बारहवीं योजना के अमल में भारत के विकास के लिए गुजरात का योगदान महत्वपूर्ण
गुजरात बजट का 65 प्रतिशत प्रतिशत विकास पर खर्च करता है जबकि केन्द्र सरकार सिर्फ 35 प्रतिशत धन ही विकास में खर्च करती है
मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के वर्ष 2013-14 के बजट की विशेषता पर कहा कि भाजपा की नयी सरकार के पांच वर्ष का यह प्रथम बजट है और पहले ही वर्ष में जनता जनार्दन के समक्ष रखे गए संकल्पों की पूर्ति करने की पहल की है। उन्होंने कहा कि बारहवीं पंचवर्षीय योजना प्रारम्भ हो गई है और गुजरात ने विकास के क्षेत्र में जो छलांग लगाई है, अनेक उपलब्धियां हासिल कर देश और दुनिया का ध्यान गुजरात पर केन्द्रित किया है इस सन्दर्भ में गुजरात की नयी सरकार का यह प्रथम बजट राज्य को विकास की ऊंचाईयों पर ले जाने के साथ-साथ देश के विकास में भी भारी योगदान देगा।
आगामी पांच वर्ष में गुजरात को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता के साथ आनेवाले कल की समृद्धि और सुख- सुविधाओं की मजबूत नींव इस बजट में सुविचारित तौर पर रखी गई है। इसका उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने गुजरात सरकार और भारत सरकार के विकासलक्ष्यी अभिगम की तुलना की। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के कुल बजट का 35 प्रतिशत हिस्सा ही विकास में खर्च होता है जबकि 65 प्रतिशत प्रशासन और व्यवस्था में खर्च हो जाता है।
इसकी तुलना में गुजरात के बजट का 65 प्रतिशत हिस्सा विकास में खर्च होता है और सिर्फ 35 प्रतिशत भाग ही व्यवस्था पर खर्च होता है। इस प्रकार गुजरात के बजट का पैसा विकास के उचित उपयोग पर खर्च किया जाता है।

गुजरात में खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों की भारी तादाद है और टपक सिंचाई के प्रति उनको प्रेरित कर उत्पादन बढ़ाने के लिए माइक्रो इरिगेशन को करों से सम्पूर्ण मुक्त किया गया है। किसानों को बिजली कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है और गांवों, शहरों के संतुलित ढांचागत विकास की व्यवस्था की है। नवोदित मध्यम वर्ग के विकास की अपेक्षाओं की पूर्ति करने के लिए भी इस बजट में अनेक नये अवसर हैं।
श्री मोदी ने कहा कि गुजरात की नयी सरकार का यह प्रथम बजट विश्व में गुजरात के विकास के सामर्थ्य की अनुभूति करवाने वाला और आम नागरिक में विशवास पैदा करने वाला बजट है।

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