानों ने विश्व के बाजारों में छा जाने के लिए फाइव एफ फार्मुला अपनाया है। जिसके तहत फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैब्रिक, फैब्रिक टू फैशन, फैशन टू फॉरेन जैसी दिशा अपनाई है। नतीजा यह कि, गांवों की क्रयशक्ति बढ़ी है और उससे राज्य की अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचा है। सेवा क्षेत्र में पर्यटन विकास से गुजरात विश्व के पर्यटन मानचित्र पर अंकित हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में गुजरात ने अनोखी पहल की है। दस वर्ष पूर्व जहां राज्य में ११ यूनिवर्सिटियां कार्यरत थी, जबकि आज इनकी संख्या बढ़कर ४१ हो गई है। इसमें भी विश्व की सर्वप्रथम फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी और देश की प्रथम रक्षाशक्ति यूनिवर्सिटी तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर्स एजुकेशन जैसी शैक्षणिक संस्थाएं गुजरात में युवाओं को अनेक अवसर प्रदान कर रही हैं। इसी तरह कौशल विकास के अनेक नये पाठ्यक्रम का विशाल फलक खड़ा किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिन्दुस्तान के पास जो शक्ति और सामर्थ्य की महान विरासत और विशाल युवाशक्ति का मानवबल है, ऐसे में भारत की ब्रांड इमेज खड़ी कर
मेड इन इंडिया द्वारा विश्व के बाजारों में अपनी सर्वोपरिता स्थापित की जा सकती है।

श्री मोदी ने विश्व बाजार में छा जाने के लिए उत्पादनों में जीरो डिफेक्ट प्रोडक्ट और पैकेजिंग स्ट्रेटेजी अपनाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत को एक बड़े बाजार के तौर पर स्वीकार करती है। लेकिन हमारा संकल्प यह होना चाहिए कि हम अपने सामर्थ्य से विश्व के बाजारों पर छा जाएं। मुख्यमंत्री ने स्वामी विवेकानंद के सपने और संकल्प को मूर्तिमंत करने का युवाशक्ति से अनुरोध करते हुए कहा कि देश के युवाओं का मिजाज ऐसा होना चाहिए कि, भारत के दिव्य-भव्य निर्माण के लिए समूचा विश्व देश के युवाओं की ओर नजर दौड़ाए, यही हमारा दायित्व है। उन्होंने हिन्दुस्तान के नौजवानों से दुनिया के समक्ष आंख से आंख मिलाकर अपने ज्ञान-कौशल की अनुभूति कराने का भी अनुरोध किया। इससे पूर्व श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के चेयरमैन अजय एस. श्रीराम ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत और अभिवादन किया, जबकि प्राचार्य श्री जैन ने आभार व्यक्त किया।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India-EU FTA: A trade deal that redefines India’s global economic position

Media Coverage

India-EU FTA: A trade deal that redefines India’s global economic position
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Arya Vaidya Sala has played a significant role in preserving, protecting and advancing Ayurveda: PM Modi
January 28, 2026
Ayurveda in India has transcended time and region, guiding humanity to understand life, achieve balance and live in harmony with nature: PM
We have consistently focused on preventive health, the National AYUSH Mission was launched with this vision: PM
We must adapt to the changing times and increase the use of modern technology and AI in Ayurveda: PM

नमस्कारम !

केरला के गवर्नर श्रीमान राजेंद्र आर्लेकर जी,आर्य वैद्य शाला से जुड़े सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों,

आज इस गरिमामय अवसर पर, आप सभी से जुड़ना मेरे लिए खुशी का अवसर है। आयुर्वेद को सहेजने, संरक्षित करने और आगे बढ़ाने में, आर्य वैद्यशाला का महत्वपूर्ण योगदान है। अपने 125 वर्षों की यात्रा में इस संस्था ने, आयुर्वेद को इलाज की एक सशक्त व्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। आज इस अवसर पर, मैं आर्य वैद्यशाला के संस्थापक,वैद्यरत्नम पी एस वरियर जी के योगदानों को याद करता हूं। आयुर्वेद के प्रति उनकी approach और लोक कल्याण के लिए उनका समर्पण, आज भी हमें प्रेरित करता है।

साथियों,

केरला की आर्य वैद्यशाला, भारत की उस उपचार परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसने सदियों से मानवता की सेवा की है। भारत में आयुर्वेद किसी एक काल या एक क्षेत्र में सीमित नहीं रहा। हर दौर में इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने जीवन को समझने, संतुलन बनाने, और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने का रास्ता दिखाया है। आज आर्य वैद्यशाला 600 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करती है, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में संस्था के अस्पताल, आयुर्वेदिक तरीके से मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिनमें दुनिया के 60 से अधिक देशों के मरीज शामिल होते हैं। आर्य वैद्यशाला ने ये भरोसा अपने काम से बनाया है। जब लोग कष्ट में होते हैं, तो आप सभी उनके लिए बहुत बड़ी उम्मीद बनते हैं।

साथियों,

आर्य वैद्यशाला के लिए सेवा, केवल एक विचार नहीं है,ये भावना उनके Action, Approach और Institutions में भी दिखाई देती है। संस्था का Charitable Hospital पिछले 100 वर्षों से, 100 वर्ष ये कोई कम समय नहीं है, 100 वर्षों से निरंतर लोगों की सेवा में जुटा है। इसमें अस्पताल से जुड़े सभी लोगों का योगदान है। मैं अस्पताल के वैद्य, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सभी लोगों का भी अभिनंदन करता हूं। चैरिटेबल अस्पताल की 100 वर्षों की यात्रा पूरी करने के लिए आप सब बधाई के पात्र हैं। केरला के लोगों ने आयुर्वेद की जिन परंपराओं को सदियों से जीवंत बनाए रखा है। आप उन परंपराओं का संरक्षण भी कर रहे हैं, संवर्धन भी कर रहे हैं।

साथियों,

देश में लंबे समय तक प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को साइलो में देखा जाता रहा। पिछले 10-11 वर्षों में इस अप्रोच में बड़ा बदलाव हुआ है। अब स्वास्थ्य सेवाओं को होलिस्टिक नजरिए से देखा जा रहा है। आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक, सिद्ध और योग, इन सबको हम एक Umbrella के नीचे लाए हैं, और इसके लिए विशेष तौर पर आयुष मंत्रालय बनाया गया है। हमने preventive health पर निरंतर फोकस किया है। इसी सोच के साथ, नेशनल आयुष मिशन लॉन्च किया गया, 12 हजार से अधिक आयुष वेलनेस सेंटर्स खोले गए, इन सेंटर्स में योग, preventive care, community health services, ये सब कुछ उपलब्ध कराई जाती हैं। हमने देश के अन्य अस्पतालों को भी आयुष सेवाओं से जोड़ा, आयुष दवाओं की regular supply पर भी ध्यान दिया। इसका उद्देश्य साफ है, कि भारत के परंपरागत चिकित्सा इस ज्ञान का लाभ, देश के कोने-कोने के लोगों को मिले।

साथियों,

सरकार की नीतियों का स्पष्ट प्रभाव आयुष सेक्टर पर दिखाई दिया है। AYUSH manufacturing sector तेज़ी से आगे बढ़ा है और इसका विस्तार हुआ है। भारतीय पारंपरिक वेलनेस को दुनिया तक पहुंचाने के लिए, सरकार ने Ayush Export Promotion Council की स्थापना की है। हमारी कोशिश है कि AYUSH products और services को, global markets में बढ़ावा मिल सके। इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव भी हम देख रहे हैं। साल 2014 में भारत से लगभग 3 हजार करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होते थे। वहीं अब भारत से 6500 करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होने लगे हैं। इसका बहुत बड़ा फायदा देश के किसानों को भी हो रहा है।

साथियों,

भारत आज AYUSH based Medical Value Travel के लिए, एक भरोसेमंद destination के रूप में भी उभर रहा है। इसलिए हमने, AYUSH Visa, जैसे कदम भी उठाए हैं। इससे विदेशों से आने वाले लोगों को आयुष चिकित्सा की बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।

साथियों,

आयुर्वेद जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धति को प्रमोट करने के लिए, सरकार हर बड़े मंच पर इसे गर्व से आगे रख रही है। चाहे ब्रिक्स देशों का सम्मेलन हो, या जी-20 देशों की बैठक हो, जहां भी अवसर मिला, मैंने आयुर्वेद को होलिस्टिक हेल्थ के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया। गुजरात के जामनगर में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन- WHO के Global Traditional Medicine Centre की स्थापना भी की जा रही है। जामनगर में ही Institute of Teaching and Research in Ayurveda, इसने काम करना शुरू कर दिया है। आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, गंगा नदी के किनारों पर औषधीय खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

साथियों,

आज मैं आप सभी से देश की एक और उपलब्धि साझा करना चाहता हूं। आप सभी जानते हैं कि अभी European Union के साथ trade agreement की ऐतिहासिक घोषणा हुई है। मुझे ये बताते हुए खुशी है कि ये trade agreement, Indian traditional medicine services और practitioners को एक बड़ा boost देगा। EU member states में जहाँ regulations मौजूद नहीं हैं, वहाँ हमारे AYUSH practitioners, भारत में हासिल की गई अपनी professional qualifications के आधार पर, अपनी services प्रदान कर सकेंगे। इसका बहुत बड़ा लाभ आयुर्वेद और योग से जुड़े हमारे युवाओं को होगा। इस एग्रीमेंट से यूरोप में आयुष wellness centers की स्थापना में भी मदद मिलेगी। आयुर्वेद-आयुष से जुड़े आप सभी महानुभावों को मैं इस एग्रीमेंट की बधाई देता हूं।

साथियों,

आयुर्वेद के माध्यम से भारत में सदियों से इलाज का काम होता रहा है। लेकिन ये भी दुर्भाग्य रहा है कि, हमें देश में और ज्यादातर विदेशों में, लोगों को आयुर्वेद का महत्व समझाना पड़ता है। इसकी एक बड़ी वजह है, एविडेंस बेस्ड रिसर्च की कमी, रिसर्च पेपरर्स की कमी, जब साइंस के सिद्धांतों पर आयुर्वेदिक पद्धति को परखा जाता है, तो लोगों का भरोसा और मजबूत होता है। इसलिए मुझे इस बात की खुशी है कि, आर्य वैद्यशाला ने आयुर्वेद को साइंस और रिसर्च की कसौटी पर लगातार परखा है। ये CSIR और I.I.T जैसे संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रही है। Drug Research, Clinical Research और कैंसर केयर पर भी आपका फोकस रहा है। आयुष मंत्रालय के सहयोग से, Cancer Research के लिए Centre of Excellence की स्थापना करना, इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

साथियों,

अब हमें बदलते समय के अनुसार, आयुर्वेद में आधुनिक टेक्नॉलजी और AI का उपयोग भी बढ़ाना चाहिए। बीमारी की संभावनाओं का पता लगाने के लिए, अलग-अलग पद्धितियों से इलाज के लिए, काफी कुछ इनोवेटिव किया जा सकता है।

साथियों,

आर्य वैद्यशाला ने दिखाया है कि परंपरा और आधुनिकता साथ चल सकती हैं, और स्वास्थ्य सेवा लोगों के जीवन में भरोसे का आधार बन सकती है। इस संस्था ने आयुर्वेद की पुरानी समझ को सहेजते हुए, आधुनिक जरूरतों को अपनाया है। इलाज को व्यवस्थित बनाया गया है और मरीजों तक सेवाएं पहुंचाई गई हैं। मैं आर्य वैद्यशाला को इस प्रेरक यात्रा के लिए फिर से बधाई देता हूं। मेरी कामना है कि यह संस्था आने वाले वर्षों में भी, इसी समर्पण और सेवा भावना के साथ लोगों के जीवन को बेहतर बनाती रहे। बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कारम।