मुम्बई : मुख्यमंत्री श्री मोदी द्वारा माय होम इंडिया का वन इंडिया अवॉर्ड पूर्वांचल के समाजसेवी नाबाम अतुम को प्रदान किया गया

केन्द्र के शासक भारत के सीमावर्ती राज्यों के विकास- संस्कृति और जनाअकांक्षाओं की घोर उपेक्षा कर रहे हैं: श्री मोदी

प्रधानमंत्री असम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं फिर भी उत्तर- पूर्व के राज्यों की जनभावनाओं को नजरअन्दाज क्यों किया जा रहा है ?

अहमदाबाद,सोमवार। गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज मुम्बई में माय होम इंडिया आयोजित अवॉर्ड वितरण समारोह में खुले तौर पर भारत के सीमावर्ती राज्यों और खास तौर पर उत्तर पूर्व के आठ राज्यों के विकास- संस्कृति और जनआकांक्षाओं, देशभक्ति की उपेक्षा करने का केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया। श्री मोदी ने कहा कि

 प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह २१ सालों से असम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं फिर भी राजनैतिक विकास, अर्थव्यवस्था और जनभावनाओं की निरंतर उपेक्षा की जा रही है।

 मुख्यमंत्री श्री मोदी द्वारा भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में आजीवन सेवारत नाबाम अतुम को माय होम इंडिया का वन इंडिया अवॉर्ड प्रदान किया गया। गले के कैंसर की परवाह किए बगैर अरुणाचल प्रदेश में स्वधर्म, संस्कृति और समाजसेवा के लिए जीवन समर्पित करने वाले श्री नाबाम को श्री मोदी द्वारा एक लाख का पुरस्कार और प्रशस्तिपत्र देकर सम्मनित किया गया

श्री मोदी ने श्री नाबाम को बधाई भी दी।

भारतीय विरासत के अभिन्न अंग होने के बावजूद उत्तर-पूर्व के आठ राज्यों के विकास, संस्कृति और जनापेक्षाओं की घोर उपेक्षा करने के लिए केन्द्र सरकार की तीखी आलोचना करते हुए श्री मोदी ने कहा कि उत्तर-पूर्व के किसी नागरिक को जब कोई पूछता है कि आप किस देश के हैं तब उन्हें कितनी पीड़ा होती होगी? इसके बावजूद नाबाम अतुम भारत भक्ति के लिए जनाअन्दोलन करके जनजन में जागृति लाए हैं

श्री मोदी ने कहा कि सरदार पटेल लम्बे समय तक जीवित रहे होते तो भारत की एकता- अखंडता के लिए किसी जनान्दोलन की जरूरत ही नहीं रहती। पूर्वांचल के राज्यों के विकट परीभ्रमण के मौके को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के कच्छ और पूर्वांचल में आज भी मोबाइल और टीवी चैनल पाकिस्तान और चीन की कनेक्टीविटी से जुड़े हुए हैं मगर केन्द्र को इसकी परवाह नहीं।

कोई भी देश अपने सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रति उदासीन रहे तो उस पर संक्ट आता है। इसलिए सीमावर्ती राज्यों में विकास को प्राथमिकता मिलनी चाहिए लेकिन १९६२ के भारत-चीन युद्ध के बाद भी केन्द्र के शासक सबक नहीं सीखना चाहते। अरुणाचल प्रदेश में ५०० मीटर चीन की घुसपैठ की जानकारी श्री नाबाम ने ही केन्द्र को की थी मगर उनकी बात को गम्भीरता से नहीं लिया जा रहा।

भारत के गुलामीकाल में विदेशी सल्तनतों ने हिन्दुस्तान का बंटवारा करके बैर का बीजारोपण किया था जिसके दुष्परीणाम हम आज भोग रहे हैं। भारत की जनता के स्वाभिमान और देशभक्ति के लिए जनान्दोलन करने की इसलिए ही जरूरत है।

पिछली राष्ट्रीय विकास परिषद में श्री मोदी ने उत्तर-पूवी राज्यों में से सुरक्षा बलों के जवानों को गुजरात में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का आग्रह किया था। इसका प्रतिसाद नही६ मिलने पर उन्होंने अफसोस जताया। श्री मोदी ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक एकता का वातावरण बनाने की जरूरत है। उत्तर-पूर्व के राज्यों में से भारत की आजादी के लिए समर्पण और बलिदान देनेवाले अनेक देशभक्तों की उपेक्षा हुई है। सिर्फ एक परीवार की पूजा में पूरे आजादी के देशभक्तिपूर्ण इतिहास को विकृत बना दिया गया है।

­­देशद्रोही तत्वों को इसलिए ही मौके मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्व. इन्दिरा गांधी ने धार्मिक राजनीति करके उत्तर-पूर्व के राज्यों में अलगाववाद पैदा किया। श्री मोदी ने कहा कि भारत के उत्तर-पूवी राज्यों में सिर्फ यहीं युरेनियम उपलब्ध है मगर भारत को शक्तिशाली बनाने में इस युरेनियम का उपयोग करने की केन्द्र को फिक्र नहीं। बांग्लादेश की घुसपैठ, हथियारों की तस्करी और देशविरोधी तत्वो६ द्वारा उत्तर-पूर्वी राज्यों का उपयोग होता है। इसके बावजूद वोट्बैंक की राजनीति के कारण केन्द्र यह मानता है कि सब ठीक है।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को भारत का सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर के नेताओं ने बधाई दी
June 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी को सबसे लंबे समय तक भारत का निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर के नेताओं ने गर्मजोशी भरी बधाई दी है। विश्‍व भर के नेताओं ने प्रधानमंत्री के बदलाव लाने वाले शासन, 'ग्लोबल साउथ' की वकालत और एक समावेशी व आर्थिक रूप से गतिशील भारत की उनकी कल्‍पना की सराहना की।

श्रीलंका के राष्ट्रपति महामहिम अनुरा कुमारा दिसानायके ने 8 जून 2026 को प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में श्रीलंका की सरकार और वहां के लोगों की ओर से उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा: "यह उपलब्धि न केवल आपके कार्यकाल की अवधि को दर्शाती है, बल्कि उस भरोसे और विश्वास का भी प्रमाण है जो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जनता ने बार-बार आपके नेतृत्व में जताया है।" राष्ट्रपति ने भारत के उल्लेखनीय आर्थिक और सामाजिक बदलाव का भी ज़िक्र किया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विज़न ने भारत की सीमाओं से परे, श्रीलंका सहित कई देशों के लोगों को प्रेरित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 4-6 अप्रैल 2025 के दौरान श्रीलंका का दौरा किया था। यह इस द्वीप देश की उनकी चौथी यात्रा थी, जिसके दौरान उन्हें 'मित्र विभूषण' से सम्मानित किया गया - यह श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जो किसी विदेशी गणमान्य व्यक्ति को दिया जाता है। इस यात्रा ने भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) नीति को और मज़बूत किया; श्रीलंका भारत की अटूट साझेदारी से सबसे ज़्यादा लाभ उठाने वाले देशों में से एक है, जिसमें 2022 में श्रीलंका की आर्थिक मुश्किलों के दौरान भारत का अहम सहयोग भी शामिल है।

पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने एक व्‍यक्तिगत वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी को "एक रोल मॉडल और लीडरशिप की मिसाल" बताया। उन्होंने कहा - "आज 20 करोड़ से ज़्यादा लोगों को गरीबी से निकालकर बेहतर ज़िंदगी देना एक अद्भुत उपलब्धि है।" प्रधानमंत्री मारापे ने पापुआ न्यू गिनी की स्‍नेहपूर्ण दोस्ती और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मज़बूत करने की इच्छा ज़ाहिर की। मई 2023 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पापुआ न्यू गिनी की ऐतिहासिक यात्रा भारत–प्रशांत द्वीपीय देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण क्षण था। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस देश की यह पहली यात्रा थी। यह यात्रा भारत–प्रशांत द्वीप सहयोग मंच (एफआईपीआईसी) के तीसरे शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए की गई थी। इस यात्रा ने 'ग्लोबल साउथ' के एक प्रतिबद्ध साथी के तौर पर भारत की भूमिका पर जोर दिया।

त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी और कहा कि "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्‍व में भारत वैश्विक मामलों में एक प्रमुख आवाज़ बनकर उभरा है।" उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की साधारण शुरुआत से लेकर तीन कार्यकाल तक 1.4 अरब लोगों वाले देश का नेतृत्व करने तक के सफ़र पर प्रकाश डाला और विदेश नीति, आर्थिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक-आर्थिक विकास में भारत की अहम उपलब्धियों पर बल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने 3-4 जुलाई 2025 को त्रिनिदाद और टोबैगो की एक ऐतिहासिक यात्रा की - जो 26 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी - और यह यात्रा त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय प्रवासियों के आगमन की 180वीं वर्षगांठ के मौके पर हुई।