छठी वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट का शानदार समापन
सातवीं वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट ११ जनवरी २०१५ को होगी
आगामी वर्ष में गुजरात इंटरनेशनल एग्रीटेक समिट आयोजित करेगा जो हर दो साल में आयोजित होगी
इवेंट्स -
- १२७ इवेंट्स सेमिनार
- ३१ थीम इवेंट
- १.०४ लाख वर्ग मीटर में ग्लोबल ट्रेड शो
- १६ लाख प्रेक्षकों ने प्रदर्शनी को निहारा
- १२१ देश
- ५८ हजार डेलीगेट्स
- २१०० विदेशी डेलीगेट्स
- २६७० स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप इन्टेन्शन
- कुल इन्वेस्टमेंट इन्टेन्शन १७,७१९ प्रोजेक्ट
- कुल एसएमई इन्वेस्टमेंट इन्टेन्शन १२,८८६ प्रोजेक्ट
- एसएमई में रोजगार निर्माण ३.७३ लाख
आगामी सातवीं वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट ११ जनवरी, २०१५ में अवश्य आयोजित होगी। इसकी घोषणा करते हुए श्री मोदी ने इसमें नये सपनों और नई उम्मीदों के साथ भाग लेने का आमंत्रण दिया। इतने बड़े स्केल और विशाल दायरे में आयोजित इस ग्लोबल समिट को सफल बनाने वाले तमाम सहभागी साथियों को शुभकामनाएं देते हुए श्री मोदी ने कहा कि विश्व के १२१ देश इसमें भागीदार बने हैं और इन १२१ देशों में गुजरात ने संदेश पहुंचाया है कि यही हिन्दुस्तान का सामर्थ्य है। यह १२१ देश भारत के विकास के एम्बेसेडर बन गए हैं। देशवासी के रूप में हमारे लिए यह एक गौरवपूर्ण सच्चाई है। प्रत्येक हिन्दुस्तानी के लिए सीना गर्व से चौड़ा करने वाली भारत की आन-बान-शान की यह घटना है। गुजरात की धरती पर यह गुजरातियों के परिश्रम के कारण सफल हुई है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश या प्रदेश में सीमित संसाधन होने के बावजूद विकास का सामर्थ्य होता है, यह विश्वास गुजरात ने पैदा किया है। प्रत्येक व्यक्ति की मानसिकता में अनजाने का डर स्वाभाविक तौर पर रहता है, परन्तु गुजरात की इस समिट में १२१ देश आए, जिससे गुजरात की और नई पीढ़ी में से यह डर निकल गया है और नया मनोवैज्ञानिक विश्वास पैदा हुआ है।
श्री मोदी ने कहा कि इस ग्लोबल इवेन्ट का मूल्यांकन मात्र रुपये-पैसों के निवेश मापदंड से मापा नहीं जा सकता। गुजरात की ग्लोबल ब्रांडिंग इस ऐतिहासिक सफल घटना से हुई है। आज गुजरात दुनिया में इतना प्रसिद्ध हो चुका है कि जिसकी पहचान से कोई अनजान नहीं है। भूतकाल में विदेश की धऱती पर भारत के राज्य प्रयास करके निवेश के समझौता करार कर आते थे, परन्तु २००३ से गुजरात सरकार ने इस अभिगम, दृष्टिकोण में बदलाव लाने का नया मार्ग दिखलाया है और गुजरात की धरती पर इसके सामर्थ्य की अनुभूति करवाई है। गुजरात की धरती की मिट्टी में ऐसा क्या है, यह सवाल स्वाभाविक रूप से पूछा जाता है। इसका जवाब है, इस धरती की मिट्टी में हमारे पूर्वजों के पुरुषार्थ का पसीना है, जिससे यह धरती उपजाऊ बनी है। विश्व की बदलती परिस्थिति और समृद्ध दुनिया के बारे में जानने और समझने में यह ग्लोबल समिट सफल रही है। इसकी भूमिका में श्री मोदी ने कहा कि कोई भी समाज बदलते विश्व की गतिविधियों से अलग रहकर प्रगति नहीं कर सकता। गुजरात के आम नागरिक में अब दुनिया में उत्तम और अच्छा जानने की जिज्ञास जागी है। गांव, तहसील और जिलों में सामाजिक जीवन की शक्ति के समक्ष इस समिट ने एक नई विकास क्षितिज खोल दी है।
इस गुजरात की धरती पर आए १२१ देशों के मेहमानों, महानुभावों के साथ गुजरात का नाता जुड़ा है, परन्तु गुजरात की भूमि के साथ, इसकी मिट्टी के साथ अपनेपन का नाता उद्दीपक बना है। इस दुनिया के अनेक देशों के लोगों का एक बॉन्डिंग हुआ है, जिसका मूल्य आंकने का कोई पैमाना नहीं है। इस दुनिया का गुजरात के साथ बॉन्डिंग गुजरात की ब्रांडिंग से कहीं ज्यादा है। गुजरात का एक वैश्विक रूप उभरा है और इसकी फलश्रुति के लिए नये दृष्टिकोण से चिंतन करने का उन्होंने अनुरोध किया। नई पीढ़ी, युवा पीढ़ी इसका मूल्य और महिमा समझेगी। समग्र विश्व अब तेजी से वृद्धावस्था की ओर आगे बढ़ रहा है, लेकिन अकेला हिन्दुस्तान विश्व का सबसे युवा देश है जिसकी इस ज्ञान युग में ६५ प्रतिशत युवाशक्ति है। युवा भुजाओं में जो शक्ति है उसे बल देने के लिए गुजरात ने स्किल डेवलपमेंट का विशाल दायरा खड़ा करने पर ध्यान केन्द्रित किया है। मेरा सपना है कि गुजरात में से हिन्दुस्तान के उत्तम शिक्षक दुनिया के शिक्षण जगत की आवश्यकताएं पूरी करें। ऐसे चिंतन आयामों के साथ गुजरात समाज शक्ति को उजागर करना चाहता है। २००३ की प्रथम ग्लोबल समिट में जितनी उपस्थिति थी उससे चार गुनी उपस्थिति, इस २०१३ के समिट में हुई है और तीन-चार गुना ज्यादा विदेशी डेलीगेट्स आए हैं। इसकी व्यापकता का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि ग्लोबल समिट के निमित्त ही यह विशिष्ट महात्मा मंदिर बना है। मुख्यमंत्री ने ग्लोबल समिट की सफलता से प्रेरित होते हुए अगले वर्ष ग्लोबल एग्रीकल्चर हाईटेक समिट, एग्रोटेक फेयर आयोजित करने की घोषणा करते हुए कहा कि, हर दो साल में कृषि अर्थव्यवस्था के वैश्विक बाजारों में गुजरात के किसानों के लिए इस प्रकार की ग्लोबल एग्रोटेक इवेन्ट आयोजित की जाएगी। श्री मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में टेक्नोलॉजी के साथ राज्य सरकार की जीएसएफसी कंपनी कनाडा की भूमि पर पोटाश खरीदकर वहीं पर पोटाश खाद का कारखाना बनाएगी। एशिया में टूरिज्म के लिए गुजरात भगवान बुद्ध की विरासत के अवशेषों के लिए नई पर्यटन पहचान बनाएगा।गुजरात के बारे में विकृति और नकारात्मकता में से आज गुजरात संपूर्णतया बाहर निकल गया है। इस ग्लोबल समिट ने वैश्विक मंदी के दुविधापूर्ण वातावरण में भी समृद्ध देशों को सकारात्मक संदेश दिया है। श्री मोदी ने इस ग्लोबल समिट को गौरव दिलाने वाले विश्व भर के देशों की भागीदारी और सहयोग के लिए सभी का आभार जताया।






