केंद्रीय शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले एक दशक में भारत की साक्षरता दर में उल्लेखनीय प्रगति के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की है। महिला साक्षरता में वृद्धि के कारण भारत की ग्रामीण साक्षरता दर 2023-24 में उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 77.5% हो गई है।

प्रधान ने कहा, "कांग्रेस के शासन में शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई थी। छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अंतहीन संघर्ष के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला था और देश के शीर्ष संस्थान विशेषाधिकार प्राप्त अभिजात वर्ग के नियंत्रण में थे। इसके विपरीत, पीएम मोदी के नेतृत्व में यह दुष्चक्र टूट गया है। ग्रामीण साक्षरता 2011 में 67.77% से बढ़कर 2023-24 में प्रभावशाली 77.5% हो गई है, जबकि महिला साक्षरता 57.93% से बढ़कर 74.6% हो गई है। यह वह बदलाव है जो हमने देखा है।" उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के सुधारों ने इस बदलाव को संभव बनाया।

उन्होंने आगे बताया कि पीएम मोदी के प्रयासों से न केवल शहरी क्षेत्रों में बल्कि देश के सबसे दूरदराज के कोनों में भी शिक्षा अधिक समावेशी और सुलभ हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा, "21वीं सदी में भारत का उत्थान शिक्षा के बिना अधूरा है। पीएम मोदी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी पीछे न छूटे। उनके सुधार भारत को एक ऐसे भविष्य की ओर ले जा रहे हैं जहां शिक्षा की कोई सीमा नहीं है।"

प्रधान ने कांग्रेस पर 70 साल में भारत को मात्र 7 एम्स देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "आज, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत में 23 एम्स हैं, 700 से ज़्यादा मेडिकल कॉलेज हैं, 50,000 से ज़्यादा कॉलेज हैं और एमबीबीएस तथा आईआईटी सीटों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। ये संख्याएँ उन परिवर्तनकारी सुधारों के बारे में बहुत कुछ बताती हैं, जिन्होंने भारत के शैक्षिक परिदृश्य को नया रूप दिया है।"

इस संदर्भ में उन्होंने शिक्षा सुधारों में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "पहले दूरदराज के इलाकों में शिक्षा की स्थिति बहुत खराब थी। कांग्रेस सरकार ने उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में डिजिटल इंडिया मिशन, नई शिक्षा नीति, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, पीएम-श्री योजना, विद्यालक्ष्मी योजना और उल्लास योजना जैसी पहलों ने शिक्षा और कौशल विकास को नई ऊंचाई दी है।"

प्रधान ने कहा, "जब हम 2015 में शुरू हुए 'डिजिटल इंडिया मिशन' की बात करते हैं, तो इसने स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया है। देश भर में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म को बढ़ाने के लिए कई पहल लागू की गई हैं। इस बीच, 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना न केवल शिक्षा में लैंगिक समानता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि जन्म के समय राष्ट्रीय लिंगानुपात में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दूसरी ओर, पीएम मोदी के मार्गदर्शन में 'नई शिक्षा नीति' छात्रों के समग्र विकास को सुनिश्चित करती है।"

उन्होंने ‘उल्लास’ कार्यक्रम पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला और कहा, "यह एक अनूठी पहल है जो 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के वयस्कों को, जो औपचारिक शिक्षा से वंचित थे, अपनी पढ़ाई पूरी करने का अवसर प्रदान करती है। इस कार्यक्रम के लिए वित्तीय आवंटन ₹1,037 करोड़ से अधिक है, और 2 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी पहले ही इसमें शामिल हो चुके हैं। कुलमिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी की पहल ने वयस्क शिक्षा की परिभाषा को पूरी तरह से बदल दिया है।"

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प्रधानमंत्री ने निःस्वार्थ सेवा भावना के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
August 07, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने निःस्वार्थ सेवा के गुण और दूसरों के कल्याण के लिए बिना किसी अपेक्षा के कार्य करने के महान आदर्श को दर्शाने वाला एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया:

"किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्।

स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥"

प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर पोस्ट किया:

किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्।

स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥