आजाद हिंद फौज स्थापना दिवस का गरिमापूर्ण समारोह : वीरत्व की याद में

नेताजी और सरदार पटेल की उपेक्षा केन्द्र की वर्तमान सरकार कर रही है, लेकिन गुजरात महापुरुषों के इतिहास को भुलाने नहीं देगा : मुख्यमंत्री

नेताजी की मृत्यु कहां, किस तरह और कैसी परिस्थितियों में हुई,

इसकी जांच होनी चाहिए : संगमा

 यह देश का दुर्भाग्य है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल जैसे महान राष्ट्रभक्तों की उपेक्षा देश के वर्तमान शासक कर रहे हैं लेकिन गुजरात इन महापुरुषों के देशभक्ति के इतिहास को भुलाने नहीं देगा। अहमदाबाद में आजाद हिंद फौज के स्थापना दिवस पर वीरत्व की याद में गरिमापूर्ण समारोह में मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यह बात कही। आजाद हिंद फौज-इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के स्थापक नेताजी सुभाषचंद्र बोस आईएनए ट्रस्ट के तत्वावधान में यह समारोह आयोजित हुआ।

6 जुलाई को डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मजयंति है और आजाद हिंद फौज का स्थापना दिवस भी आज ही मनाया जाता है। इस मौके पर श्री मोदी ने कहा कि आईएनए के स्थापक सुभाष बाबू ने सशस्त्र क्रांति द्वारा भारत की आजादी का रास्ता अपनाया और महात्मा गांधी के नेतृत्व में जीवन कुर्बान किया। इन सुभाष बाबू का व्यक्तित्व कुछ अलग प्रकार का था। अंग्रेजों को सशस्त्र क्रांति द्वारा देश में से धकेलने के लिए विदेश की धरती पर से दिल्ली चलो का नारा लेकर आजाद हिंद फौज के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया।

सुभाषचंद्र बोस के गुजरात के साथ संबंधों का स्मरण करवाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 1938 में हरिपुरा-सूरत में गुजरात की धरती पर कांग्रेस अधिवेशन में टर्निंग पॉइंट लाकर वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे और अपनी ताकत के साथ ही सामथ्र्य का मिजाज दिखलाया था। इस ऐतिहासिक घटना को कांग्रेस ने भुला दिया है लेकिन हमने इस इतिहास को चिरंजीवी स्मृति के रूप में जीवंत रखा है।

इस सरकार ने वर्ष 2009 में हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन के इस ऐतिहासिक दिवस पर बैलगाड़ी से उपग्रह यात्रा तक की विकासयात्रा में ई-ग्राम विश्वग्राम प्रोजेक्ट 18 हजार गांवों में शुरू किया था। सुभाष बाबू ने देश के युवाओं का आह्वान किया था कि, तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा। इस नारे के मिजाज के अनुरूप मुख्यमंत्री श्री मोदी ने युवाओं का आह्वान किया कि, तुम मुझे साथ दो मैं तुम्हे विकास दूंगा। इस विकासयात्रा पर ही गुजरात आगे बढ़ रहा है।

एक गुजराती एम.आर. व्यास ने सुभाषचंद्र बोस के जर्मनी के आजाद रेडियो का संचालन किया था। 100 जितने गुजराती और अनेक गुजराती महिलाएं दुर्गा बनकर आजाद हिंद फौज में शामिल हुई थी, यह स्मरण भी मुख्यमंत्री ने साझा किया। उन्होंने आह्वान किया कि आज देश के लिए मर मिटने का सौभाग्य भले न मिले लेकिन देश के लिए जीने का कर्तव्य निभाया जाना चाहिए।

श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह पिछले 24 घंटे से आर्थिक सुधारों की बातें उत्साहपूर्वक कर रहे हैं, परन्तु पूर्व वित्त मंत्री आपके नेतृत्व वाली सरकार में थे तब आठ वर्ष तक देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने से आपको किसने रोका था? क्या प्रधानमंत्री का यह दायित्व नहीं था?

देश जिस तरह के संकटों से आज गुजर रहा है, ऐसे में देश की जनता को प्रधानमंत्री और पूर्व वित्त मंत्री की अर्थव्यवस्था पर तालमेल की नीति के बारे में जवाब दिया जाना चाहिए। सूरज हमेशा पूर्व में से ही उदय होता है और संगमाजी भी पूर्वी भारत से आते हैं। देश में नया सूरज उदय होगा, ऐसा विश्वास श्री मोदी ने व्यक्त किया।

इधर, पी.ए. संगमा ने भारत की वर्तमान सरकार की नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति उपेक्षित मानसिकता के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि, स्व. नेताजी की मृत्यु किस प्रकार, कहां और किन परिस्थितियों में हुई इसकी विश्वसनीय जांच अभी तक नहीं हुई है। देश की राजधानी दिल्ली में अब तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का राष्ट्रीय स्मारक स्थापित करने का कोई काम नहीं हुआ है। श्री संगमा ने नेताजी की आजाद हिंद फौज और हिंदुस्तान की आजादी के सशस्त्र क्रांति दल के शहीदों को श्रद्घांजलि दी।

राज्य के मुख्यमंत्री श्री मोदी के शक्तिशाली नेतृत्व की सराहना करते हुए श्री संगमा ने सुभाष चंद्र बोस सहित आजादी की लड़ाई के अनेक शहीद योद्घाओं के प्रति गुजरात सरकार के विधेयात्मक अभिगम का स्वागत किया।

प्रारंभ में आईएनए ट्रस्ट के सेक्रेटरी ब्रिगेडियर छिंकारा ने सभी का स्वागत किया और ट्रस्ट की भूमिका पेश की।

इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष गणपतभाई वसावा, राज्य मंत्रिमंडल के मंत्रीगण श्रीमती आनंदीबेन पटेल, फकीरभाई वाघेला, मंगूभाई पटेल, राज्य मंत्री जशवंतभाई भाभोर, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अनंत कुमार और अरविंद नेताम सहित कई अग्रणी, राष्ट्रप्रेमी नागरिक मौजूद थे।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें विश्व को प्रभावित करने में वीरता और साहस के महत्व पर प्रकाश डाला गया है
March 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें वीरता के महत्व और एक साहसी व्यक्ति के पूरे विश्व पर पड़ने वाले गहरे प्रभाव को रेखांकित किया गया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वीरता और पराक्रम वह पूंजी है, जिससे हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है। श्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत के युवाओं का साहस और आत्मविश्वास इस संदर्भ में प्रेरणा का स्रोत है।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा;

"वीरता और पराक्रम वो पूंजी है, जिससे हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है। भारत के युवाओं का साहस और आत्मविश्वास इसी की प्रेरणा देता है।

एकेनापि हि शूरेण पादाक्रान्तं महीतलम्।

क्रियते भास्करेणेव स्फारस्फुरिततेजसा ॥"

सूर्य जिस प्रकार अपने प्रखर और विस्तृत तेज से समग्र पृथ्वी को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार एक वीर पूरी पृथ्वी को अपने पराक्रम से प्रभावित कर सकता है।