प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित मुख्यमंत्रियों की परिषद में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एनसीटीसी को वापस लेने की पूरजोर मांग की
राज्यों के अधिकार छीनने का यूपीए सरकार का गुप्त एजेंडा : मुख्यमंत्री
परिषद में देश के प्रमुख और बड़े राज्यों की ओर से एनसीटीसी के विरोध की गंभीरता को ध्यान में लेने का अनुरोध करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि आतंक के खिलाफ जंग में संघ और राज्य सरकारों के बीच किसी भी किस्म का तनाव दुनिया में फैले आतंकी संगठनों को इस मामले में भारत की कमजोरी और ढुलमुल रवैये का ही संकेत देगा। मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि आतंकवाद का प्रवेश, देश के भीतर उसके षड्यंत्रों को मिल रहा समर्थन और देश को बर्बाद करने की आतंककारियों की तैयारी का पूरा विषय पांच मुख्य आधार स्तंभों पर टिका है। इसमें सीमापार से आतंककारियों की घुसपैठ, शस्त्र-हथियारों की आपूर्ति, हवाला के जरिए गैरकानूनी आर्थिक लेनदेन, संचार व्यवस्था और अपराधियों के विदेशों से प्रत्यार्पण का समावेश होता है। ये पांचों विषय संघ सरकार के कार्यक्षेत्र में आते हैं और राज्य सरकारों की इसमें कोई भूमिका नहीं होती, क्योंकि सीमा सुरक्षा का मामला पूर्णत: केन्द्र के आधीन है।
इन पांचों क्षेत्रों में केन्द्र सरकार की ओर से अपनायी गई रणनीति और उसकी सफलता के सन्दर्भ में भारत सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में देश की जनता को विश्वास में लिया जाना चाहिए। श्री मोदी ने एनसीटीसी के तहत आतंकियों की गिरफ्तारी, जांच और जब्ती के अधिकार राज्य पुलिस से छीनकर केन्द्रीय गुप्तचर एजेंसी (आईबी) को देने के एकतरफा निर्णय के खिलाफ कड़ा एतराज जताया।
उन्होंने कहा कि गुजरात में हुए बम धमाके में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के एक मंत्री मोहम्मद सूरती और उसके शागिर्द आतंकवादी हनीफ टाइगर के खिलाफ आतंकी अपराध साबित हो चुका। लेकिन हनीफ के लंदन भाग जाने पर उसे वापस लाने के लिए जरूरी प्रत्यार्पण प्रक्रिया के लिए वर्तमान गुजरात सरकार ने मौजूदा केन्द्र सरकार से मदद की गुहार लगाई। लेकिन केन्द्र सरकार ने इस मामले में उदासीनता का परिचय दिया। ऐसे में राज्य पुलिस ने लंदन की अदालत से प्रत्यार्पण का आदेश हासिल किया।


