मुख्यमंत्री की अगुवाई में दसवां कन्या केळवणी शाला प्रवेशोत्सव प्रारंभ

 सरकारी प्राथमिक शालाओं को ए ग्रेड की बनाने का

मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आह्वान

साबरकांठा के वनवासी क्षेत्र भिलोड़ा और विजयनगर में

प्राथमिक शिक्षा की ज्योति प्रकटाई

मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने निरंतर दसवें वर्ष कन्या केळ्वणी और शाला प्रवेशोत्सव के जनाभियान का नेतृत्व करते हुए प्रत्येक सरकारी प्राथमिक शाला को ए ग्रेड की उत्तम शाला बनाने का ग्रामीणों से आह्वान किया है। उन्होंने तहसीलवार उत्तम प्राथमिक शाला की प्रतियोगिता आयोजित करने की अपील भी की।

                गुजरात के सभी १८,००० गांवों की ३२,७७२ प्राथमिक शालाओं में आज से शाला प्रवेशोत्सव का शुभारम्भ उमंग और उत्साह के माहौल में हुआ। मुख्यमंत्री ने आज पहले दिन साबरकांठा के वनवासी क्षेत्र भिलोड़ा और विजयनगर तहसीलों की प्राथमिक शालाओं-आंगनवाड़ियों में जाकर बच्चों का नामांकन करवाया। इसके साथ ही शैक्षणिक साधनों के किट, पुस्तकों और उपहार में मिले खिलौनों का वितरण भी किया। श्री मोदी ने विश्वास जताया कि समाजशक्ति और सरकार की सहयोगपूर्ण तपस्या का यह दस साल का परिश्रम गुजरात को निरक्षरता के कलंक से मुक्त रखेगा और कुपोषण के खिलाफ जंग में जीत हासिल होगी।

श्री मोदी ने कहा कि ५० साल में जिन लोगों ने प्राथमिक शिक्षा की दुर्दशा की थी, उनकी आपराधिक लापरवाही से गुजरात के आनेवाले कल को बचाने का काम इस सरकार ने समाज के साथ मिलकर किया है। दस वर्ष में प्राथमिक शिक्षा और कन्या केळ्वणी की उपेक्षा को बदलने का हर सम्भव काम राज्य सरकार ने किया है। तमाम सरकारी प्राथमिक शालाओं में सर्वोत्तम सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। गांव में एक भी बेटा-बेटी निरक्षर ना रहे इसके लिए गांवों को स्वंय जागरुक रहना होगा

भिलोड़ा तहसील के मउटांडा गांव का वणजारा समाज श्री मोदी के आगमन से आनन्दविभोर हो गया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर शाला के नये कक्ष का लोकार्पण किया। मुस्लिम परिवारों की ओर से इस शाला में सरस्वती माता की प्रतिमा उपहार में दी गई है। अभिभावकों के साथ भी श्री मोदी ने बातचीत करके बालकों के सुन्दर भविष्य के लिए शालाओं में निरंतर आनेजाने की अपील की। उन्होंने शालाओं को ए ग्रेड की बनाने का भी मार्गदर्शन दिया।

विजयनगर तहसील के दांतोड गांव के पिछड़ावर्ग परिवारों के उमंगपूर्ण माहौल में श्री मोदी ने बालकों का नामांकन करवाया और फल-मिठाईयों का वितरण भी किया। इसके साथ ही उन्होंने तेजस्वी कन्याओं को सम्मानित किया और कक्षा सातवीं पास कन्याओं को कन्या केळवणी निधि में से विद्यालक्ष्मी बॉण्ड के २००० रुपए ब्याज के साथ अर्पित किए।

६० वर्ष में पीढियां और महिलाएं निरक्षर रह गई यह शर्म और लाचारी आज की बेटी की किसमत में आए यह इस सरकार को मंजूर नहीं। श्री मोदी ने कहा कि भूतकाल की सरकारों ने जो पाप किया था वह हमने भुगत लिया मगर आगे ऐसा नहीं होना चाहिए और कोई निरक्षर नहीं रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने गुजरात के आनेवाले कल की चिंता इस सरकार द्वारा किए जाने की भूमिका में कहा कि चुनाव के इस साल में सरकार बालकों की शिक्षा सुधारने के काम मे लग गई है और यह ऐसे लोगों के लिए हो रहा है जो मतदाता नहीं बालक हैं।

मुख्यमंत्री ने दस साल पहले की प्राथमिक शिक्षा की दुर्दशा से आज की तुलना करते हुए कहा कि समाज की यह जिम्मेदारी है कि बालक शिक्षा से वंचित ना रह जाए।

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प्रधानमंत्री ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी
June 26, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज महान बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन्हें साहित्य की एक महान हस्ती के रूप में याद किया, जिनकी रचनाओं ने भारतीयों की कई पीढ़ियों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना जगाई।

इस साल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने कहा कि भारत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' के ज़रिए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और देश को प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत दिया, जो हमेशा बना रहेगा।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

महान बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि।

साहित्य की एक महान हस्ती, जिनकी रचनाओं ने भारतीयों की कई पीढ़ियों में देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना जगाई। उनका समृद्ध साहित्यिक कार्य लोगों के विचारों को रोशन करता है और राष्ट्र-निर्माण के प्रति हमारे सामूहिक संकल्प को मज़बूत करता है।

यह वह समय है, जब हम 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। 'वंदे मातरम' के ज़रिए उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन और हमारे देश को प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत दिया, जो हमेशा बना रहेगा।

মহান বঙ্কিম চন্দ্র চট্টোপাধ্যায়ের জয়ন্তীতে তাঁর প্রতি শ্রদ্ধাঞ্জলি।

এক সুবিশাল সাহিত্যিক আলোকবর্তিকা হিসেবে, তাঁর লেখা প্রজন্মান্তরের ভারতীয়দের মধ্যে দেশপ্রেম এবং সাংস্কৃতিক গৌরবের চেতনা জাগ্রত করেছিল। তাঁর সমৃদ্ধ সাহিত্যকর্ম মনকে উদ্ভাসিত করে চলেছে এবং জাতি গঠনের প্রতি আমাদের সম্মিলিত সংকল্পকে শক্তিশালী করছে।

এখন আমরা বন্দে মাতরমের ১৫০তম বার্ষিকী উদযাপন করছি। বন্দে মাতরমের মাধ্যমে, তিনি স্বাধীনতা আন্দোলন এবং আমাদের জাতিকে অন্যতম দীর্ঘস্থায়ী অনুপ্রেরণা উপহার দিয়েছিলেন।