देश के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को आधुनिक बनाने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट, विशेष रूप से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। ये डेडिकेटेड कॉरिडोर, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांतिकारी कड़ी हैं जिनका उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना, ट्रैफिक का बोझ कम करना और आर्थिक विकास को गति देना है। ये विशेष कॉरिडोर, जो केवल माल की आवाजाही के लिए आरक्षित हैं, अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये अहम मैन्युफैक्चरिंग हब को कंज्यूमर मार्केट्स से जोड़ते हैं। हालांकि, DFC की उपयोगिता महज साधारण लॉजिस्टिक्स से परे है; ये कृषि क्षेत्र की समृद्धि को विकसित करने और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं।
ये नए रास्ते लंबी, भारी और तेज रफ्तार वाली गाड़ियों को चलाकर माल ढुलाई को और अधिक कुशल बनाएंगे। इससे यात्रा का समय कम होगा और खर्चे भी बचेंगे। निर्यात-आयात में तेजी लाने के लिए, यह परियोजना रेलवे के हिस्से को बढ़ाने और DFC क्षेत्र में कारोबारियों और लॉजिस्टिक कंपनियों के लिए सप्लाई चेन में सुधार लाने का लक्ष्य रखती है। साथ ही, नए माल टर्मिनल, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और इनलैंड कंटेनर डिपो बनाने से DFC के विकास को बढ़ावा मिलने, कॉरिडोर के साथ इंडस्ट्रियल एक्टिविटी को बढ़ाने और परियोजना से प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार के कई अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
2005-06 के रेल बजट में, तत्कालीन यूपीए सरकार के रेल मंत्री ने DFC की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर भीड़भाड़ कम करने के लिए यात्री और माल सेवाओं को अलग करना था। हालांकि, 2014 से पहले इस परियोजना में कई अड़चनों, नीतिगत खामियों और गठबंधन की राजनीति के कारण अत्यधिक देरी का सामना करना पड़ा।
लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज DFC का निर्माण अभूतपूर्व गति से हो रहा है। सरकार ने इन कॉरिडोर के निर्माण और कार्यान्वयन प्रक्रिया को तेज कर दिया है, जिससे प्रारंभिक लाभ प्राप्त करने के लिए अहम सेक्शन को समय पर पूरा करने और चालू करने को सुनिश्चित किया जा रहा है। 2014 से पहले इस परियोजना में भारी देरी का मुख्य कारण भूमि अधिग्रहण में आने वाली समस्याएं थीं। लेकिन तब से बहुत कुछ बदल गया है, खासकर इन समस्याओं को सुलझाने के लिए उठाए गए जोरदार कदमों के कारण। इनमें राज्य सरकारों को अधिक धन देना, परियोजनाओं की बारीकी से निगरानी करना, ठेकों और भूमि अधिग्रहण के मुद्दों को सुलझाना तथा उनसे जुड़ी समस्याओं का समाधान करना शामिल है। इन समन्वित कार्यों ने परियोजना की गति को काफी तेज कर दिया है, जोकि इसके समय पर पूरा होने की गारंटी के लिए आवश्यक हैं।
रेल मंत्रालय द्वारा दो DFC बनाए जा रहे हैं: ईस्टर्न DFC , जो लुधियाना से सोननगर तक 1337 किलोमीटर लंबा है और दूसरा वेस्टर्न DFC, जो JNPT से दादरी तक 1506 किलोमीटर की लंबाई का होगा। अभी तक कुल 2843 किलोमीटर के DFC में से 2196 किलोमीटर (77% से अधिक) का निर्माण पूरा हो चुका है, जिसमें ईस्टर्न DFC में 1150 किलोमीटर और वेस्टर्न DFC में 1046 किलोमीटर शामिल हैं। उल्लेखनीय रूप से, ईस्टर्न DFC में भौपुर-दादरी, भीमसेन-सुजातपुर और छेओकी से चुनार जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों का निर्माण पूरा हो चुका है, जो कुल 799 किलोमीटर लंबा है। वेस्टर्न DFC में रेवाड़ी से सानंद के लिए 811 किलोमीटर लंबी लाइन पहले से ही चालू है। वेस्टर्न DFC का 90% हिस्सा 2023 तक चालू हो जाएगा और 2024 तक JNPT तक इसका आखिरी हिस्सा पूरा हो जाएगा। फिलहाल DFC पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में चालू है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ईस्ट कोस्ट कॉरिडोर, वेस्ट कोस्ट कॉरिडोर आदि तथा और अधिक फ्रेट कॉरिडोर डेवलप करने पर विचार कर रही है।
भारत जैसे कृषि प्रधान देशों में, जहां आय का प्राथमिक स्रोत कृषि उपज है, DFC ग्रामीण विकास और समृद्धि के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों को अक्सर फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान, बाजार तक पहुंच और यातायात जाम जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। DFC शहरी क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों के बीच सुगम संपर्क स्थापित करके इस कमी को पूरा करते हैं, जिससे ट्रेड और कॉमर्स के लिए नए रास्ते खुलते हैं।
कृषि पर निर्भर भारत में वेस्टर्न DFC का खास महत्व है। यह हरियाणा और राजस्थान में कृषि और उससे जुड़े उद्योगों को नई रफ्तार देगा। महेंद्रगढ़, जयपुर, अजमेर और सीकर जैसे शहरों में भी नई जान आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी से इन राज्यों के मैन्युफैक्चरर और उद्यमियों को घरेलू और वैश्विक बाजारों तक तेजी से पहुंच मिलेगी, जिससे लागत भी कम होगी। साथ ही, गुजरात और महाराष्ट्र के पोर्ट तक जल्दी और कम खर्चे में पहुंच मिलने से उम्मीद है कि इस क्षेत्र में नए निवेश का रास्ता खुलेगा।
DFC किसानों की मदद करने के कई तरीके अपनाता है, जिनमें से प्रमुख है ट्रासंपोर्ट खर्च और समय कम करना। तेजी से और आसान बाजार पहुंच से किसान अपने फल-सब्जियों की ताजगी और गुणवत्ता बनाए रखकर लाभ को अधिकतम और बर्बादी को न्यूनतम कर सकते हैं। साथ ही, सामान और सेवाओं की विश्वसनीयता तेज डिलीवरी सुनिश्चित करती है, जिससे किसान बाजार की मांग का लाभ उठा सकते हैं और अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। नतीजतन, कृषि-औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलता है। ये कॉरिडोर ग्रामीण क्षेत्रों को मैन्युफैक्चरिंग सेंटर्स से जोड़कर सप्लाई चेन के साथ निवेश, मूल्य वृद्धि और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देते हैं। सामानों की सुचारू आवाजाही सप्लाई चेन को मजबूत बनाती है, जिससे किसानों और कंपनियों को अचानक रुकावटों से बचाया जा सकता है। ये रुकावटें कई वजहों से हो सकती हैं, जैसे कि सड़कों पर जाम लग जाना या प्राकृतिक आपदाएं आना इत्यादि। सुचारू परिवहन सुनिश्चित करके DFC किसानों और कंपनियों को इन परेशानियों से होने वाले नुकसान से बचाता है।
IGDP ग्रोथ, निर्यात प्रतिस्पर्धा और रीजनल इंटीग्रेशन सभी DFC की स्थापना से सहायता प्राप्त करते हैं। ये कॉरिडोर, कनेक्टिविटी में सुधार और लॉजिस्टिक कॉस्ट को कम करके इकोनॉमिक डाइवर्सिटी, कारोबारी संबंधों और निवेश को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा, DFC से समाज को मिलने वाले लाभों में प्रदूषण में कमी, बेहतर वायु गुणवत्ता और सामान्य कल्याण में वृद्धि शामिल है।
पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) को प्राथमिकता दे रही है। इन कॉरिडोर में माल ढुलाई में क्रांति लाने, किसानों को सशक्त बनाने और देश की अर्थव्यवस्था को तेज गति देने की क्षमता है। DFC के विकास को प्राथमिकता देकर और उन्हें आसान बनाने वाली नीतियों को लागू करके, मोदी सरकार एक अधिक उत्पादक, समावेशी और कुशल कृषि क्षेत्र और अर्थव्यवस्था की नींव रख रही है।




