मुख्यमंत्री ने जतायी गुजरात में बर्ड व्यूअर्स मुवमेंट और ईको टूरिजम के विकास की अभिलाषा

नर्मदा की शाखा नहरों पर सोलर पैनल्स स्थापित कर बिजली उत्पादित करने का दुनिया का विशिष्ट प्रोजेक्ट

गांधीनगर, बुधवार: मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के समुद्री तट पर टापुओं के पर्यावरणीय विकास और ईकोटूरिजम के अलावा कच्छ के पर्यावरणीय प्राकृतिक पर्यटन सहित पक्षी निरीक्षण पर्यटन अभियान विकसित करने की अभिलाषा जतायी है। इन्टरनेशनल यूनियन फॉर कन्जर्वेशन ऑफ नेचर की एशिया क्षेत्र की निदेशक सुश्री आब्ररान मारकट काबराजी ने बुधवार को मुख्यमंत्री श्री मोदी से मुलाकात की। उन्होंने पर्यावरण संवद्र्घन के साथ विकास के जो नये आयाम गुजरात सरकार ने शुरू किए हैं, उसकी प्रशंसा करते हुए गुजरात में पर्यावरण संवादिता के साथ सातत्यपूर्ण विकास के लिए सहभागिता के क्षेत्रों को लेकर मुख्यमंत्री के साथ परामर्श किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, कच्छ सहित समग्र गुजरात में वन्य जीवसृष्टि सहित भरपुर जैविक विविधता है। गुजरात की कच्छ की खाड़ी और विशाल समुद्री किनारों में कई टापुओं का अस्तित्व है। इसके अलावा विदेशी यायावर पक्षियों की विरासत भी गुजरात बन गया है। ऐसे में, गुजरात में ईको फ्रेंडली टूरिजम और बर्ड व्यूअर्स मुवमेंट को विकसित करने की राज्य सरकार की इच्छा है

मुख्यमंत्री ने सरदार सरोवर नर्मदा की शाखा नहरों पर सोलर पैनल्स स्थापित कर सूर्य ऊर्जा से बिजली पैदा करने के साथ ही नहरों के पानी का वाष्पीभवन रोकने के पर्यावरणीय रक्षा के अनोखे पायलट प्रोजेक्ट की रूपरेखा भी दी। ये सोलर पैनल कम माइक्रो हाइड्रोटर्बाइन सिस्टम से प्रति किलोमीटर एक मेगावाट बिजली पैदा हो सकेगी और एक करोड़ लीटर पानी का वाष्पीभवन रुकेगा। बैठक में वन और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव डॉ. एस.के. नंदा एवं कार्तिकेय साराभाई उपस्थित थे।

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प्रधानमंत्री ने सुव्यवस्थित मानकों से मानवीय आचरण के मार्गदर्शन को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
May 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका अभिप्राय है कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह है जो न केवल एक व्यक्ति को बल्कि पूरे समाज को आलोकित करता है। श्री मोदी ने कहा कि इसी आदर्श को अपनाकर हमारे देश के लोग आज पूरे संयम, क्षमता और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा:

"श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।

ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।"

क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसका निर्धारण व्यक्तिपरक राय या क्षणिक आवेग पर नहीं, बल्कि शास्त्र आधारित एक सुव्यवस्थित मानक के अनुसार होना चाहिए, जो आचरण को दिशा और अनुशासन प्रदान करता है। इसलिए, व्यक्ति को स्थापित मानकों की उस प्रणाली के अनुसार कार्य करना चाहिए, ताकि उसका आचरण संतुलित, मान्य और सार्थक हो सके।